ताजा खबरें
Loading...

अनमोल विचार

सर्वाधिक पड़े गए लेख

Subscribe Email

नए लेख आपके ईमेल पर


ज्योतिष लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ज्योतिष लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

11 मई को शनि देव होंगे वक्री, इन 5 राशियों पर है शनि का अशुभ प्रभाव

11 मई, 2020 को शनिदेव अपनी मार्गी चाल को छोड़ कर वक्री होने जा रहे हैं। 142 दिनों तक यानि 29 सितंबर तक वे इसी अवस्था में रहेंगे तत्पश्चात वे फिर से मार्गी हो जाएंगे। शनि देव, सोमवार, 11 मई 2020 को सुबह के 9 बजकर 27 मिनट से वक्री हो जाएंगे और फिर बुधवार, 29 सितंबर 2020 को 10 बजकर 30 मिनट से फिर से मार्गी हो जाएंगे। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री के मतानुसार शनि की ये बदलती चाल आम जनमानस की तनाव बढ़ाने वाली साबित होगी। आमतौर पर शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्षों तक वास करते हैं। 24 जनवरी 2020 को शनि ने धनु से मकर राशि में प्रवेश किया था। 
   ज्योतिष विशेषज्ञ पण्डित दयानन्द शास्त्री जी मानते हैं की जब शनि वक्री अवस्था में आते हैं तो बहुत कष्ट  दुख देते हैं। जिन राशियों पर शनि की नज़र होती है, उनको बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसा भी कहा जा सकता है की उनके जीवन से सुख-शांति सदा के लिए समाप्त हो जाती है। शनि न्याय के देवता हैं। जब वे वक्री होते हैं तो वे अपना अशुभ प्रभाव सबसे पहले उन राशियों पर डालते हैं जिन पर साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही होती है। यदि आपकी जन्मकुंडली में शनि अशुभ भाव में हैं तो आप पर दुखों का कहर टूटने वाला है। अगर शनि शुभ भाव में हैं तो कोई भी आपका अमंगल नहीं कर सकता।
Shani-Dev-will-be-retrograde-on-May-11-2020-know-the-effects-and-remedies-are-inauspicious-effects-of-Saturn-on-5-zodiac-signs- 11 मई को शनि देव होंगे वक्री, जानिए प्रभाव एवम उपाय- इन 5 राशियों पर है शनि का अशुभ प्रभाव    11 मई 2020 को शनि अपनी राशि मकर में वक्री हो जाएंगे। इसके बाद 13 मई को शुक्र और फिर 14 मई को बृहस्पति भी वक्री हो रहे हैं। इसके अलावा, 18 जून को बुध उलटी चाल से चलने लगेंगे। गौरतलब है कि 18 जून से 25 जून के बीच ये चारों ग्रह एक ही समय पर प्रतिगामी यानी वक्र रहेंगे। ग्रहों की यह स्थिति 15 जुलाई तक कालपुरुष कुंडली में बने काल सर्प दोष के साथ परस्पर व्याप्त होती है जिसका परिणाम चिंताजनक हो सकता है।

जांने ओर समझें  प्रतिगामी शनि के परिणाम को–
प्रतिगामी शनि उन कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए शक्ति प्रदान करते है जिन्हें अतीत में अधूरा छोड़ दिया गया था। शनि भारत की कुंडली में नौवें और दसवें भाव के स्वामी हैं, अर्थात योगकारक ग्रह हैं। शनि 11 मई से 29 सितंबर 2020 तक मकर राशि में वक्री रहेंगे जो भारत की कुंडली के नौवें भाव में है।  भारतीय पंचाग गणना अनुसार 11 मई से 2020 से शनि वक्री होगे। आगामी 143 दिनों तक वक्री रहकर गोचर में पर प्रभाव देंगे। न्याय के देवता है जातक के कर्मों के मुताबिक राजा और रंक बनाने में कोई कोर कसर नही छोड़ते। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि  कोरोना महामारी चलते कालाबाज़ारी जमाखोरी और मुनाफाखोरी करने की पृवत्ति में लिप्त व्यापारियों पर सत्ता और प्रशासन का शिकंजा कसेगा। 
इन 143 दिनों में उद्योग के क्षेत्र में शनै शनै सुधार आरम्भ होगा उद्योगपतियों और मजदूरों में विश्वास पैदा होने से परस्पर एक दूसरे को सहयोग करेंगे एवम उद्योग सम्बन्धी कार्य सुचारू शुरू होंगे । सम्भवतः श्रम कानूनों में भी सरकार कुछ ऐतिहासिक परिवर्तन करते हुए संगठित एवं असंगठित मज़दूरों के पक्ष में करेगी, ऐसे संकेत शनि दे रहे है। सभी वणिज व्यापार क्षेत्र एवम जनता के बीच कानून की परिपालना सख्त प्रशासनिक रवैये व अनुशासन के कारण चुस्त दुरुस्त दिखाई देगी। देश की सुरक्षा के मामलों में सतर्कता व त्वरित कठोरतम कार्यवाही देखने को मिलेगी। गरीबों एवम मेहनतकशों में असुरक्षा की भावना भी पनपेगी भयाक्रांत वातावरण कुल मिलाकर देश मे पसरेगा। सम्पूर्ण देश में शिक्षा एवम स्वास्थ्य के क्षेत्र ने नवीनतम दिशा निर्देश जारी होने की संभावना है ।
         पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस अवधि में कार्यपालिका विधायी पालिका व न्यायपालिका में जनहित के गम्भीर विषयों को लेकर भारी टकराव तथा आम जनता में व्याप्त अस्थिरता के कारण भारी जनाक्रोश होगा। सत्ताधारियो को नम्र होकर झुकना पड़ेगा। इस बीच यातायात की सभी सेवाएं, अंतरराष्ट्रीय हवाई, घरेलू हवाई सेवाएं सुचारू रूप से शुरू होगी रेल व सड़क यातायात भी धीरे धीरे यथावत शुरू होगा। आवागमन सुचारू होकर प्रत्येक क्षेत्र में बाधित रुकी थमी गतिविधियों को गति प्रदान करेगा। देश पटरी पर आने लगेगा शनि सबको राहत देगे व्याप्त भय का वातावरण समाप्त होगा। शनि का प्रतिगमन जिम्मेदारियों और काम के बोझ के साथ एक कठिन अवधि को दर्शाता है। लेकिन यह लोगों को अपने कौशल को अधिक निखारने और यथार्थवादी एवं व्यवहारिक बनने में भी मदद करेगा। कोरोनावायरस के कारण आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए नए कानून और नीतियां बनाई जा सकती हैं। न्यायिक सुधार और न्यायिक ढांचे का पुनर्गठन भी हो सकता है।

इन 5 राशियों पर है शनि का अशुभ प्रभाव---
ज्योतिषशास्त्र में शनि को न्याय का कारक ग्रह माना गया है। शनि के वक्री होने का सबसे ज्यादा असर उन राशि के जातकों पर पड़ेगा जिन राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही होगी। अगर आपकी कुंडली में शनि अशुभ भाव में बैठा है तब आपको इसका कष्ट देखने को मिलेगा वहीं अगर आपकी कुंडली में शनि शुभ भाव में है तो आपको इसका  अशुभ असर देखने को नहीं मिलेगा।
वर्तमान दौर में धनु, मकर और कुंभ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। वहीं 2 अन्य राशि मिथुन और तुला पर शनि की ढैय्या चल रही है। ऐसे में शनि के वक्री होने पर कुल पांच राशियों पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। अन्य 7 राशियों के जातकों को घबराने की अवश्यकता नहीं है।
वक्री शनि को बली बनाने के इन उपायों से होगा लाभ --

शक्तिशाली है ये मन्त्र:---
कर्मफलदाता शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शनि मंत्र सबसे अधिक प्रभावशाली माना जाता है। शनि की साढ़ेसाती हो या फिर ढैया सबके लिए शनि-मंत्र रामबाण उपाय है। शनिवार का दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए अत्यंत शुभ दिन होता है। शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए शास्त्रों में बहुत सारे उपाय बताए गए हैं लेकिन जो शक्ति शनि मंत्र है वह अन्य किसी उपाय में नहीं है।

 शनि स्तोत्र :---
 नमस्ते कोणसंस्थाय पिडगलाय नमोस्तुते।
 नमस्ते बभ्रुरूपाय कृष्णाय च नमोस्तु ते।।
 नमस्ते रौद्रदेहाय नमस्ते चान्तकाय च।
 नमस्ते यमसंज्ञाय नमस्ते सौरये विभो।।
 नमस्ते यंमदसंज्ञाय शनैश्वर नमोस्तुते।
 प्रसादं कुरू देवेश दीनस्य प्रणतस्य च।।
 शनि के इस स्तोत्र का पाठ करने से शनि के सभी दोषों से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि शनि देव को प्रसन्न करने के लिए इससे बेहतर कोई स्तोत्र नहीं है। इस स्तोत्र का कम से कम 11 बार पाठ करना चाहिए।

 वैदिक शनि मंत्र :---
 " ऊँ शन्नोदेवीर भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योर भिस्त्रवन्तुन : "

 पौराणिक शनि मंत्र :---
 "ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
 छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।"

 शनि महाग्रह मन्त्र :---
ॐ नमोऽहते भगवते श्रीमते मुनि सुव्रततीर्थ कराय बरुणयक्ष बहुरु-पिणीयक्षी सहिताय ॐ आं क्रों ह्रीं ह्रः शनिमहाग्रह मम दुष्टग्रह रोगकष्ट निवारण सर्व शांति च कुरू कुरू हूं फट् ।।

 इस मन्त्र का जप 33 हजार करने का विधान दिया गया है।

शनिदेव को खुश करने के लिए शनिवार को सूर्योदय से पहले जगकर पीपल की पूजा करने से शनिदेव खुश होते हैं। शनिवार को पीपल के पेड़ में सरसों का तेल चढ़ाने से शनि देव अति प्रसन्न होते हैं। शनिवार को संध्याकाल में इन मंत्रों का जाप करने से शनि का प्रकोप शांत होता है। साथ ही शनिदेव को इस मंत्र से पूजा करने से जो भी शनि की महादशा भी खत्म होती है।
 शनि व्रत :---
 शनिवार का व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार से प्रारंभ करे और 19, 31 या 41 शनिवार तक करे। शनिवार के दिन प्रात: स्नान आदि करके काले रंग की बनियान धारण करे और सरसो के तेल का दान करे तथा तांबे के कलश मे जल, थोडे काले तिल​, लोंग​, दुध, शक्कर, आदि डाल के पीपल अथवा खेजडी के वृक्ष के दर्शन करते हुये पश्चिम दिशा कि तरफ़ मुख रखते हुये जल प्रदान करे. तथा "ॐ प्रां प्रीं प्रों स​: शनैश्चराय नम​: " इस बिज मंत्र का यथाशक्ति जाप करे। इस दिन भोजन में उडद दाल एवं केले और तेल के पदार्थ बनाये।
     भोजन से पुर्व भोजन का कुछ भाग काले कूत्ते या भिखारी को दे उसके बाद प्रथम 7 ग्रास उपरोक्त पदार्थ ग्रहण करे बाद में अन्य पदार्थ ग्रहण करे। अंतिम शनिवार को हवन क्रिया के पश्चात यथाशक्ति तील, छ्त्री, जुता, कम्बल​, नीला-काला वस्त्र​, आदि वस्तुओ का दान निर्धन व्यक्ति को करे। व्रत के दिन जल, सभी प्रकार के फल, दूध एवं दूध से बने पदार्थ या औषध सेवन करने से व्रत नष्ट नहीं होता है। व्रत के दिन एक बार भी पान खाने से, दिन के समय सोने से, स्त्री रति प्रसंग आदि से व्रत नष्ट होता है।
  • – प्रत्येक शनिवार को शनि देव का उपवास रखें।
  • – शाम को पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • – शनि के बीज मंत्र ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः का 108 बार जाप करें।
  • – काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • – गरीबों को अन्न-वस्त्र दान करें।

जानिए कैसा रहेगा माह अप्रैल 2020 का राशिफल (भविष्यफल) आपकी राशि के लिए

मेष राशि (Aries) च, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ:-
इस माह अपको अपने स्वास्थ्य प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है, शरीर में आलस्य की प्रवृत्ति बनी रहेगी । पिता के साथ तालमेल बनाकर रखें, किसी भी काम की शुरुआत करने से पहले उनसे राए मशवरा जरूर करें।
इस महीने आपका शुभ रंग पीला और शुभ अंक 3 होगा ।

वृषभ राशि (Taurus) ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो ब बो:-
april-2020-rashifal-horoscope-for-the-month-of-April-2020-will-be-for-your-zodiac-sign- जानिए कैसा रहेगा माह अप्रैल 2020 का राशिफल (भविष्यफल) आपकी राशि के लिएइस महीने आपके स्वभाव में गुस्से की बढ़ोतरी होगी जिसके कारण किसी के साथ मतभेद भी पैदा हो सकते हैं । काम-काज की जगह पर नया जोश और उत्साह देखने को मिलेगा ।
इस महीने आप लाल रंग से परहेज रखें और आपका अशुभ अंक 2 होगा।

मिथुन राशि (Gemini) का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह:- 
इस महीने भाग्य आपको हर संभव सहयोग देगा कामकाज की जगह पर अच्छा मान-सम्मान मिलेगा और आर्थिक लाभ भी होगा।पढ़ाई-लिखाई में आशातीत फल नहीं मिलेंगे। इस महीने आपका शुभ रंग लाल होगा और शुभ अंक 9

कर्क राशि (Cancer) ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो:- 
इस महिने आप जिस काम की शुरुआत करेंगे उसमे आपको सफलता प्राप्त होगी । आप अपनी बुद्धिमता का प्रयोग करके अपने काम को अच्छे से पूरा करेंगे । घर के बड़े बुजुर्गो से आशीर्वाद लेकर दिन की शुरुआत करें ।

सिंह राशि (Leo) मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे:- 
बच्चों के लिए यह समय काफी अच्छा जाने वाला है पढ़ाई लिखाई में सफलता प्राप्त होगी । बड़ों की मर्जी से किया हुआ काम आपको शुभ फल देगा । इस महीने आपका शुभ रंग सफ़ेद और शुभ अंक 2 होगा।
कन्या राशि (Virgo) ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो:- 
इस महीने परिवार में खुशनुमा माहौल बना रहेगा परिवार के साथ व्यतीत करने के लिए आज का दिन काफी अच्छा है। कामकाज के मामले में आज भाग्य कुछ खास साथ नहीं दे पाएगा । इस महीने आपका शुभ रंग नारंगी और और शुभ अंक 1 होगा ।

तुला राशि (Libra) रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते:- 
इस महीने  आपको अधिक सचेत रहने की आवश्यकता है किसी तरह की अनहोनी घटना घटित होने के योग बने हुये हैं । आज आपके प्रत्येक कार्य में बाधाएँ आएंगी।माता की सेवा करने से मानशिक शांति प्राप्त होगी ।

वृश्चिक राशि (Scorpio) तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू:- 
इस महीने आपका स्वास्थ्य आमतौर पर अच्छा बना रहेगा, परिवार के लोगों के साथ अच्छा समय व्यतीत होगा। माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता में रह सकते है । कार्यक्षेत्र में शुभ समाचारों की प्रधानता बनी रहेगी।

धनु राशि (Sagittarius) ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे:- 
बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में कमी का सामना करना पड़ सकता है । कार्यक्षेत्र में अच्छे हालात बने रहेंगे । इस महीने आप किसी मांगलिक कार्य पर जा सकते हैं यहाँ नयें लोगों से मधुर संबंध बनेंगे।

मकर राशि (Capricorn) भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी:-
इस माह आपके स्वभाव में गुस्से की अधिकता होगी, जिसके कारण काम करने की जगह पर किसी से मतभेद पैदा हो सकते हैं । नियंत्रण रखें। शरीर में आलस्य की बढ़ोतरी होगी । परिवार में खुशनुमा माहौल बना रहेगा।
कुंभ राशि (Aquarius) गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा:-
इस महीने आपके परिवार में किसी न किसी बात को लेकर मतभेद पैदा हो सकते हैं जिसके कारण आप चिंता में रहेंगे।ईश्वर की आराधना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होगी।
इस महीने आपका शुभ रंग सफ़ेद होगा।

मीन राशि (Pisces) दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची:-
इस महीने आपको आग या बिजली से सचेत रहने की आवश्यकता है किसी न किसी तरह की अनहोनी घटना घटित होने के योग बने हुये हैं । आपके स्वभाव में जिद्दीपन देखने को मिलेगा जिसके कारण किसी के साथ मतभेद पैदा हो सकते हैं।

