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14 मार्च 2017 (मंगलवार) से शुरू हो चुके हैं मल मास, विवाह आदि शुभ कार्य वर्जित

जन सामान्य में प्रचलित मान्यता है कि खरमास में विवाह आदि शुभ कार्य वर्जित है. जैसे विवाह आदि जैसे कार्य नही होते हैं. लोग सिर्फ ईश्वर-भजन, पूजा-पाठ आदि कर सकते हैं , ज्योतिषाचार्य एवम वास्तुशास्त्री पंडित दयानंद शास्त्री ने बताया की इस अवधि में अनुष्ठान, यज्ञ, पूजा-पाठ, हवन आदि करना अच्छा नहीं माना गया है. 
14-March-2017-Tuesday-have-started-from-Mal-Mas-marriage-Auspicious-work-baned-14 मार्च 2017 (मंगलवार) से शुरू हो चुके हैं मल मास, विवाह आदि शुभ कार्य वर्जित          इस वर्ष 14 मार्च 2017 (मंगलवार) से मल मास शुरू हो चुके हैं, जो 13 अप्रैल 2017, गुरुवार तक रहेगा। इस मास में तीर्थों, घरों व मंदिरों में जगह-जगह भगवान की कथा होनी चाहिए एवं गो-ब्राह्मण तथा धर्म की रक्षा हो . ज्योतिषाचार्य एवम वास्तुशास्त्री पंडित दयानंद शास्त्री ने बताया की यदि आप मार्च के महीने में नया कार्य, व्यापार या गृह प्रवेश करना चाह‍ते हैं तो सावधानी रखें| कार्य-सिद्धि योग सकारात्मक ऊर्जा से सम्‍पन्न होते हैं। इसी कारण किसी भी नए कार्य को शुरू करने से पहले शुभ योग-संयोग को देख-परख लेना श्रेष्ठ होता हैं। 
          ज्योतिषाचार्य एवम वास्तुशास्त्री पंडित दयानंद शास्त्री ने बताया की यदि आपको किसी भी कारण से इस माह में नया कार्य आरंभ करना हो तो 17 मार्च, 24 मार्च या 28 मार्च अथवा 30 मार्च को सर्वदोषनाशक रवि योग में भी कर सकते है || 14 मार्च 2017 से खरमास प्रारंभ हो गया है। इसलिए हिन्दू मान्यता के अनुसार, एक महीने तक शुभ कार्य नहीं होंगे. यह खरमास 13 अप्रैल 2017 तक कायम रहेगा. वैदिक ज्योतिष और हिन्दू पंचांग गणना के अनुसार सूर्य एक राशि में एक महीने तक रहता है. जब सूर्य 12 राशियों का भ्रमण करते हुए बृहस्पति की राशियो, धनु और मीन, में प्रवेश करता है, तो अगले 30 दिनों यानि एक महीने की अवधि को खरमास कहा जाता हैं. इस साल 14 मार्च को सूर्य कुंभ राशि से निकल कर मीन राशि में प्रवेश कर रहा है. इसे मीन संक्रांति भी कहते हैं. 
         ज्योतिषाचार्य एवम वास्तुशास्त्री पंडित दयानंद शास्त्री ने बताया की इस समय में भवन-निर्माण संबंधित कार्य भी नहीं किये जाते हैं. कोई नया निवेश या व्यवसाय आदि भी नहीं शुरू की जाती है इस अवधि में बच्चे का मुंडन संस्कार भी नहीं होता है| साथ ही लोग नए घर में गृह-प्रवेश भी नहीं करते हैं . 14 मार्च,2017 (मंगलवार) से मल मास शुरू हो रहा है, जो 13 अप्रैल 2017, गुरुवार तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य एवम वास्तुशास्त्री पंडित दयानंद शास्त्री ने बताया की धर्मग्रंथों के अनुसार, खर (मल) मास को भगवान पुरुषोत्तम ने अपना नाम दिया है। इसलिए इस मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस मास में भगवान की आराधना करने का विशेष महत्व है। 
          धर्मग्रंथों के अनुसार, इस मास में सुबह सूर्योदय के पहले उठकर शौच, स्नान, संध्या आदि अपने-अपने अधिकार के अनुसार नित्यकर्म करके भगवान का स्मरण करना चाहिए और पुरुषोत्तम मास के नियम ग्रहण करने चाहिए। पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत का पाठ करना महान पुण्यदायक है। खरमास, यानि खराब महीना . वो महीना जब हर प्रकार के शुभ काम बंद हो जाते हैं. कोई नया काम शुरू नहीं किया जाता, इस मास के साथ आती है कई प्रकार की बंदिशें और साथ ही ये सलाह भी कि ज़रा बच कर रहिएगा, ज़रा सोच समझकर काम कीजिएगा . सूर्य प्रतिकूल हो तो हर कार्य में असफलता नजर आती है. भारतीय पंचांग पद्धति में प्रतिवर्ष पौष मास को खर मास कहते हैं .इसे मलमास काला महीना भी कहा जाता है.  लेकिन इस मास में भी कुछ योग होते हैं, जिनमें अति आवश्यक परिस्थितियों में कुछ कार्य किए जा सकते हैं. 
           पंडितों का कहना है कि पौष मास के समय अति आवश्यक परिस्थिति में सर्वार्थ सिद्ध योग, रवि योग, गुरु पुष्य योग अमृत योग में विवाह के कर्मों को छोड़कर अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं. लेकिन ये शुभ कार्य अति आवश्यक परिस्थिति में ही कर सकते हैं .वर्ष भर में दो बार खरमास आता है . जब सूर्य गुरु की राशि धनु या मीन में होता है .खरमास के समय पृथ्वी से सूर्य की दूरी अधिक होती है. इस समय सूर्य का रथ घोड़े के स्थान पर गधे का हो जाता है . इन गधों का नाम ही खर है इसलिए इसे खरमास कहा जाता हैजब सूर्य वृश्चिक राशि से धनु राशि में प्रवेश करता है, इस प्रवेश क्रिया को धनु की संक्रांति कहते हैं. यही मलमास है ज्योतिषाचार्य एवम वास्तुशास्त्री पंडित दयानंद शास्त्री ने बताया की इस मास में तीर्थों, घरों व मंदिरों में जगह-जगह भगवान की कथा होनी चाहिए। भगवान की विशेष पूजा होनी चाहिए और भगवान की कृपा से देश तथा विश्व का मंगल हो एवं गो-ब्राह्मण तथा धर्म की रक्षा हो, इसके लिए व्रत-नियम आदि का आचरण करते हुए दान, पुण्य और भगवान की पूजा करना चाहिए। 
 पुरुषोत्तम मास के संबंध में धर्म ग्रंथों में वर्णित है- 
 येनाहमर्चितो भक्त्या मासेस्मिन् पुरुषोत्तमे। 
धनपुत्रसुखं भुकत्वा पश्चाद् गोलोकवासभाक्।। 
 अर्थात- पुरुषोत्तम मास में नियम से रहकर भगवान की विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तिपूर्वक उन भगवान की पूजा करने वाला यहां सब प्रकार के सुख भोगकर मृत्यु के बाद भगवान के दिव्य गोलोक में निवास करता है। 
        धर्म ग्रंथों में ऐसे कई श्लोक भी वर्णित है जिनका जप यदि खर मास में किया जाए तो अतुल्य पुण्य की प्राप्ति होती है। प्राचीन काल में श्रीकौण्डिन्य ऋषि ने यह मंत्र बताया था। मंत्र जाप किस प्रकार करें इसका वर्णन इस प्रकार है- 
 कौण्डिन्येन पुरा प्रोक्तमिमं मंत्र पुन: पुन:। 
जपन्मासं नयेद् भक्त्या पुरुषोत्तममाप्नुयात्।। 
ध्यायेन्नवघनश्यामं द्विभुजं मुरलीधरम्। 
लसत्पीतपटं रम्यं सराधं पुरुषोत्तम्।। 
 अर्थात- मंत्र जपते समय नवीन मेघश्याम दोभुजधारी बांसुरी बजाते हुए पीले वस्त्र पहने हुए श्रीराधिकाजी के सहित श्रीपुरुषोत्तम भगवान का ध्यान करना चाहिए। 
 गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोपरूपिणम्। 
गोकुलोत्सवमीशानं गोविन्दं गोपिकाप्रियम्।। 
 इस मंत्र का एक महीने तक भक्तिपूर्वक बार-बार जाप करने से पुरुषोत्तम भगवान की प्राप्ति होती है, ऐसा धर्मग्रंथों में लिखा है। 
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जानिए भगवान विष्णु ने क्यों दिया इसे अपना नाम?
 धर्मग्रंथों के अनुसार, खर (मल) मास को भगवान पुरुषोत्तम ने अपना नाम दिया है। इसलिए इस मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस मास में भगवान की आराधना करने का विशेष महत्व है। धर्मग्रंथों के अनुसार, इस मास में सुबह सूर्योदय के पहले उठकर शौच, स्नान, संध्या आदि अपने-अपने अधिकार के अनुसार नित्यकर्म करके भगवान का स्मरण करना चाहिए और पुरुषोत्तम मास के नियम ग्रहण करने चाहिए। पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत का पाठ करना महान पुण्यदायक है। 
           शास्त्रों के अनुसार इस मास में सुबह सूर्योदय से पहले उठकर अपने नित्य कामों से निवृत्त हो जाना चाहिए। और दिन भर भगवान विष्णु के नाम का जाप करना चाहिए। इसे विष्णु ने अपना नाम दिया था। इसका दूसरा नाम पुरुषोत्तम मास भी है। इस दिनों पर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए साथ ही गो दान, ब्राह्मण की सेवा, दान आदि देने से अधिक फल मिलता है। इस मास में तीर्थों, घरों व मंदिरों में जगह-जगह भगवान की कथा होनी चाहिए। भगवान की विशेष पूजा होनी चाहिए और भगवान की कृपा से देश तथा विश्व का मंगल हो एवं गो-ब्राह्मण तथा धर्म की रक्षा हो, इसके लिए व्रत-नियम आदि का आचरण करते हुए दान, पुण्य और भगवान की पूजा करना चाहिए। 
पुरुषोत्तम मास के संबंध में धर्म ग्रंथों में वर्णित है- 
 येनाहमर्चितो भक्त्या मासेस्मिन् पुरुषोत्तमे। 
धनपुत्रसुखं भुकत्वा पश्चाद् गोलोकवासभाक्।। 
 अर्थात- पुरुषोत्तम मास में नियम से रहकर भगवान की विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तिपूर्वक उन भगवान की पूजा करने वाला यहां सब प्रकार के सुख भोगकर मृत्यु के बाद भगवान के दिव्य गोलोक में निवास करता है। ज्योतिषाचार्य एवम वास्तुशास्त्री पंडित दयानंद शास्त्री ने बताया की इस खर मास में सिर्फ भागवत कथा या रामायण कथा का सामूहिक श्रवण ही किया जाता है 
    ब्रह्म पुराण के अनुसार खर मास में मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति नर्क का भागी होता है. अर्थात चाहे व्यक्ति अल्पायु हो या दीर्घायु अगर वह पौष के अन्तर्गत खर मास यानी मल मास की अवधि में अपने प्राण त्याग रहा है तो निश्चित रूप से उसका इहलोक और परलोक नर्क के द्वार की तरफ खुलता है  इस बात की पुष्टि महाभारत में होती है जब खर मास के अंदर अर्जुन ने भीष्म पितामह को धर्म युद्ध में बाणों से बेध दिया था सैकड़ों बाणों से घायल हो जाने के बावजूद भी भीष्म पितामह ने अपने प्राण नहीं त्यागे प्राण नहीं त्यागने का मूल कारण यही था कि अगर वह इस खर मास में प्राण त्याग करते हैं तो उनका अगला जन्म नर्क की ओर जाएगा 
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जानिए खरमास के महीने मे कैसे अपना भाग्योदय करें ?? 
