ताजा खबरें
Loading...

अनमोल विचार

सर्वाधिक पड़े गए लेख

Subscribe Email

नए लेख आपके ईमेल पर


पर्व एवम त्यौहार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
पर्व एवम त्यौहार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

जानिए 2018 में मौनी अमावस्या व्रत का महत्व और स्नान- दान के शुभ मुहूर्त

मौनी अमावस्या का हिन्दू धर्म में बेहद खास महत्व है। माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ही मौनी अमावस्या कहते है। इस दिन मौन व्रत करना चाहिए। बता दें, मुनि शब्द से ही ‘मौनी’ शब्द की उत्पत्ति हुई है। इसीलिए इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन रहकर यमुना या गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व है। इस दिन मौन रहना चाहिए। मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है। इसलिए इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन रहकर प्रयाग संगम अथवा पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। मौन रहकर वाणी को शक्ति मिलती है म।नसिक समस्या हो वहम की समस्या हो तो इस दिन मौन रहकर इस समस्या क निदान होत। है । ग्रहों की शांति के लिये और उसके निवारण के लिये मौन रहें । 
============================================================================= 
जानिए 2018 में मौनी अमावस्या व्रत का महत्व और स्नान- दान के शुभ मुहूर्त-Know-the-importance-of-fasting-in-the-year-2018-and-the-auspicious-timeमाघ माह के स्नान का सबसे अधिक महत्वपूर्ण पर्व अमावस्या ही है। इस माह की अमावस्या और पूर्णिमा दोनों ही तिथियां बहुत पर्व है। इन दिनों में पृथ्वी के किसी न किसी भाग में सूर्य या चंद्र ग्रहण हो सकता है। इसलिए इस दिन स्नानादि करके पुण्य कर्म किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की चंद्रमा को मन का स्वामी माना जाता है और अमावस्या को चंद्र के दर्शन नहीं होते, जिसके कारण मन की स्थिति कमजोर होती है। इसीलिए इस दिन मौन व्रत रखकर मन को संयम में रखने का विधान बनाया गया है। शास्त्रों में कहा गया है की होंठों से ईश्वर का जाप करने से जितना पुण्य मिलता है उससे कई गुना अधिक पुण्य मन में हरी का नाम लेने से मिलता है। क्योंकि इस व्रत को करने वाले को पुरे दिन मौन व्रत का पालन करना होता है इसीलिए यह योग पर आधारित व्रत भी कहलाता है। 
       मौनी अमावस्या के दिन संतों और महात्माओं की तरह चुप रहना उत्तम माना जाता है। अगर चुप नहीं रह सकते को इस दिन मुख से कोई कटु शब्द नहीं निकालने चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु और भगवान् शिव दोनों की ही पूजा का विधान है। मौनी अमावस्या के दिन व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान, पुण्य तथा जाप करने चाहिए. यदि किसी व्यक्ति की सामर्थ्य त्रिवेणी के संगम अथवा अन्य किसी तीर्थ स्थान पर जाने की नहीं है तब उसे अपने घर में ही प्रात: काल उठकर दैनिक कर्मों से निवृत होकर स्नान आदि करना चाहिए अथवा घर के समीप किसी भी नदी या नहर में स्नान कर सकते हैं. पुराणों के अनुसार इस दिन सभी नदियों का जल गंगाजल के समान हो जाता है. स्नान करते हुए मौन धारण करें और जाप करने तक मौन व्रत का पालन करें | इस दिन व्यक्ति प्रण करें कि वह झूठ, छल-कपट आदि की बातें नहीं करेगें. 
      इस दिन से व्यक्ति को सभी बेकार की बातों से दूर रहकर अपने मन को सबल बनाने की कोशिश करनी चाहिए. इससे मन शांत रहता है और शांत मन शरीर को सबल बनाता है. इसके बाद व्यक्ति को इस दिन ब्रह्मदेव तथा गायत्री का जाप अथवा पाठ करना चाहिए. मंत्रोच्चारण के साथ अथवा श्रद्धा-भक्ति के साथ दान करना चाहिए. दान में गाय, स्वर्ण, छाता, वस्त्र, बिस्तर तथा अन्य उपयोगी वस्तुएं अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करनी चाहिए | ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की शास्त्रों में वर्णित है कि नदी, सरोवर के जल में स्नान कर सूर्य को गायत्री मंत्र उच्चारण करते हुए अर्घ्य देना चाहिए लेकिन जो लोग घर पर स्नान करके अनुष्ठान करना चाहते हैं, उन्हें पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। सोमवती अमावस्या या मौनी अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी परिक्रमा करें। सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य नारायण को जल देने से गरीबी और दरिद्रता दूर होती है। जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर है, वह गाय को दही और चावल खिलाएं तो मानसिक शांति प्राप्त होगी। इसके अलावा मंत्र जाप, सिद्धि साधना और दान कर मौन व्रत को धारण करने से पुण्य प्राप्ति और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।
 ============================================================== 
मौनी अमावस्या 2018 :-
  •  वर्ष 2018 में मौनी अमावस्या 16 जनवरी 2018 मंगलवार के दिन होगी। 
  •  मौनी अमावस्या का समय अमावस्या तिथि = 16 जनवरी 2017, मंगलवार 05:11 बजे प्रारंभ होगी। 
  •  अमावस्या तिथि = 17 जनवरी 2017, बुधवार 07:47 बजे समाप्त होगी। 
  •  कुम्भ मेले के दौरान इलाहबाद के प्रयाग में मौनी अमावस्या का स्नान सबसे महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि इस दिन हिन्दू धर्मवलंभी न केवल मौन व्रत रखते है बल्कि भगवान् पूजा अर्चना भी करते है। 

================================================================ 
जानिए इस मोनी अमावस्या पर विशेष क्या करे — 
  1.  *सुबह शाम स्नान क संकल्प करे 
  2. *जल को सिर पर लगाकर स्नान करे 
  3. *साफ कपड़े पहने *सूर्य को तिल डालकर जल चढ़ाये 
  4. *श्री कृष्णा और शिवजी के कोई भी मंत्र का उचारण करे 
  5. *दान करे 
  6. *जल और फल खाकर व्रत करे । 

