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जानिए कब, क्यों और कैसे लगेगा वर्ष का 2020 पहला चंद्र ग्रहण

इस वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण 10 जनवरी (शुक्रवार) को लगेगा। इसका प्रभाव रात 10 बजकर 37 मिनट से 11 जनवरी को देर रात 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। चंद्र ग्रहण के दौरान, चंद्रमा का लगभग 90 फीसदी भाग पृथ्वी द्वारा आंशिक रूप से ढक लिया जाएगा। जो इसके उपछाया का कारण होगा। यह ग्रहण लगभग 4 घंटे 8 मिनट तक रहेगा।
  • ग्रहण शुरू होने का समय –  10 जनवरी 2020, 22:37 PM
  • चंद्र ग्रहण समाप्त होने का समय – 11 जनवरी 2020, 02:42 AM
  • ग्रहण की कुल अवधि – 00:40...

10 january 2020 will be the first lunar eclipse of the year- इस वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण 10 जनवरी शुक्रवार10 जनवरी 2020 को चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा, मिथुन राशि में और पुनर्वसु नक्षत्र में होगा।मिथुन राशि में तब राहु भी रहेगा। इसका मतलब है कि इस राशि वालों के साथ हर प्रकार की घटना अचानक होगी। चंद्र की दृष्टि धनु राशि पर रहेगी। इसलिए इस राशि वालों को बेहद सावधान रहना होगा। इसके अलावा अन्य राशि वालों को भी लाभ हानी होगी। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार यह चंद्र ग्रहण मिथुन राशि में प्रथमा तिथि को कृष्ण पक्ष और पुनर्वसु नक्षत्र के दौरान घटित होगा। इसलिये मिथुन राशि के जातकों पर इस ग्रहण के कारण कुछ परिवर्तन अपने जीवन में देखने को मिल सकते हैं।
ग्रहण की कुल अवधि- 4 घंटे 06 मिनट

कहां दिखाई देगा 10 जनवरी 2020 का चंद्र ग्रहण- भारत, अफ्रीका, एशिया, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया
इस चन्द्र ग्रहण सबसे विशेष बात यह है कि यह भारत में भी दिखाई देगा। भारत के अलावा यह ग्रहण यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया  में भी दिखाई देगा। 10 जनवरी 2020 को इस साल आने वाले साल 2020 में कुल 6 ग्रहण लगने वाले हैं। इनमें तीन चंद्र ग्रहण हैं और दो सूर्य ग्रहण हैं। दिसंबर में साल 2020 का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा। 
वर्ष 2020 में कब-कब लगेगा सूर्य और चंद्र ग्रहण, क्या है समय और तारीख ---
अब अगर आप सोच रहे हैं कि आने वाले साल में कितने ग्रहण लेंगे तो आपको बता दें कि साल 2020 में कुल 6 ग्रहण लगेंगे। जिनमें से 3 चंद्र ग्रहण होंगे, 2 सूर्य ग्रहण।
10 जनवरी 2020 को लगने वाले चंद्र ग्रहण का समय 
ग्रहण का टाइम:  रात 10:37 से 11 जनवरी को 2:42 तक 
कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण: भारत, अफ्रीक, एशिया, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया  
5 जून, 2020 को लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण..
चंद्र ग्रहण का समय: रात को 11:15 से 6 जून को 2:34 तक
कहां कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण: भारत, अफ्रीक, एशिया, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया  
5 जुलाई 2020 चंद्र ग्रहण
ग्रहण का समय: सुबह 08:37 से 11:22 तक।
कहां कहां दिखेगा ग्रहण: दक्षिण पूर्व यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका
30 नवंबर, 2020 चंद्र ग्रहण
ग्रहण का समय: दोपहर को 1:02 से शुरू होगा और शाम 5:23 तक

कहां-कहां दिखेगा ग्रहण: भारत, प्रशांत महासागर, एशिया, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया  
पोष या शाकम्बरी पूर्णिमा और चंद्रग्रहण एक साथ होने की वजह से गुरु पूजा भी सूतक लगने से पहले कर लेना ठीक होगा। इस ग्रहण का सूतक भी ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले शुरू हो जाएगा। इसके मुताबिक भारतीय समय के अनुसार 10 जनवरी की सुबह 10 बजे से ग्रहण का सूतक आरंभ हो जाएगा। सूतक से पहले ही गुरु पूर्णिमा की पूजा के बाद सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।

जानिए ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी से आपकी राशि पर क्या होगा प्रभाव 10 जनवरी 2020 के चन्द्र ग्रहण का--
मेष राशि -- इस जातकों के लिये चंद्र ग्रहण आर्थिक रुप से लाभप्रद कहा जा सकता है। आपको भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। कर्म करने में विश्वास रखें। इससे आपको लाभ होगा। कामकाज का दबाव रहेगा लेकिन कार्योन्नति की उम्मीद भी आप कर सकते हैं। हालांकि परिवार में किसी बात पर विवाद हो सकता है, माता की सेहत के प्रति भी आपको ध्यान देने की आवश्यकता पड़ सकती है। किसी बहुत ही करीबी दोस्त से थोड़ा सावधान रहने की आवश्यकता भी है। 
वृषभ राशि वालों को कंधे का दर्द संभावित। 
मिथुन राशि – पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि (शुक्रवार) 10 जनवरी 2020 को होने वाला आपके लिये दांपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव आने का संकेत भी दे रहा है। अपने स्वास्थ्य का भी विशेष रुप से ध्यान रखने की आवश्यकता है। शारीरिक कष्ट मिल सकता है। अचानक से किसी यात्रा पर भी आपको जाना पड़ सकता है अपने आप को इस स्थिति के लिये तैयार रखें। ग्रहण के दिन दूध का सेवन न करें तो बेहतर रहेगा। गले संबंधी रोगों के प्रति भी सचेत रहें।
कर्क राशि– ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि 10 जनवरी 2020 को होने वाले चंद्रग्रहण पर आपके लिये विशेष रुप से सतर्क रहने का समय रहेगा। मानसिक तौर पर इस समय आप तनावग्रस्त रह सकते हैं। गुप्त शत्रु से धन की हानि भी आपको उठानी पड़ सकती है। कामकाज संबंधी चिंताएं भी बढ़ने के आसार हैं। अचानक से कहीं स्थानातंरण के आदेश मिल सकते हैं। जहां तक संभव हो यात्रा से बचने का प्रयास करें। गुप्त रोग की संभावनाएं भी बन रही हैं सावधान रहें। 
सिंह राशि वालों को भूमि भवन से लाभ सम्भव।
कन्या राशि वालों को स्थान परिवर्तन सम्भव ।
तुला राशि वालों को धन का लाभ। 
वृश्चिक राशि वालों को रोग , चिकित्सा अथवा ऑपरेशन होने की संभावना।।
धनु राशि वालों को धन का नुकसान सम्भव।
मकर राशि – मकर जातकों के लिये यह चंद्र ग्रहण पीड़ा देने वाला रह सकता है। विशेषकर धन निवेश के मामले में बचकर रहें हानि उठानी पड़ सकती है। खर्चों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। रोमांटिक जीवन में आपकी खुशियों को ग्रहण लग सकता है। विवाहित दंपतियों के बीच जहां वाद-विवाद की संभावनाएं बढ़ सकती हैं वहीं अविवाहित प्रेमी जातक भी एक दूसरे को शक की निगाह से देख सकते हैं। जिन जातकों की जन्मकुंडली में भी यही ग्रहण योग है उन्हें विशेष रुप से सचेत रहने की आवश्यकता है, उनके लिये शादी का बंधन टूटने की कगार पर पंहुच सकता है। 
कुंभ राशि – चंद्रग्रहण के दौरान कुंभ जातकों को हो सकता है कि अपेक्षित लाभ न मिले। आपको नुक्सान उठाना पड़ सकता है। अपने शत्रुओं से सावधान रहने की आवश्यकता है। व्यवसाय में भी प्रतिस्पर्धी आपकी परेशानियों को बढ़ा सकते हैं। इस दौरान यात्रा का जोखिम न ही उठाएं तो आपके लिये बेहतर रहेगा। आर्थिक तौर पर भी किसी तरह का निवेश न करें धन हानि के योग हैं। सेहत का ध्यान व नाजुक अंगों को बचाकर रखें। नशीले पदार्थों के सेवन से बचें।
मीन राशि – पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि मीन राशि वाले जातकों के लिये कर्म भाव में यह ग्रहण लग रहा है। करियर के मामले में थोड़ा सचेत रहें। कामकाज सावधानी से करें। आर्थिक तौर पर आपके खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है, आमदनी से अधिक खर्च आपकी चिंता को बढ़ा सकता है। कामकाज में देरी भी आपके मानसिक तनाव को बढ़ा सकती है। 
जानिए कैसे लगता है चंद्रग्रहण--
पूर्णिमा की रात को चंद्रमा पूर्णत: गोलाकार दिखाई पड़ना चाहिए, किन्तु कभी-कभी अपवादस्वरूप चंद्रमा के पूर्ण बिम्ब पर धनुष या हसिया के आकार की काली परछाई दिखाई देने लगती है। कभी-कभी यह छाया चांद को पूर्ण रूप से ढक लेती है। पहली स्थिति को चन्द्र अंश ग्रहण या खंड-ग्रहण कहते हैं। दूसरी स्थिति को चंद्र पूर्ण ग्रहण या खग्रास कहते हैं। चंद्रमा सूर्य से प्रकाश प्राप्त करता है। उपग्रह होने के नाते चंद्रमा अपने अंडाकार कक्ष-तल पर पृथ्वी का लगभग एक माह में पूरा चक्कर लगा लेता है। चंद्रमा और पृथ्वी के कक्ष तल एक दूसरे पर 5 डिग्री का कोण बनाते हुए दो स्थानों पर काटते हैं। इन स्थानों को ग्रंथि कहते हैं। चंद्रमा और पृथ्वी परिक्रमण करते हुए सूर्य की सीधी रेखा में नहीं आते हैं इसलिए पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर नहीं पड़ पाती है, किन्तु पूर्णिमा की रात्रि को परिक्रमण करता हुआ चंद्रमा पृथ्वी के कक्ष के समीप पहुंच जाए और पृथ्वी की स्थिति सूर्य और चंद्रमा के बीच ठीक एक सीध में हो तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। चंद्रमा की ऐसी स्थिति को चन्द्र ग्रहण कहते हैं।