 खर मास ऐसा महीना जब हम ना ही कुछ अच्छे कम की शुरुआत कर सकते हैं और ना ही कुछ खरीद सकतें हैं| ज्योतिषाचार्य एवम वास्तुशास्त्री पंडित दयानंद शास्त्री ने बताया की इस खर मास में क्या करना अच्छा है और क्या आपको नुकसान दे सकता है| 
 जानिए खर मास में क्या नही करना चाहिए :-- 
  1. कोई भी नई वस्तुएँ जैसे की घर, कार, इत्यादि ना खरीदे 
  2. घर के निर्माण का कार्य को शुरू ना करें और ना ही उस से संबंधित कोई भी समान खरीदें 
  3. कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, सगाई ना करें 
जानिए क्या करें खर मास में आप अपने भाग्य को अच्छा करने के लिए:-- 
  1. खर मास को पुरषोत्तम मास भी कहा जाता है जो भगवान विष्णु का नाम है, इसलिए इस मास के दोनों एकादशी मे भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाएँ और उसमें तुलसी के पत्तों का प्रयोग करें
  2. इस समय पिलें वस्त्र, पीला रंग का अनाज, फल श्री हरी को अर्पण करें और फिर इन चीज़ों को दान कर दें
  3. खर मास मे माँ तुलसी के सामने गाय के घी का दीपक लगाएँ और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जप करते हुए ११ बार परिक्रमा करें ऐसा करने से घर के सारे संकट और दुख ख़त्म हो जातें हैं और घर मे सुख शांति का वास होता है
  4.  ब्रह्म मुहर्त मे उठकर स्नान करके भगवान विष्णु को केसर युक्त दूध का अभिषेक करें और तुलसी के माला से ११ बार ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जप करें
  5. हमारे .ग्रंथों के अनुसार पीपल के वृक्ष मे भगवान विष्णु का वास माना गया है इसलिए अगर आप पीपल के पेड़ मे जल को अर्पण करके गाय के घी का दीपक जलातें है तो आपके ऊपर भगवान विष्णु का आशीर्वाद हमेशा बना रहेगा
  6. खर मास मे प्रत्येक दिन श्री हरी का ध्यान करें और पीले पुष्प अर्पित करें, इससे आपके सारे मनोकामनाएँ पूरी होंगी
  7. दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करनी चाहिए इस मास मे| कहा जाता है की दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करने से श्री हरी विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी भ प्रसन्न होती हैं
  8. सुबह उठकर भागवत कथा को पढ़ें
  9. अगर आपको अपना प्रमोशन या पदोंउन्नति चाहिए तो खर मास के नवमी तिथि को कन्याओं को अपने घर पे बुला के भोजन कराएँ

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जानिए महाशिवरात्रि महात्म्य व पूजा विधान

 Know-the-majesty-and-worship-legislation-Shivaratri-2017-india-जानिए महाशिवरात्रि 2017 महात्म्य व पूजा विधान

       शिव यानि कल्याणकारी, शिव यानि बाबा भोलेनाथ, शिव यानि शिवशंकर, शिवशम्भू, शिवजी, नीलकंठ, रूद्र आदि। हिंदू देवी-देवताओं में भगवान शिव शंकर सबसे लोकप्रिय देवता हैं, वे देवों के देव महादेव हैं तो असुरों के राजा भी उनके उपासक रहे। आज भी दुनिया भर में हिंदू धर्म के मानने वालों के लिये भगवान शिव पूज्य हैं। 
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  • महाशिवरात्रि 2017 में 24 फरवरी--- 
  • निशिथ काल पूजा- 24:08 से 24:59 
  • पारण का समय- 06:54 से 15:24 (25 फरवरी) 
  • चतुर्दशी तिथि आरंभ- 21:38 (24 फरवरी) 
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त- 21:20 (25 फरवरी) 

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         हिंदु शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव मनुष्य के सभी कष्टों एवं पापों को हरने वाले हैं। सांसरिक कष्टों से एकमात्र भगवान शिव ही मुक्ति दिला सकते हैं। इस कारण प्रत्येक हिंदु मास के अंतिम दिन भगवान शिव की पूजा करके जाने-अनजाने मे किए हुए पाप कर्म के लिए क्षमा मांगने और आने वाले मास में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का प्रावधान है। शास्त्रों के अनुसार, शुद्धि एवं मुक्ति के लिए रात्री के निशीथ काल में की गई साधना सर्वाधिक फलदायक होती है। अत: इस दिन रात्री जागरण करके निशीथ काल में भगवान शिव कि साधना एवं पूजा करने का अत्यधिक महत्व है।
            महाशिवरात्री वर्ष के अंत में आती है अत: इसे महाशिवरात्री के रूप में मनाया जाता है एवं इस दिन पूरे वर्ष में हुई त्रुटियों के लिए भगवान शंकर से क्षमा याचना की जाती है तथा आने वाले वर्ष में उन्नति एवं सदगुणों के विकास के लिए प्रार्थना की जाती है। महाशिवरात्रि का महा उत्सव फाल्गुड मास की त्रिद्रशी के दिन मनाई जाती है। मान्यता है की महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर ही भोलेनाथ और माता पार्वती विवाह के पावन सुत्र में बंधे थे, कुछ विद्वानों का यह भी मानना है कि इस दिन महादेव ने कालकूट नाम का विष पान कर अपने कंठ में रख लिया था कहा जाता है कि यह विष सागर मंथन में निकला था। शिवरात्रि के ही दिन बहुत समय पहले एक शिकारी को दर्शन देकर उसे पापो से मुक्त किया था। महाशिवरात्रि के इस पवित्र अवसर से एक पौराणिक कथा भी जुडी हैं। प्राचीन काल में, एक जंगल में गुरूद्रूह नाम के एक शिकारी रहते थे जो जंगली जानवरों के शिकार करके वह अपने परिवार का पालन-पोषण किया करते थे। 
           एक बार शिवरात्रि के दिन ही जब वह शिकार के लिए गया, तब संयोगवश पूरे दिन खोजने के बाद भी उसे कोई जानवर शिकार के लिए न मिला, चिंतित हो कर कि आज उसके बच्चों, पत्नी एवं माता-पिता को भूखा रहना पडेगा, वह सूर्यास्त होने पर भी एक जलाशय के समीप गया और वहां एक घाट के किनारे एक पेड पर अपने साथ थोडा सा जल पीने के लिए लेकर, चढ गया क्योंकि उसे पूरी उम्मीद थी कि कोई न कोई जानवर अपनी प्यास बुझाने के लिए यहां ज़रूर आयेगा। वह पेड "बेल-पत्र" का था और इसके नीचे शिवलिंग भी था जो सूखे बेलपत्रों से ढक जाने के कारण दिखाई नहीं दे रहा था। 
           रात का पहला प्रहर बीतने से पहले ही एक हिरणी वहां पर पानी पीने के लिए आई। उसे देखते ही शिकारी ने अपने धनुष पर बाण साधा। ऎसा करते हुए, उसके हाथ के धक्के से कुछ पत्ते एवं जल की कुछ बूंदे पे़ड के नीचे बने शिवलिंग पर गिरीं और अनजाने में ही शिकारी की पहले प्रहर की पूजा हो गई। हिरणी ने जब पत्तों की खडखडाहट सुनी, तो घबरा कर ऊपर की ओर देखा और भयभीत हो कर, शिकारी से, कांपते हुए बोली- "मुझे मत मारो।" शिकारी ने कहा कि वह और उसका परिवार भूखा है इसलिए वह उसे नहीं छोड सकता। हिरणी ने शपथ ली कि वह अपने बच्चों को अपने स्वामी को सौंप कर लौट आयेगी। तब वह उसका शिकार कर ले। शिकारी को उसकी बात का विश्वास नहीं हो रहा था। उसने फिर से शिकारी को यह कहते हुए अपनी बात का भरोसा करवाया कि जैसे सत्य पर ही धरती टिकी है।
              समुद्र मर्यादा में रहता है और झरनों से जल-धाराएँ गिरा करती हैं वैसे ही वह भी सत्य बोल रही है। शिकारी को उस पर दया आ गयी और उसने "जल्दी लौटना" कहकर ,उस हिरनी को जाने दिया। थोडी ही देर गुजरी कि एक और हिरनी वहां पानी पीने आई, शिकारी सावधान हो, तीर सांधने लगा और ऎसा करते हुए, उसके हाथ के धक्के से फिर पहले की ही तरह थोडा जल और कुछ बेलपत्र नीचे शिवलिंग पर जा गिरे और अनायास ही शिकारी की दूसरे प्रहर की पूजा भी हो गई। इस हिरनी ने भी भयभीत हो कर, शिकारी से जीवनदान की याचना की लेकिन उसके अस्वीकार कर देने पर, हिरनी ने उसे लौट आने का वचन, यह कहते हुए दिया कि उसे ज्ञात है कि जो वचन दे कर पलट जाता है, उसका अपने जीवन में संचित पुण्य नष्ट हो जाया करता है। उस शिकारी ने पहले की तरह, इस हिरनी के वचन का भी भरोसा कर उसे जाने दिया। 
              अब तो वह इसी चिंता से व्याकुल हो रहा था कि उन में से शायद ही कोई हिरनी लौट के आये और अब उसके परिवार का क्या होगा। इतने में ही उसने जल की ओर आते हुए एक हिरण को देखा, उसे देखकर वनेचर (शिकारी ) को बडा हर्ष हुआ, अब फिर धनुष पर बाण चढाने से उसकी तीसरे प्रहर की पूजा भी स्वत: ही संपन्न हो गई लेकिन पत्तों के गिरने की आवाज़ से वह हिरन सावधान हो गया। उसने व्याध (शिकारी ) को देखा और पूछा क्या करना चाहते हो। वह बोला-अपने कुटुंब को भोजन देने के लिए तुम्हारा वध करूंगा। वह मृग प्रसन्न हो कर कहने लगा कि मैं धन्य हूं कि मेरा ये ह्वष्ट-पुष्ट शरीर किसी के काम आएगा, परोपकार से मेरा जीवन सफल हो जायेगा लेकिन एक बार मुझे जाने दो ताकि मैं अपने बच्चों को उनकी माता के हाथ में सौंप कर और उन सबको धीरज बंधा कर यहां लौट आऊं। शिकारी का ह्रदय, उसके पापपुंज नष्ट हो जाने से अब तक शुद्ध हो गया था इसलिए वह कुछ विनम्र वाणी में बोला कि जो-जो यहां आये, सभी बातें बनाकर चले गये और अब तक नहीं लौटे, यदि तुम भी झूठ बोलकर चले जाओगे, तो मेरे परिजनों का क्या होगा। 