=================================================================== 
इस मंत्र का करें जाप ---
 ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की अमावस्या के दिन इस मंत्र के जप से विशेष उपलब्धि प्राप्त होगी। साथ ही स्नान दान का पूरा पुण्य भी मिलेगा। 
 यह हैं मंत्र-- अयोध्या, मथुरा, माया, काशी कांचीअवन्तिकापुरी, द्वारवती ज्ञेया: सप्तैता मोक्ष दायिका।। गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदा सिंधु कावेरी जलेस्मिनेसंनिधि कुरू।। 
==================================================================== 
क्या करें उपाय राहु केतु के लिये --- 
 -शिवजी के मंदिर ज़रूर जाये -शिवलिंग पर जल चढ़ाये -एक रुद्राक्ष की माला अर्पित करे और धूप दीप जलाकर नीचे दिये मंत्र को 108 बार बोले : और रुद्राक्ष की माला धारण कर ले । ग्रहों की दोषों का भी निवारण होता है । गले मे पहन ले जीवन की परेशानियों से मुक्ति मिलेगी | 
================================================================== 
जानिए इस वर्ष मोनी अमावस्या पर क्या करे दान --- 
  •  -मुक्ति और मोक्ष के लिये – गौ दान करे 
  • -आर्थिक समस्या के लिये -भूमि दान 
  • -ग्रह नक्षत्र के दोष निवारण के लिये – काले तिल य तिल के लड्डू दान करे
  •  -कर्ज़ा मुक्ति के लिये – पीले धातु का दान / पीतल /पीले वस्तुओं क दान
  •  -पारिवारिक समस्या के निदान – देशी घी का दान 
  • -बाधा मुक्ति – नमक का दान 
  • -संतान से जुड़ी कोई समस्या – चाँदी का दान 

=================================================================== 
जानिए क्या करें इस वर्ष मोनी अमावस्या पर-- 
कम बोले और मौन रहें | ॐ नम :शिवाय क जाप करे मृत्युंजय मंत्र का जाप करे गायत्री मंत्र का जाप करे पूजा करने से पहले अन्न जल न ग्रहण करे गाय कुत्ते और कौवे को भोजन दे ब्रह्मण को भोजन कराये कुष्ठ रोगियों को भोजन कराये हो सके घर मे हवन करे इससे पितृ दोष का निवारण होता है । 
================================================================== 
मोनी अमवस्या के दिन व्रत का है बड़ा महत्व ---- 
 ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। अश्वत्थ यानि पीपल वृक्ष। इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेटकर परिक्रमा करने का विधान होता है। धान, पान और खड़ी हल्दी को मिला कर उसे विधानपूर्वक तुलसी के पेड़ को चढ़ाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी खास महत्व समझा जाता है। कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा। ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है।
 ======================================================================== 
जानिए मौनी अमावस्या को किए जाने वाले ज्योतिषीय और तांत्रिक उपाय को---
 हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष के अंत में अमावस्या तिथि आती है। इस प्रकार एक वर्ष में 12 अमावस्या आती है, लेकिन इन सभी में माघ मास में आने वाली अमावस्या बहुत ही विशेष मानी गई है। इसे मौनी व मानी अमावस्या कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की इस अमावस्या पर स्नान, दान, श्राद्ध व व्रत का विशेष महत्व हमारे धर्म ग्रंथों में लिखा है। तंत्र शास्त्र में भी मौनी अमावस्या को विशेष तिथि माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए उपाय विशेष ही शुभ फल प्रदान करते हैं। ये उपाय बहुत ही आसान हैं। जानिए मौनी अमावस्या के दिन आप कौन-कौन से उपाय कर सकते हैं- 
  1. हिंदू धर्म में अमावस्या को पितरों की तिथि माना गया है। इसलिए इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए गाय के गोबर से बने उपले (कंडे) पर शुद्ध घी व गुड़ मिलाकर धूप (सुलगते हुए कंडे पर रखना) देनी चाहिए। यदि घी व गुड़ उपलब्ध न हो तो खीर से भी धूप दे सकते हैं। यदि यह भी संभव न हो तो घर में जो भी ताजा भोजन बना हो, उससे भी धूप देने से पितर प्रसन्न हो जाते हैं। धूप देने के बाद हथेली में पानी लें व अंगूठे के माध्यम से उसे धरती पर छोड़ दें। ऐसा करने से पितरों को तृप्ति का अनुभव होता है। 
  2. मौनी अमावस्या के दिन भूखे प्राणियों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व है। इस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। गोलियां बनाते समय भगवान का नाम लेते रहें। इसके बाद समीप स्थित किसी तालाब या नदी में जाकर यह आटे की गोलियां मछलियों को खिला दें। इस उपाय से आपके जीवन की अनेक परेशानियों का अंत हो सकता है। अमावस्या के दिन चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप कर्मों का क्षय होगा और पुण्य कर्म उदय होंगे। यही पुण्य कर्म आपकी मनोकामना पूर्ति में सहायक होंगे। 
  3. मौनी अमावस्या को शाम के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें। साथ ही दीएं में थोड़ी सी केसर भी डाल दें। यह मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का उपाय है। 
  4. मौनी अमावस्या व मंगलवार के शुभ योग में किसी भी हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। संभव हो तो हनुमानजी को चमेली के तेल से चोला भी चढ़ा सकते हैं। ये उपाय करने से साधक की समस्त मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। 
  5. मौनी अमावस्या की रात को करीब 10 बजे नहाकर साफ पीले रंग के कपड़े पहन लें। इसके उत्तर दिशा की ओर मुख करके ऊन या कुश के आसन पर बैठ जाएं। अब अपने सामने पटिए (बाजोट या चौकी) पर एक थाली में केसर का स्वस्तिक या ऊं बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। इसके बाद उसके सामने एक दिव्य शंख थाली में स्थापित करें। अब थोड़े से चावल को केसर में रंगकर दिव्य शंख में डालें। घी का दीपक जलाकर नीचे लिखे मंत्र का कमलगट्टे की माला से ग्यारह माला जाप करें- 