जानिए 24 जनवरी 2020 को कैसे होगा दूर सभी राशियों से शनि का प्रकोप

हिंदू धर्म में हर ग्रह का अपना एक अलग स्थान है. इन्ही ग्रहों के आधार पर यहाँ भविष्यवाणीयाँ की जाती है l समय समय पर इन ग्रहों का प्रभाव हमारे सांसारिक जीवन पर बहुत ही महत्वपूर्ण होता है l और इन सब में भी शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव तो बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है इसीलियें हमारे ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द जी शास्त्री ने आप सभी के लिए शनि की साढेसाती का प्रभाव किन-किन राशियों पर कब-कब होगा यहाँ बताया है. आप सभी यह महत्वपूर्ण जानकारी आप तक व अन्य लोगों तक जरुर पहुंचाएं.
Know-how-far-Saturn-will-get-out-of-all-zodiac-signs-on-24-January-2020- जानिए 24 जनवरी 2020 को कैसे होगा दूर सभी राशियों से शनि का प्रकोपवैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रह गोचर का विशेष महत्व होता है। जब कोई ग्रह एक राशि को छोड़कर दूसरी राशि में स्थान परिवर्तन करता है तो उसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है। अगले वर्ष की शुरुआत ( 2020) में ग्रहों की स्थितियों में कई बड़े फेरबदल होने वाले हैं। वर्ष 2020 के शुरूआती दिनों में ही शनि अपनी राशि बदलेंगे। शनि 24 जनवरी 2020 को धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। शनि के राशि परिवर्तन से अगले वर्ष 2020 में किन राशियों से शनि की अशुभ छाया हट जाएगी और किन राशि पर इनका प्रकोप रहेगा।
    शनि के गोचर, साढ़ेसाती और महादशा का हमारे जीवन में बहुत महत्व होता है, क्योंकि इसके प्रभाव से मनुष्य के जीवन में बड़े बदलाव होते हैं, जैसे शादी , नौकरी, व्यवसाय, संतान आदि। हालांकि ये परिवर्तन सुखद और दुखद दोनों हो सकते हैं। शनि देव बुध, शुक्र और राहु के साथ मित्रता रखते हैं तो सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ इनका संबंध शत्रुता का है। बृहस्पति और केतु के साथ इनका संबंध सम रहता है। मकर तथा कुंभ राशियों के ये स्वामी माने जाते हैं।  मिथुन और तुला राशि वालों की ढैय्या साल 24 जनवरी साल 2020 में शुरु होने जा रही है। 
   यहां से मकर की द्वितीय ढैय्या, धनु की अंतिम ढैय्या और वृश्चिक राशि वाले शनि की साढ़े साती से मुक्त हो जाएंगे इस प्रकार शनि के धनु राशि के गोचर से 6 राशियों मेष,कर्क,सिंह,तुला,कुम्भ,एवं मीन को शुभ फलों की प्राप्ति होगी। शेष 6 राशियों ,वृषभ,मिथुन,कन्या,वृश्चिक धनु,मकर अशुभ फलों में वृद्धि करेंगे अतः उन्हें सतर्क एवं सावधान रह कर जरूरी उपाय करना चाहिए। शनि ग्रह का गोचर 24 जनवरी 2020 यानी शुक्रवार के दिन रात को 12 बजकर 10 मिनिट पर धनु राशि से मकर राशि मे हो रहा है शनि की यह अपनी ही राशि है । इसके बाद वर्ष 2022 में शनि (शुक्रवार) दिनांक 29 अप्रैल 2022 को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। साथ ही साल 2025 में शनि, शनिवार दिनांक 29 मार्च 2025 को रात 11 बजकर 02 मिनट पर कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करेंगे।
   वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि को न्यायधीश की उपाधि दी गई है। जब भी शनि का राशि परिवर्तन होता है तो प्रकृति के साथ- साथ मानव जीवन पर भी इसका अत्याधिक प्रभाव देखने को मिलता है।पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि शनि मध्यम वर्ग, मजदूर वर्ग का भी कारक माना जाता है। शनि के राशि परिवर्तन के साथ ही कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव शुरू हो जाएगा तो कुछ को इन सब चीजों से राहत मिलेगी। 
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी से जानिए शनि का मकर राशि में गोचर करने पर सभी 12 राशियों पर क्या होगा प्रभाव (असर)---
  1. शनि गोचर 2020 मेष राशि -- शनि का गोचर आपके दसवें भाव में हो रहा है। कुंडली में दसवें भाव से कर्म को देखा जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए काफी शुभ है। शनि का परिवर्तन आपके कर्म को प्रभावित करेगा। इस राशि परिवर्तन से नौकरी करने वाले लोगों को अत्यंत ही लाभ प्राप्त हो सकता है। आपको इस समय में प्रमोशन मिल सकता है। मेष राशि के जो लोग काफी समय से अच्छी नौकरी का प्रयास कर रहे हैं तो इनको इस समय में एक अच्छी नौकरी प्राप्त हो सकती है। लेकिन इस समय में आपको अपनी माता और जीवनसाथी की सेहत का ख्याल रखना होगा। वहीं जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद भी हो सकता है। 
  2. शनि गोचर 2020 वृषभ राशि --- शनि के मकर राशि में जाने से इस रााशि से शनि की ढैय्या का असर बिल्कुल खत्म हो जाएगा। शनि का गोचर आपके नवें भाव में हो रहा है। कुंडली में नवें भाव से भाग्य का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ है। शनि का परिवर्तन आपके भाग्य में वद्धि करेगा। इस राशि के जिन लोगों का कोई काम काफी समय से अटका हुआ था। वह इस समय में पूरा हो जाएगा। आपको इस समय में आपके भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। लेकिन आपका इस समय अपने छोटे भाई बहनों के साथ विवाद हो सकता है। आपको इस समय में आपका कोई रोग भी परेशान करता है। धार्मिक कार्यों में आप इस समय बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। 
  3. शनि गोचर 2020 मिथुन राशि --- शनि का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है। कुंडली में अष्टम भाव से मृत्यु का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए अशुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपकी परेशानियों को बढ़ा सकता है। इस राशि परिवर्तन के साथ ही आपकी शनि की ढैय्या भी आरंभ हो जाएगी। इस समय आपका अपने परिवार में झगड़ा हो सकता है। इसलिए आपको अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। कार्यक्षेत्र में भी आपकाअपने उच्च अधिकारियों के साथ मतभेद हो सकता है। इसलिए आपको इस समय बहुत ही ज्यादा संभल कर चलना चाहिए। बच्चों की सेहत का इस समय विशेष ध्यान रखें।  
  4. शनि का गोचर 2020 कर्क राशि -- शनि का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है। कुंडली में सप्तम भाव से वैवाहिक जीवन का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके वैवाहिक जीवन में खुशियों का संदेश लेकर आ रहा है। इस समय जो जातक विवाह करना चाहते हैं उनके लिए यह समय काफी शुभ है। इस समय में आपका विवाह हो सकता है। कार्यक्षेत्र में भी आपको इस समय लाभ मिल सकता है। वहीं अगर आप नौकरी में परिवर्तन करना चाहते हैं तो भी यह समय आपके लिए काफी अच्छा है। इस समय आपकी प्रवृति काफी गंभीर हो जाएगी और आप सभी काम को काफी सोच विचार कर करेंगे। 
  5. शनि गोचर 2020 सिंह राशि -- शनि का गोचर आपके छठवें भाव में हो रहा है। कुंडली में छठवें भाव से रोग और शत्रु का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए सामान्य रहेगा। इस परिवर्तन से आपके शुत्र परास्त होंगे। अगर आपको काफी से किसी रोग ने परेशान कर रखा था तो वह भी इस समय में ठीक हो जाएगा। कोर्ट कचहरी के क्षेत्र में भी इस समय आपको सफलता प्राप्त होगी। लेकिन इस समय में आपके खर्चे बढ़ सकते हैं। ससुराल पक्ष से भी आपको इस समय परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस समय आपरे पराक्रम में वृद्धि होगी। अगर आप विदेश जाना चाहते हैं तो भी आपके लिए समय काफी शुभ है। 
  6. शनि गोचर 2020 कन्या राशि --- इस राशि पर से शनि की ढैय्या समाप्त हो जाएगी। इस वजह से तमाम तरह की परेशानियों से इन्हें निजात मिल जाएगी। शनि का गोचर आपके पांचवें भाव में हो रहा है। कुंडली में पांचवें भाव से संतान और विद्या का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। इस परिवर्तन से आपको संतान सुख की प्राप्ति होगी। इस समय नव दंपत्ति के यहां संतान की किलकारियां गुंज सकती है। विद्यार्थियों को भी इस समय लाभ प्राप्त हो सकता है। अगर आप अपने किसी मंदपंसद कॉलेज या स्कूल में एडमिशन लेना चाहते हैं तो आपके लिए यह समय काफी शुभ है। लेकिन आपको इस समय वैवाहिक सुख में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं आपकी आय में भी कमीं हो सकती है। 