               अब हिरन ने यह कहते हुए उसे अपने सत्य बोलने का भरोसा दिलवाया कि यदि वह लौटकर न आये; तो उसे वह पाप लगे जो उसे लगा करता है जो सामर्थ्य रहते हुए भी दूसरे का उपकार नहीं करता। व्याध ने उसे भी यह कहकर जाने दिया कि "शीघ्र लौट आना।" रात्रि का अंतिम प्रहर शुरू होते ही उस वनेचर के हर्ष की सीमा न थी क्योंकि उसने उन सब हिरन-हिरनियों को अपने बच्चों सहित एकसाथ आते देख लिया था। उन्हें देखते ही उसने अपने धनुष पर बाण रखा और पहले की ही तरह उसकी चौथे प्रहर की भी शिव-पूजा संपन्न हो गई अब उस शिकारी के शिव कृपा से सभी पाप भस्म हो गये इसलिए वह सोचने लगा, "ओह, ये पशु धन्य हैं जो ज्ञानहीन हो कर भी अपने शरीर से परोपकार करना चाहते हैं लेकिन धिक्कार है मेरे जीवन को कि मैं अनेक प्रकार के कुकृत्यों से अपने कुटुंब का पालन करता रहा। अब उसने अपना बाण रोक लिया तथा सब मृगों को यह कहकर कि "वे धन्य हैं"। वापिस जाने दिया। उसके ऎसा करने पर भगवान् शंकर ने प्रसन्न हो कर तत्काल उसे अपने दिव्य स्वरूप का दर्शन करवाया तथा उसे सुख-समृद्धि का वरदान देकर गुह" नाम प्रदान किया। यह वही गुह थे जिनके साथ भगवान् श्री राम ने मित्रता की थी। अत: यह भी माना जाता है कि, शिवरात्री के दिन व्रत करने से सारे पाप से मुक्त हो जाते है और महादेव का दर्शन कर स्वर्ग को प्राप्त होते हैं।
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इस वर्ष महाशिवरात्री का त्योहार (शुक्रवार) 24 फरवरी 2017के दिन मनाया जाएगा। हिंदु कलेंडर के अनुसार एक वर्ष में बारह शिवरात्रियां होतीं हैं। शिवरात्रि प्रत्येक हिन्दु माह की कृष्ण चतुर्दशी, जो कि माह का अंतिम दिन होता है के दिन मनाई जाती है। माघ मास की कृष्ण चतुर्दशी, महाशिवरात्री के रूप में, पूरे भारतवर्ष में धूम-धाम से मनाई जाती है। इसके दूसरे दिन से हिंदु वर्ष के अंतिम मास फाल्गुन का आरंभ हो जाता है। 
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           ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शंकर एवं मां पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था तथा इसी दिन प्रथम शिवलिंग का प्राकट्य हुआ था। शिव रात्री के दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है। इस दिन शिव भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं, भगवान शिव का अभिषेक करते हैं तथा पंचक्षरी मंत्र का जाप करतें हैं। भगवान शिव सब देवों में वृहद हैं, सर्वत्र समरूप में स्थित एवं व्यापक हैं। इस कारण वे ही सबकी आत्मा हैं। भगवान शिव निष्काल एवं निराकार हैं। भगवान शिव साक्षात ब्रह्म का प्रतीक है तथा शिवलिंग भगवान शंकर के ब्रह्म तत्व का बोध करता है। इसलिए भगवान शिव की पूजा में निष्काल लिंग का प्रयोग किया जाता है। सारा चराचर जगत बिन्दु नाद स्वरूप है। 
        बिन्दु देव है एवं नाद शिव इन दोनों का संयुक्त रूप ही शिवलिंग है। बिन्दु रूपी उमा देवी माता है तथा नाद स्वरूप भगवान शिव पिता हैं। जो इनकी पूजा सेवा करता है उस पुत्र पर इन दोनों माता-पिता की अधिकाधिक कृपा बढ़ती रहती है। वह पूजक पर कृपा करके उसे अतिरिक्त ऐश्वर्य प्रदान करते हैं। आंतरिक आनंद की प्राप्ति के लिए शिवलिंग को माता-पिता के स्वरूप मानकर उसकी सदैव पूजा करनी चाहिए। भगवान शिव प्रत्येक मनुष्य के अंतःकरण में स्थित अवयक्त आंतरिक अधिस्ठान तथा प्रकृति मनुष्य की सुव्यक्त आंतरिक अधिष्ठान है। नमः शिवाय: पंचतत्वमक मंत्र है इसे शिव पंचक्षरी मंत्र कहते हैं। इस पंचक्षरी मंत्र के जप से ही मनुष्य सम्पूर्ण सिद्धियों को प्राप्त कर सकता है।
         इस मंत्र के आदि में ॐ लगाकर ही सदा इसके जप करना चाहिए। भगवान शिव का निरंतर चिंतन करते हुए इस मंत्र का जाप करें। सदा सब पर अनुग्रह करने वाले भगवान शिव का बारंबार स्मरण करते हुए पूर्वाभिमुख होकर पंचक्षरी मंत्र का जाप करें। भक्त की पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। शिव भक्त जितना जितना भगवान शिव के पंचक्षरी मंत्र का जप कर लेता है उतना ही उसके अंतकरण की शुद्धि होती जाती है एवं वह अपने अंतकरण मे स्थित अव्यक्त आंतरिक अधिष्ठान के रूप मे विराजमान भगवान शिव के समीप होता जाता है। उसके दरिद्रता, रोग, दुख एवं शत्रुजनित पीड़ा एवं कष्टों के अंत हो जाता है एवं उसे परम आनंद कि प्राप्ति होती है। भगवान शिव की पूजा आराधना की विधि बहुत सरल मानी जाती है।
           माना जाता है कि शिव को यदि सच्चे मन से याद कर लिया जाये तो शिव प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी पूजा में भी ज्यादा ताम-झाम की जरुरत नहीं होती। ये केवल जलाभिषेक, बिल्वपत्रों को चढ़ाने और रात्रि भर इनका जागरण करने मात्र से मेहरबान हो जाते हैं। वैसे तो हर सप्ताह सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना का दिन माना जाता है। हर महीने में मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है लेकिन साल में शिवरात्रि का मुख्य पर्व जिसे व्यापक रुप से देश भर में मनाया जाता है दो बार आता है। एक फाल्गुन के महीने में तो दूसरा श्रावण मास में। फाल्गुन के महीने की शिवरात्रि को तो महाशिवरात्रि कहा जाता है। इसे फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु कावड़ के जरिये गंगाजल भी लेकर आते हैं जिससे भगवान शिव को स्नान करवाया जाता हैं।
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जानिए महाशिवरात्रि महात्म्य व पूजा विधान 
       सत्य ही शिव हैं और शिव ही सुंदर है।तभी तो भगवान आशुतोष को सत्यम शिवम सुंदर कहा जाता है।दोस्तों भगवान शिव की महिमा अपरंपार है,जो जल्द ही प्रसन्न होने वाले हैं।भोलेनाथ को प्रसन्न करने का ही महापर्व है...शिवरात्रि...जिसे त्रयोदशी तिथि, फाल्गुण मास, कृ्ष्ण पक्ष की तिथि को प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।महाशिवरात्रि के महान पर्व की विशेषता है कि सनातन धर्म के सभी प्रेमी इस त्योहार को मनाते हैं। महाशिवरात्रि के दिन भक्त जप,तप और व्रत रखते हैं और इस दिन भगवान के शिवलिंग रुप के दर्शन करते हैं।इस पवित्र दिन पर देश के हर हिस्सों में शिवालयों में बेलपत्र, धतूरा, दूध,दही, शर्करा आदि से शिव जी का अभिषेक किया जाता है।देश भर में महाशिवरात्रि को एक महोत्सव के रुप में मनाया जाता है क्योंकि इस दिन देवों के देव महादेव का विवाह हुआ था।महाशिवरात्रि का महात्योहार हर्ष और उल्लास का महापर्व है। 
महाशिवरात्रि व्रत महात्म्य--- 
 हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले साधक को मोक्ष की प्राप्ती होती है।जगत में रहते हुए मुष्य का कल्याण करने वाला व्रत है महाशिवरात्रि। आज के दिन व्रत रखने से साधक के सभी दुखों,पीड़ाओं का अंत तो होता ही है साथ ही मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। कहने का मतलब है कि शिव की सादना से धन-धान्य, सुख-सौभाग्य,और समृ्द्धि की कमी कभी नहीं होती। भक्ति और भाव से स्वत: के लिए तो करना ही चाहिए सात ही जगत के कल्याण के लिए भगवान आशुतोष की आराधना करनी चाहिए।मनसा...वाचा...कर्मणा हमें शिव की आराधना करनी चाहिए।
       भगवान भोलेनाथ..नीलकण्ठ हैं, विश्वनाथ है। हिंदू धर्म शास्त्रों में प्रदोषकाल यानि सूर्यास्त होने के बाद रात्रि होने के मध्य की अवधि,मतलब सूर्यास्त होने के बाद के 2 घंटे 24 मिनट कि अवधि प्रदोष काल कहलाती है। इसी समय भगवान आशुतोष प्रसन्न मुद्रा में नृ्त्य करते है।इसी समय सर्वजनप्रिय भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यही वजह है, कि प्रदोषकाल में शिव पूजा या शिवरात्रि में अवघड़दानी भगवान शिव का जागरण करना विशेष कल्याणकारी कहा गया है। 
        हमारे सनातन धर्म में 12 ज्योतिर्लिंग का वर्णन है।कहा जाता है कि प्रदोष काल में महाशिवरात्रि तिथि में ही सभी ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव हुआ था।
 महाशिवरात्रि व्रत: विधि व पूजा विधान--- 
 महाशिवरात्रि का व्रत हमसब के लिए है। भोले भंडारी तो सबसे लिए निराले हैं...जिनकी महिमा का गुणगान जितना भी किया जाए उतना ही कम है।भोले तो अपने साधकों से पान फूल से भी प्रसन्न हो जाते हैं।बस भाव होना चाहिए। इस व्रत को जनसाधारण स्त्री-पुरुष , बच्चा, युवा और वृ्द्ध सभी करते है। धनवान,हो या निर्धन,श्रद्धालू अपने सामर्थ्य के अनुसार इस दिन रुद्राभिषेक और यज्ञ करते हैं,पूजन करते हैं।और भाव से भगवान आशुतोष को प्रसन्न करने का सहर संभव प्रयास करते हैं। 
         महाशिवरात्रि का ये महाव्रत हमें प्रदोषनिशिथ काल में ही करना चाहिए। जो व्यक्ति इस व्रत को पूर्ण विधि-विधान से करने में असमर्थ हो, उन्हें रात्रि के प्रारम्भ में तथा अर्धरात्रि में भगवान शिव का पूजन अवश्य करना चाहिए। व्रत करने वाले पुरुष को शिवपुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान व नित्यकर्म से निवृत्त होकर ललाट पर भस्मका त्रिपुण्ड्र तिलक और गले में रुद्राक्ष की माला धारण कर शिवालय में जाना चाहिए और शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन एवं भगवान शिव को प्रणाम करना चाहिये।