जाने और समझें शुक्र एवम शुक्र के कारण होने वाले रोगों को

वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को एक शुभ ग्रह माना गया है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को भौतिक, शारीरिक और वैवाहिक सुखों की प्राप्ति होती है। इसलिए ज्योतिष में शुक्र ग्रह को भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, भोग-विलास, शौहरत, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस, काम-वासना और फैशन-डिजाइनिंग आदि का कारक माना जाता है। 
समझें शुक्र एवम शुक्र के प्रभाव को--
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि शुक्र, वृषभ और तुला राशि का स्वामी होता है और मीन इसकी उच्च राशि है, जबकि कन्या इसकी नीच राशि कहलाती है। शुक्र को 27 नक्षत्रों में से भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त है। ग्रहों में बुध और शनि ग्रह शुक्र के मित्र ग्रह हैं और तथा सूर्य और चंद्रमा इसके शत्रु ग्रह माने जाते हैं। शुक्र का गोचर 23 दिन की अवधि का होता है अर्थात शुक्र एक राशि में क़रीब 23 दिन तक रहता है।
        ज्योतिष में धन और लक्ष्मी का कारक शुक्र ग्रह को माना गया है। सबसे ज्यादा धन देने में यही ग्रह समर्थ है। शुक्र ग्रह को शुक्राचार्य/दैत्याचार्य भी कहाँ जाता है। वृषभ और तुला राशि का स्वामी शुक्र ही होता है। तुला राशि शुक्र की मूल त्रिकोण अर्थात सबसे प्रिय राशि है। व्यय भाव अर्थात पत्रिका का 12वां स्थान इसकी सबसे प्रिय जगह है। 12वीं राशि मीन में यह उच्च राशि का होता है। इस ग्रह को भोग प्रिय ग्रह कहा गया है। इसलिये पत्रिका के बारहवें भाव जिसे खर्च, शय्या स्थान भी कहा जाता है, वहां यह ग्रह सबसे शानदार परिणाम देता है। यदि आपकी कुंडली में यह ग्रह अच्छी स्थिति में है तो आपको शानदार जीवन जीने को मिलेगा। शुक्र की नीच राशि कन्या होती है। जहा ये ग्रह अच्छे परिणाम नही देता।

शुक्र की शुभ स्थिति--

Know-and-understand-the-diseases-caused-by-Venus-जाने और समझें शुक्र एवम शुक्र के कारण होने वाले रोगों कोपत्रिका में वृषभ, तुला तथा मीन राशि का शुक्र हो तो जातक यदि दरिद्र परिवार में भी जन्मा हो तो अमीर बन जाता है। यदि किसी भी राशि का शुक्र बारहवें भाव में हो तो जातक को वैभवपूर्ण जीवन जीने कॊ मिल ही जाता है। यदि पत्रिका के 6ठे भाव मॆ स्थित होकर भी यह ग्रह जब 12वे स्थान कॊ देखता है तो अच्छे परिणाम देता है। पत्रिका के दूसरे तथा सातवें मॆ बैठा शुक्र शादी के बाद आर्थिक स्थिति को शानदार कर देता है।

पत्नी, प्रेमिका व सुंदर वाहन--

शुक्र ग्रह को प्रेमिका माना गया है। संसार मॆ समस्त तरह का प्रेम इसी ग्रह से देखा जाता है।राधा कृष्ण का दिव्य प्रेम शुक्र ग्रह से ही सम्भव है। संसार मॆ समस्त सुंदरता इस ग्रह से ही है।शानदार तथा महँगे वाहन, मकान इस ग्रह की कृपा से ही सम्भव है।

शनि का परम मित्र हैं शुक्र--

जीवन मॆ कड़ी मेहनत से ही लक्ष्मी प्राप्ति होती है चाहे वह कर्म कैसा भी हो। हां एक बात अवश्य है की आपके कर्मफल भोगना पड़ता है। शनि व शुक्र का विशेष प्रेम है शुक्र की राशि तुला मॆ शनि उच्च राशि का होता है। यानी आपने जी तोड़ परिश्रम किया है तो लक्ष्मी कृपा आपको अवश्य प्राप्त होगी।

स्वच्छता पसंद है शुक्र ग्रह को--

दीवाली के पहले लक्ष्मी पूजन के लिये हम सभी जगह सफाई करते है रंग रोगन भी करते है साफ वस्त्र पहनते है। इस तरह हम शुक्र ग्रह को अपने अनुकूल बनाने का प्रयास करते हैं। यदि आप स्वच्छ रहते है (निर्धन भी स्वच्छ रह सकता है) तथा कड़ी मेहनत करते है तो निश्चित रूप से आप पर लक्ष्मी मां की कृपा होगी।
भगवान विष्णु, लक्ष्मी तथा भ्रगु ऋषि में समझौता
मां लक्ष्मी हमेशा क्षीरसागर में शेषनाग में विश्राम कर रहे भगवान विष्णु की चरण सेवा करती हैं। एक बार त्रिदेव के क्रोध की परीक्षा हेतु ऋषि भ्रगु ने क्षीरसागर में शयन कर रहे भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर प्रहार किया था। जिससे रुष्ट होकर माता लक्ष्मी ने ब्राह्मणों कों दरिद्र होने का शाप दिया। बदले में भ्रगु ने भी मां लक्ष्मी को श्राप दिया। इस झगडे को भगवान विष्णु ने सुलझाया। उन्होने कहा, जहाँ ब्राह्मण अपनी पूजापाठ व आशीर्वाद देगा वहा लक्ष्मी को आना ही पड़ेगा साथ ही जो व्यक्ति ब्राह्मणों को दान देगा उसे ही लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी।
     ज्योतिषीय ग्रंथों में शुक्र को भोग का कारक ग्रह माना गया है। इसका प्रभाव जातक के भोग करने पर अधिक पड़ता है। उसे जननेन्द्रिय सम्बन्धी रोगों का अधिक सामना करना पड़ता है।  जब जन्म पत्रिका में शुक्र निर्बल अथवा पीड़ित हो अथवा शुक्र के गोचर काल में जातक को गुप्त रोग, जननेन्द्रिय के पूर्ण रोग, स्त्रियों को प्रदर संतान बंध्यत्व, स्तन रोग, वक्ष ग्रन्थि, पुरुष को शीघ्रपतन, लिंग सिकुड़ना, उपदंश, मूत्र संस्थान के रोग, दवा की विपरीत प्रतिक्रिया, कैंसर, गंडमाला, अधिक सम्भोग के बाद कमजोरी अथवा चन्द्र व चतुर्थ भाव के पीड़ित होने पर हृदयाघात भी हो सकता है। 
खगोलीय दृष्टि से शुक्र ग्रह का महत्व---
खगोल विज्ञान के अनुसार, शुक्र एक चमकीला ग्रह है। अंग्रेज़ी में इसे वीनस के नाम से जाना जाता है। यह एक स्थलीय ग्रह है। शुक्र आकार तथा दूरी में पृथ्वी के निकटतम है। कई बार इसे पृथ्वी की बहन भी कहते हैं। इस ग्रह के वायु मंडल में सर्वाधिक कार्बन डाई ऑक्साइड गैस भरी हुई है। इस ग्रह से संबंधित दिलचस्प बात यह है कि शुक्र सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद केवल थोड़ी देर के लिए सबसे तेज़ चमकता है। इसी कारण इसे भोर का तारा या सांझ का तारा कहा जाता है।
         इस प्रकार आप समझ सकते हैं कि खगोलीय और धार्मिक दृष्टि के साथ साथ ज्योतिष में शुक्र ग्रह का महत्व कितना व्यापक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में स्थित 12 भाव उसके संपूर्ण जीवन को दर्शाते हैं और जब उन पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है तो व्यक्ति के जीवन में उसका असर भी दिखाई देता है।
धार्मिक दृष्टि से शुक्र ग्रह का महत्व --
पौराणिक मान्यता के अनुसार, शुक्र ग्रह असुरों के गुरू हैं इसलिए इन्हें शुक्राचार्य भी कहा जाता है। भागवत पुराण में लिखा गया है कि शुक्र महर्षि भृगु ऋषि के पुत्र हैं और बचपन में इन्हें कवि या भार्गव नाम से भी जाना जाता था। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार ज्योतिष शास्त्रों में शुक्र देव के रूप का वर्णन कुछ इस प्रकार किया गया है - शुक्र श्वेत वर्ण के हैं और ऊँट, घोड़े या मगरमच्छ पर सवार होते हैं। इनके हाथों में दण्ड, कमल, माला और धनुष-बाण भी है। शुक्र ग्रह का संबंध धन की देवी माँ लक्ष्मी जी से है, इसलिए हिन्दू धर्म के अनुयायी धन-वैभव और ऐश्वर्य की कामना के लिए शुक्रवार के दिन व्रत धारण करते हैं।

गुरु कृपा प्राप्त करे--

यदि आप धन लक्ष्मी प्राप्त करना चाहते है तो इसके लिये आपको कड़ी मेहनत, स्वच्छता के अलावा गुरु, ब्राह्मण कृपा व आशीर्वाद आवश्यक है। यदि ब्राह्मण और गुरु रुष्ट है तो आपकी लक्ष्मी अन्यत्र चली जायगी। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि शुक्र के रोग भाव के स्वामी के साथ होने पर जातक को नेत्र में चिन्ह बनता है। शुक्र की महादशा तथा शुक्र की अन्तर्दशा में जातक को विभिन्न रोग हो सकते हैं। 
  • शुक्र यदि द्वितीय भाव में है तो हृदयरोग, नेत्रकष्ट, मानसिक समस्या, चोरी के कारण धन हानि, राजप्रकोप अथवा शत्रु प्रबल होते हैं।
  • शुक्र तृतीय अथवा एकादश भाव में होने पर राजा अर्थात् उच्चाधिकारी से दण्ड, अग्निकाण्ड, भाई से कष्ट तथा कई अन्य कष्ट हो सकते हैं।
  •  शुक्र त्रिकोण अर्थात् लग्न, पंचम अथवा नवम भाव में होने पर जातक अपनी बुद्धि का सही प्रयोग नहीं कर पाता है। वह सदैव शंका व संशय में रहता है शारीरिक व मानसिक कष्ट भी प्राप्त होते हैं। इस स्थिति की सम्भावना
  • शुक्र के 4-6-8 अथवा 12वें भाव में होने पर अथवा शुक्र गोचरवश इन भावों में आने पर ही अधिक होती है।

आप यह न समझें कि यदि आपकी पत्रिका में शुक्र पापी है तो आपको केवल यही रोग होंगे, रोग होने में शुक्र किस भाव में तथा किस राशि में स्थित है, इस बात का भी बहुत असर होता है। यहां पर हम पत्रिका में शुक्र किस राशि में होने पर किस रोग की सम्भावना अधिक होती है। इसकी इस लेख द्वारा जानकारी प्राप्त करेंगे।
  1. शुक्र यदि मेष राशि में हो तो जातक को शिरोरोग, शूल, नेत्र रोग तथा सिर पर चोट का भय होता है।
  2. शुक्र के वृषभ राशि में होने पर जातक को तभी रोग होते हैं, जब शुक्र अत्यधिक पीड़ित हो। इनमें आहार नली का संक्रमण, गलसुए, टान्सिल्स, मुख व जिव्हा पर छाले जैसे रोग अधिक होते हैं।
  3. शुक्र के मिथुन राशि में होने पर जातक को गुप्त रोग, चेहरे पर मुंहासे आदि होते हैं। यदि लग्नस्थ शुक्र है तो चर्मविकार के साथ रक्त विकार की भी सम्भावना होती है।
  4. शुक्र के कर्क राशि में होने पर जातक को जलोदर, वक्ष सूजन, अपच, वमन अथवा जी मिचलाने जैसे रोग होते हैं। मंगल की दृष्टि होने पर अक्सर शरीर में जल की कमी से ग्लूकोज की बोतलें चढ़ती हैं।
  5. शुक्र के सिंह राशि में होने पर जातक को हृदयविकार, रीढ़ की हड्डी की पीड़ा व रक्त धरमनियों के रोग अथवा धमनी रक्त का थक्का जमने से हृदयाघात का योग बनता है।
  6. शुक्र के कन्या राशि में होने पर जातक को खूनी अतिसार, थोड़ा भी खाते ही शौच जाना तथा भोजन का न पचना जैसे रोग उत्पन्न होते है। 
  7. शुक्र के तुला राशि में होने पर जातक को मूत्र संस्थान के रोग, शीघ्रपतन तथा गुरु के भी पीड़ित होने पर मधुमेह जैसे रोग होते हैं।
  8. शुक्र के वृश्चिक राशि में होने पर पुरुष जातक को अण्डकोष के रोग, अल्पवीर्यता, हर्निया की शल्य क्रिया, उपदंश तथा स्त्री जातक को गर्भाशय संक्रमण योनिरोग, श्वेत प्रदर व गुदाद्वार के रोग होते हैं।
  9. शुक्र के धनु राशि में होने पर जातक को गुदा रोग अथवा शल्य क्रिया, फिशर, गुप्तेन्द्रिय रोग, स्नायु रोग, कमर की पीड़ा, दुर्घटना में कमर उतरना जैसे रोग अधिक होते हैं।
  10. शुक्र के मकर राशि में होने पर जातक को घुटनों की पीड़ा व सूजन, त्वचा रोग, कमर से निचले हिस्से में पीड़ा व स्नायु विकार के रोग होते हैं।
  11. शुक्र के कुंभ राशि में होने पर जातक को रक्तवाहिका के रोग, घुटने में पीडा अथवा सूजन, रक्तविकार स्फूर्ति में कमी, काम में मन न लगना आदि रोग होते हैं।
  12. शुक्र मीन राशि में होने पर जातक को पैरों के पंजों के रोग अधिक होते हैं। तथा गुरु के भी पीड़ित होने पर मधुमेह रोग की संभावना बढ़ जाती है।
जानिए शुक्र ग्रह के मंत्र -

शुक्र का वैदिक मंत्र---
ॐ अन्नात्परिस्त्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पय: सोमं प्रजापति:।
ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु।।

शुक्र का तांत्रिक मंत्र---
ॐ शुं शुक्राय नमः

शुक्र का बीज मंत्र---
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

क्या होगा यदि शुक्र स्थित हो रोग/ऋण/शत्रु (6ठे भाव में) तो --
शुक्र की इस भाव में स्थिति आपके कुल की श्रेष्ठता का द्योतक हो सकती है। आप सुशिक्षित और विवेकवान हो सकते हैं। लेकिन यहां स्थित शुक्र आपको डरपोक बना सकता है अथवा आपको स्त्रियों से अप्रियता भी मिल सकती है। गुरुजनों से भी आपका विरोध रह सकता है। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि इस भाव में शुक्र के शुभ फल अधिक मिलते हैं, मतान्तर से शुक्र यहाँ निष्फल होता है लेकिन अधिक मत शुक्र के शुभ फल देने के हैं। शुक्र के निष्फल होने के मत में जातक शारीरिक रूप से सुखहीन, दुराचारी, अधिक मित्र वाला, मूत्र रोग से ग्रसित, विपरीत लिंग में प्रिय, गुप्तरोगी, समस्त प्रकार के वैभव व सुख से रहित, संकीर्ण मानसिक प्रवृत्ति का, शारीरिक रूप से भी अववस्थ व अक्षम, सदैव दुःखी रहने वाला परन्तु शत्रुनाशक तथा विवाहोपरान्त भाग्योदय अवश्य होता है। दूसरे मत में अर्थात् शुक्र के शुभ फल में जातक अत्यधिक सुख प्राप्ति, धनवान, अधिक शारीरिक सुख प्रापत करने वाला तथा समस्त प्रकार के वैभव को भोगने वाला होता है।
       ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि ऐसा जातक अपने मातृपक्ष (मामा-मौसी) के लिये अशुभ होता है। इस भाव में शुक्र यदि पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या व मकर) राशि में हो तो जातक का जीवनसाथी सुन्दर तो होता है परन्तु झगड़ालू प्रवृत्ति का होता है। वह परिवार में सामंजस्य बनाकर चलता है। ऐसे लोगों को )ण से बचना चाहिये क्योंकि यदि उन्होंने एक बार )ण ले लिया तो फिर इस योग के प्रभाव से वह जीवनपर्यन्त )णग्रस्त रहेंगे। एक पुत्री को वैधव्य भोगना पड़ सकता है जिसका पूर्ण खर्चा जातक को ही उठाना पड़ता है। खाने में कोई संयम नहीं रखते हैं। गुप्त रोग के साथ मूत्र संस्थान का संक्रमण भी हो सकता है।
      आपको शत्रुओं से पीडा भी मिल सकती है। हांलाकि आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर पाएंगे। आपको भाई-बहनों और मामा से सुख मिलेगा। आपके मामा के कन्या संतान अधिक हो सकती हैं। आपके अच्छे मित्रों की संख्या कम होगी जबकि खराब आदतों वाले मित्र अधिक संख्या में होंगे। आपकी प्रथम संतान पुत्र के रूप में हो सकती है। आपकी संतान अच्छी होगी और आप पुत्र-पौत्रों से युक्त होंगे। किसी भी जन्म कुंडली के छठे भाव में शुक्र  जातक की कुंडली के छठे भाव में बैठा शुक्र जातक को विपरित लिंग की ओर आकर्षित करता है। 
     लग्न का छठा भाव बुध और केतू का माना गया है जो एक दूसरे के शत्रु हैं, लेकिन शुक्र दोनों का मित्र है. इस घर में शुक्र नीच होता है। लेकिन यदि जातक विपरीत लिंगी को प्रसन्न रखता है और सारे और सुविधा उपलब्ध करवाता है तो उसके धन और पैसे में बृद्धि होगी।  ऐसा जातक अपने काम को बिच में अधूरा नहीं छोड़ता है। इस भाव के शुक्र पर हुए मेरे शोध का फल कहता है कि ऐसा जातक संसार के प्रत्येक सुख का भोग करता है लेकिन इस भोग के कारण उसे गुप्त रोग भी होता (कर्क, वृश्चिक व मीन) राशि में हो तो जातक अत्यधिक यदि पुरुष राशि (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु व कुंभ) में हो तो जीवनसाथी सुन्दर व सुशील होता है परन्तु वह कठोर भाषा का प्रयोग अधिक करता है। 
   जब स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) में शुक्र होने पर जीवनसाथी बहुत ही कोमल शरीर का परन्तु स्वभाव बिलकुल विपरीत होता है। संतान कम होती है। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार ऐसा जातक रुपया लगाकर व्यापार में पूर्णतः असफल होता है परन्तु बिना धन के व्यवसाय में सफल हो जाता है। उदाहरण के लिये जैसे किसी व्यवसाय में कोई ऐसा व्यक्ति धन लगाये जिसे व्यापार का अनुभव न हो तो ऐसे जातक को वह सलाहकार अथवा किसी अन्य रूप में सम्मिलित करे तो फिर जातक व्यापार में बहुत सफल होता है।
    ऐसा होने पर स्त्री पक्ष से आपको कम सुख मिलेगा अथवा कुछ गुप्त परेशानियां रह सकती हैं। हांलाकि विवाह के बाद यदि आपका आहार विहार नियमित और मर्यादित रहेगा तो समस्याएं नहीं होंगी। आपके खर्चे आमदनी से अधिक हो सकते हैं। हो सकता है कि आप उचित स्थान पर खर्च न करके अनुचित जगह पर खर्च करें। हो सकता है कि स्वतंत्र व्यवसाय से भी आपको बहुत लाभ न मिल पाए।
इन उपाय से होगा लाभ -
-- जातक की पत्नी को पुरुषों के जैसे कपडे नहीं पहनने चाहिए और न ही पुरुषों के जैसे बाल रखने चाहिए अन्यथा गरीबी बढती है। 
-- ऐसे जातक को उसी से विवाह करना चाहिए जिस स्त्री के भाई हों।
-- जातक स्त्री हो तो स्वयं या फिर पुरुष हो तो पत्नी अपने बालों में सोने का कि.ल लगाए। 
-- खयाल रखें कि पत्नी नंगे पैर न चले।