  7. शनि गोचर 2020 तुला राशि --- 24 जनवरी 2020 से शनि का मकर राशि में यानि आपके चतुर्थ भाव में प्रवेश होगा| उस समय स्थितिया परिवर्तन होगी और आपके सुख में वृद्धि होगी आपकी माता के साथ आपका रिश्ता अच्छा रहेगा किसी भी तरह का कोई भी आप कार्य भूमि, वाहन से सम्बंधित करते है| तो आपको उसमे सफलता हासिल होंगी| इसके अलावा गुरु जो की 30 मार्च को नीच के होकर मकर राशि में प्रवेश कर रहे है| उसके बाद वो 30 जून को पुनः धनु राशि में प्रवेश करेंगे और 20 नवम्बर को पुनः मकर राशि में प्रवेश कर जायेंगे| ये कुछ उत्तार चढाव गुरु का इस साल देखने को मिलेगा| राहू इस साल आपके भाग्य स्थान से आपके अष्टम स्थान यानि वृषभ राशि में 23 सितम्बर 2020 को प्रवेश करेंगे| वही 23 सितम्बर 2020 को केतु भी आपके राशि से द्वितीय भाव में यानि वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे|शनि का गोचर आपके चौथे भाव में हो रहा है। कुंडली में चौथे भाव से सुख और माता का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए अशुभ रहेगा। इस राशि परिवर्तन के साथ ही आपके ऊपर शनि की ढैय्या की शुरू हो जाएगी। इस समय में आपकी माता की सेहत ठीक रहेगी। आपको वाहन, भूमि और वाहन के सभी सुख प्राप्त होंगे। लेकिन इस समय आपको अपने कार्यक्षेत्र में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इस समय में आपको शत्रु बाधा हो सकती है। कोर्ट कचहरी के मामलों में भी आपको परेशानी हो सकती है। शारीरीक का भी इस समय में आपको सामना करना पड़ सकता है। 
  8. शनि गोचर 2020 वृश्चिक राशि -----शनि के मकर राशि में जाने से वृश्चिक राशि वालों पर अब शनि की टेढ़ी नजर नहीं रहेगी। शनि का गोचर आपके तीसरे भाव में हो रहा है। कुंडली में तीसरे भाव से पराक्रम और छोटे भाई बहन का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके पराक्रम में वृद्धि करेगा। इस समय में आप अपना सभी काम अपने पराक्रम के दम पर पूरा कर लेंगे। आपका भाग्य भी इस समय में आपका साथ देगा। धार्मिक कार्यों में भी आप इस समय बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे लेकिन आपको इस समय में अपनी संतान की तरफ से परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। आपके खर्च भी इस समय में अत्याधिक बढ़ सकते हैं। 
  9. शनि गोचर 2020 धनु राशि---धनु राशि अग्नितत्व, द्विस्वभाव राशि है । धनु राशि में स्थित होकर शनि तृतीय दृष्टि से कुम्भ राशि को प्रभावित करेंगे जो उनकी मूलत्रिकोण राशि है। ज्यादा अशुभ प्रभाव नहीं रहेगा। सप्तम दृष्टि से मिथुन राशि को देखेंगे जो उनके मित्र बुध की राशि है। शनि की दशम दृष्टि कन्या पर रहेगी जो फिर से बुध की ही राशि है ।  यह याद रखियेगा की शनि ग्रह गोचरवश राशि के अंतिम भाग में अर्थात 20 डिग्री से 30 डिग्री विशेष प्रभाव या फल उत्पन्न करते हैं। शनि एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए लगभग ढाई साल का समय लेते हैं। यहां से, वह संपत्ति को इंकित करनेवाले चौथे भाव, दीर्घायु को इंकित करनेवाले 8 वीं भाव और लाभ और व्यवसाय को इंकित करने वाले 11 वें भाव पर अपनी दृष्टि डालते है। धनुष राशीवालों के लिए इन साढ़े सात वर्ष (साडे सती) को 'पाद शनी' कहा जाता है, जिसके दौरान शनि आपको अच्छे फल प्रदान करेगा, बशर्ते आपने अच्छी नैतिकता बनाए रखी हो। यह गोचर आपके करियर में सकारात्मक मोड़ ला सकता है, वित्तीय स्थिति में सुधार कर सकता है और आपके लंबित सपने को पूरा कर सकता है।इस राशि वाले सभी जातक सतर्क ओर सावधानी रखें। साल 2020 में शनि धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में धनु राशि वालों से दूसरे चरण की साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी और तीसरी चरण साढ़ेसाती यानी उतरती साढ़ेसाती आरंभ हो जाएगी। इससे धनु राशि वालों की पहले की मुकाबले से उनके जीवन में परेशानियां कम होती चली जाएगी। इस राशि के जो लोग सरकारी नौकरी में हैं, उनके लिए नौकरी में पदोन्नति और वित्तीय वृद्धि होगी। कला और सिनेमा क्षेत्र के लोग इस अवधि के दौरान अपने पेशे में लोकप्रियता और सुधार का आनंद लेंगे।  इस अवधि में शनि धनु राशि से द्वितीय भाव में गोचर करेगा, जो वित्त और परिवार का द्योतक है।शनि का गोचर आपके दूसरे भाव में हो रहा है। कुंडली में दूसरे भाव से धन और कुंटुंब का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए मध्यम रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके धन में वृद्धि करेगा। इसी के साथ आप पर शनि की साढेसाती की आखिरी ढैय्या शुरु हो जाएगी। आपका परिवार भी इस समय में आपका पूरा साथ देगा। लेकिन आपको इस समय में कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ेगा। आपको अपने ससुराल पक्ष से परेशानि हो सकती है। आपकी माता का स्वास्थय भी इस समय में खराब हो सकता है। वहीं लाभ की अपेक्षा आपको नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है। 
  10. शनि गोचर 2020 मकर राशि --- शनि का गोचर आपके लग्न भाव में हो रहा है। कुंडली में लग्न भाव से शरीर का विचार किया जाता है। अगर आप व्यापार करते हैं तो आपको इस समय बाहरी देशों के साथ अपना व्यापार बढ़ाने का मौका मिलेगा। आयात-निर्यात के क्षेत्र में आपको सफलता मिल सकती है। विदेश यात्रा अथवा जन्मस्थान से दूर जाने के योग भी आपके लिये बन रहे हैं। वर्ष 2020 में मंगल का लाभ स्थान में होना आपके अंदर हर समस्या से लड़ने की शक्ति प्रदान करेगा। इस वर्ष आपकी राशि पर शनि की साढेसाती का प्रथम चरण समाप्त हो जाएगा। जिससे आपको काफी राहत मिलेगी। वर्ष राशिफल 2020 में 24 जनवरी को शनि राशि परिवर्तन कर आपकी ही राशि में प्रवेश कर जाएंगें। स्वराशि के शनि का होना आपके लिये शनि का शश महायोग बनाएगा। जिससे आपके कार्यक्षेत्र की स्थिति में काफी अच्छा बदलाव देखने को मिलेगा।शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए सामान्य ही रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके शरीर के लिए तो ठीक है। लेकिन इस समय आपमें आलस्य की अधिकता रहेगी। जिसके कारण आप अपने कार्यों को ठीक प्रकार से नहीं कर पाएंगे। आपका इस समय में अपने जीवनसाथी के साथ भी झगड़ा हो सकता है। अगर आप व्यापार करते हैं तो आपको इस समय काफी संभल कर चलना चाहिए। नौकरी करने वाले जातकों को भी कार्यस्थल में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 
  11. शनि गोचर 2020 कुंभ राशि --- इस राशि के जेक विशेष ध्यान(सावधानी) रखें क्यों कि शनि का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है। कुंडली में बारहवें भाव से खर्च का विचार किया जाता है। पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि शनि का राशि परिवर्तन इस राशि के लिए अशुभ ही रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके खर्चों को बढाएगा। इस राशि परिवर्तन के साथ ही आप पर शनि की साढेसाती शुरू हो जाएगी। इस समय में आपको खर्च बढ़ सकते हैं। आपको कोई पुराना रोग भी फिर से परेशान कर सकता है। शत्रुओं से आपको इस समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। परिवार में भी किसी के साथ आपका झगड़ा हो सकता है। धन संबंधी परेशानियां भी हो सकती है। इस समय में आपको भाग्य के भरोसे नहीं रहना चाहिए। 
  12. शनि गोचर 2020 मीन राशि---- शनि का गोचर आपके ग्यारहवें भाव में हो रहा है। कुंडली में ग्यारहवें भाव से आय का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपकी आय को बढाएगा। यह राशि परिवर्तन आपकी सभी इच्छाओं को पूर्ण करेगा। इस समय में आपकी सैलरी बढ़ सकती है। कार्यक्षेत्र में भी आपका मान सम्मान बढ़ेगा। आपके स्वाभाव में गंभीरता आएगी और आप अपने सभी कामों को अत्याधिक विचारकर ही करेंगे। लेकिन ध्यान रखें, वैवाहिक जीवन के लिए यह समय ठीक नहीं है। आप वयस्त होने के कारण इस समय अपने पार्टनर को समय नहीं दे पाएंगे और अगर आप शादीशुदा हैं तो आपका अपनी ससुरालवालों के साथ मतभेद हो सकता है। 