       तत्पश्चात्‌ उसे श्रद्धापूर्वक महाशिवरात्रि व्रत का इस प्रकार संकल्प करना चाहिये- 
 शिवरात्रिव्रतं ह्यतत्‌ करिष्येऽहं महाफलम्‌। निर्विघ्नमस्तु मे चात्र त्वत्प्रसादाज्जगत्पते॥ 
    महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर में संकल्प करके दूध से स्नान व `ओम हीं ईशानाय नम:’ का जाप करना चाहिए। द्वितीय प्रहर में दधि स्नान करके `ओम हीं अधोराय नम:’ का जाप व तृतीय प्रहर में घृत स्नान एवं मंत्र `ओम हीं वामदेवाय नम:’ तथा चतुर्थ प्रहर में मधु स्नान एवं `ओम हीं सद्योजाताय नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए।
 महाशिवरात्रि मंत्र एवं समर्पण--- 
महाशिवरात्रि पूजा विधान के समय ‘ओम नम: शिवाय’ एवं ‘शिवाय नम:’ मंत्र का जाप अवश्य करना चाहि‌ए। ध्यान, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, पय: स्नान, दधि स्नान, घृत स्नान, गंधोदक स्नान, शर्करा स्नान, पंचामृत स्नान, गंधोदक स्नान, शुद्धोदक स्नान, अभिषेक, वस्त्र, यज्ञोपवीत, उवपसत्र, बिल्व पत्र, नाना परिमल दव्य, धूप दीप नैवेद्य करोद्वर्तन (चंदन का लेप) ऋतुफल, तांबूल-पुंगीफल, दक्षिणा उपर्युक्त उपचार कर ’समर्पयामि’ कहकर पूजा संपन्न करनी चाहिए। पश्चात कपूर आदि से आरती पूर्ण कर प्रदक्षिणा, पुष्पांजलि, शाष्टांग प्रणाम कर महाशिवरात्रि पूजन कर्म शिवार्पण करने का विधान हमारे धर्म शास्त्रों में बताया गया है।
          अंतत: महाशिवरात्रि व्रत प्राप्त काल से चतुर्दशी तिथि रहते रात्रि पर्यन्त करना चाहि‌ए। रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करने से जागरण, पूजा और उपवास तीनों पुण्य कर्मों का एक साथ पालन हो जाता है,साथ ही भगवान शिव की विशेष अनुकम्पा और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।भगवान भोलेनाथ,महादेव,आशुतोष आप सभी की समस्त मनोकामनाओं को पूरा करें।। 
 जानिए क्यों कहते हैं शिवरात्रि/कालरात्रि -- 
 रात्रि शब्द अज्ञान अन्धकार से होने वाले नैतिक पतन का द्योतक है। परमात्मा ही ज्ञानसागर है जो मानव मात्र को सत्यज्ञान द्वारा अन्धकार से प्रकाश की ओर अथवा असत्य से सत्य की ओर ले जाते हैं। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, स्त्री-पुरुष, बालक, युवा और वृद्ध सभी इस व्रत को कर सकते हैं। इस व्रत के विधान में सवेरे स्नानादि से निवृत्त होकर उपवास रखा जाता है। शिवरात्रि शब्द का प्रयोग इसलिए करते है क्यूंकि शिव बाबा का अवतरण(आना) घोर संकट के समय में हुआ है , जब 5 विकार जिनको माया (5 विकारों के समूह को माया कहते है) कहा जाता है समाज मे हर जगह 100% होते है. इन 5 विकारों से हम सबको छुड़ाने के लिए शिव बाबा धरा पर आते है और उनके आने की ख़ुशी मे शिवरात्रि का त्योहार हर साल बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है. फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। 
     माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया।

जानिए अंक ज्योतिष द्वारा वर्ष 2017 का राशिफल

वर्ष 2017 का अंक 1 है जो कि एक सार्वभौमिक अंक है। यह अंक वर्ष 2017 के सभी अंको के योग के बाद प्राप्त होता है- 2+0+1+7=10=1 
 By-the-year-2017-Learn-Numerology-Horoscope-जानिए अंक ज्योतिष द्वारा वर्ष 2017 का राशिफल        अंक 1 के अनुसार 2017 के बारे में कहा जा सकता है कि यह एक बहुत ही बेहतरीन एवं आशाओं, उम्मीदों व वादों से परिपूर्ण वर्ष हो सकता है। यह हमारी जीवन शैली, हमारे नज़रिये, हमारी सोच यहां तक कि हमारी कार्यशैली में एक सकारात्मक परिवर्तन की ओर भी संकेत करता है। इसलिये, एक दूरदर्शी सोच के साथ इस आने वाले साल में आगे बढ़ें यह आपके जीवन में कुछ बेहतर परिवर्तन ला सकता है। ऐसे करें अपनी अंकज्योतिष प्रोफाइल की गणना आपकी जन्मतिथि+जन्म माह+ सार्वभौमिक नंबर उदाहरण के तौर पर मान लिजिये आपका नाम राम है और 15 जुलाई को जन्में हैं तो 2017 के लिये आपका अंक इस प्रकार होगा।
 15+7+1=23=5 
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       2017 में जिनका वर्षांक 1 है वे जातक बहुत ही भाग्यशाली हैं। यह वर्ष आपकी सोच में बुहत ही बेहतर परिवर्तन लेकर आ सकता है। आपका जन्म क‌िसी भी महीने में 1, 10, 19, 28 तारीख को हुआ है तो साल 2017 आपके ल‌िए कई मामलों में सुखद और उन्नत‌ि दायक रहेगा। इस साल आपको अपने कार्यक्षेत्र में जमकर मेहनत करनी चाह‌िए क्योंक‌ि लाभ और उन्नत‌ि की अच्छी संभावना है। इस कारण आप अपने आस-पास एक सकारात्मक ऊर्जा को महसूस कर सकते हैं और अपने दिमाग में उपज रहे नये विचारों से आप अपनी लंबित परियोजनाओं को पूरा कर सकते हैं। इस साल आप पर चन्द्र ग्रह का प्रभाव रहेगा। नकारात्मक विचार दूर रहेंगे और आप अपने अंदर एक नई ऊर्जा महसूस करेंगे। नौकरी व बिज़नेस में आपको धुँआधार सफलता मिलने वाली है। 
        अंक ज्योतिष 2017 के अनुसार इस दौरान आपकी तरक़्क़ी भी संभव है। जो लोग सेल्स या मार्केटिंग से जुड़ी नौकरी कर रहे हैं, उन्हें ज़्यादा फ़ायदा मिल सकता है। व्यक्तिगत संबंधों को भी आप अपने सकारात्मक विचारों से साधने में कामयाब हो सकते हैं। इस वर्ष असल में आप अपनी वास्तविक क्षमताओं से परिचित हो सकते हैं जो किन्हीं वजहों से या तो स्थिर थी या उन्हें भीतर के किसी कौने में दबा रखा था। इस समय महसूस कर सकते हैं कि आपका चीज़ों को देखने व समझने का नज़रिया नकारात्मक से सकारात्मक हो रहा है। आप एक दम ताजा विचारों से हर तरह की समस्याओं को आसानी से निपटाने में कामयाब हो सकते हैं। परिवार और मित्र आपकी सफलता में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। 
          आपके जीवन में 2017 में सब कुछ अच्छा हो रहा है इसका तात्पर्य यह बिल्कुल भी नहीं है कि आपको समस्याओं का सामना बिल्कुल ही नहीं करना पड़ेगा। इसका अभिप्राय है कि आप अपनी ऊर्जा व उत्साह से इन समस्याओं को आसानी से हल कर सकते हैं। हालांकि यह ऊर्जा हो सकता है वर्ष की शुरुआत में आप महसूस न कर सकें लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ेगा आप अपने अंदर के उत्साह को महसूस कर सकेंगें इसके बाद आप अपने कदम जीवन की उन्नति के पथ पर तेजी से बढ़ा सकते हैं। अपने इसी जोश के साथ कार्यों को सपंन्न करते हुए आप अपने लक्ष्यों को हासिल करने में भी कामयाबी हासिल कर सकते हैं। 
       इस वर्ष आप जिस भी काम में हाथ डालेंगें उसमें आपको सफलता मिल सकती है। यदि किसी नई नौकरी या वर्तमान नौकरी में पदोन्नति के इच्छुक हैं तो अपनी इन मनोकामनाओं को पूर्ण करने के अवसर भी प्रचूरता में आपको मिल सकते हैं बशर्ते आप इन अवसरों का लाभ उठाने के लिये तैयार रहें। व्यक्तिगत समस्याओं को सुलझाने के लिये भी यह वर्ष आपके लिये श्रेष्ठ साबित हो सकता है। कुल मिलाकर कहा जा सकते हैं वर्षांक 1 वालों के लिये पूर्ण रूप से यह वर्ष बहुत ही भाग्यशाली रहने के आसार हैं। साल के 4 महीने अप्रैल, मई, अगस्त और स‌ितंबर आपके ल‌िए सबसे खास हैं। इन महीनों में अच्छे अवसर प्राप्त होंगे, मौके का लाभ उठाएं। 13 अप्रैल से 12 मई व 17 अगस्त से 16 सितंबर तक का समय ज़्यादा अच्छा रह सकता है। 
 मूलांक 1 के लिए उपाय--- 
आपके लिए सुनहरा लाल रंग शुभ है। लाल व नारंगी रंग के कपड़े पहना फ़ायदेमंद है। शिव व सूर्य की उपासना करना फलप्रद है। सूर्य को प्रातःकाल तांबे के पात्र से जल दें व लाल-नारंगी रुमाल जेब में रखें। रविवार को व्रत रखना उत्तम है। आपके लिए रविवार, सोमवार और गुरुवार शुभ व 1, 10, 19, 28 तारीख़ें अनुकूल रहेंगी। यदि इन तारीख़ों में रविवार का संयोग पड़ जाये तो समझिए की ये दिन अत्यंत अनुकूल व्यतीत होंगे। 4, 6, 7, 8 अंक वाले व्यक्तियों से बचें। 
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2017 में जिनका वर्षांक 2 है वे जातक बहुत ही भाग्यशाली हैं। आपकी जन्म‌‌त‌िथ‌ि क‌िसी भी महीन में 2, 11, 20, 29 तारीख है तो आप मूलांक दो के व्यक्त‌ि हैं। आपके ल‌िए यह वर्ष अधूरी चाहतों को पूरी करने वाला है। आप प्रयास करेंगे तो नौकरी में आपकी स्‍थ‌ित‌ि बेहतर होगी। कार्यक्षेत्र में अध‌िकार‌ियों का सहयोग प्राप्त होगा। यह वर्ष आपकी सोच में बुहत ही बेहतर परिवर्तन लेकर आ सकता है। इस कारण आप अपने आस-पास एक सकारात्मक ऊर्जा को महसूस कर सकते हैं और अपने दिमाग में उपज रहे नये विचारों से आप अपनी लंबित परियोजनाओं को पूरा कर सकते हैं। व्यक्तिगत संबंधों को भी आप अपने सकारात्मक विचारों से साधने में कामयाब हो सकते हैं।