 मंत्र-
 सिद्धि बुद्धि प्रदे देवि मुक्ति भुक्ति प्रदायिनी। मंत्र पुते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।
 मंत्र जाप के बाद इस पूरी पूजन सामग्री को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। इस प्रयोग से आपको धन लाभ होने की संभावना बन सकती है। 
====================================================================================== 
मौनी अमावस्या पर कालसर्प दोष निवारण हेतु उपाय- 
  1. मौनी अमावस्या पर सुबह स्नान आदि करने के बाद चांदी से निर्मित नाग-नागिन की पूजा करें और सफेद पुष्प के साथ इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। कालसर्प दोष से राहत पाने का ये अचूक उपाय है।
  2.  कालसर्प दोष निवारण के लिए मौनी अमावस्या के दिन लघु रुद्र का पाठ स्वयं करें या किसी योग्य पंडित से करवाएं। ये पाठ विधि-विधान पूर्वक होना चाहिए। 
  3. मौनी अमावस्या पर गरीबों को अपनी शक्ति के अनुसार दान करें व नवनाग स्तोत्र का पाठ करें।
  4.  मौनी अमावस्या पर सुबह नहाने के बाद समीप स्थित शिव मंदिर जाएं और शिवलिंग पर तांबे का नाग चढ़ाएं। इसके बाद वहां बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और शिवजी से कालसर्प दोष मुक्ति के लिए प्रार्थना करें। 
  5. मौनी अमावस्या पर सफेद फूल, बताशे, कच्चा दूध, सफेद कपड़ा, चावल व सफेद मिठाई बहते हुए जल में प्रवाहित करें और कालसर्प दोष की शांति के लिए शेषनाग से प्रार्थना करें। 
  6. मौनी अमावस्या पर शाम को पीपल के वृक्ष की पूजा करें तथा पीपल के नीचे दीपक जलाएं। 
  7.  मौनी अमावस्या पर कालसर्प यंत्र की स्थापना करें, इसकी विधि इस प्रकार है- आज सुबह नित्य कर्मों से निवृत्त होकर भगवान शंकर का ध्यान करें और फिर कालसर्प दोष यंत्र का भी पूजन करें। सबसे पहले दूध से कालसर्प दोष यंत्र को स्नान करवाएं, इसके बाद गंगाजल से स्नान करवाएं। तत्पश्चात गंध, सफेद पुष्प, धूप, दीप से पूजन करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का रुद्राक्ष की माला से जप करें। कम से कम एक माला जाप अवश्य करें।  

मंत्र- 
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्। शंखपाल धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
 एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्। सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात:काले विशेषत:।। 
तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।
 इस प्रकार प्रतिदिन कालसर्प यंत्र की पूजा करने तथा मंत्र का जाप करने से शीघ्र ही कालसर्प दोष का प्रभाव होने लगता है और शुभ परिणाम मिलने लगते हैं।

इस शारदीय नवरात्रि में पूजाघर/ घर के मंदिर भूलकर भी नहीं करें ये गलतियां वरना हो सकता हैं तनाव/टेंशन

