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जाने और समझें शुक्र एवम शुक्र के कारण होने वाले रोगों को

वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को एक शुभ ग्रह माना गया है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को भौतिक, शारीरिक और वैवाहिक सुखों की प्राप्ति होती है। इसलिए ज्योतिष में शुक्र ग्रह को भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, भोग-विलास, शौहरत, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस, काम-वासना और फैशन-डिजाइनिंग आदि का कारक माना जाता है। 
समझें शुक्र एवम शुक्र के प्रभाव को--
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि शुक्र, वृषभ और तुला राशि का स्वामी होता है और मीन इसकी उच्च राशि है, जबकि कन्या इसकी नीच राशि कहलाती है। शुक्र को 27 नक्षत्रों में से भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त है। ग्रहों में बुध और शनि ग्रह शुक्र के मित्र ग्रह हैं और तथा सूर्य और चंद्रमा इसके शत्रु ग्रह माने जाते हैं। शुक्र का गोचर 23 दिन की अवधि का होता है अर्थात शुक्र एक राशि में क़रीब 23 दिन तक रहता है।
        ज्योतिष में धन और लक्ष्मी का कारक शुक्र ग्रह को माना गया है। सबसे ज्यादा धन देने में यही ग्रह समर्थ है। शुक्र ग्रह को शुक्राचार्य/दैत्याचार्य भी कहाँ जाता है। वृषभ और तुला राशि का स्वामी शुक्र ही होता है। तुला राशि शुक्र की मूल त्रिकोण अर्थात सबसे प्रिय राशि है। व्यय भाव अर्थात पत्रिका का 12वां स्थान इसकी सबसे प्रिय जगह है। 12वीं राशि मीन में यह उच्च राशि का होता है। इस ग्रह को भोग प्रिय ग्रह कहा गया है। इसलिये पत्रिका के बारहवें भाव जिसे खर्च, शय्या स्थान भी कहा जाता है, वहां यह ग्रह सबसे शानदार परिणाम देता है। यदि आपकी कुंडली में यह ग्रह अच्छी स्थिति में है तो आपको शानदार जीवन जीने को मिलेगा। शुक्र की नीच राशि कन्या होती है। जहा ये ग्रह अच्छे परिणाम नही देता।

शुक्र की शुभ स्थिति--

Know-and-understand-the-diseases-caused-by-Venus-जाने और समझें शुक्र एवम शुक्र के कारण होने वाले रोगों कोपत्रिका में वृषभ, तुला तथा मीन राशि का शुक्र हो तो जातक यदि दरिद्र परिवार में भी जन्मा हो तो अमीर बन जाता है। यदि किसी भी राशि का शुक्र बारहवें भाव में हो तो जातक को वैभवपूर्ण जीवन जीने कॊ मिल ही जाता है। यदि पत्रिका के 6ठे भाव मॆ स्थित होकर भी यह ग्रह जब 12वे स्थान कॊ देखता है तो अच्छे परिणाम देता है। पत्रिका के दूसरे तथा सातवें मॆ बैठा शुक्र शादी के बाद आर्थिक स्थिति को शानदार कर देता है।

पत्नी, प्रेमिका व सुंदर वाहन--

शुक्र ग्रह को प्रेमिका माना गया है। संसार मॆ समस्त तरह का प्रेम इसी ग्रह से देखा जाता है।राधा कृष्ण का दिव्य प्रेम शुक्र ग्रह से ही सम्भव है। संसार मॆ समस्त सुंदरता इस ग्रह से ही है।शानदार तथा महँगे वाहन, मकान इस ग्रह की कृपा से ही सम्भव है।

शनि का परम मित्र हैं शुक्र--

जीवन मॆ कड़ी मेहनत से ही लक्ष्मी प्राप्ति होती है चाहे वह कर्म कैसा भी हो। हां एक बात अवश्य है की आपके कर्मफल भोगना पड़ता है। शनि व शुक्र का विशेष प्रेम है शुक्र की राशि तुला मॆ शनि उच्च राशि का होता है। यानी आपने जी तोड़ परिश्रम किया है तो लक्ष्मी कृपा आपको अवश्य प्राप्त होगी।