जानिए 24 जनवरी 2020 को कैसे होगा दूर सभी राशियों से शनि का प्रकोप

हिंदू धर्म में हर ग्रह का अपना एक अलग स्थान है. इन्ही ग्रहों के आधार पर यहाँ भविष्यवाणीयाँ की जाती है l समय समय पर इन ग्रहों का प्रभाव हमारे सांसारिक जीवन पर बहुत ही महत्वपूर्ण होता है l और इन सब में भी शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव तो बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है इसीलियें हमारे ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द जी शास्त्री ने आप सभी के लिए शनि की साढेसाती का प्रभाव किन-किन राशियों पर कब-कब होगा यहाँ बताया है. आप सभी यह महत्वपूर्ण जानकारी आप तक व अन्य लोगों तक जरुर पहुंचाएं.
Know-how-far-Saturn-will-get-out-of-all-zodiac-signs-on-24-January-2020- जानिए 24 जनवरी 2020 को कैसे होगा दूर सभी राशियों से शनि का प्रकोपवैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रह गोचर का विशेष महत्व होता है। जब कोई ग्रह एक राशि को छोड़कर दूसरी राशि में स्थान परिवर्तन करता है तो उसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है। अगले वर्ष की शुरुआत ( 2020) में ग्रहों की स्थितियों में कई बड़े फेरबदल होने वाले हैं। वर्ष 2020 के शुरूआती दिनों में ही शनि अपनी राशि बदलेंगे। शनि 24 जनवरी 2020 को धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। शनि के राशि परिवर्तन से अगले वर्ष 2020 में किन राशियों से शनि की अशुभ छाया हट जाएगी और किन राशि पर इनका प्रकोप रहेगा।
    शनि के गोचर, साढ़ेसाती और महादशा का हमारे जीवन में बहुत महत्व होता है, क्योंकि इसके प्रभाव से मनुष्य के जीवन में बड़े बदलाव होते हैं, जैसे शादी , नौकरी, व्यवसाय, संतान आदि। हालांकि ये परिवर्तन सुखद और दुखद दोनों हो सकते हैं। शनि देव बुध, शुक्र और राहु के साथ मित्रता रखते हैं तो सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ इनका संबंध शत्रुता का है। बृहस्पति और केतु के साथ इनका संबंध सम रहता है। मकर तथा कुंभ राशियों के ये स्वामी माने जाते हैं।  मिथुन और तुला राशि वालों की ढैय्या साल 24 जनवरी साल 2020 में शुरु होने जा रही है। 
   यहां से मकर की द्वितीय ढैय्या, धनु की अंतिम ढैय्या और वृश्चिक राशि वाले शनि की साढ़े साती से मुक्त हो जाएंगे इस प्रकार शनि के धनु राशि के गोचर से 6 राशियों मेष,कर्क,सिंह,तुला,कुम्भ,एवं मीन को शुभ फलों की प्राप्ति होगी। शेष 6 राशियों ,वृषभ,मिथुन,कन्या,वृश्चिक धनु,मकर अशुभ फलों में वृद्धि करेंगे अतः उन्हें सतर्क एवं सावधान रह कर जरूरी उपाय करना चाहिए। शनि ग्रह का गोचर 24 जनवरी 2020 यानी शुक्रवार के दिन रात को 12 बजकर 10 मिनिट पर धनु राशि से मकर राशि मे हो रहा है शनि की यह अपनी ही राशि है । इसके बाद वर्ष 2022 में शनि (शुक्रवार) दिनांक 29 अप्रैल 2022 को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। साथ ही साल 2025 में शनि, शनिवार दिनांक 29 मार्च 2025 को रात 11 बजकर 02 मिनट पर कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करेंगे।
   वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि को न्यायधीश की उपाधि दी गई है। जब भी शनि का राशि परिवर्तन होता है तो प्रकृति के साथ- साथ मानव जीवन पर भी इसका अत्याधिक प्रभाव देखने को मिलता है।पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि शनि मध्यम वर्ग, मजदूर वर्ग का भी कारक माना जाता है। शनि के राशि परिवर्तन के साथ ही कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव शुरू हो जाएगा तो कुछ को इन सब चीजों से राहत मिलेगी। 
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी से जानिए शनि का मकर राशि में गोचर करने पर सभी 12 राशियों पर क्या होगा प्रभाव (असर)---
  1. शनि गोचर 2020 मेष राशि -- शनि का गोचर आपके दसवें भाव में हो रहा है। कुंडली में दसवें भाव से कर्म को देखा जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए काफी शुभ है। शनि का परिवर्तन आपके कर्म को प्रभावित करेगा। इस राशि परिवर्तन से नौकरी करने वाले लोगों को अत्यंत ही लाभ प्राप्त हो सकता है। आपको इस समय में प्रमोशन मिल सकता है। मेष राशि के जो लोग काफी समय से अच्छी नौकरी का प्रयास कर रहे हैं तो इनको इस समय में एक अच्छी नौकरी प्राप्त हो सकती है। लेकिन इस समय में आपको अपनी माता और जीवनसाथी की सेहत का ख्याल रखना होगा। वहीं जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद भी हो सकता है। 
  2. शनि गोचर 2020 वृषभ राशि --- शनि के मकर राशि में जाने से इस रााशि से शनि की ढैय्या का असर बिल्कुल खत्म हो जाएगा। शनि का गोचर आपके नवें भाव में हो रहा है। कुंडली में नवें भाव से भाग्य का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ है। शनि का परिवर्तन आपके भाग्य में वद्धि करेगा। इस राशि के जिन लोगों का कोई काम काफी समय से अटका हुआ था। वह इस समय में पूरा हो जाएगा। आपको इस समय में आपके भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। लेकिन आपका इस समय अपने छोटे भाई बहनों के साथ विवाद हो सकता है। आपको इस समय में आपका कोई रोग भी परेशान करता है। धार्मिक कार्यों में आप इस समय बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। 
  3. शनि गोचर 2020 मिथुन राशि --- शनि का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है। कुंडली में अष्टम भाव से मृत्यु का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए अशुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपकी परेशानियों को बढ़ा सकता है। इस राशि परिवर्तन के साथ ही आपकी शनि की ढैय्या भी आरंभ हो जाएगी। इस समय आपका अपने परिवार में झगड़ा हो सकता है। इसलिए आपको अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। कार्यक्षेत्र में भी आपकाअपने उच्च अधिकारियों के साथ मतभेद हो सकता है। इसलिए आपको इस समय बहुत ही ज्यादा संभल कर चलना चाहिए। बच्चों की सेहत का इस समय विशेष ध्यान रखें।  
  4. शनि का गोचर 2020 कर्क राशि -- शनि का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है। कुंडली में सप्तम भाव से वैवाहिक जीवन का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके वैवाहिक जीवन में खुशियों का संदेश लेकर आ रहा है। इस समय जो जातक विवाह करना चाहते हैं उनके लिए यह समय काफी शुभ है। इस समय में आपका विवाह हो सकता है। कार्यक्षेत्र में भी आपको इस समय लाभ मिल सकता है। वहीं अगर आप नौकरी में परिवर्तन करना चाहते हैं तो भी यह समय आपके लिए काफी अच्छा है। इस समय आपकी प्रवृति काफी गंभीर हो जाएगी और आप सभी काम को काफी सोच विचार कर करेंगे। 
  5. शनि गोचर 2020 सिंह राशि -- शनि का गोचर आपके छठवें भाव में हो रहा है। कुंडली में छठवें भाव से रोग और शत्रु का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए सामान्य रहेगा। इस परिवर्तन से आपके शुत्र परास्त होंगे। अगर आपको काफी से किसी रोग ने परेशान कर रखा था तो वह भी इस समय में ठीक हो जाएगा। कोर्ट कचहरी के क्षेत्र में भी इस समय आपको सफलता प्राप्त होगी। लेकिन इस समय में आपके खर्चे बढ़ सकते हैं। ससुराल पक्ष से भी आपको इस समय परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस समय आपरे पराक्रम में वृद्धि होगी। अगर आप विदेश जाना चाहते हैं तो भी आपके लिए समय काफी शुभ है। 
  6. शनि गोचर 2020 कन्या राशि --- इस राशि पर से शनि की ढैय्या समाप्त हो जाएगी। इस वजह से तमाम तरह की परेशानियों से इन्हें निजात मिल जाएगी। शनि का गोचर आपके पांचवें भाव में हो रहा है। कुंडली में पांचवें भाव से संतान और विद्या का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। इस परिवर्तन से आपको संतान सुख की प्राप्ति होगी। इस समय नव दंपत्ति के यहां संतान की किलकारियां गुंज सकती है। विद्यार्थियों को भी इस समय लाभ प्राप्त हो सकता है। अगर आप अपने किसी मंदपंसद कॉलेज या स्कूल में एडमिशन लेना चाहते हैं तो आपके लिए यह समय काफी शुभ है। लेकिन आपको इस समय वैवाहिक सुख में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं आपकी आय में भी कमीं हो सकती है। 
  7. शनि गोचर 2020 तुला राशि --- 24 जनवरी 2020 से शनि का मकर राशि में यानि आपके चतुर्थ भाव में प्रवेश होगा| उस समय स्थितिया परिवर्तन होगी और आपके सुख में वृद्धि होगी आपकी माता के साथ आपका रिश्ता अच्छा रहेगा किसी भी तरह का कोई भी आप कार्य भूमि, वाहन से सम्बंधित करते है| तो आपको उसमे सफलता हासिल होंगी| इसके अलावा गुरु जो की 30 मार्च को नीच के होकर मकर राशि में प्रवेश कर रहे है| उसके बाद वो 30 जून को पुनः धनु राशि में प्रवेश करेंगे और 20 नवम्बर को पुनः मकर राशि में प्रवेश कर जायेंगे| ये कुछ उत्तार चढाव गुरु का इस साल देखने को मिलेगा| राहू इस साल आपके भाग्य स्थान से आपके अष्टम स्थान यानि वृषभ राशि में 23 सितम्बर 2020 को प्रवेश करेंगे| वही 23 सितम्बर 2020 को केतु भी आपके राशि से द्वितीय भाव में यानि वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे|शनि का गोचर आपके चौथे भाव में हो रहा है। कुंडली में चौथे भाव से सुख और माता का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए अशुभ रहेगा। इस राशि परिवर्तन के साथ ही आपके ऊपर शनि की ढैय्या की शुरू हो जाएगी। इस समय में आपकी माता की सेहत ठीक रहेगी। आपको वाहन, भूमि और वाहन के सभी सुख प्राप्त होंगे। लेकिन इस समय आपको अपने कार्यक्षेत्र में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इस समय में आपको शत्रु बाधा हो सकती है। कोर्ट कचहरी के मामलों में भी आपको परेशानी हो सकती है। शारीरीक का भी इस समय में आपको सामना करना पड़ सकता है। 
  8. शनि गोचर 2020 वृश्चिक राशि -----शनि के मकर राशि में जाने से वृश्चिक राशि वालों पर अब शनि की टेढ़ी नजर नहीं रहेगी। शनि का गोचर आपके तीसरे भाव में हो रहा है। कुंडली में तीसरे भाव से पराक्रम और छोटे भाई बहन का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके पराक्रम में वृद्धि करेगा। इस समय में आप अपना सभी काम अपने पराक्रम के दम पर पूरा कर लेंगे। आपका भाग्य भी इस समय में आपका साथ देगा। धार्मिक कार्यों में भी आप इस समय बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे लेकिन आपको इस समय में अपनी संतान की तरफ से परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। आपके खर्च भी इस समय में अत्याधिक बढ़ सकते हैं। 
  9. शनि गोचर 2020 धनु राशि---धनु राशि अग्नितत्व, द्विस्वभाव राशि है । धनु राशि में स्थित होकर शनि तृतीय दृष्टि से कुम्भ राशि को प्रभावित करेंगे जो उनकी मूलत्रिकोण राशि है। ज्यादा अशुभ प्रभाव नहीं रहेगा। सप्तम दृष्टि से मिथुन राशि को देखेंगे जो उनके मित्र बुध की राशि है। शनि की दशम दृष्टि कन्या पर रहेगी जो फिर से बुध की ही राशि है ।  यह याद रखियेगा की शनि ग्रह गोचरवश राशि के अंतिम भाग में अर्थात 20 डिग्री से 30 डिग्री विशेष प्रभाव या फल उत्पन्न करते हैं। शनि एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए लगभग ढाई साल का समय लेते हैं। यहां से, वह संपत्ति को इंकित करनेवाले चौथे भाव, दीर्घायु को इंकित करनेवाले 8 वीं भाव और लाभ और व्यवसाय को इंकित करने वाले 11 वें भाव पर अपनी दृष्टि डालते है। धनुष राशीवालों के लिए इन साढ़े सात वर्ष (साडे सती) को 'पाद शनी' कहा जाता है, जिसके दौरान शनि आपको अच्छे फल प्रदान करेगा, बशर्ते आपने अच्छी नैतिकता बनाए रखी हो। यह गोचर आपके करियर में सकारात्मक मोड़ ला सकता है, वित्तीय स्थिति में सुधार कर सकता है और आपके लंबित सपने को पूरा कर सकता है।इस राशि वाले सभी जातक सतर्क ओर सावधानी रखें। साल 2020 में शनि धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में धनु राशि वालों से दूसरे चरण की साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी और तीसरी चरण साढ़ेसाती यानी उतरती साढ़ेसाती आरंभ हो जाएगी। इससे धनु राशि वालों की पहले की मुकाबले से उनके जीवन में परेशानियां कम होती चली जाएगी। इस राशि के जो लोग सरकारी नौकरी में हैं, उनके लिए नौकरी में पदोन्नति और वित्तीय वृद्धि होगी। कला और सिनेमा क्षेत्र के लोग इस अवधि के दौरान अपने पेशे में लोकप्रियता और सुधार का आनंद लेंगे।  इस अवधि में शनि धनु राशि से द्वितीय भाव में गोचर करेगा, जो वित्त और परिवार का द्योतक है।शनि का गोचर आपके दूसरे भाव में हो रहा है। कुंडली में दूसरे भाव से धन और कुंटुंब का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए मध्यम रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके धन में वृद्धि करेगा। इसी के साथ आप पर शनि की साढेसाती की आखिरी ढैय्या शुरु हो जाएगी। आपका परिवार भी इस समय में आपका पूरा साथ देगा। लेकिन आपको इस समय में कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ेगा। आपको अपने ससुराल पक्ष से परेशानि हो सकती है। आपकी माता का स्वास्थय भी इस समय में खराब हो सकता है। वहीं लाभ की अपेक्षा आपको नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है। 
  10. शनि गोचर 2020 मकर राशि --- शनि का गोचर आपके लग्न भाव में हो रहा है। कुंडली में लग्न भाव से शरीर का विचार किया जाता है। अगर आप व्यापार करते हैं तो आपको इस समय बाहरी देशों के साथ अपना व्यापार बढ़ाने का मौका मिलेगा। आयात-निर्यात के क्षेत्र में आपको सफलता मिल सकती है। विदेश यात्रा अथवा जन्मस्थान से दूर जाने के योग भी आपके लिये बन रहे हैं। वर्ष 2020 में मंगल का लाभ स्थान में होना आपके अंदर हर समस्या से लड़ने की शक्ति प्रदान करेगा। इस वर्ष आपकी राशि पर शनि की साढेसाती का प्रथम चरण समाप्त हो जाएगा। जिससे आपको काफी राहत मिलेगी। वर्ष राशिफल 2020 में 24 जनवरी को शनि राशि परिवर्तन कर आपकी ही राशि में प्रवेश कर जाएंगें। स्वराशि के शनि का होना आपके लिये शनि का शश महायोग बनाएगा। जिससे आपके कार्यक्षेत्र की स्थिति में काफी अच्छा बदलाव देखने को मिलेगा।शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए सामान्य ही रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके शरीर के लिए तो ठीक है। लेकिन इस समय आपमें आलस्य की अधिकता रहेगी। जिसके कारण आप अपने कार्यों को ठीक प्रकार से नहीं कर पाएंगे। आपका इस समय में अपने जीवनसाथी के साथ भी झगड़ा हो सकता है। अगर आप व्यापार करते हैं तो आपको इस समय काफी संभल कर चलना चाहिए। नौकरी करने वाले जातकों को भी कार्यस्थल में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 
  11. शनि गोचर 2020 कुंभ राशि --- इस राशि के जेक विशेष ध्यान(सावधानी) रखें क्यों कि शनि का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है। कुंडली में बारहवें भाव से खर्च का विचार किया जाता है। पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि शनि का राशि परिवर्तन इस राशि के लिए अशुभ ही रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके खर्चों को बढाएगा। इस राशि परिवर्तन के साथ ही आप पर शनि की साढेसाती शुरू हो जाएगी। इस समय में आपको खर्च बढ़ सकते हैं। आपको कोई पुराना रोग भी फिर से परेशान कर सकता है। शत्रुओं से आपको इस समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। परिवार में भी किसी के साथ आपका झगड़ा हो सकता है। धन संबंधी परेशानियां भी हो सकती है। इस समय में आपको भाग्य के भरोसे नहीं रहना चाहिए। 
  12. शनि गोचर 2020 मीन राशि---- शनि का गोचर आपके ग्यारहवें भाव में हो रहा है। कुंडली में ग्यारहवें भाव से आय का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपकी आय को बढाएगा। यह राशि परिवर्तन आपकी सभी इच्छाओं को पूर्ण करेगा। इस समय में आपकी सैलरी बढ़ सकती है। कार्यक्षेत्र में भी आपका मान सम्मान बढ़ेगा। आपके स्वाभाव में गंभीरता आएगी और आप अपने सभी कामों को अत्याधिक विचारकर ही करेंगे। लेकिन ध्यान रखें, वैवाहिक जीवन के लिए यह समय ठीक नहीं है। आप वयस्त होने के कारण इस समय अपने पार्टनर को समय नहीं दे पाएंगे और अगर आप शादीशुदा हैं तो आपका अपनी ससुरालवालों के साथ मतभेद हो सकता है। 