प्रिय पाठकों/मित्रों, भगवान् की पूजा हर घर में की जाती है, लोग अपने घर में भगवान् को एक खास जगह देते है और उसी जगह पर रोज़ाना उनकी पूजा पाठ की जाती है,एक तरह से माना जाये तो ये स्थान हमारे घर में एक मंदिर के रूप में रहता है.मंदिर चाहे छोटा हो या बड़ा लेकिन उसका वास्तु के अनुसार ही होना शुभ माना जाता है. आज हम आपको आपके घर के मंदिर से जुड़ी ऐसी ज़रूरी बातो के बारे में बताने जा रहे है जिनका ध्यान रखना बहुत ही जरूरी होता है. अगर आप इन बातो का ध्यान नहीं रखते है तो इससे भगवान की कृपा घर-परिवार को नहीं मिल पाती है |
इस शारदीय नवरात्रि में पूजाघर/ घर के मंदिर भूलकर भी नहीं करें ये गलतियां वरना हो सकता हैं तनाव/टेंशन-Do-not-even-forget-the-house-in-this-monastery-Navaratri-These-mistakes-may-be-tension       घर के मंदिर में भगवान की मूर्तियां रखकर पूजा अर्चना करने की परंपरा सदियों पुरानी है। लेकिन वास्तु शास्‍त्र के अनुसार कुछ ऐसे देवी-देवताओं की मूर्त‌ियां भी हैं जिन्हें घर के मंद‌िर में नहीं रखना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इनके घर में होने पर सुख समृद्ध‌ि घर से चली जाती है। वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की यदि आपके घर का पूजाघर गलत दिशा में बना हुआ हैं तो पूजा का अभीष्ट फल प्राप्त नहीं होता हैं फिर भी ऐसे पूजाघर में उत्तर अथवा पूर्वोत्तर दिशा में भगवान की मूर्तियाॅ या चित्र आदि रखने चाहिए । पूजाघर की देहरी को कुछ ऊँचा बनाना चाहिए । पूजाघर में प्रातःकाल सूर्य का प्रकाश आने की व्यवस्था बनानी चाहिए । पूजाघर में वायु के प्रवाह को संतुलित बनाने के लिए कोई खिड़की अथवा रोशनदान भी होनी चाहिए । पूजाघर के द्वार पर मांगलिक चि
न्ह, (स्वास्तीक, ऊँ,) आदि स्थापित करने चाहिए ।
      ब्रह्मा, विष्णु, महेश या सूर्य की मूर्तियों का मुख पूर्व या पश्चिम में होना चाहिए । गणपति एवं दुर्गा की मूर्तियों का मुख दक्षिण में होना उत्तम होता हैं । काली माॅ की मूर्ति का मुख दक्षिण में होना शुभ माना गया हैं । हनुमान जी की मूर्ति का मुख दक्षिण पश्चिम में होना शुभ फलदायक हैं । पूजा घर में श्रीयंत्र, गणेश यंत्र या कुबेर यंत्र रखना शुभ हैं । पूजाघर के समीप शौचालय नहीं होना चाहिए । इससे प्रबल वास्तुदोष उत्पन्न होता हैं । यदि पूजाघर के नजदीक शौचालय हो, तो शौचालय का द्वार इस प्रकार बनाना चाहिए कि पूजाकक्ष के द्वार से अथवा पूजाकक्ष में बैठकर वह दिखाई न दे । 
      पूजाघर का दरवाजा लम्बे समय तक बंद नहीं रखना चाहिए । यदि पूजाघर में नियमित रूप से पूजा नहीं की जाए तो वहाॅ के निवासियों को दोषकारक परिणाम प्राप्त होते हैं । पूजाघर में गंदगी एवं आसपास के वातावरण में शौरगुल हो तो ऐसा पूजाकक्ष भी दोषयुक्त होता हैं चाहे वह वास्तुसम्मत ही क्यों न बना हो क्योंकि ऐसे स्थान पर आकाश तत्व एवं वायु तत्व प्रदूषित हो जाते हैं जिसके कारण इस पूजा कक्ष में बैठकर पूजन करने वाले व्यक्तियों की एकाग्रता भंग होती हैं तथा पूजा का शुभ फला प्राप्त नहीं होता । पूजा घर गलत दिशा में बना हुआ होने पर भी यदि वहां का वातावरण स्वच्छ एवं शांतिपूर्ण होगा तो उस स्थान का वास्तुदोष प्रभाव स्वयं ही घट जाएगा ।
       भगवान के दर्शन मात्र से ही कई जन्मों के पापों का प्रभाव नष्ट हो जाता है। इसी वजह से घर में भी देवी-देवताओं की मूर्तियां रखने की परंपरा है। इस कारण घर में छोटा मंदिर होता है और उस मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं रखी जाती हैं। कुछ लोग एक ही देवता की कई मूर्तियां भी रखते हैं। हमारे वैदिक शास्त्रों में बताया गया है कि घर के मंदिर में किस देवता की कितनी मूर्तियां रखना श्रेष्ठ है।
 भगवान् श्रीगणेश की मूर्ति---- 
प्रथम पूज्य श्रीगणेश के स्मरण मात्र लेने से ही कार्य सिद्ध हो जाते हैं। घर में इनकी मूर्ति रखना बहुत शुभ माना जाता है। वैसे तो अधिकांश घरों में गणेशजी की कई मूर्तियां होती हैं, लेकिन ध्यान रखें कि गजानंद की मूर्तियों की संख्या 1, 3 या 5 नहीं होना चाहिए। यह अशुभ माना गया है। गणेशजी की मूर्तियों की संख्या विषम नहीं होना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार श्रीगणेश का स्वरूप सम संख्या के समान होता है, इस कारण इनकी मूर्तियों की संख्या विषम नहीं होना चाहिए। विषम संख्या यानी 1, 3, 5 आदि। घर में श्रीगणेश की कम से कम दो मूर्तियां रखना श्रेष्ठ माना गया है।
 शिवलिंग की संख्या और आकार--- 
ऐसा माना जाता है कि शिवलिंग के दर्शन मात्र से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। घर में शिवलिंग रखने के संबंध में कुछ नियम बताए गए हैं। घर के मंदिर में रखे गए शिवलिंग का आकार हमारे अंगूठे से बड़ा नहीं होना चाहिए। ऐसा माना जाता है शिवलिंग बहुत संवेदनशील होता है, अत: घर में ज्यादा बड़ा शिवलिंग नहीं रखना चाहिए। इसके साथ ही घर के मंदिर में एक शिवलिंग ही रखा जाए तो वह ज्यादा बेहतर फल देता है। एक से अधिक शिवलिंग रखने से बचना चाहिए।
 हनुमानजी की मूर्तियां--- 
घर के मंदिर में हनुमानजी की मूर्ति की संख्या एक ही होनी चाहिए, क्योंकि बजरंग बली रुद्र (शिव) के अवतार हैं। घर में शिवलिंग भी एक ही होना चाहिए। मंदिर में बैठे हुए हनुमानजी की प्रतिमा रखना श्रेष्ठ होता है। घर के अन्य भाग में हनुमानजी की मूर्ति नहीं, ऐसी फोटो रखी जा सकती है, जिसमें वे खड़े हुए हों। घर के दरवाजे के पास उड़ते हुए हनुमानजी की फोटो रखी जा सकती है। ध्यान रखें पति-पत्नी को शयनकक्ष में हनुमानजी की मूर्ति या फोटो नहीं लगाना चाहिए। शयनकक्ष में राधा-कृष्ण का फोटो लगाया जा सकता है। 
 मां दुर्गा और अन्य देवियों की मूर्तियों की संख्या---- 
घर के मंदिर मां दुर्गा या अन्य किसी देवी की मूर्तियों की संख्या तीन नहीं होना चाहिए। यह अशुभ माना जाता है। यदि आप चाहें तो तीन से कम या ज्यादा मूर्तियां घर के मंदिर में रख सकते हैं। मूर्तियों के संबंध में श्रेष्ठ बात यही है कि मंदिर में किसी भी देवता की एक से अधिक मूर्तियां न हो। अलग-अलग देवी-देवताओं की एक-एक मूर्तियां रखी जा सकती है। 
आइये पंडित दयानन्द शास्त्री से जानते है घर-परिवार में खुशियां और शांति बनाएं रखने के लिए कुछ टिप्स/टोटके/उपाय---
  1. आपके घर के मंदिर के आसपास बाथरूम का होना अच्छा नहीं माना जाता है,इसके अलावा मंदिर को कभी किचन में भी नहीं बनवाना चाहिए,वास्तु के हिसाब से ये अच्छा नहीं माना जाता है. 
  2.  मंदिर को कभी भी अपने घर की दक्षिण और पश्चिम दिशा में ना बनवाये. ऐसा होने से परिवार के सदस्यों पर बहुत बुरा असर पड़ता है. मंदिर को हमेशा घर की पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए,ऐसा करने से घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. 
  3. इस बात का हमेशा ध्यान रखे की आप अपने घर के मंदिर में भगवान की जिन मूर्तियों को रखते है उनमे हमेशा एक इंच का फासला ज़रूर होना चाहिए, इसके अलावा भगवान को कभी भी आमने सामने नहीं रखना चाहिए. ऐसा होने से आपके जीवन में तनाव हो सकता है. 
  4.  वास्तु विज्ञान के मुताबिक भगवान भैरव की मूर्ति घर में नहीं रखनी चाह‌िए। वैसे तो भैरव, भगवान श‌िव का ही एक रूप हैं। लेकिन भैरव, तामस‌िक देवता हैं। तंत्र मंत्र द्वारा इनकी साधना की जाती है। इसल‌िए घर में भैरव की मूर्त‌ि नहीं रखनी चाह‌िए। 
  5. भगवान श‌िव का एक और रूप है- नटराज। वास्तु शास्त्र के अनुसार नटराज रूप वाली भगवान श‌िव की प्रत‌िमा भी घर में नहीं होनी चाह‌िए। इसका कारण यह है क‌ि नटराज रूप में श‌िव, तांडव करते हैं इसल‌िए इन्हें घर में न लाएं। 
  6. ग्रह शांति के लिए शनि की पूजा अर्चना तो की जाती है लेकिन ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक शनि की मूर्ति घर नहीं लानी चाहिए। शनि की ही तरह, ज्योत‌िषशास्‍त्र में राहु-केतु की भी पूजा की सलाह तो दी जाती है, लेक‌िन इनकी मूर्त‌ि घर लाने से मना किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंक‌ि राहु-केतु, दोनों छाया ग्रह होने के साथ ही पाप ग्रह भी है। 
  7. वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर के मंदिर में भगवान की सिर्फ सौम्य रूप वाली मूर्त‌ियां ही होनी चाह‌िए। ऐसे में मां दुर्गा के कालरात्र‌ि स्वरूप वाली मूर्त‌ि भी घर में नहीं रखनी चाहिए। 