स्वच्छता पसंद है शुक्र ग्रह को--

दीवाली के पहले लक्ष्मी पूजन के लिये हम सभी जगह सफाई करते है रंग रोगन भी करते है साफ वस्त्र पहनते है। इस तरह हम शुक्र ग्रह को अपने अनुकूल बनाने का प्रयास करते हैं। यदि आप स्वच्छ रहते है (निर्धन भी स्वच्छ रह सकता है) तथा कड़ी मेहनत करते है तो निश्चित रूप से आप पर लक्ष्मी मां की कृपा होगी।
भगवान विष्णु, लक्ष्मी तथा भ्रगु ऋषि में समझौता
मां लक्ष्मी हमेशा क्षीरसागर में शेषनाग में विश्राम कर रहे भगवान विष्णु की चरण सेवा करती हैं। एक बार त्रिदेव के क्रोध की परीक्षा हेतु ऋषि भ्रगु ने क्षीरसागर में शयन कर रहे भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर प्रहार किया था। जिससे रुष्ट होकर माता लक्ष्मी ने ब्राह्मणों कों दरिद्र होने का शाप दिया। बदले में भ्रगु ने भी मां लक्ष्मी को श्राप दिया। इस झगडे को भगवान विष्णु ने सुलझाया। उन्होने कहा, जहाँ ब्राह्मण अपनी पूजापाठ व आशीर्वाद देगा वहा लक्ष्मी को आना ही पड़ेगा साथ ही जो व्यक्ति ब्राह्मणों को दान देगा उसे ही लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी।
     ज्योतिषीय ग्रंथों में शुक्र को भोग का कारक ग्रह माना गया है। इसका प्रभाव जातक के भोग करने पर अधिक पड़ता है। उसे जननेन्द्रिय सम्बन्धी रोगों का अधिक सामना करना पड़ता है।  जब जन्म पत्रिका में शुक्र निर्बल अथवा पीड़ित हो अथवा शुक्र के गोचर काल में जातक को गुप्त रोग, जननेन्द्रिय के पूर्ण रोग, स्त्रियों को प्रदर संतान बंध्यत्व, स्तन रोग, वक्ष ग्रन्थि, पुरुष को शीघ्रपतन, लिंग सिकुड़ना, उपदंश, मूत्र संस्थान के रोग, दवा की विपरीत प्रतिक्रिया, कैंसर, गंडमाला, अधिक सम्भोग के बाद कमजोरी अथवा चन्द्र व चतुर्थ भाव के पीड़ित होने पर हृदयाघात भी हो सकता है। 
खगोलीय दृष्टि से शुक्र ग्रह का महत्व---
खगोल विज्ञान के अनुसार, शुक्र एक चमकीला ग्रह है। अंग्रेज़ी में इसे वीनस के नाम से जाना जाता है। यह एक स्थलीय ग्रह है। शुक्र आकार तथा दूरी में पृथ्वी के निकटतम है। कई बार इसे पृथ्वी की बहन भी कहते हैं। इस ग्रह के वायु मंडल में सर्वाधिक कार्बन डाई ऑक्साइड गैस भरी हुई है। इस ग्रह से संबंधित दिलचस्प बात यह है कि शुक्र सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद केवल थोड़ी देर के लिए सबसे तेज़ चमकता है। इसी कारण इसे भोर का तारा या सांझ का तारा कहा जाता है।
         इस प्रकार आप समझ सकते हैं कि खगोलीय और धार्मिक दृष्टि के साथ साथ ज्योतिष में शुक्र ग्रह का महत्व कितना व्यापक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में स्थित 12 भाव उसके संपूर्ण जीवन को दर्शाते हैं और जब उन पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है तो व्यक्ति के जीवन में उसका असर भी दिखाई देता है।
धार्मिक दृष्टि से शुक्र ग्रह का महत्व --
पौराणिक मान्यता के अनुसार, शुक्र ग्रह असुरों के गुरू हैं इसलिए इन्हें शुक्राचार्य भी कहा जाता है। भागवत पुराण में लिखा गया है कि शुक्र महर्षि भृगु ऋषि के पुत्र हैं और बचपन में इन्हें कवि या भार्गव नाम से भी जाना जाता था। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार ज्योतिष शास्त्रों में शुक्र देव के रूप का वर्णन कुछ इस प्रकार किया गया है - शुक्र श्वेत वर्ण के हैं और ऊँट, घोड़े या मगरमच्छ पर सवार होते हैं। इनके हाथों में दण्ड, कमल, माला और धनुष-बाण भी है। शुक्र ग्रह का संबंध धन की देवी माँ लक्ष्मी जी से है, इसलिए हिन्दू धर्म के अनुयायी धन-वैभव और ऐश्वर्य की कामना के लिए शुक्रवार के दिन व्रत धारण करते हैं।