      इस साल आपके ऊपर देव-गुरु बृहस्पति मेहरबान हैं। इसलिए आपकी पाँचों उंगलियाँ घी में रहने वाली हैं। ज़्यादा टेंशन लेने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि पिछले साल जो उम्मीदें ध्वस्त हो गयी थीं वे इस साल सफलता रूपी बिल्डिंग की तरह फिर से खड़ी होने वाली हैं। नौकरी में आपको अपने बॉस का पूरा सहयोग मिलेगा। रुका हुआ प्रोमोशन इस साल ज़रुर हो जायेगा। इस वर्ष असल में आप अपनी वास्तविक क्षमताओं से परिचित हो सकते हैं जो किन्हीं वजहों से या तो स्थिर थी या उन्हें भीतर के किसी कौने में दबा रखा था। इस समय महसूस कर सकते हैं कि आपका चीज़ों को देखने व समझने का नज़रिया नकारात्मक से सकारात्मक हो रहा है। 
      आप एक दम ताजा विचारों से हर तरह की समस्याओं को आसानी से निपटाने में कामयाब हो सकते हैं। परिवार और मित्र आपकी सफलता में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। आपके जीवन में 2017 में सब कुछ अच्छा हो रहा है इसका तात्पर्य यह बिल्कुल भी नहीं है कि आपको समस्याओं का सामना बिल्कुल ही नहीं करना पड़ेगा। इसका अभिप्राय है कि आप अपनी ऊर्जा व उत्साह से इन समस्याओं को आसानी से हल कर सकते हैं। हालांकि यह ऊर्जा हो सकता है वर्ष की शुरुआत में आप महसूस न कर सकें लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ेगा आप अपने अंदर के उत्साह को महसूस कर सकेंगें इसके बाद आप अपने कदम जीवन की उन्नति के पथ पर तेजी से बढ़ा सकते हैं। अपने इसी जोश के साथ कार्यों को सपंन्न करते हुए आप अपने लक्ष्यों को हासिल करने में भी कामयाबी हासिल कर सकते हैं। 
       इस वर्ष आप जिस भी काम में हाथ डालेंगें उसमें आपको सफलता मिल सकती है। यदि किसी नई नौकरी या वर्तमान नौकरी में पदोन्नति के इच्छुक हैं तो अपनी इन मनोकामनाओं को पूर्ण करने के अवसर भी प्रचूरता में आपको मिल सकते हैं बशर्ते आप इन अवसरों का लाभ उठाने के लिये तैयार रहें। व्यक्तिगत समस्याओं को सुलझाने के लिये भी यह वर्ष आपके लिये श्रेष्ठ साबित हो सकता है। कुल मिलाकर कहा जा सकते हैं वर्षांक 1 वालों के लिये पूर्ण रूप से यह वर्ष बहुत ही भाग्यशाली रहने के आसार हैं।सेहत भी इस वर्ष आपका अच्छा रहेगा, खान-पान का ध्यान रखें। आपके ल‌िए मार्च से अप्रैल का महीना व‌िशेष लाभप्रद रहेगा। 14 मार्च से 12 अप्रैल तक का समय विशेष अनुकूल रहेगा। 
 मूलांक 2 के लिए उपाय--- 
आपके लिए सोमवार, बुधवार और रविवार अत्यधिक अनुकूल रहेंगे। अगर सोमवार को 2, 11, 20 व 29 तारीख़ें पड़ें तो ये आपके लिए विशेष शुभ होंगी। आपके लिए सफ़ेद, हरा, सिंदूरी व क्रीम रंग शुभ है। इन रंगों के कपड़ों को ज़्यादा पहनें। 4 और 7 अंक वाले व्यक्तियों से बचें। जेब में सफ़ेद रुमाल रखना व शिवजी की पूजा करना शांतिवर्धक रहेगा। सोमवार का व्रत करना आपके लिए लाभकारी है। 
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जिनका व्यक्तिगत वर्षांक इस वर्ष 3 है उनके लिये भी 2017 एक अंक वालों के समान ही भाग्यशाली है। जिस प्रकार व्यक्तिगत वर्षांक 1 वाले असीम ऊर्जा व उत्साह से कार्यों को संपन्न करेंगें उसी तरह 3 अंक वाले भी 1 अंक वालों से पूर्णत: प्रेरित रहें इसकी उम्मीद की जा सकती है। ज‌िन लोगों की जन्म‌त‌िथ‌ि 3, 12, 21, 30 तारीख है उनके ल‌िए यह वर्ष उलझन और उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। आपको कार्यक्षेत्र में काफी संभलकर चलना होगा नहीं तो आपको परेशान‌ियों का सामना करना पड़ सकता है। अध‌िकार‌ियों से उलझने से बचें। आपके मन में नौकरी बदलने का व‌िचार आ सकता है। आप हमेशा कुछ कर गुजरने के लिये तत्पर रहेंगें। 2017 में आप अपनी ऊर्जा से अपनी क्षमताओं को इस कदर विकसित कर सकते हैं जिससे आपका जीवन भविष्य के लिये पूर्णत: परिवर्तित हो जाये। लेकिन यह भी सिर्फ आप पर ही निर्भर करेगा कि आप अपनी इस ऊर्जा से कोई उठा पाते हैं या नहीं। 
     इसलिये आपको यह ध्यान देने अथवा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि आपकी ऊर्जा का इस्तेमाल अनावश्यक गतिविधियों, फालतू के कार्यों या फिर महत्वहीन संबंधों में न हो। 2017 का समय ही आपके लिये वह सौभाग्यशाली समय है जिसमें आप अपनी इस अतिरिक्त ऊर्जा का प्रयोग अपने उन सपनों को, अपनी उन इच्छाओं को पूरा करने के लिये कर सकते हैं जिन्हें आप अपने अंदर दफन कर चुके हैं या फिर जिन्हें अपने जीवन में कभी पूरा करने का सपना देखते हैं। अपने कार्यों को करने में भी आपका अतीन्द्रिय ज्ञान आपका मार्गदर्शन करेगा। इसलिये अपने अंतर्मन की आवाज़ को जरुर सुनें वह क्या कहना चाहता है। जिस काम को करने की गवाही आपका मन न दे उसे न ही करें तो बेहतर होगा। वर्ष का उत्तरार्ध विशेष रूप से भाग्यशाली रहने के आसार हैं। 
          एक बेहतरीन वर्ष का आनंद लें। आपका मूड बहुत खुशगवार रहने के आसार हैं।यह साल आपके लिए सामान्य रहेगा और आप यूरेनस ग्रह की शरण में रहेंगे। आपके साथ कुछ रहस्यमयी व आकस्मिक घटनाएँ घट सकती हैं। जीवन में अचानक उतार-चढ़ाव आने की सम्भावना है। बिज़नेस करने वाले बंधुओं को काम-धंधे में बड़ी इन्वेस्टमेंट करने से पहले सोच लेना चाहिए। अपने बॉस या ऊँचे अधिकारियों से उलझना आपके लिए घाटे का सौदा साबित होगा। 14 मार्च से 12 अप्रैल तक का समय आपके लिए सुनहरा अवसर लेकर आएगा। 
 मूलांक 3 के लिए उपाय--- 
आपके लिए गुरुवार, सोमवार और मंगलवार काफ़ी अनुकूल रहेंगे। अगर गुरुवार को 3, 12, 21 व 30 तारीख़ें पड़ जाएँ तो समझ लीजिए आपकी निकल पड़ी। आपके लिए पीला, सफ़ेद व लाल रंग शुभ है। इन रंगों के कपड़ों को ज़्यादा-से-ज़्यादा पहनें। जेब में पीला रुमाल हमेशा रखें। 5 व 6 अंक के व्यक्तियों को दूर से ही राम-राम करें। गुरुवार का व्रत रखें। 
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अंक ज्योतिषीय भविष्यवाणी के अनुसार व्यक्तिगत वर्षांक 4 वालों के लिये सुझाव है कि आप अपने किसी भी कार्य या परियोजना को क्रियांन्वित करने से पहले उसकी अच्छे से रूप रेखा तैयार करें व सुनियोजित तरीके से उस पर काम करें। इस वर्ष में आपके ऊपर बुध ग्रह की कृपा रहेगी। आपके दिमाग़ में नए-नए आइडिया आने वाले हैं, जिनसे आप कुछ अलग करके दिखायेंगे। इस साल अपनी क्रिएटिविटी से आप काफ़ी सफलता प्राप्त करेंगे। नौकरी व बिज़नेस में आप कुछ हटकर करने वाले हैं जिससे आपके विरोधियों को भी जलन होगी। आपके ऊपर अपने बॉस की कृपा बनी रहेगी। 
       अंक विज्ञान 2017 कहता है कि आप अपनी बातों के जादू से अपने सहकर्मियों को इम्प्रेस कर देंगे जिससे कई नए लोग भी आपके मुरीद बनेंगे। यदि आपने संबंधित कार्यक्षेत्र में अच्छे से शोध एवं जमीनी स्तर पर उस पर काम नहीं किया तो आपकी काबलियत धरी की धरही रह सकती है, लाख कोशिशों के बावजूद भी आपको अपेक्षानुसार परिणाम हासिल करने में दिक्कत आ सकती हैं। इसलिये बेहतर है जंग के मैदान में उतरने से पहले अपने सभी हथियारों को अच्छे से जांच-पड़ताल कर दुश्मन की हर चाल को बारीकि से समझ लें, अन्यथा आपके अथक प्रयास भी बेकार साबित होने की संभावनाएं प्रबल हैं। आपको निरंतर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, ग्रीष्मकाल में आपको इसके सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। इस वर्ष आपको केवल अपने कामकाजी जीवन पर ही ध्यानकेंद्रित करने की आवश्यकता नहीं है बल्कि अपनी सेहत का भी बराबर ध्यान रखना होगा। 
    यदि आप व्यायाम करने से कतराते रहे हैं तो इस आलस्य को त्याग दें और व्यायाम के लिये समय अवश्य निकालें और यदि आप यह कर रहे हैं तो इसे नियमित रूप से जारी रखें किसी तरह की कोताही न बरतें। यदि किसी भी प्रकार के शारीरिक कष्ट को महसूस कर रहे हैं तो चिकित्सकीय परामर्श के साथ-साथ जरुरी जांच पड़ताल अवश्य करवायें। इस वर्ष आप जितने भी प्रयास करेंगें आने वाले वर्षों में आपको जीवन में सफलता इनके अनुरूप ही मिलेगी। इसलिये अपने कर्तव्यों का जिम्मेदारी के साथ निर्वाह करें। 2017 में परिजन आपके जीवन बहुत बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इस साल छात्रों को अपनी मेहनत का सुखद पर‌िणाम म‌िलने से खुशी होगी। आपके ल‌िए अगस्त एवं स‌ितंबर का महीना हर तरह से अनुकूल रहेगा। 17 अगस्त से 16 सितम्बर तक का समय जीवन में ख़ुशियों की बहार ला सकता है। 
 मूलांक 4 के लिए उपाय--- 
आपके लिए बुधवार और शनिवार फ़ायदेमंद रहेंगे। अगर इन वारों में 4, 13, 22 व 31 तारीख़ें पड़ जाएँ तो सफलता निश्चित जानिए। आपके लिए भूरा, खाकी, काला व नीला रंग विशेष शुभ है इसलिए इन रंगों के कपड़ों का ज़्यादा उपयोग करें। जेब में भूरा, काला या नीला रुमाल रखें। पक्षियों को रोज़ाना दाना डालें और दुर्गा जी की पूजा करें। 1, 2, 7 व 9 अंकों वाले व्यक्तियों से बचकर रहें। 