जानिए कुछ अतिरिक्त विशेष सावधानियां--- 
  1. किसी भी प्रकार के पूजन में कुल देवता, कुल देवी, घर के वास्तु देवता, ग्राम देवता आदि का ध्यान करना भी आवश्यक है। इन सभी का पूजन भी करना चाहिए। 
  2. पूजन में हम जिस आसन पर बैठते हैं, उसे पैरों से इधर-उधर खिसकाना नहीं चाहिए। आसन को हाथों से ही खिसकाना चाहिए।
  3. देवी-देवताओं को हार-फूल, पत्तियां आदि अर्पित करने से पहले एक बार साफ पानी से अवश्य धो लेना चाहिए। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पीले रंग का रेशमी कपड़ा चढ़ाना चाहिए। माता दुर्गा, सूर्यदेव व श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए लाल रंग का, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सफेद वस्त्र अर्पित करना चाहिए। 
  4. पूजन कर्म में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा के बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए। ऐसा होने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है। 
  5. यदि आप प्रतिदिन घी का एक दीपक भी घर में जलाएंगे तो घर के कई वास्तु दोष भी दूर हो जाएंगे। 
  6. सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु, ये पंचदेव कहलाते हैं, इनकी पूजा सभी कार्यों में अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। प्रतिदिन पूजन करते समय इन पंचदेव का ध्यान करना चाहिए। इससे लक्ष्मी कृपा और समृद्धि प्राप्त होती है 
  7. तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है। इसकी पत्तियों पर हर रोज जल छिड़कर पुन: भगवान को अर्पित किया जा सकता है। 
  8. दीपक हमेशा भगवान की प्रतिमा के ठीक सामने लगाना चाहिए। कभी-कभी भगवान की प्रतिमा के सामने दीपक न लगाकर इधर-उधर लगा दिया जाता है, जबकि यह सही नहीं है। 
  9. घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती उपयोग किया जाना चाहिए। जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ बताई गई है। 
  10. पूजन में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक कार्यों में खंडित सामग्री शुभ नहीं मानी जाती है।
  11. शिवजी को बिल्व पत्र अवश्य चढ़ाएं और किसी भी पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए अपनी इच्छा के अनुसार भगवान को दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए, दान करना चाहिए। दक्षिणा अर्पित करते समय अपने दोषों को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। दोषों को जल्दी से जल्दी छोड़ने पर मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होंगी। --
  12. भगवान सूर्य की 7, श्रीगणेश की 3, विष्णुजी की 4 और शिवजी की 1/2 परिक्रमा करनी चाहिए। 
  13. घर में या मंदिर में जब भी कोई विशेष पूजा करें तो अपने इष्टदेव के साथ ही स्वस्तिक, कलश, नवग्रह देवता, पंच लोकपाल, षोडश मातृका, सप्त मातृका का पूजन भी अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। इन सभी की पूरी जानकारी किसी ब्राह्मण (पंडित) से प्राप्त की जा सकती है। विशेष पूजन पंडित की मदद से ही करवाने चाहिए, ताकि पूजा विधिवत हो सके।
  14. घर में पूजन स्थल के ऊपर कोई कबाड़ या भारी चीज न रखें। 
  15. भगवान शिव को हल्दी नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही शंख से जल चढ़ाना चाहिए। 
  16. पूजन स्थल पर पवित्रता का ध्यान रखें। चप्पल पहनकर कोई मंदिर तक नहीं जाना चाहिए। चमड़े का बेल्ट या पर्स अपने पास रखकर पूजा न करें। पूजन स्थल पर कचरा इत्यादि न जमा हो पाए। 
  17. किसी भी भगवान के पूजन में उनका आवाहन (आमंत्रित करना) करना, ध्यान करना, आसन देना, स्नान करवाना, धूप-दीप जलाना, अक्षत (चावल), कुमकुम, चंदन, पुष्प (फूल), प्रसाद आदि अनिवार्य रूप से होना चाहिए। 
  18. सभी प्रकार की पूजा में चावल विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं। पूजन के लिए ऐसे चावल का उपयोग करना चाहिए जो अखंडित (पूरे चावल) हो यानी टूटे हुए ना हो। चावल चढ़ाने से पहले इन्हें हल्दी से पीला करना बहुत शुभ माना गया है। इसके लिए थोड़े से पानी में हल्दी घोल लें और उस घोल में चावल को डूबोकर पीला किया जा सकता है। 
  19.  पूजन में पान का पत्ता भी रखना चाहिए। ध्यान रखें पान के पत्ते के साथ इलाइची, लौंग, गुलकंद आदि भी चढ़ाना चाहिए। पूरा बना हुआ पान चढ़ाएंगे तो श्रेष्ठ रहेगा। 