जाने और समझें, शनि का फल कथन कैसे करें--
आपकी कुंडली और गोचर मिलाकर ही फलकथन किया जा सकता है अकेला गोचर कभी भी फलदाई नहीं होता  फलदीपिका, जातक पारिजात जैसे महान ज्योतिष ग्रंथों में एक बहुत सरल तरीका बताया हुआ है की जन्म चन्द्रराशि से 3, 6, 11 राशि में शनि का गोचर शुभ होता है यदि क्रमशः वेध स्थान 12, 9, 5 में कोई अन्य ग्रह न हो। उदाहरणार्थ तुला राशि के लिए धनु का शनि 3वे होकर शुभ होना चाहिए अगर 12वे कन्या में कोई ग्रह (सूर्य के अतिरिक्त) गोचर न कर रहा हो। परन्तु किसी ग्रह के गोचर का मनुष्य पर प्रभाव सिर्फ जन्म लग्न अथवा जन्म राशि देखकर बताना असंभव है। इसके लिए कुंडली का सूक्ष्म अध्ययन आवश्यक है। साथ ही शनि के अलावा 8 और ग्रह हैं जिनके गोचर का प्रभाव आपको देखना होगा। मैं आपको एक छोटा सा सूत्र देता हूँ जिसको आप खुद अपनी कुंडली में देख सकते हैं की शनि का गोचर आपको कैसा फल देगा। इसके लिए आप अपनी कुंडली में शनि का अष्टकवर्ग देखिये। इस अष्टक वर्ग में देखिये की धनु राशि में कितने बिंदु/रेखा/अंक हैं। अगर यह संख्या 0, 1, 2, 3 है तो सामान्यतः अशुभ फल मिलेगा, अगर संख्या 4 है तो मिला जुला, 5, 6, 7, 8 है तो शुभ फल मिलेगा। ऐसा आप अनुमान लगा सकते हैं।अतः अगर आपकी चन्द्र राशि तुला, कर्क, कुम्भ है और आपकी कुंडली में शनि के अष्टक वर्ग में 5 से 8 बिंदु हैं तो आप शनि के धनु राशि में गोचर से अच्छे फल की आशा कर सकते हो।

जानिए शनि की साढ़ेसाती को कम करने के उपाय ---
कृपया इन्हें आप नियमिति ध्यान रख करें l इससे आप पर शनि का प्रकोप कम हो जायेंगा. इस समय साढे साती ‘वृश्चिक’ ‘धनु’ और ‘मकर’ राशि में चालू है और इनका प्रभाव काफी गहरा हो रहा है इन राशि के जातकों को बहुत ही ध्यान से अपने सारे काम पूर्ण करने चाहिए. 
साढ़ेसाती से बचने के लिए यह है महत्वपूर्ण उपाय .
  1. साडेसाती राशि वाले जातक नित्य सुबह उठकर ‘ॐ शं शनिश्चराय नमः’ का जाप अवश्य करना चाहियें l
  2. नित्य शनिदेव की मूर्ति को हाथ जोड़ नमस्कार कर घर से निकलना चाहियें l
  3. यदि हो सकें तो नित्य शनि देव की चालीसा को पढ़ना चाहियें l
  4. सप्ताह में शनिवार के दिन शनि देव की पूजा अवश्य करनी चाहियें l
  5. यदि आप से हो सके तो शनिवार को शनि देव के उपवास करें l यह विशेष फलदायक होंगे l
  6.  (नोट : ध्यान रहे उपवास में कोई भी विघ्न नहीं आना चाहियें क्यूँ की शनि देव जल्दी नाराज हो जातें है l तो इस बात का अवश्य ध्यान दे अगर संकल्प ले तो उसे पूरा करें न हो सके तो न ले l
  7. शनि देव का यंत्र अपने पूजा स्थल अपने तिजोरी में अवश्य रखें l
  8. शनि देव को मनाने के लिए आप मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर में भी पूजा कर सकते है l हनुमान देव की पूजा शनि की पूजा कहलाती है l
  9. शनिवार को काला वस्त्र पहने l अगर न पहन सकों तो कम से कम एक काला रुमाल अपने पास अवश्य रखें l
  10. शनि देव सूर्य भगवान के पुत्र है इसलिए रोज सूर्य भगवान को जल अवस्य चढ़ाएं इससे विशेष कृपा प्राप्त होंगी l
  11. शनि देव की माता छाया है l इसलिए आप शाम के समय या रात को शनि देव का ध्यान करें इससे भी उनकी कृपा बनी रहेंगी l
  12. “ॐ शं शनिश्चराय नमः” यह मंत्र जितना आप जपेंगे l उतना शनि का प्रकोप कम होगा l यह मंत्र ही साढ़ेसाती का रामबाण उपाय है l

26 दिसंबर को लगेगा वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण

वर्ष 2019 का अंतिम सूर्य  ग्रहण जो कि 26 दिसम्बर 2019 को होगा वह केवल (भारत में )केरल राज्य में दिखाई देगा। इस सूर्य ग्रहण पर सूर्य आग की एक अंगूठी की तरह दिखाई देगा। ग्रहण का वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टि से प्रकृति तथा मानव समुदाय पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि हर साल घटित होने वाले सूर्य ग्रहण को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।  पृथ्वी से सूय ग्रहण और चंद्र ग्रहण दो तरहे के ग्रहण ही नजर आते हैं। सूर्य ग्रहण को लेकर वैज्ञानिक भाषा में बताया गया है कि जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा या कोई दूसरा ग्रह आता है तो इसे सूर्य ग्रहण कहते हैं। इसी तरह जब चांद और सूरज के बीच पृथ्वी आती है तो उसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि इस वर्ष का आखिरी सूर्य ग्रहण अभी बाकी है जो 26 दिसंबर को पड़ने जा रहा है यह साल का अंतिम सूर्य ग्रहण भी होगा। वर्ष 2019 की शुरुआत चंद्र ग्रहण से हुई थी और खत्म सूर्य ग्रहण के साथ होगी। इस वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण 21 जनवरी को पड़ा था।
Last-solar-eclipse-of-the-year-2019-on-26-December-26 दिसंबर को लगेगा वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण       वर्ष का तीसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर 2019 को लगेगा। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जो भारतीय समयानुसार सुबह 08:17 से लेकर 10: 57 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण भारत के साथ पूर्वी यूरोप, एशिया, उत्तरी/पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और पूर्वी अफ्रीका में दिखाई देगा। 26 दिसंबर 2019 के सूर्यग्रहण को भारत में केरल राज्य में कोयम्बटूर और मदुरै में स्पष्ट देखा जा सकेगा।  पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि 26 दिसंबर को रायपुर (छत्तीसगढ़) में सुबह 8 बजकर 15 मिनट से लेकर 11 बजकर 15 मिनट तक आंशिक रूप से सूर्यग्रहण देखा जा सकेगा। पंचांगकर्ता पण्डित भागीरथ जोशी के अनुसार देश के मैदानी इलाकों में पूर्ण सूर्यग्रहण 2114 में ही देखा जा सकेगा। 20 मार्च 2034 को भी भारत में यह खगोलीय घटना होगी लेकिन कारगिल के दुर्गम पहाड़ों में ही इसे देखा जा सकेगा।
जानिए किस राशि और नक्षत्र होगा इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव--
पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार यह सूर्य ग्रहण धनु राशि और मूल नक्षत्र में लगेगा। धनु राशि तथा मूल नक्षत्र से संबंधित व्यक्तियों के जीवन पर इसका प्रभाव पड़ेगा। इन राशियों और नक्षत्र से संबंधित लोगों को सूर्य ग्रहण के समय सतर्क रहने की आवश्यकता है। 26 दिसंबर 2019 को सूर्यग्रहण का स्पर्श, मोक्ष मूल नक्षत्र और धनु राशि में हो रहा है। यह ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा। साथ साथ रशिया, ऑस्ट्रेलिया और सोलोमन द्वीप में भी नजर आएगा। वर्ष 2019 का अंतिम और एक मात्र सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए यहाँ पर इस ग्रहण का सूतक भी लागू  होगा। इस मौके पर  हरियाणा की तीर्थनगरी कुरुक्षेत्र में 26 दिसम्बर सूर्य ग्रहण मेला का आयोजन किया जाएगा जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे।
यह रहेगा 26 दिसम्बर को सूर्य ग्रहण प्रारंभ और समाप्त होने का समय--