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जिनका वर्षांक 5 हैं अंक ज्योतिष के अनुसार 2017 में उनके जीवन में बहुत सारे बदलाव हो सकते हैं। अंक शास्त्र के अनुसार 2017 में आपके ऊपर शुक्र ग्रह का राज रहेगा। यह वर्ष सेहत के मामले में सुखद रहेगा। आप अध‌िकतर खुशम‌िजाज और आनंद‌ित रहेंगे। जो लोग वाहन खरीदना चाह रहे हैं उन्हें अपने प्रयास में सफलता म‌िलेगी। वैसे इस साल आपकी आय भी अच्छी रहेगी। आप लक्ज़री व ब्यूटी की तरफ़ ज़्यादा आकर्षित होंगे। आप नए गैजेट्स व कपड़े ख़रीदने में ख़ूब धन ख़र्च करने वाले हैं। नौकरी व बिज़नेस में आपको अच्छी सफलता मिलनी संभव है। ऑफ़िस में किसी व्यक्ति से आँखें चार हो सकती हैं। 
        अगर आप ऑटोमोबाइल, आर्ट्स, रेस्टोरेंट, होटल, म्यूज़िक व डांस, रेडीमेड गारमेंट्स, मॉडलिंग, पेंटिंग, एक्टिंग से जुड़ा कोई भी काम कर रहे हैं तो सफलता मिलनी निश्चित है। जो समय के साथ अपने जीवन में हो रहे परिवर्तनों को स्वीकार कर आगे बढ़ेंगें वह बहुत अच्छा कर सकते हैं लेकिन यदि कोई स्वाभाविक रूप से हो रहे इन परिवर्तनों में बाधा उत्पन्न करेगा उसका जीवन काफी कष्टप्रद भी हो सकता है। इस वर्ष अचानक हुए कुछ परिवर्तनों से आप असमंजस की स्थिति में पड़ सकते हैं आपकी हालत ठीक उस व्यक्ति जैसी हो सकती है जो किसी किसी चौराहे पर खड़ा हो और उसे मालूम न हो कि जाना किधर है। इसलिये जिस भी रास्ते का चयन करें ठंडे दिमाग से पूरी तरह से सोच समझकर करें।
       ऐसे समय से बुद्धिमानी से यदि आप निर्णय लेते हैं तो यह आपके जीवन को बेहतर व आपकी मंजिल तक पंहुचने के मार्ग को सुगम बना सकता है। कुछ परिवर्तन आपके लिये बड़े ही आश्चर्यात्मक हो सकते हैं, लेकिन घबराएं नहीं बल्कि इनका सही इस्तेमाल कर आप एक लंबी छलांग लगाने में भी कामयाब हो सकते हैं। आप बस इन बदलावों को अपने मन से स्वीकार कर आगे बढ़ें इनके रास्ते में किसी तरह की बाधा उत्पन्न न करें। यह आपके भावी विकास के लिये बहुत मंगलकारी हो सकते हैं। आपके लिये इस वर्ष एक फायदेमंद बात यह है कि आपके पास दोराहे तक न पंहुचने के विकल्प होंगे। आप अपनी राह पर चलते हुए खुद सामंजस्य बैठा सकते हैं। बस आप के केवल अपनी मंजिल का ध्यान करते हुए नवीनतम जानकारियों पर अपनी पकड़ बनायें रखें। 
   अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिये हर संभव प्रयास व कठिन परिश्रम करते रहें, फिर आप हर हाल में मंजिल पाने में कामयाब हो सकते हैं। यह वर्ष स्वयं का सुधारने का भी बेहतर अवसर आपके लिये लेकर आ सकता है। अपनी सेहत के प्रति भी सचेत रहें और व्यायाम करते रहें। अपने खाने की आदत में भी सेहत के अनुसार जरुरी बदलाव करते हुए पौष्टिक आहार ग्रहण करें। अपने आदतों में सुधार का प्रण लेकर इस वर्ष को आप अपने आगामी जीवन का आधार बना सकते हैं।जरूरी है क‌ि आप अपने मन और वाणी पर संयम रखें। साल की अंत‌िम त‌िमाही आपके ल‌िए व‌िशेष रूप से सुखद रहेगी। 17 सितम्बर से 16 अक्टूबर तक का समय काफ़ी अच्छा रहेगा। 
 मूलांक 5 के लिए उपाय--- 
आपके लिए हरा, भूरा व ग्रे रंग अनुकूल है। इन रंगों के कपड़े ज़्यादा पहनें। जेब में हमेशा हरे रंग का रुमाल रखें। देवी सरस्वती व विष्णु जी की रोज़ाना पूजा करें। आपके लिए बुधवार अनुकूल है। अगर इस वार को 5, 14, 23 तारीख़ें पड़ जाएँ तो पाँचों उंगलियाँ घी में समझिये। 2 अंक के व्यक्तियों से बचकर चलें। 
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जिन जातकों का व्यक्तिगत वर्षांक 6 है वे इस वर्ष सामाजिक रूप से काफी सक्रिय रह सकते हैं। 2017 का पूरा साल आप लोगों से घिरे रहकर उनके साथ बातचीत करते हुए बीता सकते हैं। ज‌िनकी जन्मत‌िथ‌ि 6, 15, 24 है उनके ल‌िए साल 2017 कायक्षेत्र के मामले में उन्नत‌िदायक रहेगा। नौकरी में अध‌िकार‌ियों के साथ तालमेल बना रहेगा। इस साल आप पर नेपच्यून ग्रह का दबदबा रहेगा। 2017 का यह समय आपके लिए अच्छा है। आप अपनी नौकरी व बिज़नेस मीटिंग्स के चलते काफ़ी व्यस्त रहने वाले हैं। कोई नया बिज़नेस शुरू करने की प्लानिंग भी आप करने वाले हैं, जिससे आप अच्छा-ख़ासा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। किसी बड़े प्रोजेक्ट को समय से पूरा करने के कारण आप अपने बॉस की वाहवाही लूटेंगे। नौकरी में आपका अनुशासन देखकर आपके विरोधी भी आपकी तारीफ़ करने पर मजबूर हो जायेंगे। 
        अपने आस-पास अत्यधिक गतिविधियों के कारण आप खुद को अभिभूत (थका हुआ, पूर्णतया पराजित) महसूस कर सकते हैं लेकिन इनके दूरगामी परिणाम आपके लिये काफी सहायक होंगे जोकि आपके लिये काफी सुखद व संतोषप्रद साबित हो सकते हैं। अपने जीवन में स्वयं को सर्वोपरि समझने की भूल न करें और अन्य लोगों से बातचीत कर उनसे प्रेरणा लें, सीख लें, इस वर्ष यही आपके लिये बहुत महत्वपूर्ण है। हालांकि किसी मोड़ पर आप इस सबसे उकताहट महसूस कर सकते हैं और सोच सकते हैं कि आप पर इतने सारे लोगों से डील करने का दबाव बनाया जा रहा है। आपको अपनी निजता के लिये भी इसे एक खतरे के रूप में देख सकते हैं लेकिन ऐसा न सोचें और समय के बहाव के साथ चलते चलिये, बल्कि उनकी संगत का ज्यादा से ज्यादा आनंद उठायें। वे किसी न किसी रूप में आपके करियर से लेकर रिश्तों तक में आपके मददगार हो सकते हैं। पहले तीन महीनों का समय तो आपके लिये इतनी तेजी से गुजर सकता है कि आपको यह भनक तक न लगे कि समय कब गुजर गया। घरेलू जीवन में आप खुद को बहुत सारे दायित्वों के बोझ तले दबा हुआ महसूस कर सकते हैं। कई पारिवारिक समारोह की धुरी भी आपको बनना पड़ सकता है। 
      इसे बोझ समझने की बजाय जितना हो सकता है इन पलों का आनंद लें। हो सकता है भविष्य में इस तरह के मौके बहुत कम मिलें, अगला वर्ष इससे बहुत भिन्न हो सकता है यदि रोमांटिक जीवन की बात की जाये तो यह वर्ष आपके बहुत ही अच्छा रहने की उम्मीद की जा सकती है। यदि आप किसी को चाहते हैं और अपने प्यार का इजहार करने में किसी भी तरह की हिचकिचाहट महसूस करते हैं तो यह समय तमाम शंकाओं, भय आदि को त्यागकर सही नियत के साथ आगे बढ़ने का है। वर्षांक 6 आपके लिये मददगार है अपने भावों को साथी से अभिव्यक्त करें।साल का मध्‍य आपके ल‌िए उत्साहवर्धक रहेगा। 13 मई से 14 जून तक का समय आपके लिए कुछ अच्छे सरप्राइज़ ला सकता है।
 मूलांक 6 के लिए उपाय---
 आपके लिए सफ़ेद व नीला रंग अनुकूल है। इसलिए इन रंगों के कपड़ों को ज़्यादा पहनें। जेब में सफ़ेद रुमाल रखें। आपके लिए बुधवार, शुक्रवार व शनिवार शुभ हैं, अगर इन वारों में 6, 15 व 24 तारीख़ें पड़ जाएँ तो लाभदायक रहेंगी। शुक्रवार का व्रत रखना आपके लिए फ़ायदेमंद है। 1 व 2 अंक के व्यक्तियों से बचकर रहें। 
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वर्षांक 7 वालों के लिये 2017 बहुत ही अच्छा साल रहने के आसार हैं। जन्मत‌िथ‌ि 7, 16, 25 है तो यह वर्ष आपके ल‌िए अपनी कार्यक्षता और योग्यता द‌िखाने के ल‌िए अच्छा है आप अपनी मेहनत और लगनशीलता से नौकरी एवं व्यवसाय में कामयाबी की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। अंक ज्योतिष की दृष्टि से इस वर्ष आप पर शनि देव शासन करेंगे। अपनी नौकरी व बिज़नेस को लेकर आप काफी सीरियस रहेंगे। आपका प्लानिंग करके काम करना नौकरी में अचानक तरक़्क़ी दे सकता है। जोश व उत्साह से आप भरपूर रहेंगे। नौकरी में अपने टैलेंट के चलते इस दौरान आप विरोधियों की ईंट-से-ईंट बजा सकते हैं। स्टील, लोहा, मशीनरी, लेदर, प्रॉपर्टी, ऑयल व जूतों से जुड़ा बिज़नेस अगर कर रहे हैं तो सफलता मिलने की पूर्ण सम्भावना है। बिज़नेस में ईमानदारी बरतें व छल-कपट से दूर रहें। 
      आपके पिछले कुछ वर्ष हो सकता है मुश्किलात से भरे रहे हों और आने वाले वर्ष में भी शायद थोड़े बहुत कठिन प्रयास आपको करने पड़ें। लेकिन जिस आरामदायक समय की आपको आवश्यकता है 2017 में आपको वह आवश्यक रूप से मिलना चाहिये। इसका पूर्ण रूप से उपयोग करें। एक बेहतर रणनीति के साथ इस वर्ष काम करेंगें तो निश्चित तौर पर आने वाले समय के तनाव को भी आप कम कर सकते हैं। अपने भविष्य के विकास एवं करियर में समृद्धि के लिये आप 2017 में योजना बना सकते हैं। विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल करने के साथ-साथ अपने सोचने के तरीके में भी आवश्यक बदलाव करें तो फायदेमंद रहेगा। जो सवाल व शंकाए आपको अक्सर परेशान करती हैं यह समय उन पर विजय प्राप्त करने का भी है। 
     इस वर्ष आपका रूझान आध्यात्मिकता की ओर भी हो सकता है। धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों के दौरान जो भी आप आत्मसात करेंगें वह बहुत सारी चीज़ों को समझने में आपके लिये सहायक सिद्ध हो सकता है। कुछ समय के लिये हो सकता है आप अपने चाहने वालों से अलगाव भी महसूस करें लेकिन जल्द ही आप परिस्थितियों को समझ कर उनके साथ समझौता कर सकते हैं। पिछले वर्षों के तनाव से मुक्त होकर 2017 में आप खुद को तरोताज़ा महसूस कर सकते हैं। आप अपने आपको उन आनंददायक रचनात्मक गतिविधियों में शामिल कर सकते हैं जो आपको सुकून दें और आपको एक खुशहाल व्यक्ति बनायें। सावधानी से अपने भविष्य की योजना बनाते हुए अपनी इस खुशहाली का इस साल आनंद लें। हो सकता है इस तरह का बेहतरीन समय आपको फिर मिले न मिले, इन पलों का लुत्फ़ उठायें। 16 जुलाई से 16 अगस्त तक का समय यादगार साबित हो सकता है। 