जाने और समझें, शनि का फल कथन कैसे करें--
आपकी कुंडली और गोचर मिलाकर ही फलकथन किया जा सकता है अकेला गोचर कभी भी फलदाई नहीं होता  फलदीपिका, जातक पारिजात जैसे महान ज्योतिष ग्रंथों में एक बहुत सरल तरीका बताया हुआ है की जन्म चन्द्रराशि से 3, 6, 11 राशि में शनि का गोचर शुभ होता है यदि क्रमशः वेध स्थान 12, 9, 5 में कोई अन्य ग्रह न हो। उदाहरणार्थ तुला राशि के लिए धनु का शनि 3वे होकर शुभ होना चाहिए अगर 12वे कन्या में कोई ग्रह (सूर्य के अतिरिक्त) गोचर न कर रहा हो। परन्तु किसी ग्रह के गोचर का मनुष्य पर प्रभाव सिर्फ जन्म लग्न अथवा जन्म राशि देखकर बताना असंभव है। इसके लिए कुंडली का सूक्ष्म अध्ययन आवश्यक है। साथ ही शनि के अलावा 8 और ग्रह हैं जिनके गोचर का प्रभाव आपको देखना होगा। मैं आपको एक छोटा सा सूत्र देता हूँ जिसको आप खुद अपनी कुंडली में देख सकते हैं की शनि का गोचर आपको कैसा फल देगा। इसके लिए आप अपनी कुंडली में शनि का अष्टकवर्ग देखिये। इस अष्टक वर्ग में देखिये की धनु राशि में कितने बिंदु/रेखा/अंक हैं। अगर यह संख्या 0, 1, 2, 3 है तो सामान्यतः अशुभ फल मिलेगा, अगर संख्या 4 है तो मिला जुला, 5, 6, 7, 8 है तो शुभ फल मिलेगा। ऐसा आप अनुमान लगा सकते हैं।अतः अगर आपकी चन्द्र राशि तुला, कर्क, कुम्भ है और आपकी कुंडली में शनि के अष्टक वर्ग में 5 से 8 बिंदु हैं तो आप शनि के धनु राशि में गोचर से अच्छे फल की आशा कर सकते हो।

जानिए शनि की साढ़ेसाती को कम करने के उपाय ---
कृपया इन्हें आप नियमिति ध्यान रख करें l इससे आप पर शनि का प्रकोप कम हो जायेंगा. इस समय साढे साती ‘वृश्चिक’ ‘धनु’ और ‘मकर’ राशि में चालू है और इनका प्रभाव काफी गहरा हो रहा है इन राशि के जातकों को बहुत ही ध्यान से अपने सारे काम पूर्ण करने चाहिए. 
साढ़ेसाती से बचने के लिए यह है महत्वपूर्ण उपाय .
  1. साडेसाती राशि वाले जातक नित्य सुबह उठकर ‘ॐ शं शनिश्चराय नमः’ का जाप अवश्य करना चाहियें l
  2. नित्य शनिदेव की मूर्ति को हाथ जोड़ नमस्कार कर घर से निकलना चाहियें l
  3. यदि हो सकें तो नित्य शनि देव की चालीसा को पढ़ना चाहियें l
  4. सप्ताह में शनिवार के दिन शनि देव की पूजा अवश्य करनी चाहियें l
  5. यदि आप से हो सके तो शनिवार को शनि देव के उपवास करें l यह विशेष फलदायक होंगे l
  6.  (नोट : ध्यान रहे उपवास में कोई भी विघ्न नहीं आना चाहियें क्यूँ की शनि देव जल्दी नाराज हो जातें है l तो इस बात का अवश्य ध्यान दे अगर संकल्प ले तो उसे पूरा करें न हो सके तो न ले l
  7. शनि देव का यंत्र अपने पूजा स्थल अपने तिजोरी में अवश्य रखें l
  8. शनि देव को मनाने के लिए आप मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर में भी पूजा कर सकते है l हनुमान देव की पूजा शनि की पूजा कहलाती है l
  9. शनिवार को काला वस्त्र पहने l अगर न पहन सकों तो कम से कम एक काला रुमाल अपने पास अवश्य रखें l
  10. शनि देव सूर्य भगवान के पुत्र है इसलिए रोज सूर्य भगवान को जल अवस्य चढ़ाएं इससे विशेष कृपा प्राप्त होंगी l
  11. शनि देव की माता छाया है l इसलिए आप शाम के समय या रात को शनि देव का ध्यान करें इससे भी उनकी कृपा बनी रहेंगी l
  12. “ॐ शं शनिश्चराय नमः” यह मंत्र जितना आप जपेंगे l उतना शनि का प्रकोप कम होगा l यह मंत्र ही साढ़ेसाती का रामबाण उपाय है l

वृश्चिक राशि में देव गुरु वृहस्पति का प्रवेश, 5 महीनें रखें सावधानी

देवगुरु वृहस्पति लगभग 12 वर्षों बाद पुनः 05 नवंबर 2019 को प्रातः अपनी राशि धनु में प्रवेश कर रहे हैं। ये एक सदी में लगभग आठ बार धनु राशि की परिक्रमा करते हैं।  देव वृहस्पति ग्रह 5 नवंबर 2019, मंगलवार रात 12 बजकर 3 मिनट पर अपनी राशि धनु में गोचर करेगा और 29 मार्च 2020, रविवार शाम को 7 बजकर 8 मिनट तक इसी राशि में स्थित रहेगा। गुरु के धनु राशि में गोचर करने से 'हंस' योग बनता है। धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु पुनर्वसु, विशाखा एवं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों के भी स्वामी हैं। कर्क राशि इनकी उच्च और मकर राशि नीच संज्ञक कही गयी है। जिन जातकों की जन्मकुंडली में गुरु धनु राशि में होकर केन्द्र या त्रिकोण में होंगे उनके लिए 'हंस' योग श्रेष्ठतम फलदाई रहेगा।ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को सर्वाधिक शुभ एवं शीघ्रफलदाई ग्रह माना गया है। जन्मकुंडली में द्वितीय, पंचम, नवम तथा एकादश भाव के कारक होते हैं।
गुरु बृहस्पति का कुंडली पर प्रभाव--
कुंडली में बृहस्पति की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को मान सम्मान और ज्ञान प्रदान करती है तथा व्यक्ति को धन की प्राप्ति भी अच्छी मात्रा में होती है। संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी बृहस्पति की मजबूत स्थिति को देखा जाता है। वहीं दूसरी ओर गुरु बृहस्पति जब इसके विपरीत अवस्था में होते हैं तो इन सभी कारकों में कमी आने की संभावना बढ़ जाती है। 
 Lord-Jupiter-in-Scorpio-keep-careful-for-5-months-वृश्चिक राशि में देव गुरु वृहस्पति का प्रवेश, 5 महीनें रखें सावधानी    मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा, संयम, धैर्य, तरक्की, ज्ञान, सदाचरण और वैवाहिक सुख का प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति 5 नवंबर को सुबह अपनी राशि धनु में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 2019 में बृहस्पति ने कई बार मार्गी-वक्री गति करते हुए आगे-पीछे की राशियों में गोचर किया। धनु राशि में चल रहे बृहस्पति 10 अप्रैल को वक्री हुए थे। वक्री गति करते हुए ये 22 अप्रैल को पिछली राशि वृश्चिक में आ गए थे। इसके बाद 11 अगस्त को वृश्चिक राशि में ही मार्गी हो गए थे। अब मार्गी गति करते हुए 5 नवंबर को पुन: अपनी ही राशि धनु में आ रहे हैं। बृहस्पति कर्क राशि में उच्च का होता है और मकर में नीच का। धनु और मीन इसकी स्वयं की राशि है। यह धनु और मीन राशि के स्वामी हैं और कर्क राशि में उच्च तथा मकर राशि में नीच अवस्था में माने जाते हैं। कुंडली में चंद्रमा लग्न पर बृहस्पति की दृष्टि अमृत समान मानी जाती है। यह स्थिति गजकेसरी योग बनाती हैं।