गुरु कृपा प्राप्त करे--

यदि आप धन लक्ष्मी प्राप्त करना चाहते है तो इसके लिये आपको कड़ी मेहनत, स्वच्छता के अलावा गुरु, ब्राह्मण कृपा व आशीर्वाद आवश्यक है। यदि ब्राह्मण और गुरु रुष्ट है तो आपकी लक्ष्मी अन्यत्र चली जायगी। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि शुक्र के रोग भाव के स्वामी के साथ होने पर जातक को नेत्र में चिन्ह बनता है। शुक्र की महादशा तथा शुक्र की अन्तर्दशा में जातक को विभिन्न रोग हो सकते हैं। 
  • शुक्र यदि द्वितीय भाव में है तो हृदयरोग, नेत्रकष्ट, मानसिक समस्या, चोरी के कारण धन हानि, राजप्रकोप अथवा शत्रु प्रबल होते हैं।
  • शुक्र तृतीय अथवा एकादश भाव में होने पर राजा अर्थात् उच्चाधिकारी से दण्ड, अग्निकाण्ड, भाई से कष्ट तथा कई अन्य कष्ट हो सकते हैं।
  •  शुक्र त्रिकोण अर्थात् लग्न, पंचम अथवा नवम भाव में होने पर जातक अपनी बुद्धि का सही प्रयोग नहीं कर पाता है। वह सदैव शंका व संशय में रहता है शारीरिक व मानसिक कष्ट भी प्राप्त होते हैं। इस स्थिति की सम्भावना
  • शुक्र के 4-6-8 अथवा 12वें भाव में होने पर अथवा शुक्र गोचरवश इन भावों में आने पर ही अधिक होती है।

आप यह न समझें कि यदि आपकी पत्रिका में शुक्र पापी है तो आपको केवल यही रोग होंगे, रोग होने में शुक्र किस भाव में तथा किस राशि में स्थित है, इस बात का भी बहुत असर होता है। यहां पर हम पत्रिका में शुक्र किस राशि में होने पर किस रोग की सम्भावना अधिक होती है। इसकी इस लेख द्वारा जानकारी प्राप्त करेंगे।
  1. शुक्र यदि मेष राशि में हो तो जातक को शिरोरोग, शूल, नेत्र रोग तथा सिर पर चोट का भय होता है।
  2. शुक्र के वृषभ राशि में होने पर जातक को तभी रोग होते हैं, जब शुक्र अत्यधिक पीड़ित हो। इनमें आहार नली का संक्रमण, गलसुए, टान्सिल्स, मुख व जिव्हा पर छाले जैसे रोग अधिक होते हैं।
  3. शुक्र के मिथुन राशि में होने पर जातक को गुप्त रोग, चेहरे पर मुंहासे आदि होते हैं। यदि लग्नस्थ शुक्र है तो चर्मविकार के साथ रक्त विकार की भी सम्भावना होती है।
  4. शुक्र के कर्क राशि में होने पर जातक को जलोदर, वक्ष सूजन, अपच, वमन अथवा जी मिचलाने जैसे रोग होते हैं। मंगल की दृष्टि होने पर अक्सर शरीर में जल की कमी से ग्लूकोज की बोतलें चढ़ती हैं।
  5. शुक्र के सिंह राशि में होने पर जातक को हृदयविकार, रीढ़ की हड्डी की पीड़ा व रक्त धरमनियों के रोग अथवा धमनी रक्त का थक्का जमने से हृदयाघात का योग बनता है।
  6. शुक्र के कन्या राशि में होने पर जातक को खूनी अतिसार, थोड़ा भी खाते ही शौच जाना तथा भोजन का न पचना जैसे रोग उत्पन्न होते है। 
  7. शुक्र के तुला राशि में होने पर जातक को मूत्र संस्थान के रोग, शीघ्रपतन तथा गुरु के भी पीड़ित होने पर मधुमेह जैसे रोग होते हैं।
  8. शुक्र के वृश्चिक राशि में होने पर पुरुष जातक को अण्डकोष के रोग, अल्पवीर्यता, हर्निया की शल्य क्रिया, उपदंश तथा स्त्री जातक को गर्भाशय संक्रमण योनिरोग, श्वेत प्रदर व गुदाद्वार के रोग होते हैं।
  9. शुक्र के धनु राशि में होने पर जातक को गुदा रोग अथवा शल्य क्रिया, फिशर, गुप्तेन्द्रिय रोग, स्नायु रोग, कमर की पीड़ा, दुर्घटना में कमर उतरना जैसे रोग अधिक होते हैं।
  10. शुक्र के मकर राशि में होने पर जातक को घुटनों की पीड़ा व सूजन, त्वचा रोग, कमर से निचले हिस्से में पीड़ा व स्नायु विकार के रोग होते हैं।
  11. शुक्र के कुंभ राशि में होने पर जातक को रक्तवाहिका के रोग, घुटने में पीडा अथवा सूजन, रक्तविकार स्फूर्ति में कमी, काम में मन न लगना आदि रोग होते हैं।
  12. शुक्र मीन राशि में होने पर जातक को पैरों के पंजों के रोग अधिक होते हैं। तथा गुरु के भी पीड़ित होने पर मधुमेह रोग की संभावना बढ़ जाती है।
जानिए शुक्र ग्रह के मंत्र -