 मूलांक 7 के लिए उपाय-- 
आपके लिए गुरुवार व शनिवार शुभ हैं। अगर इन वारों को 7, 16, 25 तारीख़ें पड़ जाएँ तो समझिए आपकी निकल पड़ी। आपके लिए नीला, क्रीम, पीला, हल्का हरा व गुलाबी रंग शुभ है। इन रंगों के कपड़ों को ज़्यादा पहनें। पॉकेट में नीला, पीला या क्रीम कलर का रुमाल हमेशा रखें। शनि देव की रोज़ाना पूजा करें। 1, 2, 4 और 9 अंकों वाले व्यक्तियों से बचकर रहें। 
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व्यक्तिगत वर्षांक 8 साल 2017 में आपकी कामयाबी और विकास की ओर ईशारा कर रहा है। 8, 17, 26 तारीख को जिनका जन्मद‌िन है उनका मूलांक 8 है। इनके ल‌‌िए यह वर्ष संघर्षपूर्ण रह सकता है। आपको पर‌िश्रम के अनुकूल लाभ नहीं म‌िलने से न‌िराशा हो सकती है। अगर आप इस साल कोई नया काम शुरु करने की सोच रहे हैं तो सोच-समझकर कदम बढ़ाएं नहीं तो न‌ुकसान हो सकता है। उम्मीद है 2016 आपके लिये एक आरामदायक वर्ष रहा है। इस वर्ष आप पर मंगल ग्रह का स्वामित्व रहेगा। आप ऊर्जा और जोश से भरे रहेंगे। नौकरी और बिज़नेस में आप जी-तोड़ मेहनत करने वाले हैं, परन्तु परिणाम उम्मीद से थोड़ा कम मिल सकता है। इस दौरान कोई नया बिज़नेस शुरू न करें और किसी भी बिज़नेस में बड़ा निवेश करने से पहले सोच लें। प्रॉपर्टी, मशीनरी, लोहे के बिज़नेस से जुड़े हुए लोगों को अपने बिज़नेस में सतर्कता बरतनी चाहिए। पढ़ाई में इस साल आपका ध्यान थोड़ा कम लगने की संभावना है। अपने पैरों पर खड़ा होने के लिये जिस सफलता का इंतजार आप कर रहे हैं उसके लिये सक्रिय होने का यह बेहतर समय है। 
         निस्संदेह सफलता अचानक से आपकी झोली में नहीं आन पड़ेगी, उसके लिये हर किसी को प्रयास करने पड़ते हैं। लेकिन जब सितारे आपके साथ हों तो ऐसे में आप उनका कितने अच्छे से लाभ उठाते हैं यही निर्णायक रूप से एक सफल और असफल व्यक्ति में अंतर करता है। चीज़ों को समझने व कार्यों को करने में किसी भी तरह से हड़बड़ी दिखाने की आवश्यकता नहीं है। आगे बढ़ें लेकिन मजबूती से, जल्दबाजी में नहीं। व्यावसायिक जातकों के लिये यह साल बहुत ही सौभाग्यशाली रहने की संभावना है। जो भी मेहनत आप 2017 में करेंगे और जो प्रयास आपने सफलता अर्जित करने के लिये गत वर्ष किये हैं, इस वर्ष वास्तव में उनके संयुक्त परिणाम आपके पक्ष में होंगें, और जिन जातकों ने पिछले वर्ष पहले ही बहुत अच्छा किया है वे इस वर्ष और बेहतर करने की स्थिति में होंगे। 
    इसलिये वर्षांक 8 के सुअवसरों का लाभ उठायें और उद्देश्यों को पूर्ण करें। अधेड़ उम्र जातकों के लिये भी यह वर्ष बहुत अच्छा रहने के आसार हैं और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा व समृद्धि में वृद्धि होने की उम्मीद है। हालांकि अतीत की यादें आपको थोड़ा बहुत परेशान कर सकती हैं इसलिये इन्हें जितना हो सके नजरअंदाज करने की कोशिश करें और इन्हें अपनी सफलता के रास्ते में रोड़ा न बनने दें।सेहत के मामले में लापरवाही से बचें और सड़क पर चलते समय एवं जोख‌िम भरे काम करते हुए सजग रहें। एक अच्छे वर्ष के लिये शुभकामनाएं।वैसे भी 2017 में आपका वज़नबढ़ सकता है इसलिए रोज़ सुबह जॉगिंग करें। अंक ज्योतिष के मुताबिक़ 14 जनवरी से 13 फ़रवरी तक का समय आपके लिए एक नया सवेरा लेकर आ सकता है। 
 मूलांक 8 के लिए उपाय--- 
आपके लिए शनिवार व बुधवार काफ़ी बढ़िया रहेंगे। इन वारों में अगर 8, 17, 26 तारीख़ें पड़ जाएँ तो समझिए कि आपकी पौ बारह हो गई। आपके लिए काला, भूरा, गहरा नीला, हरा, बैंगनी रंग काफी शुभ हैं इसलिए इन रंगों के कपड़ों को ज़्यादा-से-ज़्यादा पहनें। जेब में काला रुमाल हमेशा रखें। शनिवार का व्रत रखें व किसी ग़रीब को खाना खिलाएँ। 1, 2 व 9 अंक के व्यक्तियों से सतर्क रहें। 
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अंक ज्योतिष के अनुसार 1 से लेकर 9 अंकों तक ज्योतिषीय भविष्यवाणी की जाती है हर वर्ष का अंक निकाला जाता है 9 वर्षों 9वें अंक के बाद यह चक्र पुन: आरंभ होता है। अत: जिन जातकों का व्यक्तिगत वर्षांक इस वर्ष 9 है, उन्हें पूर्व वर्षों में हासिल की गई उपलब्धियों का स्मरण करने की आवश्यकता है। साल 2017 उनके ल‌िए अनुकूल है ‌ज‌िनका जन्मद‌िन 9, 18, 27 तारीख को है। इस त‌िथ‌ि को जन्मे व्यक्त‌ि मूलांक 9 के अंतर्गत आते हैं। इस साल मूलांक 9 के व्यक्त‌ि नौकरी में अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं। अभी तक समाज से आपने जो कुछ भी हासिल किया है वक्त आ गया है कि आप भी अब समाज को अब कुछ लौटाना शुरु करें। यदि पिछले सालों में अपनी उपल्बधियों से आप संतुष्ट नहीं हैं तो अपनी गतिविधियों, कार्य परियोजनाओं का विश्लेषण कर नये सिरे से उनकी योजना अगले 9 वर्षीय चक्र के लिये तैयार करें। इस साल आपके ऊपर सूर्य नारायण की कृपा रहेगी। अपनी मेहनत और हौसले के दम पर आप हर क्षेत्र में बाज़ी मार लेंगे। 
         नौकरी और बिज़नेस में आप सूर्य के समान चमकने वाले हैं। बिज़नेस में कोई बड़ा मुनाफ़ा आपका इंतज़ार कर रहा है। इस दौरान प्रोमोशन मिलने की भी पूरी संभावना है। पुलिस डिपार्टमेंट, बिल्डिंग-मटेरियल-सीमेंट, प्रॉपर्टी, डॉक्टरी, केमिस्ट से जुड़ा अगर कोई काम कर रहे हैं तो गेंद आपके पाले में है। पिछले साल जो मेडिकल एंट्रेंस आप क्लियर नहीं कर पाए थे इस वर्ष उसमे झंडे गाड़ने के पूरे-पूरे योग हैं। यदि आप समझते हैं कि पिछले 9 सालों में आपने काफी कमाई की है तो इस वर्ष आप उसका कुछ हिस्सा मानव कल्याण के कार्यों में खर्च कर सकते हैं। आपको इसका लाभ अवश्य मिलेगा। अपने अनुभवों को अन्य के साथ सांझा करें और उन्हें लक्ष्यों तक पहुंचाने में उनकी मदद करें।
       मदद करने के विभिन्न तरीके अपनाकर आप इस नेक कार्य का आनंद उठा सकते हैं। इन विधियों पद्धतियों में अपनी रचनात्मकता का प्रयोग करें। आप अतीत की जिन गलतियों के कारण, जो उपलब्धियां हासिल करने से आप चूक गये हैं उन पर चिंतन करते हुए अपने भविष्य की योजनाओं को सुदृढ़ बना सकते हैं। 2017 पहले के सालों की अपेक्षा योजना बनाने व अपने लक्ष्यों को हासिल करने के मामले में आपके लिये काफी श्रेष्ठ रहने के आसार हैं। अपने दोस्तों की तरफ से भी आपको काफी सहयोग मिलने की उम्मीद है। पार‌िवार‌िक जीवन रोमांट‌िक और आनंदपूर्ण होगा। सेहत के मामले में बीते साल के मुकाबले यह साल आपके ल‌िए अध‌िक अनुकूल है। मैडिटेशन का सहारा लेकर आप मेंटली और स्ट्रांग बन सकते हैं 13 अप्रैल से 12 मई तक का समय आपके लिए बेहतरीन साबित हो सकता है। 
 मूलांक 9 के लिए उपाय--- 
आपके लिए मंगलवार, रविवार व सोमवार शुभ हैं। अगर इन वारों को 9, 18 व 27 तारीख़ें पड़ जाएँ तो सफलता आपके क़दम चूम सकती है। आपके लिए लाल, सिंदूरी रंग अनुकूल है। इसलिए इन कलर्स के कपड़ों को ज़्यादा अहमियत दें। हनुमान जी की डेली पूजा करना फ़ायदेमंद है। मंगलवार का व्रत रखें। 4, 5 व 7 अंकों के व्यक्तियों से बचकर चलें।

जानिए कैसे लोगों को शनिदेव बनाते है संपन्न और धनवान

Here-how-to-make-people-rich-with-Shani-जानिए कैसे  लोगों को शनिदेव बनाते है संपन्न और धनवानशनिदेव की अपने पिता सूर्य से अत्यधिक दूरी के कारण यह प्रकाशहीन हैं। इसी कारण लोग शनिदेव को अंधकारमयी, भावहीन, गुस्सैल, निर्दयी और उत्साहहीन भी मान बैठते हैं परंतु शनि ग्रह ईमानदार लोगों के लिए यश, धन, पद और सम्मान का ग्रह है। शनि संतुलन एवं न्याय के ग्रह हैं। 
         शनि अर्थ, धर्म, कर्म और न्याय का प्रतीक हैं। शनि ही धन-संपत्ति, वैभव और मोक्ष भी देते हैं। कहते हैं शनि देव पापी व्यक्तियों के लिए अत्यंत कष्टकारक हैं। शनि की दशा आने पर जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं, जिससे जीवन पूरी तरह से डगमगा सकता है परंतु शनि कुछ लोगों के अत्यंत शुभ और श्रेष्ट फल देता है। 
 आइए जानते हैं शनिदेव कैसे लोगों को धनी बनाते है--- 
  1. जो लोग अपने हाथ-पांव के नाखून निरंतर अंतराल पर काटते हैं व नाखुनों में मैल नहीं जमने देते शनि उनका सैदेव कल्याण करते हैं। 
  2. जो लोग पौष माह में गरीबों को काले चने, काले तिल, उड़द, काले कपड़े आदि का नि:स्वार्थ दान करते हैं शनि उनसे प्रसन्न रहते हैं।
  3. जो लोग जेष्ठ माह में धूप से बचने के लिए काले छातों का दान करते हैं शनिदेव उन पर अपनी छत्र छाया बनाए रखते हैं। 
  4. जो लोग कुत्तों की सेवा करते हैं अथवा कुत्तों को भोजन देते हैं और उन्हें सताते नहीं हैं शनिदेव उन्हें कष्टों से मुक्ति देते है। 