देव गुरु वृहस्पति ग्रह 5 नवंबर को कल धनु राशि में प्रवेश करेंगे जहाँ 30 मार्च 2020 तक  इसी राशि में रहने वाले हैं. वह 22 अप्रैल 2019 से वृश्चिक राशि में ही विराजमान थे. गुरु के राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों के जातकों पर पड़ेगा। किसी राशि के जातक को धन का लाभ होगा तो किसी को स्वास्थ्य की परेशानी होगी। पांच राशि वालों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। यह बात उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिष पण्डित दयानन्द शास्त्री जी सभी राशि परिवर्तन से होने वाले असर के बारे में बताते हुए कही
जीवन में बदलाव लाएगा--
उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषी पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि भारतीय वैदिक ज्योतिष के अंतर्गत ग्रहों में बृहस्पति को देवताओं का गुरु कहा गया है और ग्रहों के मंत्रिमंडल में इन्हें मंत्री का पद प्राप्त है। ये नैसर्गिक रूप से सब से शुभ ग्रह माने जाते हैं। यह वृद्धि के कारक हैं इसलिए अच्छी या बुरी जो भी घटना हो उसमें इनका योग वृद्धि कारक होता है। यह हमारे जीवन में हमारे गुरु और गुरु तुल्य लोगों, हमारे परिवार के बड़े बुजुर्गों, संतान, धन तथा ज्ञान का कारक प्राप्त है। जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति से जातक के जीवन के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें पता चलती हैं। इसलिए यह राशि परिवर्तन कई तरह से जीवन में बदलाव लाएगा।
     गुरु एक राशि में करीब एक साल रहते हैं इसलिए 12 साल के बाद फिर से अपनी राशि धनु में लौटते हैं। 5 नवंबर को गुरु सुबह  अपनी राशि धनु में लौट रहे हैं। अपनी राशि धनु में गुरु अगले साल 2020 मार्च तक रहेंगे। इस राशि में गुरु का स्वागत दो पाप ग्रह केतु और शनि करेंगे। शनि और केतु से साथ गुरु का संयोग यूं तो शुभ नहीं है फिर भी गोचर के अनुसार कुछ राशियों को इसका परिवर्तन शुभ लाभ  होगा तो किसी को होगा नुकसान. ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी से जानते हैं कि अगले 5 महीने किन किन राशि वालों को सबसे अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है।
  1. मेष राशि- मेष राशि से नवम भाव में गुरु का गोचर रुके हुए कार्यों को पूरा करने के साथ-साथ भाग्य में वृद्धि करेगा तथा मनचाहा परिणाम देगा. इस राशि के लिए बृहस्पति नवम भाव में गोचर करेगा। इस राशि वालों को अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त होता। इस राशि के लिए बृहस्पति भाग्योदकारी है। नौकरी में प्रमोशन, व्यापार में लाभ मिलेगा। पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा। घर में नए मेहमान आएंगे। आर्थिक मामलों के लिए वक्त शुभ रहेगा। आपको कई स्रोतों से धन की प्राप्ति हो सकती है। धार्मिक कार्यों में रुचि होगी। धार्मिक यात्राओं पर जा सकते हैं। तीर्थयात्रा हो सकती है. सत्संग का लाभ मिलेगा. पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बन सकता है. स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा. रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे. पठन-पाठन व लेखन के काम में मन लगेगा. धन प्राप्ति सुगम होगी. पारिवारिक सुख-शांति बनी रहेगी. जल्दबाजी न करें.
  2. वृषभ राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति का गोचर अष्टम भाव में होगा। इससे कुछ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सेहत का विशेष ध्यान रखना होगा। पेट संबंधी रोग आ सकते हैं। अनचाही यात्राएं होंगी। आर्थिक पक्ष कमजोर रहेगा। धन संचय करने में परेशानी आ सकती है। उधार चुकाने का दबाव रहेगा। व्यापार में मनचाहे परिणाम प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करना पड़ेगी। धार्मिक कार्यों की ओर रूझान बढ़ेगा। रोजगार में वृद्धि होगी. प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे. शारीरिक कष्ट की वजह से बाधा संभव है. उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे. आय में वृद्धि होगी. वरिष्ठ जनों का सहयोग तथा मार्गदर्शन प्राप्त होगा. पार्टनरों से मतभेद दूर होंगे. कुसंगति से हानि होगी. विवेक से कार्य करें।
  3. मिथुन राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति का गोचर सप्तम स्थान में रहेगा। इस समय आपका वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। वैवाहिक जीवन में चल रहे मतभेद दूर होंगे। आर्थिक स्थिति के लिए समय उत्तम है। पार्टनरशिप में कोई नया कार्य प्रारंभ करना चाहते हैं तो अवश्य करें लाभ होगा। प्रेम संबंधों में नयापन आएगा। नौकरी में तरक्की, बिजनेस में लाभ की स्थिति मिलेगी। समाज में सम्मान प्राप्त होगा। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे. किसी व्यक्ति के व्यवहार से मन खिन्न रहेगा. पुराना रोग उभर सकता है. दूर का समाचार मिल सकता है. चिंता तथा तनाव में वृद्धि होगी. पार्टनरों तथा मातहतों से मतभेद बढ़ सकते हैं. दूसरों से अपेक्षा न करें. आय में निश्चितता रहेगी.
  4. कर्क राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति छठे भाव में गोचर करेगा। कर्क राशि में बृहस्पति उच्च का होता है। इसलिए इसका शुभ प्रभाव मिलने वाला है। इस राशि के जो लोग शत्रुओं से परेशान हैं, उनकी यह परेशानी शीघ्र दूर होगी। रोगों से मुक्ति मिलने का समय है। हालांकि मानसिक रूप से मजबूत रहना होगा कोई अनपेक्षित घटना हो सकती है। वैवाहिक जीवन के लिए समय ठीक है। आर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी। थोड़े प्रयास से ही कार्य बनेंगे. सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. सामाजिक कार्य करने का अवसर मिलेगा. धन प्राप्ति सुगम होगी. संतान पक्ष से कोई खराब सूचना मिल सकती है. चिंता तथा तनाव रहेंगे. प्रतिद्वंद्वी शांत रहेंगे. विवाद से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है. जोखिम न लें.
  5. सिंह राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति पंचम स्थान में गोचर करने जा रहा है। अपने मित्र सूर्य की राशि में मार्गी गुरु का प्रवेश इसके लिए शुभ रहेगा। इस राशि के जातकों की पारिवारिक स्थिति सुखद रहेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। कर्ज मुक्ति की स्थिति बन रही है। संतान पक्ष की चिंता दूर होगी। संतानों के विवाह की बात बनेगी। नौकरीपेशा को सम्मान, व्यापारियों को कार्य विस्तार का सुख प्राप्त होगा। परिवार में अतिथियों का आगमन होगा. शुभ समाचार प्राप्त होंगे. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. कोई नया काम करने की योजना बन सकती है. व्यवसाय ठीक चलेगा. थकान महसूस होगी. आलस्य हावी रहेगा. बेचैनी रहेगी. पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा. मतभेद कम होंगे. जल्दबाजी न करें।
  6. कन्या राशि- इस राशि के लिए गुरु का गोचर चतुर्थ स्थान में होगा। चतुर्थ स्थान सुख स्थान होता है, इसलिए यहां पर बृहस्पति का मार्गी होना इस राशि वालों को अनेक प्रकार के सुख प्रदान करेगा। पारिवारिक जीवन में मधुरता तो आएगी ही, जो लोग वैवाहिक सुख की प्रतीक्षा कर रहे हैं उनकी इच्छा पूरी होने वाली है। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। स्वयं पर खर्च करेंगे। पर्यटन का अवसर आएगा। दोस्तों के साथ मेल मुलाकात होगी। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे. यात्रा मनोरंजक रहेगी. सुखमय जीवन व्यतीत होगा. किसी बड़ी समस्या का हल मिलेगा. प्रसन्नता रहेगी. धन प्र‍ाप्ति सुगम होगी. वरिष्ठजनों का सहयोग तथा मार्गदर्शन प्राप्त होगा. अप्रत्याशित लाभ हो सकता है. ऐश्वर्य के साधनों पर बड़ा खर्च होगा.
  7. तुला राशि- इस राशि के लिए गुरु मार्गी तृतीय स्थान में होगा। भाई-बंधुओं के साथ रिश्ते सुधरेंगे। पैतृक संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद सुलझने की स्थिति में आ जाएंगे। अभी तक आपकी जो योजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही थीं, उन्हें गति मिलेगी। सम्मान और सुख प्राप्त होगा। सेहत के लिहाज से यह गोचर ठीक नहीं रहेगा। मस्तिष्क संबंधी रोग उभर सकते हैं। पेट के निचले हिस्से के रोग भी परेशान करेंगे। संतान पक्ष की चिंता रहेगी। मशीनरी से चोट लग सकती है। इस राशि के जातकों को वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है. अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे. बनते कामों में विघ्न आ सकते हैं. कर्ज लेना पड़ सकता है. स्वास्थ्य कमजोर रहेगा. काम में मन नहीं लगेगा. पार्टनरों से मतभेद हो सकता है. जोखिम व जमानत के कार्य टालें. कीमती वस्तुएं संभालकर रखें. विवाद न करें.
  8. वृश्चिक राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति का गोचर द्वितीय स्थान में हो रहा है। धन स्थान में बृहस्पति का बैठना शुभ संकेत है। आपकी आर्थिक योजनाओं को गति मिलेगी। नया कार्य व्यवसाय प्रारंभ करना चाहते हैं या पुराने को विस्तार देना चाहते हैं तो समय अच्छा है। इस दौरान किसी बड़े प्रोजेक्ट के पूरे हो जाने से मानसिक सुख-श्ाांति प्राप्त होगी। वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी। प्रेम संबंध में अनुकूलता प्राप्त होगी, लेकिन पार्टनर के साथ पारदर्शी व्यवहार करना होगा। कानूनी अड़चन आ सकती है. वाणी पर नियंत्रण रखें. बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे. शारीरिक कष्ट संभव है. बेचैनी रहेगी. मनोरंजक यात्रा होगी. धनलाभ के अवसर हाथ आएंगे. लेन-देन में जल्दबाजी न करें. भाइयों से सहयोग मिलेगा. घर में सुख-शांति बनी रहेगी.
  9. धनु राशि- इसी राशि में बृहस्पति आ रहा है और यह लग्न यानी प्रथम स्थान है। यहां पर बृहस्पति के मार्गी होने से शारीरिक दिक्कतें दूर होंगी। सुख-सौभाग्य प्राप्त होगा। धन की तंगी दूर होने की स्थिति बनेगी और आय के एक से अधिक साधन प्राप्त होंगे। सेहत के लिहाज से यह गोचर अच्छा साबित होगा। बीमारियों पर हो रहे खर्च में कमी आएगी। जीवनसाथी के साथ पर्यटन का मौका आएगा। शत्रुओं को परास्त करने में कामयाब होंगे। सभी कार्य आपके मनोनुकूल होंगे। मानसिक द्वंद्व रहेगा. चोट व रोग से बचें. अपरिचितों पर विश्वास न करें. जल्दबाजी न करें. नई योजना बनेगी. नए कार्य प्रारंभ करने का मन बनेगा. व्यवसाय में अनुकूलता रहेगी. मित्रों के साथ अच्‍छा समय गुजरेगा. प्रसन्नता रहेगी. मनोरंजन के अवसर मिलेंगे. भाग्य का साथ मिलेगा.
  10. मकर राशि- इस राशि के लिए द्वादश स्थान में मार्गी बृहस्पति का आना मिलाजुला प्रभाव दिखाएगा। चूंकि द्वादश स्थान व्यय भाव होता है इसलिए खर्च में निश्चित तौर पर बढ़ोतरी होगी, लेकिन ध्यान रखना होगा कि यह खर्च कहां हो रहा है। अनावश्यक कार्यों पर खर्च करने से खुद को रोकना होगा। आय के साधनों में वृद्धि होगी। कोई ऐसा कार्य प्राप्त होने के योग बन रहे हैं जो आपके धन भंडार में वृद्धि करेगा। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। सेहत बेहतर रहेगी। तीर्थ दर्शन हो सकता है. सत्संग का लाभ मिलेगा. प्रभावशाली व्यक्तियों से मेलजोल बढ़ेगा. कार्य की बाधा दूर होगी. व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल रहेगा. पारिवारिक सहयोग मिलेगा. कुछ तनाव भी हो सकता है. थकान हो सकती है. परिस्थिति अनुकूल रहेगी. जल्दबाजी न करें.
  11. कुंभ राशि- कुंभ राशि के लिए एकादश भाव में मार्गी बृहस्पति के आने से स्थितियों में सुधार आएगा। अब तक जो भागदौड़ और जीवन में अनिश्चितता बनी हुई थी वह दूर हो जाएगी। अपने बारे में कोई अच्छा निर्णय ले पाएंगे। हालांकि अभी भी कोई बड़ा निवेश करने से बचना होगा। खासकर वाहन, मशीनरी के कार्यों में निवेश करें। मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा में अवश्य वृद्धि होगी। अविवाहितों को विवाह सुख की प्राप्ति होगी।प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी. कामकाज मनमाफिक चलेगा. प्रसन्नता रहेगी. प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग मिलेगा. जल्दबाजी से का‍म बिगड़ सकते हैं. पारिवारिक संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी. सुख-शांति बनी रहेगी. वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें. सुख के साधनों पर खर्च होगा.
  12. मीन राशि- यह राशि चक्र की अंतिम राशि हैं। मीन राशि के लिए मार्गी बृहस्पति का गोचर दशम स्थान में होगा। कार्य स्थान में बृहस्पति का शुभ प्रभाव मिलेगा। जिनके पास नौकरी नहीं है उन्हें नौकरी मिलेगी। बिजनेस प्रारंभ करने के लिए सही वक्त है, कार्य विस्तार करें। प्रॉपर्टी और वाहन में निवेश फलेगा। सेहत में सुधार आएगा। परिवार के बुजुर्गों के सहयोग से सही निर्णय ले पाएंगे। मित्रों, भाई-बंधुओं के साथ संबंधों में सुधार आएगा। पारिवारिक समागम का अवसर आएगा।कष्ट, भय, तनाव व चिंता का वातावरण बन सकता है. जोखिम व जमानत के कार्य टालें. वाहन व मशीनरी के प्रयोग में विशेष सावधानी रखें. दूसरों के झगड़ों में न पड़ें. कीमती वस्तुएं गुम हो सकती हैं. आय में निश्चितता रहेगी. व्यवसाय ठीक चलेगा. नौकरी में सह‍कर्मियों से विवाद संभव है।
बृहस्पति ग्रह की शांति के कुछ उपाय ---
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति अनुकूल अवस्था में नहीं है तो आपको पुखराज रत्न धारण करना चाहिए।
- बृहस्पति धनु और मीन राशियों के स्वामी हैं इसलिए अगर इन दोनों राशियों के जातक पुखराज धारण करें तो उन्हें शुभ फल मिलते हैं। इसके साथ ही बृहस्पति ग्रह के अच्छे फल प्राप्त करने के लिए गुरुवार के दिन या बृहस्पति की होरा में गुरु यंत्र को अपने घर में स्थापित करना चाहिए। आप गुरु ग्रह के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए पीपल की जड़ को गुरु की होरा या गुरु के नक्षत्रों में भी धारण कर सकते हैं।

शनि हुए मार्गी, जानिए अगले 5 महीनों में मार्गी शनि का आपकी राशि पर क्या प्रभाव होगा

हिंदू मान्यताओं में ग्रहों और नक्षत्रों की चाल का बहुत महत्व है। मान्यता है कि इनके स्थान परिवर्तन का असर इंसान के जीवन पर भी पड़ता है। यह अच्छा या बुरा कुछ भी हो सकता है। ग्रहों के न्यायधीश और व्यक्ति को कर्मों के आधार पर फल देने वाले शनि अपनी चाल बदलेंगे। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि भारतीय ज्योतिष के नौ ग्रहों में से एक प्रमुख न्यायप्रिय शनि ग्रह का वक्री होना प्रमुख घटना है। शनि एक राशि में 30 महीने, गुरू 13 महीने, राहु केतु 18 महीने और अन्य ग्रह दिनों के हिसाब से रहते हैं। शनि इस समय धनु राशि में वक्री अवस्था में गोचर है। शनि 30 अप्रैल 2019 से वक्री चल रहे है। 
    आज 18 सितंबर को शनि धनु राशि में वक्री से मार्गी हो जाएगा। शनि जो धनु राशि में उल्टा चल रहे थे 18 सितंबर से सीधा चलने लगेगा। शनि के सीधा को शुभ माना जाता है। दो ग्रह राहु- केतु को छोड़कर 18 सितंबर से सभी ग्रह मार्गी रहेंगे। शनि के मार्गी  शनिदेव का वक्री अथवा मार्गी होना पृथ्वीवासियों के प्रति बड़ी घटना के रूप में देखा जाता है। जिस राशि पर भ्रमण करने के मध्य ये वक्री रहते हैं, उन्हें काफी मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है। शनि के मार्गी होने से पिछले कुछ समय से चली आ रही परेशानियां खत्म होगी। शनि के मार्गी होने से खासतौर पर मेष और सिंह राशि वालों के लिए कई सुखद समाचार मिलेगा।