  1. सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर 2019 प्रारंभ समय - सुबह 8 बजकर 17 मिनट (26 दिसंबर 2019)
  2. सूर्य ग्रहण परमग्रास - सुबह 9 बजकर 31 मिनट (26 दिसंबर 2019)
  3. सूर्य ग्रहण दिसंबर 2019 समाप्ति समय - सुबह 10 बजकर 57 मिनट (26 दिसंबर 2019)

यह रहेगा 26 दिसम्बर (सूर्य ग्रहण) 2019 को सूतक काल का समय--

  • सूतक काल प्रारंभ- शाम 5 बजकर 31 मिनट से (25 दिसंबर 2019)
  • सूतक काल समाप्त - अगले दिन सुबह 10 बजकर 57 मिनट तक (26 दिसंबर 2019)


कितने प्रकार का होता है सूर्य ग्रहण
  • पूर्ण सूर्य ग्रहण - जब पूर्णत: अंधेरा छाये तो इसका तात्पर्य है कि चंद्रमा ने सूर्य को पूर्ण रूप से ढ़क लिया है इस अवस्था को पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जायेगा।
  • खंड या आंशिक सूर्य ग्रहण - जब चंद्रमा सूर्य को पूर्ण रूप से न ढ़क पाये तो तो इस अवस्था को खंड ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी के अधिकांश हिस्सों में अक्सर खंड सूर्यग्रहण ही देखने को मिलता है।
  • वलयाकार सूर्य ग्रहण - वहीं यदि चांद सूरज को इस प्रकार ढके की सूर्य वलयाकार दिखाई दे यानि बीच में से ढका हुआ और उसके किनारों से रोशनी का छल्ला बनता हुआ दिखाई दे तो इस प्रकार के ग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्यग्रहण की अवधि भी कुछ ही मिनटों के लिये होती है। सूर्य ग्रहण का योग हमेशा अमावस्या के दिन ही बनता है।

जाने और समझें वलयाकार सूर्य ग्रहण कब होता है ?
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि वलयाकार सूर्य ग्रहण उस समय घटित होता है, जब चंद्रमा पृथ्वी से बहुत दूर होते हुए भी पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है। इस कारण चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी को अपनी छाया में नहीं ले पाता है। वलयाकार सूर्य ग्रहण में सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होता रहता है। इस घटना को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते है। वहीं आने वाले नए वर्ष 2020 में 6 नए ग्रहण लगने वाले है। साल की शुरुआत में 10 जनवरी को साल का पहला चंद्रग्रहण लेगा। इसके बाद अंतिम चंद्र ग्रहण 15 दिंसबर 2020 में लगेगा।
     वर्ष 2020 में कुल 6 ग्रहण लगने वाले हैं, जिनमें पहला चंद्रग्रहण 10 जनवरी को होगा और अंतिम ग्रहण 15 दिसंबर को लगने जा रहा है। वैज्ञानिक जिसे केवल एक खगोलीय घटना मानते हैं तो वहीं धार्मिक मान्‍यताएं भी अपना तर्क देती हैं। ज्योतिषों के अनुसार, ग्रहण से केवल प्रकृति पर फर्क नहीं पड़ता है बल्कि मानव जाति पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। सूर्य और चंद्रग्रहण का अलग-अलग राशियों पर अलग प्रभाव पड़ता है।
चंद्र ग्रहण क्यों होता है?
इसका सीधा सा जवाब है कि चंद्रमा का पृथ्वी की ओट में आ जाना। उस स्थिति में सूर्य एक तरफ, चंद्रमा दूसरी तरफ और पृथ्वी बीच में होती है। जब चंद्रमा धरती की छाया से निकलता है तो चंद्र ग्रहण पड़ता है।
चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन ही पड़ता है---
चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन पड़ता है लेकिन हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं पड़ता है। इसका कारण है कि पृथ्वी की कक्षा पर चंद्रमा की कक्षा का झुके होना। यह झुकाव तकरीबन 5 डिग्री है इसलिए हर बार चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश नहीं करता। उसके ऊपर या नीचे से निकल जाता है. यही बात सूर्यग्रहण के लिए भी सच है। सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन होते हैं क्योंकि चंद्रमा का आकार पृथ्वी के आकार के मुकाबले लगभग 4 गुना कम है। इसकी छाया पृथ्वी पर छोटी आकार की पड़ती है इसीलिए पूर्णता की स्थिति में सूर्य ग्रहण पृथ्वी के एक छोटे से हिस्से से ही देखा जा सकता है। लेकिन चंद्र ग्रहण की स्थिति में धरती की छाया चंद्रमा के मुकाबले काफी बड़ी होती है. लिहाजा इससे गुजरने में चंद्रमा को ज्यादा वक्त लगता है।

जाने और समझें श्री भैरव अष्टमी के महत्व और प्रभाव को

इस वर्ष भैरवाष्टमी 19 नवंबर 2019 (मंगलवार) को मनाई जाएगी। काल भैरव उत्तम तंत्र साधाना के लिए माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में बताया गया है कि भगवान शंकर का ही भैरव बाबा अवतार हैं। भैरवाष्टमी के दिन व्रत एवं षोड्षोपचार पूजन करना अत्यंत शुभ एवं फलदायक माना जाता है। इस दिन श्री कालभैरव जी का दर्शन-पूजन शुभ फल देने वाला होता है। हमारे वैदिक ग्रंथों अनुसार श्री काल भैरव का जन्म मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष अष्टमी को प्रदोष काल में हुआ था, तब से इसे भैरव अष्टमी के नाम से जाना जाता है। इसीलिए काल भैरव की पूजा मध्याह्न व्यापिनी अष्टमी पर करनी चाहिए।
Learn and understand the importance and impact of Shri Bhairav Ashtami-जाने और समझें श्री भैरव अष्टमी के महत्व और प्रभाव को    पौराणिक कथानुसार एक बार सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा ने भगवान भोलेनाथ की वेशभूषा और उनके गणों का उपहास उड़ाया, तब उस समय भगवान शिव के क्रोध से विशालकाय दंडधारी प्रचंडकाय काया प्रकट हुई और ब्रह्मा जी का वध करने के लिए बढ़ने लगी दौड़ी। पुराणों के अनुसार, इस काया ने ब्रह्मदेव के एक शीश को अपने नाखून से काट भी दिया। तभी भगवान शिव ने बीच बचाव करते हुए उसे शांत किया गया और फिर तब से ही ब्रह्मा जी के चार शीष ही बचे। ऐसी मान्यता है कि जिस दिन यह विशाल काया प्रकट हुई थी, वह दिन मार्गशीर्ष मास की कृष्णाष्टमी का दिन था। भगवान शिव के क्रोध से उत्पन्न इस काया का नाम भैरव पड़ा। भैरव का अर्थ है भय को हरने वाला या भय को जीतने वाला। इसलिए कालभैरव रूप की पूजा करने से मृत्यु और हर तरह के संकट का भय दूर हो जाता है। शिव पुराण के अनुसार शती काल भैरव भगवान शिव का रौद्र रूप है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के उल्लेखानुसार कालभैरव श्रीकृष्ण के दाहिने नेत्र से प्रकट हुए थे, जो आठ भैरवों में से एक थे। कालभैरव रोग, भय, संकट और दुख के स्वामी माने गए हैं। इनकी पूजा से हर तरह की मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर हो जाती हैं।
पुराणों में बताए गए हैं 12 भैरव--- 
धर्म ग्रंथों में मिलते है | भक्तजन इनमें से किसी एक रूप की उपासना भैरव उपासक यदि सच्चे मन से कर लेते है | तो उन पर भैरव का प्रभाव पूरा -पूरा रहता है | अपने भक्तों के सारे संकट हरण करने के लिए वे स्वयं आते है |
ऐसे हैं श्री भैरव जी के सभी बारह स्वरुप (नाम)--
  • 1. बाल भैरव 
  • 2. बटुक भैरव 
  • 3. स्वर्णाकर्षण भैरव
  • भैरव जी के ये तीनों रूप सबसे सुंदर और मृदुल माने गए है | जिनमें स्वर्णाकर्षण भैरव को धन-धान्य के स्वामी और सृष्टि के पालन पोषण कर्ता के रूप पूजा जाता है | भैरव जी के ये तीनों स्वरुप पूर्णतः सात्विक माने गये है तथा भगवान विष्णु , राम , कृष्ण आदि के समान जी इन रूपों की पूजा की जाती है |
  • 4. महाकाल भैरव
  • भैरव जी के उपरोक्त तीनों स्वरुप के बिल्कुल विपरीत है –
  •  महाकाल भैरव | महाकाल भैरव को मृत्यु का देवता माना जाता है | यही काल रूप है | इस रूप को लेकर ही तंत्र साधना की जाती है | तांत्रिक सिद्धियाँ पाने के लिए भैरव जी को महाकाल भैरव के रूप में पूजा जाता है | इसलिए गृहस्थ जीवन में महाकाल भैरव की उपासना न करके बाल भैरव , बटुक भैरव और स्वर्णाकर्षण भैरव इन रूपों में पूजा की जानी चाहिए |
इनके अतिरिक्त भैरव जी के अन्य 8 रूप इस प्रकार से है ---
  • 5. असिताग भैरव
  • 6. रु रु भैरव 
  • 7. चंड भैरव
  • 8. क्रोधोन्मत भैरव
  • 9. भयंकर भैरव
  • 10. कपाली भैरव
  • 11. भीषण भैरव
  • 12. संहार भैरव
भैरव जी के ये सभी रूप सोम्य नहीं है बल्कि प्रचंड रूप है | भैरव जी को भगवान शिव का पाँचवा और रौद्र अवतार माना गया है | भैरव जी के सभी 12 रूपों में 9 रूपों को प्रचंड माना गया है | जिनकी उपासना तांत्रिक सिद्धियाँ पाने के लिए की जाती है | रविवार, बुधवार या भैरव अष्टमी पर इन 8 नामों का उच्चारण करने से मनचाहा वरदान मिलता है। भैरव देवता शीघ्र प्रसन्न होते हैं और हर तरह की सिद्धि प्रदान करते हैं। क्षेत्रपाल व दण्डपाणि के नाम से भी इन्हें जाना जाता है। 
  • इस वर्ष कालभैरव अष्टमी (जयन्ती) मंगलवार, नवम्बर 19, 2019 को मनाई जाएगी।
  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 19, 2019 को03:35 पी एम बजे से आरम्भ होकर..
  • अष्टमी तिथि समाप्त – नवम्बर 20, 2019 को01:41 पी एम बजे होगी।