घर के मंदिर का बल्ब देता हें नुकसान/हानि—
 आजकल बहुत से लोग घरों या दुकानों में छोटा-सा मंदिर बनाकर उसमें गणेश जी या लक्ष्मी जी की प्रतिमा स्थापित कर देते हैं, वहां घी का दीपक जलाने की बजाय बिजली का बल्व लगा देते हैं। यदि आपने भी गणेश जी के स्थान में बिजली का लाल बल्ब जला रखा है तो इसे उतार दें। यह शुभदायक नहीं है, इससे आपके खाते में हानि के लाल अंक ही आएंगे। अतः घर के मंदिर में कभी भी बिजली के बल्व का इस्तेमाल न करें। कहते मंदिर जाने से मन को शांति मिलती है। 
    मंदिर वो स्थान है जहां से व्यक्ति को आत्मिक शांति के साथ ही सुख-समृद्धि भी मिलती है। लेकिन वास्तु के अनुसार घर के आसपास मंदिर का होना शुभ नहीं माना जाता है। ऐसे मंदिर आपका घर बिगाड़ सकते हैं। आपको ऐसे मंदिरों में नहीं जाना चाहिए जो आपके घर के पास है। अगर आप ऐसे मंदिरों में पूजा करते हैं तो उन मंदिरों के प्रभाव से आपका घर बिगड़ सकता है। आपकी पूजा पाठ का अशुभ फल आपके घर पडऩे लगता है।

अक्षय तृतीया (आखा तीज) 2017 पर बना वर्षों बाद अमृतसिद्घि योग के महासंयोग

Akshay-Tritiya-Aakha-Teej-on-2017-years-after-the-Mahasagya-of-Amrit-Siddhi-Yoga-अक्षय तृतीया (आखा तीज) 2017 पर बना वर्षों बाद अमृतसिद्घि योग के महासंयोगस्वयंसिद्घ मुहूर्त कही जाने वाली अक्षय तृतीया (आखा तीज) अनेक वर्षों पश्चात् अमृतसिद्घि योग के महासंयोग में आ रही है। इस योग में स्नान, दान तथा मांगालिक कार्यों का फल कई गुना अधिक शुभ माना गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार ग्रहगोचर की दृष्टि से देखें तो इस बार अक्षय तृतीया(आखा तीज) पर नक्षत्र मंडल में रोहिणी का प्रभाव 84 फीसदी रहेगा। वर्षाकाल में इसका प्रभाव आमजन की दृष्टि से हितकारी रहेगा। 29 अप्रैल 2017 को शनिवार के दिन रोहिणी नक्षत्र की साक्षी में अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। शनिवार के दिन रोहिणी नक्षत्र का होना अमृतसिद्घि योग बना रहा है। यह योग सुबह 5.51 से 10.56 बजे तक रहेगा। सूर्य के उदयकाल से करीब 5 घंटे तक दिव्य योग की साक्षी का शुभ प्रभाव दिन भर रहेगा। इस योग में शुभ तथा मांगलिक कार्य करना श्रेष्ठ रहेगा। वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया (आखातीज) कहते हैं। 
        ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है, इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है, वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है, जो कभी क्षय नहीं होती उसे अक्षय कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि अक्षय तृतीया की यह तिथि परम पुण्यमय है ।भविष्य पुराण में लिखा है कि इस दिन से ही सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ हुआ था। भगवान विष्णु ने नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था। 
       माना जाता है कि ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव इसी दिन हुआ था। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार अक्षय तृतीया(आखा तीज) को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है। आज के दिन ऐसी मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं,नवीन वस्त्र, आभूषण आदि धारण करने और नई संस्था, समाज आदि की स्थापना या उदघाटन का कार्य श्रेष्ठ माना जाता है। 
        ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार अक्षय तृतीया(आखा तीज) के दिन ही भगवान परशुराम जी का अवतार हुआ था जो आज भी अजर अमर है इसलिए इसे चिरंजीवी तिथि भी कहते हैं। त्रेता युग का आरंभ भी इसी तिथि से माना गया है, इसलिए इसे युगादितिथि भी कहते हैं। जो लोग अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति चाहते हैं, उनको अक्षय तृतीया पर व्रत जरूर रखना चाहिए। उत्तम पति की प्राप्ति के लिए भी कुंवारी कन्याओं को अक्षय तृतीया का व्रत रखना चाहिए। जिन लोगों को संतान का सुख नहीं मिल रहा है, उनको भी अक्षय तृतीया का व्रत जरूर रखना चाहिए। 
 जानिए अक्षय तृतीया 2017 पूजा का शुभ मुहूर्त--- 
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार अक्षय तृतीया 28 अप्रैल 2017 को सुबह 10.30 बजे से शुरू हो होगी जो 29 अप्रैल 2017 को सुबह 6.55 बजे तक ही रहेगी। पूजा का शुभ मुहूर्त 28 तारीख को सुबह 10:29 बजे से दोपहर के 12:17 बजे तक का है।
 ======================================================================= 
परशुराम जयंती ---
 जैनियों और सनातन धर्म के लोगों के लिए ये दिन काफी पावन है तो वहीं कुछ लोग आज के दिन परशुराम जयंति के रूप में मनाते हैं क्योंकि स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में उल्लेख है कि वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को रेणुका के गर्भ से भगवान विष्णु ने परशुराम रूप में जन्म लिया था। 
==================================================================== 
जानिए अक्षय तृतीया को क्यों विशेष तिथि मानी जाती है ?? 
 अक्षय तृतीया के दिन से ही महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की रचना आरंभ की थी। महाभारत के युधिष्ठिर को अक्षय पात्र की प्राप्ति भी इसी दिन हुई थी, जिसके बारे में यह किंवदंती प्रचलित है कि उसमें रखा गया भोजन समाप्त नहीं होता था। 
 श्रीबांकेबिहारी जी के चरणों के दर्शन--- 
 ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार श्रीधाम वृंदावन में श्रीबांकेबिहारी जी महाराज का विश्वप्रसिद्ध मंदिर है। यहां प्रभु के श्रीचरण पूरे वर्ष ढके रहते हैं। समस्त भक्तों को अपने प्रिय ठाकुर जी के चरणों के दर्शन केवल अक्षय तृतीया के दिन ही मिलते है। वृंदावन के मंदिरों में ठाकुर जी का शृंगार चंदन से दिव्य रूप में किया जाता है, ताकि प्रभु को चंदन से शीतलता प्राप्त हो सके। बाद में इसी चंदन की गोलियां बनाकर भक्तों के बीच प्रसाद रूप में वितरित कर दी जाती हैं।
        ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार स्कंदपुराण और भविष्य पुराण में यह उल्लेख है कि इसी दिन महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र परशुराम का अवतरण हुआ था। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। भगवान शिव का दिया अमोघ अस्त्र परशु (फरसा) धारण करने के कारण ही इनका नाम परशुराम पडा। भगवान परशुराम का पूजन करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। अक्षय तृतीया के दिन ही नर-नारायण, परशुराम और हयग्रीव अवतार हुए थे। अक्षय तृतीया के दिन से ही श्री बद्रीनारायण की दर्शन यात्रा का शुभारंभ होता है, जो प्रमुख चार धामों में से एक है। 
      ऐसी मान्यता है कि नर-नारायण का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था। अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान कृष्ण एवं सुदामा का पुनः मिलाप हुआ था। अक्षय तृतीया को युगादि तिथि भी कहा जाता है। युगादि का शाब्दिक अर्थ है युग आदि अर्थात एक युग का आरंभ। इस दिन त्रेता युग का आरंभ हुआ था। त्रेता युग में ही भगवान राम का जन्म हुआ था जो कि सूर्य वंशी थे। सूर्य इस दिन पूर्ण बली होता है इसीलिए इस दिन सूर्य वंश प्रधान त्रेता युग का आरंभ हुआ। भगवान शिव ने आज के दिन ही माॅ लक्ष्मी एवं कुबेर को धन का संरक्षक नियुक्त किया था। इसीलिए इस दिन सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुएं खरीदने का विशेष महत्व है।
 =========================================================================== 
     ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार पुराणों में लिखा है कि आज के दिन गंगा स्नान करने से तथा भगवत पूजन से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यहाँ तक कि इस दिन किया गया जप, तप, हवन, स्वाध्याय और दान भी अक्षय हो जाता है। यह तिथि यदि सोमवार तथा रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो इस दिन किए गए दान, जप-तप का फल बहुत अधिक बढ़ जाता हैं। इसके अतिरिक्त यदि यह तृतीया मध्याह्न से पहले शुरू होकर प्रदोष काल तक रहे तो बहुत ही श्रेष्ठ मानी जाती है।
      यह भी माना जाता है कि आज के दिन मनुष्य अपने या स्वजनों द्वारा किए गए जाने-अनजाने अपराधों की सच्चे मन से ईश्वर से क्षमा प्रार्थना करे तो भगवान उसके अपराधों को क्षमा कर देते हैं और उसे सदगुण प्रदान करते हैं, अतः आज के दिन अपने दुर्गुणों को भगवान के चरणों में सदा के लिए अर्पित कर उनसे सदगुणों का वरदान माँगने की परंपरा भी है। 
===================================================================== 
जानिए अक्षय तृतीया(आखा तीज) के दिन करने वाले कुछ विशेष उपाय ---
   ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार अक्षय तृतीया के द‌िन सोने चांदी की चीजें खरीदी जाती हैं। मान्यता है क‌ि इससे बरकत आती है। अगर आप भी बरकत चाहते हैं इस द‌िन सोने या चांदी के लक्ष्मी की चरण पादुका लाकर घर में रखें और इसकी न‌ियम‌ित पूजा करें। क्योंक‌ि जहां लक्ष्मी के चरण पड़ते हैं वहां अभाव नहीं रहता है। आज के दिन 11 कौड़‌ियों को लाल कपडे में बांधकर पूजा स्थान में रखे इसमें देवी लक्ष्मी को आकर्ष‌ित करने की क्षमता होती है। इनका प्रयोग तंत्र मंत्र में भी होता है। इसका कारण यह है क‌ि देवी लक्ष्मी के समान ही कौड़‌ियां समुद्र से उत्पन्न हुई हैं। न‌ियम‌ित केसर और हल्‍दी से इसकी पूजा देवी लक्ष्मी के साथ करने से आर्थ‌िक परेशान‌ियों में लाभ म‌िलता है, एकाक्षी नार‌ियल ज‌िसकी एक आंख होती है। ऐसे नार‌ियल को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। अक्षय तृतीय के द‌िन इसे घर में पूजा स्‍थान में स्‍थाप‌ित करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। 
        ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस दिन स्वर्गीय आत्माओं की प्रसन्नता के लिए जल कलश, पंखा, खड़ाऊं, छाता, सत्तू, ककड़ी, खरबूजा आदि फल, शक्कर तथा मिष्टान्न, घृतादि पदार्थ ब्राह्मण को दान करने चाहिए जिससे पितरों की कृपा प्राप्त होती रहे। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस दिन गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, धान्य, गुड़, चांदी, नमक, शहद और कन्या ये बारह वस्तुएं दान करने का महत्व है। जो भी भूखा हो वह अन्न दान का पात्र है। जो जिस वस्तु की इच्छा रखता है यदि वह वस्तु उसे बिना मांगे दे दी जाय तो दाता को पूरा फल मिलता है। सेवक को दिया दान एक चैथाई फल देता है। कन्या दान इन सभी दानों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है इसीलिए इस दिन कन्या का विवाह किया जाता है। 
       ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस प्रकार अक्षय तृतीया को जो भी दान किया जाता है वह अक्षय हो जाता है, दान देने वाला सूर्य लोक को प्राप्त होता है। इस तिथि को जो व्रत करता है वह ऋद्धि, वृद्धि एवं श्री से संपन्न होता है। इस दिन किये गये अच्छे व बुरे सभी कर्म व स्नान, दान, जप, होम, स्वाध्याय, तर्पण आदि। अक्षय हो जाते हैं। अतः इस दिन शुभ कर्म ही करने चाहिए।