Saturn-is-Margi-know-how-Margi-Saturn-will-affect-your-zodiac-in-the-next-5-months.-शनि हुए मार्गी, जानिए अगले 5 महीनों में मार्गी शनि का आपकी राशि पर क्या प्रभाव होगा
      आज दोपहर 18 सितंबर 2019 (बुधवार) से शनि भी अपनी चाल बदलकर उलटी से सीधी मार्ग यानी मार्गी चाल पर होंगे। इस तरह करीब 142 दिन बाद धनु राशि में चल रहे शानि देव अब उल्टी चाल छोड़कर सीधी चाल चलना शुरू करेंगे। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि शनिदेव 30 अप्रैल 2019 को वक्री हुए थे। अपने कुल 142 दिन के इस वक्रत्वकाल में शनि ने लगभग सभी राशियों को कार्यों में अड़चन, आर्थिक संकट, रोग, पारिवारिक जीवन में समस्याएं, दाम्पत्य सुख में कमी जैसी अनेक परेशानियों से लोगों का सामना हुआ है। लेकिन अब आज 18 सितंबर से शनि के धनु राशि में मार्गी होने से सभी राशि वालों को राहत महसूस होगी। शनि के मार्गी होने से जीवन की बाधाएं समाप्त होंगी, धन आगमन के बंद रास्ते खुलेंगे और प्रत्येक क्षेत्र में तरक्की का मार्ग प्रशस्त होगा। राजनीति में उथल-पुथल  देखने को मिल सकती है। डिप्रेशन व अकारण ही घटनाएं बढ़ सकती हैं।
पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार 18 सितम्बर 2019 (बुधवार) दोपहर 2 बजकर 15 मिनट पर शनि ने अपनी चाल बदल दी हैं और धनु राशि में सीधी चाल चलेंगे। इस राशि में शनि अगले पांच महीने यानी 24 जनवरी 2020 तक सीधी चाल से चलते हुए शनि मकर राशि में प्रवेश करेंगे।  
जानिए आने वाले अगले 5 महीनों में मार्गी शनि का आपकी राशि पर क्या प्रभाव होने वाला है
  1. मेष - इस राशि के जातक को शनि के स्थान परिर्वतन करने से भाग्य का सहयोग मिलेगा। चीजें बेहतर होंगी। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी और करियर भी अच्छा बनेगा। नए अवसर प्राप्त होंगे। कारोबार के सिलसिले में की गई यात्रा लाभप्रद रहेगी। शत्रु पक्ष निर्बल रहेंगे। मित्रों से सहयोग मिलेगा। रुके हुए कार्य आज पूरे हो सकते हैं, प्रयास कीजिए। आपकी कोई इच्छा आज पूरी होने वाली है भाग्य 90 प्रतिशत साथ दे रहा है। माता-पिता और गुरुओं का आशीर्वाद मिलेगा। ध्यान रखें--अष्टम ढैया से निकले शनि को मना लें, आप संकट में आ सकते हैं।
  2. वृषभ- शनि की बदली हुई चाल इस राशि के लिए शुभ है। जातकों को धन लाभ होगा। नये काम शुरू करने के लिए भी समय शुभ है। मन अस्थिर रहेगा और विचारों के भंवर में डूबते रहेंगे। लेखकों और कलाकारों के लिए दिन सृजनात्मक रहेगा। वैसे आज संभलकर काम करें, काम में बाधा आ सकती है। स्थान परिवर्तन का योग बना है। यात्रा में असुविधा हो सकती है। गुरु मंत्र का जप करें। भाग्य 53 प्रतिशत तक साथ देगा।स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। नौकरी से जुड़ी दिक्कतें खत्म होंगी। वाणी पर संयम रखें और विवाद से दूर रहें। कष्ट से छुटकारा मिलेगा।  ध्यान रखें-- परेशानियां तो आएंगी पर शनि मंत्र को जपने से आपको परेशानी कम होगी।
  3. मिथुन- इस राशि के जातक के लिए भी अगले 5 महीने फलदायी हैं। विवाह से जुड़ी  समस्याओं का हल मिलेगा। रूके हुए काम पूरे होंगे। जीवनसाथी का भरपूर साथ मिलेगा। जिन लोगों का अपने जीवनसाथी के साथ मनमुटाव था वो खत्म हो जाएगा। विशिष्ट लोगों से संपर्क बनेंगे जिनका भविष्य में लाभ भी मिल सकता है। कारोबार के लिहाज से यात्रा सुखद रहेगी। उन्नति का समाचार मिलेगा। आज जो भी कीजिए दिल खोलकर कीजिए, शत्रु निर्बल रहेंगे। सेहत अच्छी रहेगी। वैसे इस दौरान किसी से कर्ज लेने से बचें। ध्यान रखें --घरेलू समस्याओं से जूझना पड़ेगा। शनि को मनाने की तैयारी करें।
  4. कर्क- इस राशि के जातक को लंबी बीमारी से राहत मिलेगी। आय में बढोत्तरी होगी। कार्यक्षेत्र में व्यस्तता रहेगी। कारोबार में धन लाभ होगा। आज का कर्म आपके कल का भविष्य बनाएगा अतः सोच-समझकर काम करें और निर्णय लें।कानूनी और सरकारी मसलों में कोई जोखिम नहीं ले। विरोधियों से दूर रहें। अधिकारी वर्ग से लाभ होगा। ध्यान रखें -- इस अवधि में कष्टों से मुक्ति मिलेगी किन्तु शनि की भक्ति को भुलाकर भी छोड़े नहीं।
  5. सिंह- इस राशि के जातक को संतान का भरपूर साथ और प्यार मिलेगा। धन अर्जित करने में सफलता मिलेगी। अपने और अपने संतान के स्वास्थ्य का ध्यान जरूर रखें।इस आप सकारात्मक उर्जा से भरपूर रहेंगे। काम में रुचि रहेगी और जो भी करेंगे उसमें सफलता मिलेगी। मित्रों और सज्जनों से सहयोग मिलेगा। विरोधी भी आज सहयोग मांगने पर मदद करेंगे। कुल मिलाकर स्थिति सामान्य और सुखद रहने वाली है। किसी प्रकार की जल्दबाजी से बचें। ध्यान रखें -- ढैया से होगी मुक्ति, अब मिलेगी कष्टक में मुक्ति।
  6. कन्या- माता का साथ मिलेगा। यह समय घर और गाड़ी लेने के लिए भी अच्छा रहने वाला है। जीवनसाथी से विवादों में ना उलझें। यात्रा में असुविधा हो सकती है। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें। अपने सामान का ध्यान रखें, खोने का भय है। कठिन परिश्रम करना पड़ेगा।धार्मिक कार्यों में रूचि रहेगी। विदेश जाने की संभावना बन सकती है। ध्यान रखें -- सावधानी रखें।अच्छे दिन गए ।इस राशि वालो के लिए परेशानियों का आगमन होने वाला है।
  7. तुला- आपके लिए शनि का मार्गी चाल शुभ रहने वाला है। भाई-बहनों से प्रेम बढ़ेगा और शुभ समाचार मिलेंगे। कला और मनोरंजन में रुचि रहेगी। धर्म-कर्म के काम में मन लगेगा। आसपास की यात्रा लाभदायक रहेगी। कार्यक्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी मित्रों से सहयोग मिलेगा। बुजुर्गों व साधु-संतों से आशीर्वाद प्राप्त होगा।आय में वृद्धि हो सकती है। पदोन्नति का भी योग बन रहा है। आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। पैतृक संपत्ति विवाद खत्म होगा। ध्यान रखें -- इस राशि वालो। हो जाओ खुश। आ रहे हैं अच्छे दिन कर ले अपनी मन की सभी इच्छा पूरी।
  8. वृश्चिक- संपत्ति के मामले में आपको लाभ मिल सकता है। परिश्रम अधिक है। मान-सम्मान में वृद्धि का योग है। कार्यक्षेत्र में व्यस्तता बढ़ेगी। नए अवसर व नए लोगों से परिचय होगा। सक्रिय रहें, सुअवसर को हाथ से न जाने दें। पारिवारिक मामलों में धन खर्च कर सकते हैं। खराब रिश्तों में सुधार होगा और मान-सम्मान बढ़ेगा। रूके हुए काम पूरे होंगे। ध्यान रखें -- आपको शनि की अच्छी दृष्टि के लिए अभी आपको ढाई साल और इंतजार करना होगा।  
  9. धनु- आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। नई नौकरी तलाश रहे हैं तो इसमें सफलता के योग हैं और आप सकारात्मक बने रहेंगे। शादीशुदा लोग जीवनसाथी को लेकर परेशान हो सकते हैं। भविष्य की चिंता सताएगी। संघर्ष अधिक करना पड़ेगा। व्यर्थ की भागदौड़ रहेगी। मन दुविधा में रहेगा। बिजनेस बढ़ेगा और आर्थिक तौर पर मजबूत होंगे। ध्यान रखें -- इस राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती की वजह से किसी शुभ समाचार के मिलने में देरी हो सकती है।
  10. मकर- आपके लिए विदेश जाने की पूरी संभावना बन रही है। धार्मिक यात्राओं पर भी जा सकते हैं। पैसों से जुड़ी कुछ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जीवनसाथी से मनमुटाव की आशंका रहेगी। किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए जल्दबाजी से बचें और वाणी पर संयम रखें। ध्यान रखें -- इस राशि के जातकों के सभी कार्यों के पूरा होने में विलम्ब होगा।
  11. कुंभ- आपके लिए अगले कुछ दिन लाभ वाले हैं। इच्छापूर्ति होगी। सोचे हुए कार्य पूर्ण होंगे। किसी बड़े अधिकारी का समर्थन प्राप्त होगा। कार्यक्षेत्र में प्रभाव और जिम्मेदारी बढ़ेगी। अचानक लाभ से प्रसन्न होंगे। कोई डील करने जा रहे हैं तो अपनी बुद्धि और चतुराई से लाभदायक सौदा कर सकते हैं।नौकरी में परिवर्तन के योग के साथ मान-सम्मान बढ़ेगा। रूके हुए धन प्राप्त होंगे। प्रेम संबंधो में मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।  शनिदेव इस राशि वालों पर मेहबान हैं। आपका कल्याण करेंगे।
  12. मीन- आपके लिए अगले कुछ दिन मिलेजुले रहने वाले हैं। परिश्रम और संघर्ष के बाद सफलता मिलेगी जिससे आनंदित होंगे। विरोधी साजिश कर सकते हैं, लेकिन आपका अहित नहीं कर पाएंगे। जीवनसाथी से आनंद और खुशी मिलेगी।काम को लेकर कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। वैसे समय के साथ आप इनसे निपटने में भी कामयाब होंगे। नौकरीपेशा लोग खुश रहेंगे। ध्यान रखें -- इस राशि के जातकों के काम के बीच कोई बाधा नहीं आएगी पर काम आधा अधूरा ही बनेगा।

जाने किन ज्योतिष योग वाला जातक बनता हैं डॉक्टर (चिकित्सक)

दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करते ही ‘कौन-सा विषय चुनें’ यह यक्ष प्रश्न बच्चों के सामने आ खड़ा होता है। माता-पिता को अपनी महत्वाकांक्षाओं को परे रखकर एक नजर कुंडली पर भी मार लेनी चाहिए। बच्चे किस विषय में सिद्धहस्त होंगे, यह ग्रह स्थिति स्पष्ट बताती है। हम सब अपनी पसंद के कार्यक्षेत्र में जाना चाहते हैं, परन्तु बहुत बार हमारी यह इच्छा अधूरी रह जाती है। ज्योतिष एक ऐसा विषय है जिसके माध्यम से इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि कौन सा क्षेत्र हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ है।
    प्रत्येक युवक / युवती की यह अभिलाषा होती है कि वह जो भी कार्य करे वह उसकी रुचि के अनुसार हो, क्योंकि रुचि के अनुसार कार्य करने में सफलता शतप्रतिशत मिलती है परन्तु कभी ऐसा भी होता है कि अपनी रुचि वाला क्षेत्र चुन कर भी असफ़लता हाथ लगती है। ऐसा विशेष कर होता है, अतः यह जानना ज़रूरी हो जाता है कि कौन सा कार्य हमारे अनुकूल होगा जिससे सफलता मिले। हर व्यक्ति में अलग-अलग क्षमता होती है लेकिन स्वयं यह तय करना कठिन होता है कि हममें क्या क्षमता है इसलिये कभी कभी गलत निर्णय लेने से असफलता हाथ लगती है, परन्तु ज्योतिष एक ऐसा विषय है जिसके द्वारा उचित व्यवसाय/क्षेत्र चुनने में मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
    आजकल हाईस्कूल करने के बाद एक दुविधा यह रहती है कि कौन से विषय चुने जाए जिससे डॉक्टर या इन्जीनियर का व्यवसाय चुनने मे सहायता मिल सके इसके लिये कुन्डली के ज्योतिषीय योग हमारी सहायता कर सकते हैं तो आइये इस पर चर्चा करें कि ज्योतिेष के द्वारा कैसे जाना जाय कि किस क्षेत्र मे सफलता मिलेगी। पण्डित दयानन्द शास्त्री के मतानुसार जातक की जन्म पत्रिका में लग्न, लग्नेश, दशम भाव, दशमेश इन पर विभिन्न ग्रहों का प्रभाव, जातक को उचित व्यव्साय जैसे कि डॉक्टर या इन्जीनियर के क्षेत्र का चयन करने मे सहयता करता है। ग्रहों का विभिन्न राशियों में स्थित होना भी व्यव्साय का चयन करने में मदद करता है। यदि चर राशियों में अधिक ग्रह हों तो जातक को चतुराई, युक्ति निपुणता से सम्बधित व्यवसाय में सफलता मिलती है। वह ऐसा व्यव्साय करता है जिसमें निरंतर घूमना पड़ता हो। और यदि स्थिर राशि में ज्यादा ग्रह होते हैं तो एक स्थान वाला कार्य करता है जिसमे डॉक्टरी मुख्य है तथा द्विस्वभाव राशि में अधिक ग्रह हों तो जातक अध्यापन आदि कार्य करता है जिसमे एक स्थान पर भी तथा काम के सिलसिले मे आना जाना भी आवश्यक होता है।
      ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि ज्योतिष विज्ञान के आधार पर व्यक्ति की कुण्डली का विवेचन करके करियर के क्षेत्र का निर्धारण किया जा सकता है।आज के युग में सबसे महत्वपूर्ण पेशा डाक्टर का है। डाक्टर को लोग आज भी भगवान के तुल्य ही मानते है। डाक्टरी का पेशा चुनने से पहले इन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। व्यक्ति में डाक्टरी की शिक्षा लेने की कितनी सम्भावना है ? क्या व्यक्ति चिकित्सा के क्षेत्र सफलता प्राप्त करेगा ? चिकित्सा के क्षेत्र में व्यक्ति फिजीशियन बनेगा, सजर्न बनेगा, या किसी रोग का विशेषज्ञ बनेगा ?
      सर्जनों की कुण्डली में सूर्य व मंगल दोनों का मजबूत होना जरूरी होता है। क्योंकि सूर्य, आत्म-विश्वास, ऊर्जा का कारक है और मंगल, टेकनिक, साहस व चीड़-फाड़ से सम्बन्धित होता है। जब तक व्यक्ति आत्म-विश्वास, साहस, टेकनिक व ऊर्जा से लबरेज नहीं होगा तब-तक वह एक सफल सर्जन चिकित्सक नहीं बन पायेगा। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं की किसी भी जातक की कुण्डली में शिक्षा के भाव जन्मपत्री में दूसरा व पंचम भाव शिक्षा से सम्बन्धित होता है। दूसरे भाव से प्राथमिक शिक्षा के बारे में जाना जाता है और पंचम भाव से उच्च शिक्षा का आकलन किया जाता है। किसी भी तकनीकी शिक्षा का करियर के रूप में परिवर्तन होना तभी संभव है, जब पंचम भाव व पंचमेश का सीधा सम्बन्ध दशम भाव या दशमेश से बन जाये। अतः इनका आपस में रिलेशन होना आवश्यक होता है। इससे यह पता किया जा सकता व्यक्ति जिस क्षेत्र में शिक्षा में शिक्षा प्राप्त करेगा, उसे उसी क्षेत्र में जीविका प्राप्त होगी या नहीं ?
Know-which-astrological-yoga-person-becomes-a-doctor-जाने किन ज्योतिष योग वाला जातक बनता हैं डॉक्टर (चिकित्सक)   ज्योतिष में चन्द्रमा को जड़-बूटी का एंव मन का कारक माना जाता है। यदि चन्द्रमा मजबूत नहीं होगा तो डाक्टर के द्वारा दी गई दवायें लाभ नहीं करेगी। चन्द्र पीडि़त हो या पाप ग्रहों द्वारा दृष्ट हो तो डाक्टर में मरीज को तड़पते हुये देखते रहने की सहनशक्ति विद्यमान होती है। डाक्टर की कुण्डली में चन्द्रमा का सम्बन्ध त्रिक भावों में होना सामान्य योग है।सूर्य व चन्द्रमा जड़ी-बूटियों का कारक होता है और गुरू एक अच्छा सलाहकार व मार्गदर्शक होता है। इन तीनों का सम्बन्ध छठें भाव, दशम भाव व दशमेश से होने से व्यक्ति आयुर्वेदिक चिकित्सक बनता है। चिकित्सक बनने में मंगल ग्रह का विशेष रोल होता है। मंगल साहस, चीड़-फार, आपरेशन आदि चीजों का कारक होता है। मंगल अचानक होने वाली घबराहट से बचाता है और त्वरित निर्णय लेने की शक्ति देता है। चिकित्सा क्षेत्र में गुरू की भूमिका भी अहम होती है। गुरू की कृपा से ही कोई व्यक्ति किसी का इलाज करके उसे स्वस्थ्य कर सकता है। किसी भी व्यक्ति के एक सफल चिकित्सक बनने के लिए गुरू का लग्न, पंचम व दशम भाव से सम्बन्ध होना आवश्यक होता है।
     किसी भी जन्म कुंडली में पंचम भाव का दशम भाव से जितना अच्छा सम्बन्ध होगा, अजीविका के क्षेत्र में यह उतना ही अच्छा माना जायेगा। इन दोनों भावों में स्थान परिवर्तन, राशि परिवर्तन, दृष्टि सम्बन्ध या युति सम्बन्ध होना चाहिए। यदि पंचम व दशम भाव के सम्बन्ध से बनने वाला योग छठें या बारहवें भाव में बन रहा है तो चिकित्सा के क्षेत्र में जाने की प्रबल सम्भावना रहती है।
कुछ मुख्य योग निम्न हैं --
  1. यदि मेष, वृश्चिक, वृष, तुला, मकर या कुम्भ राशि कीं लग्न हो और उनमें मंगल-शनि या चंद्र-शनि या बुध-शनि की युति हो या फिर सूर्य-चंद्र के साथ अलग-अलग तीन ग्रहों की युति हो, तो जातक चिकत्सा विज्ञान की पढाई कर चिकित्सक बनने की प्रबल संभावना रहती है।
  2. चाहे कोई भी लग्न या राशि हो और केन्द्र में सूर्य-शनि या सूर्य-मंगल-शनि या चंद्र-शनि या चन्द्र-मंगल-शनि या बुध-शनि या बुध-मंगल-शनि या सूर्य-बुध-शनि या चंद्र-बुध-शनि की युति में से किसी की भी युति हो व इनमें कोई दो केन्द्रधिपत्य हो और युति कारक ग्रहों में से कोई अस्त न हो, तो जातक के डाँक्टर बनने की प्रबल संभावना होती है ।
  3. सामान्यत: यदि लग्न में मंगल स्वराशि या उच्चराशि का होकर बैठा हो तो भी जातक को सर्जरी में निपुण बनाता है । मंगल चुंकि साहस व रक्त का कारक है ओर सर्जन के लिए रक्त और साहस दोनों से संबंध होता है ।
  4. यदि कुंडली में ” कर्क राशि एवं मंगल बलवान हो तथा लग्न व दशम से मंगल तथा राहू का किसी भी रुप में संबंध हो, तो भी जातक को डॉक्टर बनाता है।
  5. केतु हमेशा डाक्टर की कुंडली में बली होता है । साथ ही सूर्य, मंगल एवं गुरू भी ताकतवर होने चाहिए। चुंकि सूर्य आत्मा का कारक है एवं गुरू बहुत बड़ा मरीज को ठीक करने वाला होता है ।
  6. वृश्चिक राशि दवाओं का प्रतिनिधित्व करती है, अत: इसका स्वामी मंगल भी ताकतवर होना चाहिए ।
  7. भाव 6 एवं उसका स्वामी का यदि भाव 10 से संबंध हो रहा हो, तो भी डॉक्टर बनाने में सहायक होता है |
  8. यदि मंगल या केतू बली होकर दशवें भाव या दशमेश से संबंध बना रहा हो तो जातक सर्जरी वाला डॉक्टर हो सकता है |
  9. मीन या मिथुन राशि गुप्त रोगियों से संबंधित दवाओं के डॉक्टर बनाने में के सहायक होता है ।
  10. यदि पंचमेश भाव 8 मेँ हो, तो भी डॉक्टर बनने की संभावना होती है ।
  11. यदि भाव 10 में चतुथेंश हो और दशमेश भाव 4 में हो, तो जातक दवाऐ जानने वाला दवाओं के माध्यम से जीवन यापन कर डॉक्टरी पेशा अपनाता है ।
  12. जिन जातकों की कुंडली में चंद्र व गुरु का बली संबध होता है, वे भी सफल चिकत्सक होते है ।
  13. यदि कुंडली का आत्म्कारक ग्रह अपने मूल त्रिकोंण का लग्न में पंचमेश से युति कर रहा हो, तो जातक प्रसिद्ध नाम वाला चिकत्सक होता है ।
  14. यदि अकारात्मक ग्रह या भाग्येश या दोनो वर्गोत्त्मी होकर कारकांश कुंडली में लग्न से केन्द्र में हो, तो रसायन से संबंधित दवाओं का व्यवसाय करने की संभावना रहती है ।
  15. यदि सूर्य और मंगल की पंचम भाव से युति हो और शनि अथवा राहू भाव 6 में हो, तो जातक सर्जन हो सकता है।
  16. यदि वृश्चिक राशि में बुध तथा तृतीय भाव पर चंद्र की दृष्टि हो तो जातक मनोचिकित्सक हो सकता है ।
  17. यदि कुंभ लग्न में स्वगृही मंगल दशम भाव से हो तथा चंद्र व सूर्य भी अच्छी स्थिति में हो, तो ऐसा जातक भी सर्जन हो सकता है ।
  18. यदि समराशि का बुध हो और लग्न विषम राशि की हो तथा धनेश मार्गी हो तथा अच्छे स्थान में हो, मंगल व चंद्र भी अच्छी स्थिति में हों, तो जातक को विख्यात चिकत्साशास्त्री बना सकता है ।
  19. यदि कर्क लग्न की कुंडली के छठे भाव में गुरु व केतू बैठे हों, तो जातक होम्योपैथिक चिकित्सक बन सकता है ।
  20. सिह लग्न कुंडली के दशम भाव में लग्नेश सूर्य हो और दशमेश शुक्र नवमस्थ हो तथा योगकारक पाल शुभ स्थान में बली हो, तो डॉक्टर बनता है ।
  21. कुंडली में यदि मंगल लाभ भाव में हो तथा तृतीयेश भाव 5 में बैठे एवं शुक्र चंद्र व सूर्य भी अच्छी स्थिति में हों, तो जातक का स्त्री एवं बाल रोग विशेषज्ञ बनने की सभावना होती है
  22. कुंडली के पंचम भाव में यदि सूर्य-राहू या राहू-बुध युति हों तथा ‘दशमेश की इन पर दृष्टि हो, साथ ही मंगल, चंद्र ,गुरु भी अच्छी स्थिति में हो, तो जातक चिकित्सा क्षेत्र में ज्योतिष प्रयोग द्वारा सफल चिकित्सक बन सकता है|
  23. यदि कुंडली में लाभेश और रोगेश की युति ताभ भाव में हो तथा मंगल,चंद,सूर्य भी शुभ होकर अच्छी स्थिति में हो, तो जातक का चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ने की संभावना होती है ।