  5. जो लोग नेत्रहीनों को राह दिखाकर उनका मार्ग प्रशस्त करते हैं शनिदेव उनके लिए उन्नति के मार्ग खोलते हैं। 
  6. जो लोग शनिवार का उपवास रखकर अपने हिस्से का भोजन गरिबों को दान करते हैं शनि उनके भण्डार भरते हैं। 
  7. जो लोग मछली का सेवन नहीं करते तथा मछलियों को दाना डालते हैं शनिदेव उनसे सदैव प्रसन्न रहते हैं। 
  8. जो लोग रोज़ संपूर्ण स्नान कर स्वयं को साफ़ व पवित्र रखते हैं शनिदेव उन्हें कभी कष्ट नहीं देते। 
  9. जो लोग सफाई कर्मियों को सम्मान व आर्थिक अनुदान देते हैं शनिदेव उनको धन प्रदान करते हैं। 
  10. जो लोग मेहनतकश मजदूरों का हक नहीं मारते शनिदेव उन्हें कभी कष्ट नहीं देते। 
  11. जो लोग वृद्ध स्त्रियों को माता समान सम्मान देते हैं शनिदेव उनकी सहयता हेतु तत्पर रहते हैं। 
  12. जो लोग पीपल व बरगद का नियमित पूजन करते हैं निश्चित ही शनिदेव उनसे प्रसन्न रहते हैं। 
  13. जो लोग नियमित शिवलिंग का पूजन करते हैं शनिदेव उनका सदैव ध्यान रखते हैं। 
  14. जो लोग पितृ श्राद्ध कर कौए को भोजन देते हैं शनि खुश होकर उनके कष्ट हरते हैं। 
  15. जो लोग धर्म मार्ग से लक्ष्मी अर्जित करते हैं शनि उन्हें अटूट लक्ष्मी का वर देते हैं। 
  16. जो लोग असहाय वृद्धों को आर्थिक अनुदान देते हैं शनिदेव उनके भंडार भर देते हैं।
  17. जो लोग हनुमान जी की पूजा करते हैं शनिदेव उनके रक्षक बन जाते हैं। 
  18. जो लोग विकलांगो की सहयता करते हैं शनि उनका सैदेव कल्याण करते हैं। 
  19. जो लोग शराब व मदपान से दूर रहते हैं शनिदेव उनसे सैदेव प्रसन्न रहते हैं। 
  20. जो लोग शाकाहार अपनाते हैं शनि उनका कुटुंब सहित कल्याण करते हैं। 
  21. जो लोग सातमुखी रुद्राक्ष धारण करते हैं शनि उनके भाग्य खोल देते हैं। 
  22. जो लोग ब्याजखोरी से दूर रहते हैं शनि उनकी सैदेव सहयता करते हैं।
  23. जो लोग कोढ़ियों की सेवा करते हैं शनि उनके सभी कष्ट हर लेते हैं।

इन उपायों द्वारा पाएं डरावने सपनों से मुक्ति/छुटकारा

Get-rid-of-the-nightmare-of-these-measures-escape-इन उपायों द्वारा पाएं डरावने सपनों से मुक्ति/छुटकारालोग कई बार यह शिकायत करते है कि वे रात में किसी डरवाने सपने के कारण अचानक से उठ जाते हैं। और यह समस्या केवल एक बार नहीं हर बार हो रहीे हो तो यह एक बड़ी परेशानी बन सकती है।स्वप्न के विभिन्न शुभ-अशुभ संकेत शास्त्रों में उल्लेखित हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारे द्वारा देखा गया सपना यदि शुभ फल दे तो हमें खुशी होती है लेकिन वहीं दूसरी ओर यदि यह किसी अशुभ घटना का संकेत देता है तो हम पहले ही डर जाते हैं।
                   स्वप्न ज्योतिष की माने तो सपने चार प्रकार के होते हैं- पहला दैविक, दूसरा शुभ, तीसरा अशुभ और चौथा मिश्रित। ये सभी भविष्य में होने वाली अच्छी-बुरी घटनाओं के बारे में हमें बताते हैं। कुछ सपने जल्दी सच हो जाते हैं तो कुछ देर से। कई बार संकेत तो दूर, कुछ सपने हमें उसमें देखे गए दृश्यों से ही डरा देते हैं। हम इतना भयभीत होकर उठते हैं मानों हमारी जान जाने वाली हो। सपने में भूत, आत्मा, किसी की मौत, अपनी मौत या फिर कोई भयानक दृश्य हमें पसीने से भरी हुई हालत में नींद से उठाता है।
 जानिए कुछ सपने हमें आने वाली मुसीबत के लिए पहले से चेतावनी देते है
  1. सपने में कई बार हम ऐसी घटना देखते है जो हमारे भूतकाल से जुड़ी हुई होती है, या फिर वो देखते है जो आने वाले भविष्य में होने वाला है। कई बार हम अपने जीवन में जैसी सोच रखते है, जैसे माहोल में रहते है वैसा ही रात को सपना देखते है। सपने हमेशा अधूरे नहीं रहते है, वे कई बार पुरे भी होते है, कभी सपने तुरंत पुरे होते है, तो कभी थोड़े समय बाद अपना असर देते है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर सपने का कोई न कोई मतलब और उनका अर्थ होता है। सपने हमारे आने वाले भविष्य का आइना है, वो हमें आने वाली मुसीबत के लिए पहले से चेतावनी देते है। तब हम इस चिंता में पड़ जाते हैं कि यदि यह सपना सच हो गया तो? यदि सपने में हमने जो कुछ भी देखा वह आने वाले दिनों में घटित हो गया तो? तब हम क्या करेंगे? लेकिन घबराइए नहीं, इसके भी उपाय शास्त्रों में मौजूद हैं। 
  2.  यदि स्वप्न अधिक भयानक और रात्रि 12 से 2 बजे देखा जए तो तुरंत श्री शिव का नाम स्मरण करें। शिव जी के बीज मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जप करते हुए सो जाएं। तत्पश्चात् ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानादि करके शिवमंदिर में जाकर जल चढ़ाएं पूजा करें व पुजारी को कुछ दान करें। इससे संकट नष्ट हो जाता है।
  3. यदि स्वप्न 4 बजे के बाद देखा गया है और स्वप्न बुरा है, तो प्रातः उठकर बिना किसी से कुछ बोले तुलसी के पौधे से पूरा स्वप्न कह डालें। कोई दुष्परिणाम नहीं होगा। स्नान के बाद “ॐ नमः शिवाय” का एक माला, यानि कि कम से कम 108 बार जप करें। 
  4. ऐसा माना जाता है कि जब कभी किसी भी प्रकार का बुरा सपना देखा जाए, तो हनुमानजी को याद करें। वह ना केवल सपनों के माध्यम से होने वाले नुकसान को, बल्कि मनुष्य पर होने वाले हर प्रकार के बुरे प्रभावों को नष्ट करने में सक्षम हैं। 
  5. हनुमान जी सब प्रकार का अनिष्ट दूर करने वाले हैं। बुरे स्वप्न का अनिष्ट दूर करने के लिए सुंदरकांड, बजरंग बाण, संकटमोचन स्तोत्र अथवा हनुमान चालीसा का पाठ भी सांयकाल के समय किया जा सकता है। -
  6. यदि स्वप्न बहुत बुरा है और आपके घर में तुलसी का पौधा नहीं है, तो सुबह उठकर सफेद काग़ज़ पर स्वप्न को लिखें फिर उसे जला दें। राख नाली में पानी डाल कर बहा दें। फिर स्नान करके एक माला शिव के मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जप करें। दुष्प्रभाव नष्ट हो जाएगा। 
  7. स्वप्न ज्योतिष के अनुसार रात के पहले पहर में देखे गए सपने का फल एक साल के अंदर मिलता है। दूसरे पहर में देखे गए सपने का फल छ: महीने में मिलता है। 
  8. तीसरे पहर में देखे गए सपने का फल तीन महीने में मिलता है और चौथे पहर यानी सुबह देखे गए सपने का फल तुरंत मिलता है। 
  9. यदि बुरा सपना देखकर यदि रात में ही किसी को बता दें तो उस सपने का फल नष्ट हो जाता है अथवा सुबह उठकर भगवान शंकर को नमस्कार कर उसके बाद तुलसी के पौधे को जल चढाएं तो भी उस बुरे सपने का फल नष्ट हो जाता है।
  10.  रात को सोने से पहले भगवान विष्णु, शंकर, महर्षि अगस्त्य और कपिल मुनि का स्मरण करने से बुरे सपने नहीं आते। 

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यह हैं उपाय डरावने सपने से मुक्ति/छुटकारा पाने के-- 
  1.  सिरहाने में चाकू को रखें--- जिन लोगों को अक्सर रात में बुरे सपने आने की वजह से अचानक नींद टूटती हो तो वे रात में अपने सिरहाने के नीचे एक चाकू रखें। यदि आप चाकू नहीं रख सकते हो तो किसी भी तरह की नुकीली वस्तु आप जरूर रखें। जैसे कांटे वाली चम्मच, कैंची या फिर नेल कटर आदि।चाकू न होने पर कैंची, नेल-कटर, कांटा आदि भी तकिए के नीचे रख सकते हैं। जिससे रात को डर नहीं लगता।
  2.  पीले रंग के चावल--- तकिये के नीचे पीले चावलों को एक कपड़े में बांधकर सिरहाने के नीचे रख दें। हल्दी में चावलों को मिलाकर आप पीले चावल बना सकते हैं। इससे बुरे सपने नहीं आते हैं। 
  3.  बहुत फायदा करेगी छोटी इलायची--- रात में सोने से पहले आप अपने तकिये के नीचे पांच छोटी इलायची को किसी कपड़े में बांध लें और उसे अपने सिरहाने के नीचे रख दें। इससे रात को बुरे सपने और उनसे नींद टूटने की समस्या ठीक हो जाएगी। 
  4.  तांबे के बर्तन में पानी--- नींद यदि रात के समय में बार बार टूट जाती हो या नींद के समय में डर लगता हो तो आप अपने बिस्तर के पास में एक पानी से भरा तांबे का बर्तन रख दें। और सुबह के समय में इस पानी को किसी गमले या पौधों के उपर डालें। इस उपाय से आपको फायदा मिलेगा। 

 इसके अलावा कुछ बातों का जरूर ध्यान रखें, जैसे-- 
  1.  भूलकर भी अपने बिस्तर के नीचे कभी जूता या चप्पल ना रखें।पलंग के आस-पास अौर नीचे रखे जूते-चप्पल भी डर अौर बुरे सपनों का कारण बनता है। 
  2.  चादर एकदम गहरे व गाढ़े रंग की ना हो।जिस चादर पर डार्क या हिंसक जानवरों का प्रिंट हो उसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। फटी हुई चादर का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 
  3.  रात को सोने से पहले अपने बिस्तर को जरूर साफ करें । पैरों को धो कर और साफ करके अपने बिस्तर पर जाएं।गंदे या अव्यवस्थित बिस्तरे पर सोने से भी डर अौर बुरे सपने आते हैं। इसलिए सोने से पूर्व बिस्तरा साफ करके सोएं। 
  4.  महिलाएं खास बात का ध्यान रखें रात को बाल बांधकर सोना चाहिए। रात को बाल खुले रखकर सोने से भी बुरे सपने आते हैं।
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