भगवान भैरव की महिमा अनेक शास्त्रों में मिलती है। भैरव जहां शिव के गण के रूप में जाने जाते हैं, वहीं वे दुर्गा के अनुचारी माने गए हैं। भैरव की सवारी कुत्ता है। चमेली फूल प्रिय होने के कारण उपासना में इसका विशेष महत्व है। साथ ही भैरव रात्रि के देवता माने जाते हैं और इनकी आराधना का खास समय भी मध्य रात्रि में 12 से 3 बजे का माना जाता है। भैरव के नाम जप मात्र से मनुष्य को कई रोगों से मुक्ति मिलती है। वे संतान को लंबी उम्र प्रदान करते है। अगर आप भूत-प्रेत बाधा, तांत्रिक क्रियाओं से परेशान है, तो आप शनिवार या मंगलवार कभी भी अपने घर में भैरव पाठ का वाचन कराने से समस्त कष्टों और परेशानियों से मुक्त हो सकते हैं।
    पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि यदि आप जन्मकुंडली में मंगल ग्रह के दोषों से परेशान हैं तो श्री भैरव की पूजा करके पत्रिका के दोषों का निवारण सरलता से कर सकते है। शनि या राहु से पीडि़त व्यक्ति अगर शनिवार और रविवार को काल भैरव के मंदिर में जाकर उनका दर्शन करें। तो उसके सारे कार्य सकुशल संपन्न हो जाते है। भैरव उपासना क्रूर ग्रहों के प्रभाव को समाप्त करती है. भैरव देव जी के राजस, तामस एवं सात्विक तीनों प्रकार के साधना तंत्र प्राप्त होते हैं। भैरव साधना स्तंभन, वशीकरण, उच्चाटन और सम्मोहन जैसी तांत्रिक क्रियाओं के दुष्प्रभाव को नष्ट करने के लिए कि जाती है। इनकी साधना करने से सभी प्रकार की तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव नष्ट हो जाते हैं।
   राहु केतु के उपायों के लिए भी इनका पूजन करना अच्छा माना जाता है। भैरव की पूजा में काली उड़द और उड़द से बने मिष्‍ठान्न इमरती, दही बड़े, दूध और मेवा का भोग लगाना लाभकारी है इससे भैरव प्रसन्न होते है भैरव की पूजा-अर्चना करने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि के साथ-साथ स्वास्थ्य की रक्षा भी होती है। तंत्र के ये जाने-माने महान देवता काशी के कोतवाल माने जाते हैं। भैरव तंत्रोक्त, बटुक भैरव कवच, काल भैरव स्तोत्र, बटुक भैरव ब्रह्म कवच आदि का नियमित पाठ करने से अपनी अनेक समस्याओं का निदान कर सकते हैं। भैरव कवच से असामायिक मृत्यु से बचा जा सकता है। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार नारद पुराण में बताया गया है कि कालभैरव की पूजा करने से मनुष्‍य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। मनुष्‍य किसी रोग से लम्बे समय से पीड़‍ि‍त है तो वह रोग, तकलीफ और दुख भी दूर होती हैं। कालभैरव की पूजा पूरे देश में अलग-अलग नाम से और अलग तरह से की जाती है। कालभैरव भगवान शिव की प्रमुख गणों में एक हैं। सारे संकट भक्तों के भैरव बाबा की पूजा करने से खत्म होते हैं।  कहा जाता है कि बहुत मुश्किल भैरव साधना है। साथ ही सात्विकता और एकाग्रता का ध्यान भैरव बाबा की साधाना में करना होता है। पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि भगवान शिव ने मार्गशीर्ष कृष्‍ण पक्ष अष्टमी के दिन अवतार लिया था। इस तिथि पर प्रत और पूजा इस उपलक्ष के तौर पर होती है। 
जानिए भैरव बाबा का महत्व 
हिंदू देवताओं में भैरव बाबा का बहुत महत्व माना गया है। शास्‍त्रों में कहा गया है कि भैरव बाब दिशाओं के रक्षक और काशी के संरक्षक हैं। भैरव बाबा के कई रूप में और बटुक भैरव और काल भैरव एक ही हैं। 
श्री भैरव जी के विभिन्न स्वरूप
शिवजी के रज, तम और सत्व गुणों के आधार पर श्री भैरव के स्वरूप कौन-कौन से हैं और किस मनोकामना के लिए कौन से स्वरूप की पूजा की जाती है...
  1. बटुक भैरव--यह भैरव का सात्विक और बाल स्वरूप है। जो लोग सभी सुख, लंबी आयु, निरोगी जीवन, पद, प्रतिष्ठा और मुक्ति पाना चाहते हैं, वे बटुक भैरव की पूजा कर सकते हैं।
  2. काल भैरव--यह भैरव का तामसिक स्वरूप है, लेकिन कल्याणकारी है। इस स्वरूप को काल का नियंत्रक माना गया है।इनकी पूजा अज्ञात भय, संकट, दुख और शत्रुओं से मुक्ति देने वाली मानी गई है।
  3. आनंद भैरव---यह भैरव का राजस यानी रज स्वरूप माना गया है। दस महाविद्या के अंतर्गत हर शक्ति के साथ भैरव की भी पूजा की जाती है। इनकी पूजा से धन, धर्म की सिद्धियां मिल सकती हैं।
जानिए भैरव अष्टमी के व्रत का महत्व 
शास्‍त्रों में कहा गया है कि शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का नाश भैरवाष्टमी के दिन व्रत और पूजा-अर्चना करने से होता है। मान्यताओं के अनुसार,सभी तरह के पाप इस दिन भैरव बाबा की विशेष पूजा अर्चना करने से धूल जाते हैं। श्री कालभैरव जी के दर्शन और पूजा इस तिथि पर करने से शुभ फल मिलता है। 
जानिए भैरव जी की पूजा के लाभ
ऐसा कहा जाता है कि पूजा-अर्चना भैरव जी की इस दिन करने से सारी मनोकामना पूर्ण होती है। जो भक्त इस दिन भैरव बाबा की पूजा करते हैं वह निर्भय होते हैं साथ ही उनके सारे कष्ट भी दूर हो जाते हैं। भैरव बाबा की पूजा और व्रत इस दिन करने से सारे विघ्न खत्म हो जाते हैं। भूत, पिशाच एवं काल भी इनके भक्तों से दूर रहते हैं।
लाभदायक होती हरण भैरव की साधना 
ग्रहों के क्रूर प्रभाव भी भैरव बाबा की पूजा करने से खत्म होते हैं। इतना ही नहीं हर तरह की तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव भी भैरव बाबा की साधना से दूर होते हैं। 
ऐसे करें भैरव पूजन
षोड्षोपचार पूजन के साथ भैरव बाबा की पूजा करनी चाहिए। रात्र में जागरण करना चाहिए। भैरव कथा व आरती रात में भजन कीर्तन करते हुए करनी चाहिए ऐसा करके विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराने से भैरव बाबा प्रसन्न होते हैं।