धारा 370 हटाने के ज्योतिषीय कारण ओर प्रभाव

भारत की उपलब्ध (प्रचलित) जन्मपत्रिका में इस समय चंद्रमा में बृहस्पति की दशा चल रही है. भारत भूमि के बारे में ज्योतिषीय आंकलन करने के लिए ज्योतिषियों के पास जो आधार है वह है स्वतंत्र भारत की जन्मपत्रिका। 
उज्जैन (मध्यप्रदेश) निवासी आदरणीय पंडित सूर्य नारायण व्यास वह मूर्धन्य विद्वान ज्योतिषी थे जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता का मुहूर्त 14 अगस्त की रात्रिकालीन अभिजीत (12 बजे ) या ये कहें की 15 अगस्त की सुबह 00 बजे का निकला था। स्वतंत्र भारत का जन्म 15 अगस्त 1947 को मध्यरात्रि दिल्ली में हुआ था और कुंडली इस प्रकार है: भारत के जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर वृष लग्न उदित हो रहा था। राहू – लग्न, मंगल – मिथुन, सूर्य, चंद्र, बुध, शुक्र, शनि – कर्क, बृहस्पति – तुला और केतु – वृश्चिक राशि में विराजमान थे।
    इसके विपरीत पाकिस्तान एक दिन पहले बिना मुहूर्त के आजाद हुआ. जिसका परिणाम है की आज 71-72 सालों के उपरांत भारत की स्थिति पाकिस्तान से कहीं ज्यादा सुदृढ है. भारत के लिये यह समय (वर्ष 2019) मिले जुले परिणाम लेकर आने वाला रह सकता है। लेकिन अगस्त 2019 के बाद हालातों में सुधार दिखाई देने लगेगा। बृहस्पति मार्गी हो जायेगें, शनि भी मार्गी हो जायेंगें। तो इसके काफी सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगेंगें। कुल मिलाकर एक बेहतर वर्षांत की उम्मीद भारत 2019 से कर सकता है। हालांकि यह पूरा साल भारत के प्रत्येक नागरिक के लिये स्वयं को साबित करने वाला साल रहने वाला है। इसलिये देश के प्रत्येक व्यक्ति का योगदान इसमें शामिल है। 
Astrological causes and effects of removal of section 370 35a kashmir-धारा 370 हटाने के ज्योतिषीय कारण ओर प्रभाव      ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि वर्ष 2019 का आरंभ कन्या लग्न में हुआ था जो कि भारत की राशि से देखा जाये तो तीसरा स्थान है। वर्ष लग्न स्वामी बुध हैं जो भारत की कुंडली के अनुसार पंचम घर के कारक हैं। कुल मिलाकर साल 2019 शिक्षा और नई तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी रह सकता है या अपना विशेष मुकाम हासिल कर सकता है। वर्ष लग्न के अनुसार लग्न स्वामी बुध पराक्रम भाव में विचरण करने से भारत अपने पराक्रम एवं मेहनत के बल पर विश्व में भी अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब हो सकता है। 
    पराक्रम में बुध के साथ सूर्य के होने से जहां बुधादित्य युति बन रही है वहीं शनि भी इसी घर में विराजमान हैं। जो कि 2019 में भारत के लिये काफी चुनौतिपूर्ण समय के संकेत कर रहे हैं। भारत की राशि के स्वामी चंद्रमा वर्ष कुंडली में सप्तम भाव में शुक्र के साथ गोचर कर रहे हैं। यह संकेत कर रहे हैं कि भारत 2019 में सांस्कृतिक तौर पर दुनिया में अपनी एक विशिष्ट छाप छोड़ सकता है। कला के मामले में दुनिया भर में भारत अपना नाम कमा सकता है। विश्व के अलग-अलग देशों में भारत की पहचान बढ़ेगी। किसी विशेष क्षेत्र में भारत विश्व का नेतृत्व भी कर सकता है।
     इस वर्ष को आर्थिक रूप से चुनौतिपूर्ण स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है या कह सकते हैं कुछ क्षेत्रों में धंधें में मंदे के संकेत मिल रहे हैं। आर्थिक तौर पर स्थिति बहुत उत्साहजनक नहीं कही जा सकती। वित्तिय घाटा बढ़ने के आसार हैं। इसका कारण है राहू इस समय राशि परिवर्तन करेंगें। निर्यात के मामले में भी भारत को प्रतिद्वंदी देशों से चुनौतियों का सामना इस समय करना पड़ सकता है। बृहस्पति धर्म इत्यादि विषयों से सम्बंधित ग्रह हैं  तथा गोचर में शनि का बृहस्पति की राशि में होना धार्मिक न्याय की बात करता है. बृहस्पति देवताओं के गुरु थे और सही गलत का ज्ञान वही देवताओं को कराते थे और शनिदेव को कर्मों का दंडनायक माना गया है. अत: कश्मीरी हिन्दू, तीन तलाक और राम मंदिर मुद्दा इत्यादि जो धर्म आधारित है, पिछले कुछ समय से इन पर कार्य हो रहा है l
अब हम आते हैं 5 अगस्त, 2019 के एतिहासिक फैसले पर जब धारा 370 और 35 ए को हटाया गया. ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने कहा कि धारा 370 हटाने वाले दिन पांच अगस्त 2019 की प्रश्न कुंडली तुला लग्न की बनती है। जहां सूर्य, शुक्र, बुध, मंगल कर्मभाव में स्थित हैं। सूर्य कर्म भाव में दिग्बली हो जाता है और लग्नेश के साथ युति करके स्थित है। वहीं, बुध भाग्य भाव व द्वादशेष के मालिक होकर कर्म भाव में स्थित है। यह दोनों ही स्थितियां ज्योतिषीय गणना अनुसार श्रेष्ठ कारक है, लेकिन मंगल कर्म भाव में नीचस्त होने से कुछ विरोध व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास करेगा और तनावपूर्ण स्थिति हो सकती है। जबकि शनि पराक्रम भाव व गुरु के द्वितीय भाव में स्थित होने से भारत की स्थिति बहुत मजबूत बनी हुई है। ऐसे में पड़ोसी देश यदि भारत पर हमला करने का प्रयास गलती से भी करता है तो उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी। 
    भारत की कुंडली में सिंह राशि अर्थात चतुर्थ भाव भारत के उत्तर दिशा को दर्शाता हैl भारत के उत्तर अर्थात जम्मू कश्मीर के फैसले के समय गोचर का चंद्रमा भारत की कुंडली के पांचवें भाव जो की जम्मू कश्मीर की संपदा को दर्शाता है को लाभ पहुंचने वाला निर्णय बना रहा है. चतुर्थ भाव का स्वामी सूर्य का गोचर का तीसरे घर में अर्थात जम्मू-कश्मीर से बारहवें भाव में होना, इस प्रदेश से किसी भी चीज़ के अंत को दर्शाता है जैसे की धारा 370 आदि. हम सभी जानते हैं कि 10 सितम्बर 2015 से स्वतंत्र भारत की कुंडली में चंद्रमा की महादशा शुरू हुई हैl चंद्रमा भारत की कुंडली में पराक्रम और पड़ोसी देशों से सम्बंधित भाव का स्वामी हैl अत: इस दशा में भारत के पराक्रम का लोहा पूरा विश्व मानेगा क्योंकी चंद्रमा अपनी खुद की राशि में भी है l 
   राहू जब तृतीय भाव, कर्क राशि से मिथुन राशि की तरफ अर्थात पराक्रम भाव से निकल रहा है तो पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक करता हुआ गयाl
सावधान ओर सतर्क रहने की आवश्यकता--
फिलहाल गोचर में शनि व केतु की युति भारत की कुंडली से आठवें चल रही है l आठवां घर गुप्त कार्यों का होता है l निर्णयों का गुप्त रखा जाना ही सफलता तक पहुंचायेगाl यही युति कोई हमला, दुर्घटना भी दर्शाती है, अत: भारत देश को बहुत सतर्क रहने की जरुरत है. भारत की कुंडली के ग्रह योग बहुत मजबूत स्थिति लिए हुए हैं। ऐसे में कश्मीर पर लिया गया धारा 370 हटाने का फैसला हमारे पक्ष में ही जाएगा। हालांकि, कुछ समय तक हमारी सेना को चौकन्ना रहना होगा। फिर ग्रहों की चाल बदलने के बाद स्थिति शांतिपूर्ण रहेगी।

क्रोध, मंगल और ज्योतिष

क्रोध का मुख्य कारण अहंकार है। अगर हम क्रोध पर नियंत्रण चाहते हैं तो अहंकार को हमें सबसे पहले कुचलना होगा।   कुछ लोगों को गुस्से के बारे में भी ढेरों भ्रांतियां होती हैं। जैसे मैं गुस्सा करना छोड़ दूंगा तो मेरा रौब कम हो जाएगा या दूसरों की गलती का एहसास कराने के लिए, सबक सिखाने के लिए गुस्सा दिखाना जरूरी है। या सामने वाला व्यक्ति हर कदम पर हमारे साथ गलत व्यवहार कर रहा हो तो क्रोधित होकर प्रतिकार करना आवश्यक है। 
      यह क्रोध ही दुख का कारण है तथा अनन्त बार जन्म-मरण करवाता है। क्रोध कैसे आता है? अहम् पर चोट पडऩे से क्रोध आता है। अन्दर में यह जो अहंकार बैठा है, वही क्रोध का कारण है। अगर कुछ करना ही है तो इस अहंकार को कम करने की कोशिश करें, जीवन सुखमय हो सकता है।
     पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाये तो क्रोध के मुख्य कारण मंगल, सूर्य, शनि, राहु तथा चंद्रमा होते हैं। सूर्य सहनशक्ति है तो मंगल अक्रामक और चंद्रमा शारीरिक और भावनात्मक जरूरतों का प्रतीक। पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया यदि जन्मकुंडली में सूर्य और चंद्रमा, मंगल ग्रह एक-दूसरे के साथ किसी रूप में सम्बद्ध है तो व्यक्ति के अन्दर क्रोध अधिक रहता है। इसके अलावा मंगल शनि की युति क्रोध को जिद के रूप बदल देती है। राहु के लग्न, तीसरे अथवा द्वादश स्थान में होने पर काल्पनिक अहंकार के कारण अपने आप को बडा मानकर अंहकारी बनाता है जिससे क्रोध उत्पन्न हो सकता है।
क्रोध, मंगल और ज्योतिष      ज्योतिष में मंगल को क्रोध, वाद विवाद, लड़ाई झगड़ा, हथियार, दुर्घटना, एक्सीडेंट, अग्नि, विद्युत आदि का कारक ग्रह माना गया है तथा राहु को आकस्मिकता, आकस्मिक घटनाएं, शत्रु, षड़यंत्र, नकारात्मक ऊर्जा, तामसिकता, बुरे विचार, छल, और बुरी आदतों का कारक ग्रह माना गया है, इसलिए फलित ज्योतिष में मंगल और राहु के योग को बहुत नकारात्मक और उठापटक कराने वाला योग माना गया है ।
         गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना बहुत आवश्यक हैं क्योंकि क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि का नाश होता हैं जब बुद्धि का नाश हो जाता है तो मनुष्य का सर्वनाश हो जाता है । ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि मंगल और राहु स्वतंत्र रूप से अलग अलग इतने नाकारात्मक नहीं होते पर जब मंगल और राहु का योग होता है तो इससे मंगल और राहु की नकारात्मक प्रचंडता बहुत बढ़ जाती है जिस कारण यह योग विध्वंसकारी प्रभाव दिखाता है, मंगल राहु का योग प्राकृतिक और सामाजिक उठापटक की स्थिति तो बनाता ही है पर व्यक्तिगत रूप से भी मंगल राहु का योग नकारात्मक परिणाम देने वाला ही होता है।
       ज्योतिष में लग्न भाव यानि प्रथम भाव को स्वभाव और शारीरिक बनावट का कारक माना जाता है। दूसरा भाव धन और वाणी का और पंचम भाव बुद्धि का होने से मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करता है। इन तीनों भावों से व्यक्ति के सवभाव को देखा जाता है। चन्द्रमा, बुध और मंगल के कारण मन, वाणी, और क्रोध पर नियंत्रण नहीं रहता। अगर कुण्डली में मंगल, चन्द्रमा और बुध ग्रह नीच राशि ने हों या इन पर राहु और सूर्य की क्रूर दृस्टि हो तो अनियंत्रित क्रोध जातक में होता है।
       मंगल कुण्डली के प्रथम, तीसरे ,चतृर्थ, पंचम या अस्टम भाव में हो तो व्यक्ति में क्रोध की अधिकता होती है। 
मंगल इन भावो में नीच राशि में हो तो  व्यक्ति को ज्यादा क्रोधित सवभाव का बनाता है।  सूर्य-मंगल, गुरु-मंगल,मंगल-बुध,मंगल-शनि, बुध-शनि, गुरु राहु , राहु-चन्द्रमा, शनि चन्द्रमा का कुण्डली में इकठे होना भी क जातक में क्रोध को बढ़ाता है।
        पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार यदि जन्मकुंडली में मंगल और राहु एक साथ हो अर्थात कुंडली में मंगल राहु का योग हो तो सर्वप्रथम तो कुंडली के जिस भाव में यह योग बन रहा हो उस भाव को पीड़ित करता है और उस भाव से नियंत्रित होने वाले घटकों में संघर्ष की स्थिति बनी रहती है उदाहरण के लिए यदि कुंडली के लग्न भाव में मंगल राहु का योग हो तो ऐसे में स्वास्थ पक्ष की और से हमेशा कोई न कोई समस्या लगी रहेगी, धन भाव में मंगल राहु का योग होने पर आर्थिक संघर्ष और क़ुतुब के सुख में कमी होगी इसी प्रकार पंचम भाव में मंगल राहु का योग शिक्षा और संतान पक्ष को बाधित करेगा।
      इसके अलावा कुंडली में मंगल राहु का योग होने से व्यक्ति का क्रोध विध्वंसकारी होता है, समान्य रूप से तो प्रत्येक व्यक्ति को क्रोध आता है पर कुंडली में राहु मंगल का योग होने पर व्यक्ति का क्रोध बहुत प्रचंड स्थिति में होता है और व्यक्ति अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं कर पाता और बहुत बार क्रोध में बड़े गलत कदम उठा बैठता है, कुंडली में मंगल राहु का योग होने पर जीवन में दुर्घटनाओं की अधिकता होती है और कई बार दुर्घटना या एक्सीडेंट का सामना करना पड़ता है।।
      कुंडली में मंगल राहु का योग होने पर व्यक्ति को वहां चलाने में भी सावधानी बरतनी चाहिए , कुंडली में मंगल राहु का योग होने पर व्यक्ति को शत्रु और विरोधियों की और से भी बहुत समस्याएं रहती है और जीवन में वाद विवाद तथा झगड़ों की अधिकता होती है, कुंडली में मंगल राहु का योग बड़े भाई के सुख में कमी या वैचारिक मतभेद उत्पन्न करता है और मंगल राहु के योग के नकारात्मक परिणाम के कारण ही व्यक्ति को जीवन में कर्ज की समस्या का भी सामना करना पड़ता है, इसके अलावा यदि स्त्री जातक की कुंडली में मंगल राहु का योग हो तो वैवाहिक जीवन को बिगड़ता है स्त्री की कुंडली में मंगल पति और मांगल्य का प्रतिनिधि ग्रह होता है और राहु से पीड़ित होने के कारण ऐसे में पति सुख में कमी या वैवाहिक जीवन में संघर्ष की स्थिति बनी रहती है।
     जिन लोगो की कुंडली में मंगल राहु का योग होता है उन्हें अक्सर जमीन जायदात से जुडी समस्याएं भी परेशान करती हैं इसके अलावा मंगल राहु का योग हाई बी.पी. मांसपेशियों की समस्या, एसिडिटी, अग्नि और विद्युत दुर्घटना जैसी समस्याएं भी उत्पन्न करता है. यदि किसी जातक को गुस्सा अधिक आता है तो उसे ईश्वर का नाम लेना शुरू कर देना चाहिए, ईश्वर के नाम लेने से गुस्सा अवश्य ही शांत हो जाता है। इसके अलावा क्रोध किस कारण आता है, इस बात की सलाह भी ज्योतिषी से लेना उचित होता है, क्योंकि यदि कुंडली में कोई ग्रह योग ऐसी स्थिति निर्मित कर रहा है तो उसका निदान किया जा सकता है।