जानिए 2017 के व्रत, पर्व एवम त्यौहार

Know-the-festiwals-in-2017-जानिए 2017 के व्रत, पर्व एवम त्यौहार

    अपने पाठकों की सुविधा के लिए वर्ष 2017 के व्रत, पर्व व त्यौहार की विषय सूची हर माह के रुप में दे रहे हैं। इसमें जनवरी 2017 से लेकर दिसंबर 2017 तक के सभी व्रत व त्यौहारो का वर्णन है। 
 आइये जानें वर्ष 2017 के सम्पूर्ण व्रत एवं त्योहार-- 
जानिए जनवरी 2017 महीने के व्रत, पर्व एवम त्यौहार:-- 
  • 1, रविवार अंग्रेजी नव वर्ष 
  • 3, मंगलवार शुक्ल पंचमी 
  • 8, रविवार पुत्रदा एकादशी 
  • 12, गुरुवार पौष पूर्णिमा 
  • 14, शनिवार मकर संक्रांति 
  • 15, रविवार गणेश चतुर्थी 
  • 17, मंगलवार कृष्ण पंचमी 
  • 23, सोमवार षटतिला एकादशी, 
  • 24, शनिवार व्रत पूर्णिमा 
  • 27, शुक्रवार मौनी अमावश्या 