वृश्चिक राशि में देव गुरु वृहस्पति का प्रवेश, 5 महीनें रखें सावधानी

देवगुरु वृहस्पति लगभग 12 वर्षों बाद पुनः 05 नवंबर 2019 को प्रातः अपनी राशि धनु में प्रवेश कर रहे हैं। ये एक सदी में लगभग आठ बार धनु राशि की परिक्रमा करते हैं।  देव वृहस्पति ग्रह 5 नवंबर 2019, मंगलवार रात 12 बजकर 3 मिनट पर अपनी राशि धनु में गोचर करेगा और 29 मार्च 2020, रविवार शाम को 7 बजकर 8 मिनट तक इसी राशि में स्थित रहेगा। गुरु के धनु राशि में गोचर करने से 'हंस' योग बनता है। धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु पुनर्वसु, विशाखा एवं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों के भी स्वामी हैं। कर्क राशि इनकी उच्च और मकर राशि नीच संज्ञक कही गयी है। जिन जातकों की जन्मकुंडली में गुरु धनु राशि में होकर केन्द्र या त्रिकोण में होंगे उनके लिए 'हंस' योग श्रेष्ठतम फलदाई रहेगा।ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को सर्वाधिक शुभ एवं शीघ्रफलदाई ग्रह माना गया है। जन्मकुंडली में द्वितीय, पंचम, नवम तथा एकादश भाव के कारक होते हैं।
गुरु बृहस्पति का कुंडली पर प्रभाव--
कुंडली में बृहस्पति की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को मान सम्मान और ज्ञान प्रदान करती है तथा व्यक्ति को धन की प्राप्ति भी अच्छी मात्रा में होती है। संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी बृहस्पति की मजबूत स्थिति को देखा जाता है। वहीं दूसरी ओर गुरु बृहस्पति जब इसके विपरीत अवस्था में होते हैं तो इन सभी कारकों में कमी आने की संभावना बढ़ जाती है। 
 Lord-Jupiter-in-Scorpio-keep-careful-for-5-months-वृश्चिक राशि में देव गुरु वृहस्पति का प्रवेश, 5 महीनें रखें सावधानी    मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा, संयम, धैर्य, तरक्की, ज्ञान, सदाचरण और वैवाहिक सुख का प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति 5 नवंबर को सुबह अपनी राशि धनु में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 2019 में बृहस्पति ने कई बार मार्गी-वक्री गति करते हुए आगे-पीछे की राशियों में गोचर किया। धनु राशि में चल रहे बृहस्पति 10 अप्रैल को वक्री हुए थे। वक्री गति करते हुए ये 22 अप्रैल को पिछली राशि वृश्चिक में आ गए थे। इसके बाद 11 अगस्त को वृश्चिक राशि में ही मार्गी हो गए थे। अब मार्गी गति करते हुए 5 नवंबर को पुन: अपनी ही राशि धनु में आ रहे हैं। बृहस्पति कर्क राशि में उच्च का होता है और मकर में नीच का। धनु और मीन इसकी स्वयं की राशि है। यह धनु और मीन राशि के स्वामी हैं और कर्क राशि में उच्च तथा मकर राशि में नीच अवस्था में माने जाते हैं। कुंडली में चंद्रमा लग्न पर बृहस्पति की दृष्टि अमृत समान मानी जाती है। यह स्थिति गजकेसरी योग बनाती हैं।