तो यहाँ हमने देखा की मंगल और राहु का योग किस प्रकार की समस्याएं उत्पन्न करता है यदि कुंडली में मंगल राहु के योग के कारण समस्याएं उत्पन्न हो रही हो तो निम्नलिखित उपाय लाभकारी होंगें---
  • ॐ अंग अंगारकाय नमः का नियमित जाप करें। 
  • हनुमान चालीसा का पाठ करें। 
  • प्रत्येक शनिवार को साबुत उडद का दान करें। 
  • प्रत्येक मंगलवार को गाय को गुड़ खिलाएं। 
  • प्रतिदिन मस्तक पर सफ़ेद चन्दन का तिलक लगाएं।
  • उपाय के तोर पर चांदी का बेजोड़ छला या कडा धारण सोमवार को करने से क्रोध में कमी आती है।
  • ॐ सौं सोमाये नमः और ॐ भोम भोमाये नमः का जप करने या करवाने से क्रोध पर काबू पाया जा सकता है।
  • चांदी के गिलास में पानी और दूध का सेवन करें।
  • बड़े बजुर्गों के चरण स्पर्श करना और उनसे आशीर्वाद लेना क्रोध की शांति के लिए रामबाण है।
  • योग्य एवम अनुभवी ज्योतिषाचार्य से परामर्श कर के ताम्बे में मूंगा या चांदी में साउथ सी मोती धारण करना चाहिए।
  • मंगलवार को आठ मीठी रोटी कोयों को या कुत्तों को डालनी चाहिए।
  • अभिमंत्रित मंगल यंत्र पास रखने से तत्काल लाभ होता है।

क्रोध निवारण में वास्तु का योगदान/उपयोग--
क्रोध इंसान की प्रगति का बहुत बड़ा दुश्मन है। अपने गुस्से की वजह से इंसान बड़े-बड़े नुकसान कर डालता है। क्रोध के कारण उसकी सामाजिक क्षति तो होती ही है वो रिश्तों और पैसों से भी हाथ धो बैठता है। क्रोध को शांत करने के लिए वास्तुशास्त्र में भी कुछ उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने क्रोध को नियंत्रण में रख सकते हैं।
उपाय निम्नलिखित है...
  • वास्तुशास्त्र के अनुसार अपने घर के किसी भी कोने में गंदगी ना रखें क्योंकि गंदगी क्रोध को उकसाती है।
  • पूर्व दिशा में कोई भारी सामान ना रखें। शाम होते ही घर में धूप बत्ती या अगरबत्ती को जलायें।
  • वास्तुशास्त्र के अनुसार क्रोध को शांत रखने के लिए रोज सूर्य भगवान को जल अर्पित करें। इससे मन में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और क्रोध जैसी नकारात्मक ऊर्जा आपसे दूर रहती है।
  • वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में लाल रंग का प्रयोग ना करें, घर में ना तो पेंट लाल हो और ना ही चादरें और पर्दे लाल रंग के हों।

क्रोध (गुस्से) से होने वाली हानियाँ (नुकसान)—
  • यदि कोई व्यक्ति लगातार गुस्सा करता है तो उसे सर दर्द की शिकायत हो सकती है क्यूंकि गुस्सा करने से सर मे ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है।।
  • ये क्रोध व्यक्ति को अवसादग्रस्त भी कर सकता है।।
  • क्रोध करने वालों को हाई ब्लड प्रेशर की बिमारी भी हो सकती है ।।
  • क्रोधी लोगों को मधुमेह (डाइबिटीज) होने का खतरा बढ़ जाता है ।।
  • क्रोध करने वालों की फेफड़ो की कार्य क्षमता भी प्रभावित होती है ।।
  • कुछ लोगो को सांस लेने मे भी समस्या होने लगती है।।
  • क्रोध करने वाले कुछ लोग पाचन तंत्र की समस्या से ग्रस्त हो जाते है ।।
  • गुस्सेल लोगो को नींद आने मे भी समस्या होने लगती है.
  • गुस्सा आदमी को जुर्म की दुनिया मे भी घुसा देता है.

वास्तव मे देखा जाए तो गुस्से से व्यक्ति खुद को ही सजा देता है. अतः ये जरुरी है की हम अपने क्रोध पर नियंत्रण करे ।।
इन उपायों से/सावधानी से भी होता है क्रोध/गुस्सा शान्त/नियंत्रण---
  1. दो पके मीठे सेब बिना छीले प्रातः खाली पेट चबा-चबाकर पन्द्रह दिन लगातार खाने से गुस्सा शान्त होता है। बर्तन फैंकने वाला, तोड़ फोड़ करने वाला और पत्नि और बच्चों पर हाथ उठाने वाला व्यक्ति भी अपने क्रोध से मुक्ति पा सकेगा। इसके सेवन से दिमाग की कमजोरी दूर होती है और स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है।
  2. प्रतिदिन प्रातः काल आंवले का एक पीस मुरब्बा खायें और शाम को एक चम्मच गुलकंद खाकर ऊपर से दुध पी लें। बहुत क्रोध आना शीघ्र ही बन्द होगा।
  3. गुस्सा आने पर दो तीन गिलास खूब ठंडा पानी धीरे धीरे घूँट घूँट लेकर पिएं । पानी हमारेशारीरिक तनाव को कम करके क्रोध शांत करने में मददगार होता है।
  4. यदि गुस्सा बहुत आता हो तो धरती माता को रोज सुबह उठकर हाथ से पाँच बार छूकर प्रणाम करें और सबसे विशाल ह्रदय धरती माँ से अपने गुस्से पर काबू करने और सहनशील होने का  मागें।
  5. हमेशा याद रखे की गुस्सा हमारे लिए हानिकारक है, अतः इसे छोड़ना चाहिए।।
  6. जब भी गुस्सा आने लगे तो लम्बी साँसे लेने लग जाए कुछ देर तक।।
  7. रोज सुबह शाम ध्यान करे और व्यायाम भी करे।।
  8. मंत्र जाप और सूर्य नमस्कार:— शारीरिक और मानसिक दोनों कमजोरियों पर विजय पाने के लिए मंत्रजाप और सूर्य नमस्कार अचूक अस्त्र हैं, इन्हें प्रमाणित करने की भी आवश्यकता नहीं है। सूर्य नमस्कार, हमारे आत्मविश्वास, आरोग्य को बढ़ाने में सहायक होता है। मंत्रजाप मन की शक्ति को बढ़ाता है और निरंतर अभ्यास से एकाग्रता और धैर्य बढ़ता है।।
  9. रोज सुबह हरी घास पे चलना चाहिए नंगे पाँव।।
  10. अगर कुंडली मे ग्रह खराब हो तो किसी अच्छे ज्योतिष से संपर्क करके उसके उपाय करने चाहिए।।
  11. अच्छे और सकारात्मक विचारों को पढ़ना चाहिए।।
  12. ॐ का जप भी बहुत लाभदायक रहता है।।
  13. पलाश के छोटे छोटे पत्तों की सब्जी खाने से गुस्सा, और पित्त जल्दी ही शांत होता है ।
  14. रविवार को अदरक, टमाटर और लाल रंग के कपड़े गुस्सा अधिक बढ़ाते हैं अत: इनका कम से कम प्रयोग करें ।
  15. ऐसे लोगो को हरड़ का प्रयोग लाभदायक रहता है  ।
  16. गर्म चीज़ो का इस्तामाल कम करना चाहिए ।
  17. दूध छाछ का सेवन करना चाहिए  ।
  18. आंवला और शह्द का इस्तामाल करे  ।
  19. तला और मिर्च मसाला वाला भोजन ना करे ।
  20. पानी ज़्यादा पिए
  21. गाय को रोटी दे ।
  22. चंदन का टीका लगाए ।
  23. आर्गला स्त्रोत का पाठ करे ।
  24. आपके परिवार में जिनको गुस्सा बहुत आता हो, बात- बात में चिढ़ जाते हो वे लोग सोमवार का उपवास करें, या एक समय भोजन करें। रात कों चन्द्रमा कों अर्घ दें तथा अपने गुस्से पर विजय प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करें । इससे भी मन शान्त रहता है, गुस्से पर नियंत्रण रहता है।
  25. भोजन में बहुत अधिक खट्टी, तीखी, मसालेदार चीजें खाने से आँखें जलती हैं, स्वभाव में चिड़चिड़ापन आता है, शीघ्र गुस्सा आता है, अकारण ही सीने और पेट में जलन होती है अत: इन चीजों का बिलकुल त्याग कर देना चाहिए ।
  26. यदि घर के किसी व्यक्ति को बात-बात पर गुस्सा आता हो, तो दक्षिणावर्ती शंख को साफ कर उसमें जल भरकर उसे पिला दें। यदि परिवार में पुरुष सदस्यों के कारण आपस में तनाव रहता हो, तो पूर्णिमा के दिन कदंब वृक्ष की सात अखंड पत्तों वाली डाली लाकर घर में रखें। अगली पूर्णिमा को पुरानी डाली कदंब वृक्ष के पास छोड़ आएं और नई डाली लाकर रखें। यह क्रिया इसी तरह करते रहें, तनाव कम होगा।
  27. भोजन को चबा-चबाकर शांति से खायें।
  28. जब भी क्रोध आए तो उस वक्त अपना चेहरा आइने में देखने से भी लज्जावश गुस्सा चला जाएगा।
  29. एक कटोरी में पानी भरकर उस पानी को देखकर ऊॅ शांति…….ऊॅ शांति…….ऊॅ शांति का मंत्र 21 बार जप करें और बाद में इस पानी को पी लें। एैसा करने से आपके क्रोधी स्वभाव में परिवर्तन आएगा।
  30. चांदी के गिलास में जल व दूध का सेंवन करें।
  31. 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  32. गणेश स्त्रोत का नियमित पाठ करें।
  33. रोज सुबह उठकर अपने बड़ों के चरण स्पर्श करें।
  34. रोज सुबह सूर्य को जल अर्पित करें।
  35. सूर्य के सामने गायत्री मंत्र का जाप करें।

जानिए कैसे पाएं क्रोध/झुंझलाहट और चिड़चिड़ेपन से छुटकारा--
अत्‍यधिक क्रोध के अलावा अक्‍सर हम छोटी-छोटी बातों को लेकर झुंझलाहट भी दिखाने लगते हैं। 
वेदों को दुनिया की सबसे प्राचीन लिखित सामग्री माना गया है। इन्‍हीं वेदों में छिपा है दुनिया के हर मसले का वैज्ञानिक हल। दरअसल भगवान शिव के पुत्र और प्रथमपूज्‍य भगवान गणेश ने समूची मानव जाति को क्रोध पर नियंत्रण करने का रहस्‍य बताया है। भगवान गणेश के बताए वैदिक मंत्र के द्वारा कोई भी इंसान अपने क्रोध पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्‍त कर सकता है। 

"ॐ गतक्रोधाय नम: "

वैदिक विधान के अनुसार इस अचूक मंत्र का प्रतिदिन 108 बार पांच मालाओं में (108x5) जप करना चाहिए। दरअसल प्राचीन ऋषि और आधुनिक विज्ञान का भी यही मानना है कि मस्‍तिष्‍क की तंत्रिकाओं के जरिए गुस्‍से पर ना सिर्फ काबू पाया जा सकता है बल्‍कि अपनी खुशियों को बढ़ाया भी जा सकता है। महर्षि वेदव्‍यास ने अपने महान ग्रंथ "महाभारत" में क्रोध नियंत्रण पर बहुत कुछ लिखा हैं। 

इसमें कलिपुरुष (कलियुग) द्वारा राजा नल को वरदान देते हुए जो बातें कहीं उन्‍हें प्रतिदिन 108 बार मनन करने से झुंझलाहट और चिड़चिड़ेपन से निजात मिलती है। 

कर्कोटस्य नागस्य दमयन्त्या नलस्य च। ऋतुपर्णस्य राजर्षे: कीर्तनं कलिनाशनम्।।

क्रोध पर काबू पाने का विष्‍णु मंत्र--- 

ॐ शांताकाराय नम: 
वैदिक शांति मंत्र 

ॐ ॐ पूर्णमद: पूर्णमिदं: पूर्णात्‍पूर्णमुदच्‍यते, पूर्णस्‍य पूर्णमादाय पुर्णमेवावशिष्‍यते, ॐ शान्‍ति: शान्‍ति: शान्‍ति: 

उपरोक्‍त मंत्र का प्रतिदिन 21 बार जप करने से लाभ निश्‍चित है। यह भी ध्‍यान रखें कि मंत्रों को पूरी शुद्धता के साथ ही पढ़ें।
अहंकार (क्रोध) शान्ति हेतु  विधि पूर्वक नकुल मंत्र का जाप कराना चाहिए या स्वयं करना चाहिए–
जिस प्रकार नकुल ने अहि का विच्छेद करके सत्य का रूप धारण किया था उसी प्रकार आप अपने जीवन में मधुरता की कामना से नकुल मंत्र का जाप करें या करवाएं।
-‘‘ यथा नकुलो विच्छिद्य संदधात्यहिं पुनः। एवं कामस्य विच्छिन्नं स धेहि वो यादितिः।।
का जाप दुर्गादेवी के षोडषोपचार पूजन के उपरांत विधिवत् संकल्प लेकर इस मंत्र का जाप करने से रिश्तों की समस्त विषमताएं समाप्त होकर जीवन में सुख प्राप्त होता है।
========================================================
  1.  वे सभी जातक जिन्हे ज्यादा गुस्सा आता हो उन्हें चाय, काफी, मदिरा से परहेज करना चाहिए ये शरीर को उत्तेजित करते है उसके स्थान पर छाछ, मीठा दूध या नींबू पानी का प्रयोग करना चाहिए ।
  2. किसी को यदि गुस्सा आने वाला हो तो 5-6 बार गहरी गहरी साँस लीजिए, कुछ पलों के लिए अपनी आँखे बंद करके ईश्वर का ध्यान करें उन्हें प्रणाम करें उनसे अपना कोई भी निवेदन करें। यह गुस्सा कम करने का सबसे बढ़िया तरीका है। इससे आप भड़कने से पहले ही निश्चित रूप से शांत हो जाएँगे।
  3. अपने घर के किसी भी कोने में गंदगी ना रखें क्योंकि गंदगी क्रोध को उकसाती है।
  4. पूर्व दिशा में कोई भारी सामान ना रखें।
  5. शाम होते ही अपने घर, दुकान या ऑफिस में धूप बत्ती को जलाकर वहां का वातावरण सुगन्धित रखें।
  6. जिस स्त्री का पति हर समय बिना बात के ही गुस्सा करता रहता है तो वह स्त्री शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार, सोमवार, गुरुवार या शुक्रवार किसी भी दिन एक नए सफेद कपड़े में एक डली गुड़, चांदी एवं तांबे के दो सिक्के, एक मुट्ठी नमक व गेहूं को बांधकर अपने शयनकक्ष में कहीं ऐसी जगह छिपा कर रख दें जहाँ पति को पता न चले । इसके प्रभाव से भी पति का गुस्सा धीरे-धीरे कम होने लगेगा।

किसी ने बिल्कुल सटीक कहा है कि अपने भीतर से अहंकार को निकालकर खुद को हल्का कीजिए क्योंकि ऊंचा वही उठता है जो हल्का होता है। अगर आप अपनी खूबियों और तरक्की को ताउम्र बरकरार रखना चाहते हैं तो अहंकार से दूर ही रहिए। अपनी तरक्की और सुख के लिए ईश्वर को धन्यवाद करते रहें। अहंकार के राक्षस से बचने का यही सबसे कारगर रास्ता है।

Ads By Google info

वास्तु

हस्त रेखा

ज्योतिष

फिटनेस मंत्र

चालीसा / स्त्रोत

तंत्र मंत्र

निदान

ऐसा क्यों

धार्मिक स्थल

 
Copyright © Asha News