 फरवरी 2017 
  • 1, बुधवार वसंत पंचमी 
  • 7, मंगलवार जया एकादशी 
  • 10, शुक्रवार माघी पूर्णिमा 
  • 15, बुधवार कृष्ण पंचमी 
  • 22, बुधवार विजया एकादशी 
  • 24,शुक्रवार महाशिवरात्रि 

 मार्च 2017 
  • 3, शुक्रवार शुक्ल पंचमी 
  • 8, बुधवार अमला एकादशी 
  • 12, रविवार पूर्णिमा होलिका दहन 
  • 13, सोमवार सर्वत्र होली 
  • 17, शुक्रवार कृष्ण पंचमी 
  • 24, शुक्रवार पापमोचनी एकादशी 
  • 29, बुधवार "नववर्ष" चैत्र नवरात्र 

 अप्रैल 2017 
  • 1, शनिवार शुक्ल पंचमी 
  • 2, रविवार चैती छठ 
  • 3, सोमवार महानिशा पूजा 
  • 4, मंगलवार दुर्गा अष्टमी 
  • 5, बुधवारवार श्रीरामनवमी 
  • 6, गुरुवार नवरात्र व्रत पारणा 
  • 7, शुक्रवार कामदा एकादशी 
  • 10, सोमवार व्रत पूर्णिमा 
  • 11, मंगलवार चैती पूर्णिमा 
  • 16 रविवार कृष्ण पंचमी 
  • 22, शनिवार वरुथनी एकादशी 
  • 29, शनिवार अक्षय तृतीया 
  • 30, रविवार शुक्ल पंचमी 

 मई 2017 
  •  4,गुरुवार सीता नवमी 
  • 6, शनिवार मोहनी एकादशी 
  • 10, बुधवार बुद्धपूर्णिमा 
  • 16, मंगलवार कृष्ण पंचमी 
  • 22, सोमवार अचला एकादशी 
  • 25, गुरुवार कृष्ण वटसावित्री व्रत 
  • 30, मंगलवार शुक्ल पंचमी 

 जून 2017 
  • 5, सोमवार निर्जला एकादशी 
  • 8, गुरुवार व्रत पूर्णिमा 
  • 9, शुक्रवार शुक्ल वटसावित्री व्रत 
  •  14, बुधवार कृष्ण पंचमी 
  •  20, मंगलवार योगिनी एकादशी 
  • 28, बुधवार शुक्ल पंचमी 

 जुलाई 2017 
  • 4, मंगलवार हरि शयनी एकादशी 
  • 8, शनिवार व्रत पूर्णिमा 
  • 9, रविवार गुरु पूर्णिमा 
  • 10, सोमवार श्रावण मासारम्भ 
  • 14, शुक्रवार कृष्ण पंचमी 
  • 19, बुधवार कामदाएकादशी 
  • 28, शुक्रवार नागपंचमी 

 अगस्त 2017 
  • 3, गुरुवार पुत्रदा एकादशी 
  • 7, सोमवार रक्षाबंधन 
  • 11, शुक्रवार बहुला गणेशचौथ 
  • 12, शनिवार कृष्ण पंचमी 
  • 14, सोमवार श्री कृष्ण जन्माष्टमी 
  • 18, शुक्रवार जया एकादशी 
  • 21, सोमवार कुशोत्पाटिनी अम. 
  • 24, गुरुवार हरितालिका तीज 
  • 26, शनिवार ऋषिपंचमी 
  • 27, रविवार ललही छठ 

 सितम्बर 2017 
  • 2, शनिवार पद्मा एकादशी 
  • 5, मंगलवार अनंत चतुर्दशी, व्रत पूर्णिमा 
  • 6, बुधवार भाद्र पूर्णिमा महाल्यारम्भ, पितृ तर्पण 
  • 10, रविवार कृष्ण पंचमी 
  • 13, बुधवार जीवित्पुत्रिका व्रत 
  • 16 शनिवार इंदिरा एकादशी 
  • 17, रविवार विश्वकर्मा पूजा 
  • 19, मंगलवार पितृविसर्जन 
  • 21, गुरुवार शारदीय नवरात्रा 
  • 25, सोमवार शुक्ल पंचमी, बिल्वाभिमंत्रण 
  • 27, बुधवार महानिशा पूजा 
  • 28 गुरुवार दुर्गा अष्टमी 
  • 29, शुक्रवार महानवमी हवन 
  • 30, शनिवार विजयादशमी 

 अक्टूबर 2017 
  • 1, रविवार पापांकुशा एकादशी 
  •  5, गुरुवार शरदपूर्णिमा 
  • 10 मंगलवार कृष्ण पंचमी 
  • 15, रविवार रम्भा एकादशी 
  • 17, मंगलवार धनत्रयोदशी 
  • 19, गुरुवार दीपावली 
  • 20, शुक्रवार गोवर्धनपूजा 
  • 21, शनिवार भैया दूज 
  • 24, मंगलवार शुक्ल पंचमी, छठ नहाय खाय 
  • 26, गुरुवार सूर्यषष्ठी व्रत 
  • 29, रविवार अक्षय नवमी 
  • 31, मंगलवार प्रबोधनी एकादशी 

 नवम्बर 2017 
  • 1, बुधवार तुलसी विवाह 
  • 3, शुक्रवार व्रत पूर्णिमा
  •  4, शनिवार कार्तिक पूर्णिमा
  •  8, बुधवार कृष्ण पंचमी 
  • 14, मंगलवार उत्पन्नाएकादशी 
  • 23, गुरुवार विवाह पंचमी 
  • 29, बुधवार मोक्षदा एकादशी 

 दिसंबर 2017 
  • 3, रविवार व्रत पूर्णिमा 
  • 8, शुक्रवार कृष्ण पंचमी 
  • 13, बुधवार सफलाएकादशी 
  • 23, शनिवार शुक्ल पंचमी 
  • 29, शुक्रवार पुत्रदा एकादशी
Ads By Google info

वास्तु

हस्त रेखा

ज्योतिष

फिटनेस मंत्र

चालीसा / स्त्रोत

तंत्र मंत्र

निदान

ऐसा क्यों

धार्मिक स्थल

 
Copyright © Asha News