देव गुरु वृहस्पति ग्रह 5 नवंबर को कल धनु राशि में प्रवेश करेंगे जहाँ 30 मार्च 2020 तक  इसी राशि में रहने वाले हैं. वह 22 अप्रैल 2019 से वृश्चिक राशि में ही विराजमान थे. गुरु के राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों के जातकों पर पड़ेगा। किसी राशि के जातक को धन का लाभ होगा तो किसी को स्वास्थ्य की परेशानी होगी। पांच राशि वालों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। यह बात उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिष पण्डित दयानन्द शास्त्री जी सभी राशि परिवर्तन से होने वाले असर के बारे में बताते हुए कही
जीवन में बदलाव लाएगा--
उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषी पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि भारतीय वैदिक ज्योतिष के अंतर्गत ग्रहों में बृहस्पति को देवताओं का गुरु कहा गया है और ग्रहों के मंत्रिमंडल में इन्हें मंत्री का पद प्राप्त है। ये नैसर्गिक रूप से सब से शुभ ग्रह माने जाते हैं। यह वृद्धि के कारक हैं इसलिए अच्छी या बुरी जो भी घटना हो उसमें इनका योग वृद्धि कारक होता है। यह हमारे जीवन में हमारे गुरु और गुरु तुल्य लोगों, हमारे परिवार के बड़े बुजुर्गों, संतान, धन तथा ज्ञान का कारक प्राप्त है। जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति से जातक के जीवन के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें पता चलती हैं। इसलिए यह राशि परिवर्तन कई तरह से जीवन में बदलाव लाएगा।
     गुरु एक राशि में करीब एक साल रहते हैं इसलिए 12 साल के बाद फिर से अपनी राशि धनु में लौटते हैं। 5 नवंबर को गुरु सुबह  अपनी राशि धनु में लौट रहे हैं। अपनी राशि धनु में गुरु अगले साल 2020 मार्च तक रहेंगे। इस राशि में गुरु का स्वागत दो पाप ग्रह केतु और शनि करेंगे। शनि और केतु से साथ गुरु का संयोग यूं तो शुभ नहीं है फिर भी गोचर के अनुसार कुछ राशियों को इसका परिवर्तन शुभ लाभ  होगा तो किसी को होगा नुकसान. ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी से जानते हैं कि अगले 5 महीने किन किन राशि वालों को सबसे अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है।
  1. मेष राशि- मेष राशि से नवम भाव में गुरु का गोचर रुके हुए कार्यों को पूरा करने के साथ-साथ भाग्य में वृद्धि करेगा तथा मनचाहा परिणाम देगा. इस राशि के लिए बृहस्पति नवम भाव में गोचर करेगा। इस राशि वालों को अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त होता। इस राशि के लिए बृहस्पति भाग्योदकारी है। नौकरी में प्रमोशन, व्यापार में लाभ मिलेगा। पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा। घर में नए मेहमान आएंगे। आर्थिक मामलों के लिए वक्त शुभ रहेगा। आपको कई स्रोतों से धन की प्राप्ति हो सकती है। धार्मिक कार्यों में रुचि होगी। धार्मिक यात्राओं पर जा सकते हैं। तीर्थयात्रा हो सकती है. सत्संग का लाभ मिलेगा. पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बन सकता है. स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा. रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे. पठन-पाठन व लेखन के काम में मन लगेगा. धन प्राप्ति सुगम होगी. पारिवारिक सुख-शांति बनी रहेगी. जल्दबाजी न करें.
  2. वृषभ राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति का गोचर अष्टम भाव में होगा। इससे कुछ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सेहत का विशेष ध्यान रखना होगा। पेट संबंधी रोग आ सकते हैं। अनचाही यात्राएं होंगी। आर्थिक पक्ष कमजोर रहेगा। धन संचय करने में परेशानी आ सकती है। उधार चुकाने का दबाव रहेगा। व्यापार में मनचाहे परिणाम प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करना पड़ेगी। धार्मिक कार्यों की ओर रूझान बढ़ेगा। रोजगार में वृद्धि होगी. प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे. शारीरिक कष्ट की वजह से बाधा संभव है. उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे. आय में वृद्धि होगी. वरिष्ठ जनों का सहयोग तथा मार्गदर्शन प्राप्त होगा. पार्टनरों से मतभेद दूर होंगे. कुसंगति से हानि होगी. विवेक से कार्य करें।
  3. मिथुन राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति का गोचर सप्तम स्थान में रहेगा। इस समय आपका वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। वैवाहिक जीवन में चल रहे मतभेद दूर होंगे। आर्थिक स्थिति के लिए समय उत्तम है। पार्टनरशिप में कोई नया कार्य प्रारंभ करना चाहते हैं तो अवश्य करें लाभ होगा। प्रेम संबंधों में नयापन आएगा। नौकरी में तरक्की, बिजनेस में लाभ की स्थिति मिलेगी। समाज में सम्मान प्राप्त होगा। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे. किसी व्यक्ति के व्यवहार से मन खिन्न रहेगा. पुराना रोग उभर सकता है. दूर का समाचार मिल सकता है. चिंता तथा तनाव में वृद्धि होगी. पार्टनरों तथा मातहतों से मतभेद बढ़ सकते हैं. दूसरों से अपेक्षा न करें. आय में निश्चितता रहेगी.
  4. कर्क राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति छठे भाव में गोचर करेगा। कर्क राशि में बृहस्पति उच्च का होता है। इसलिए इसका शुभ प्रभाव मिलने वाला है। इस राशि के जो लोग शत्रुओं से परेशान हैं, उनकी यह परेशानी शीघ्र दूर होगी। रोगों से मुक्ति मिलने का समय है। हालांकि मानसिक रूप से मजबूत रहना होगा कोई अनपेक्षित घटना हो सकती है। वैवाहिक जीवन के लिए समय ठीक है। आर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी। थोड़े प्रयास से ही कार्य बनेंगे. सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. सामाजिक कार्य करने का अवसर मिलेगा. धन प्राप्ति सुगम होगी. संतान पक्ष से कोई खराब सूचना मिल सकती है. चिंता तथा तनाव रहेंगे. प्रतिद्वंद्वी शांत रहेंगे. विवाद से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है. जोखिम न लें.
  5. सिंह राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति पंचम स्थान में गोचर करने जा रहा है। अपने मित्र सूर्य की राशि में मार्गी गुरु का प्रवेश इसके लिए शुभ रहेगा। इस राशि के जातकों की पारिवारिक स्थिति सुखद रहेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। कर्ज मुक्ति की स्थिति बन रही है। संतान पक्ष की चिंता दूर होगी। संतानों के विवाह की बात बनेगी। नौकरीपेशा को सम्मान, व्यापारियों को कार्य विस्तार का सुख प्राप्त होगा। परिवार में अतिथियों का आगमन होगा. शुभ समाचार प्राप्त होंगे. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. कोई नया काम करने की योजना बन सकती है. व्यवसाय ठीक चलेगा. थकान महसूस होगी. आलस्य हावी रहेगा. बेचैनी रहेगी. पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा. मतभेद कम होंगे. जल्दबाजी न करें।
  6. कन्या राशि- इस राशि के लिए गुरु का गोचर चतुर्थ स्थान में होगा। चतुर्थ स्थान सुख स्थान होता है, इसलिए यहां पर बृहस्पति का मार्गी होना इस राशि वालों को अनेक प्रकार के सुख प्रदान करेगा। पारिवारिक जीवन में मधुरता तो आएगी ही, जो लोग वैवाहिक सुख की प्रतीक्षा कर रहे हैं उनकी इच्छा पूरी होने वाली है। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। स्वयं पर खर्च करेंगे। पर्यटन का अवसर आएगा। दोस्तों के साथ मेल मुलाकात होगी। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे. यात्रा मनोरंजक रहेगी. सुखमय जीवन व्यतीत होगा. किसी बड़ी समस्या का हल मिलेगा. प्रसन्नता रहेगी. धन प्र‍ाप्ति सुगम होगी. वरिष्ठजनों का सहयोग तथा मार्गदर्शन प्राप्त होगा. अप्रत्याशित लाभ हो सकता है. ऐश्वर्य के साधनों पर बड़ा खर्च होगा.
  7. तुला राशि- इस राशि के लिए गुरु मार्गी तृतीय स्थान में होगा। भाई-बंधुओं के साथ रिश्ते सुधरेंगे। पैतृक संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद सुलझने की स्थिति में आ जाएंगे। अभी तक आपकी जो योजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही थीं, उन्हें गति मिलेगी। सम्मान और सुख प्राप्त होगा। सेहत के लिहाज से यह गोचर ठीक नहीं रहेगा। मस्तिष्क संबंधी रोग उभर सकते हैं। पेट के निचले हिस्से के रोग भी परेशान करेंगे। संतान पक्ष की चिंता रहेगी। मशीनरी से चोट लग सकती है। इस राशि के जातकों को वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है. अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे. बनते कामों में विघ्न आ सकते हैं. कर्ज लेना पड़ सकता है. स्वास्थ्य कमजोर रहेगा. काम में मन नहीं लगेगा. पार्टनरों से मतभेद हो सकता है. जोखिम व जमानत के कार्य टालें. कीमती वस्तुएं संभालकर रखें. विवाद न करें.
  8. वृश्चिक राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति का गोचर द्वितीय स्थान में हो रहा है। धन स्थान में बृहस्पति का बैठना शुभ संकेत है। आपकी आर्थिक योजनाओं को गति मिलेगी। नया कार्य व्यवसाय प्रारंभ करना चाहते हैं या पुराने को विस्तार देना चाहते हैं तो समय अच्छा है। इस दौरान किसी बड़े प्रोजेक्ट के पूरे हो जाने से मानसिक सुख-श्ाांति प्राप्त होगी। वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी। प्रेम संबंध में अनुकूलता प्राप्त होगी, लेकिन पार्टनर के साथ पारदर्शी व्यवहार करना होगा। कानूनी अड़चन आ सकती है. वाणी पर नियंत्रण रखें. बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे. शारीरिक कष्ट संभव है. बेचैनी रहेगी. मनोरंजक यात्रा होगी. धनलाभ के अवसर हाथ आएंगे. लेन-देन में जल्दबाजी न करें. भाइयों से सहयोग मिलेगा. घर में सुख-शांति बनी रहेगी.
  9. धनु राशि- इसी राशि में बृहस्पति आ रहा है और यह लग्न यानी प्रथम स्थान है। यहां पर बृहस्पति के मार्गी होने से शारीरिक दिक्कतें दूर होंगी। सुख-सौभाग्य प्राप्त होगा। धन की तंगी दूर होने की स्थिति बनेगी और आय के एक से अधिक साधन प्राप्त होंगे। सेहत के लिहाज से यह गोचर अच्छा साबित होगा। बीमारियों पर हो रहे खर्च में कमी आएगी। जीवनसाथी के साथ पर्यटन का मौका आएगा। शत्रुओं को परास्त करने में कामयाब होंगे। सभी कार्य आपके मनोनुकूल होंगे। मानसिक द्वंद्व रहेगा. चोट व रोग से बचें. अपरिचितों पर विश्वास न करें. जल्दबाजी न करें. नई योजना बनेगी. नए कार्य प्रारंभ करने का मन बनेगा. व्यवसाय में अनुकूलता रहेगी. मित्रों के साथ अच्‍छा समय गुजरेगा. प्रसन्नता रहेगी. मनोरंजन के अवसर मिलेंगे. भाग्य का साथ मिलेगा.
  10. मकर राशि- इस राशि के लिए द्वादश स्थान में मार्गी बृहस्पति का आना मिलाजुला प्रभाव दिखाएगा। चूंकि द्वादश स्थान व्यय भाव होता है इसलिए खर्च में निश्चित तौर पर बढ़ोतरी होगी, लेकिन ध्यान रखना होगा कि यह खर्च कहां हो रहा है। अनावश्यक कार्यों पर खर्च करने से खुद को रोकना होगा। आय के साधनों में वृद्धि होगी। कोई ऐसा कार्य प्राप्त होने के योग बन रहे हैं जो आपके धन भंडार में वृद्धि करेगा। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। सेहत बेहतर रहेगी। तीर्थ दर्शन हो सकता है. सत्संग का लाभ मिलेगा. प्रभावशाली व्यक्तियों से मेलजोल बढ़ेगा. कार्य की बाधा दूर होगी. व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल रहेगा. पारिवारिक सहयोग मिलेगा. कुछ तनाव भी हो सकता है. थकान हो सकती है. परिस्थिति अनुकूल रहेगी. जल्दबाजी न करें.
  11. कुंभ राशि- कुंभ राशि के लिए एकादश भाव में मार्गी बृहस्पति के आने से स्थितियों में सुधार आएगा। अब तक जो भागदौड़ और जीवन में अनिश्चितता बनी हुई थी वह दूर हो जाएगी। अपने बारे में कोई अच्छा निर्णय ले पाएंगे। हालांकि अभी भी कोई बड़ा निवेश करने से बचना होगा। खासकर वाहन, मशीनरी के कार्यों में निवेश करें। मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा में अवश्य वृद्धि होगी। अविवाहितों को विवाह सुख की प्राप्ति होगी।प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी. कामकाज मनमाफिक चलेगा. प्रसन्नता रहेगी. प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग मिलेगा. जल्दबाजी से का‍म बिगड़ सकते हैं. पारिवारिक संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी. सुख-शांति बनी रहेगी. वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें. सुख के साधनों पर खर्च होगा.
  12. मीन राशि- यह राशि चक्र की अंतिम राशि हैं। मीन राशि के लिए मार्गी बृहस्पति का गोचर दशम स्थान में होगा। कार्य स्थान में बृहस्पति का शुभ प्रभाव मिलेगा। जिनके पास नौकरी नहीं है उन्हें नौकरी मिलेगी। बिजनेस प्रारंभ करने के लिए सही वक्त है, कार्य विस्तार करें। प्रॉपर्टी और वाहन में निवेश फलेगा। सेहत में सुधार आएगा। परिवार के बुजुर्गों के सहयोग से सही निर्णय ले पाएंगे। मित्रों, भाई-बंधुओं के साथ संबंधों में सुधार आएगा। पारिवारिक समागम का अवसर आएगा।कष्ट, भय, तनाव व चिंता का वातावरण बन सकता है. जोखिम व जमानत के कार्य टालें. वाहन व मशीनरी के प्रयोग में विशेष सावधानी रखें. दूसरों के झगड़ों में न पड़ें. कीमती वस्तुएं गुम हो सकती हैं. आय में निश्चितता रहेगी. व्यवसाय ठीक चलेगा. नौकरी में सह‍कर्मियों से विवाद संभव है।
बृहस्पति ग्रह की शांति के कुछ उपाय ---
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति अनुकूल अवस्था में नहीं है तो आपको पुखराज रत्न धारण करना चाहिए।
- बृहस्पति धनु और मीन राशियों के स्वामी हैं इसलिए अगर इन दोनों राशियों के जातक पुखराज धारण करें तो उन्हें शुभ फल मिलते हैं। इसके साथ ही बृहस्पति ग्रह के अच्छे फल प्राप्त करने के लिए गुरुवार के दिन या बृहस्पति की होरा में गुरु यंत्र को अपने घर में स्थापित करना चाहिए। आप गुरु ग्रह के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए पीपल की जड़ को गुरु की होरा या गुरु के नक्षत्रों में भी धारण कर सकते हैं।
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