शुक्र का वैदिक मंत्र---
ॐ अन्नात्परिस्त्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पय: सोमं प्रजापति:।
ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु।।

शुक्र का तांत्रिक मंत्र---
ॐ शुं शुक्राय नमः

शुक्र का बीज मंत्र---
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

क्या होगा यदि शुक्र स्थित हो रोग/ऋण/शत्रु (6ठे भाव में) तो --
शुक्र की इस भाव में स्थिति आपके कुल की श्रेष्ठता का द्योतक हो सकती है। आप सुशिक्षित और विवेकवान हो सकते हैं। लेकिन यहां स्थित शुक्र आपको डरपोक बना सकता है अथवा आपको स्त्रियों से अप्रियता भी मिल सकती है। गुरुजनों से भी आपका विरोध रह सकता है। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि इस भाव में शुक्र के शुभ फल अधिक मिलते हैं, मतान्तर से शुक्र यहाँ निष्फल होता है लेकिन अधिक मत शुक्र के शुभ फल देने के हैं। शुक्र के निष्फल होने के मत में जातक शारीरिक रूप से सुखहीन, दुराचारी, अधिक मित्र वाला, मूत्र रोग से ग्रसित, विपरीत लिंग में प्रिय, गुप्तरोगी, समस्त प्रकार के वैभव व सुख से रहित, संकीर्ण मानसिक प्रवृत्ति का, शारीरिक रूप से भी अववस्थ व अक्षम, सदैव दुःखी रहने वाला परन्तु शत्रुनाशक तथा विवाहोपरान्त भाग्योदय अवश्य होता है। दूसरे मत में अर्थात् शुक्र के शुभ फल में जातक अत्यधिक सुख प्राप्ति, धनवान, अधिक शारीरिक सुख प्रापत करने वाला तथा समस्त प्रकार के वैभव को भोगने वाला होता है।
       ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि ऐसा जातक अपने मातृपक्ष (मामा-मौसी) के लिये अशुभ होता है। इस भाव में शुक्र यदि पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या व मकर) राशि में हो तो जातक का जीवनसाथी सुन्दर तो होता है परन्तु झगड़ालू प्रवृत्ति का होता है। वह परिवार में सामंजस्य बनाकर चलता है। ऐसे लोगों को )ण से बचना चाहिये क्योंकि यदि उन्होंने एक बार )ण ले लिया तो फिर इस योग के प्रभाव से वह जीवनपर्यन्त )णग्रस्त रहेंगे। एक पुत्री को वैधव्य भोगना पड़ सकता है जिसका पूर्ण खर्चा जातक को ही उठाना पड़ता है। खाने में कोई संयम नहीं रखते हैं। गुप्त रोग के साथ मूत्र संस्थान का संक्रमण भी हो सकता है।
      आपको शत्रुओं से पीडा भी मिल सकती है। हांलाकि आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर पाएंगे। आपको भाई-बहनों और मामा से सुख मिलेगा। आपके मामा के कन्या संतान अधिक हो सकती हैं। आपके अच्छे मित्रों की संख्या कम होगी जबकि खराब आदतों वाले मित्र अधिक संख्या में होंगे। आपकी प्रथम संतान पुत्र के रूप में हो सकती है। आपकी संतान अच्छी होगी और आप पुत्र-पौत्रों से युक्त होंगे। किसी भी जन्म कुंडली के छठे भाव में शुक्र  जातक की कुंडली के छठे भाव में बैठा शुक्र जातक को विपरित लिंग की ओर आकर्षित करता है। 
     लग्न का छठा भाव बुध और केतू का माना गया है जो एक दूसरे के शत्रु हैं, लेकिन शुक्र दोनों का मित्र है. इस घर में शुक्र नीच होता है। लेकिन यदि जातक विपरीत लिंगी को प्रसन्न रखता है और सारे और सुविधा उपलब्ध करवाता है तो उसके धन और पैसे में बृद्धि होगी।  ऐसा जातक अपने काम को बिच में अधूरा नहीं छोड़ता है। इस भाव के शुक्र पर हुए मेरे शोध का फल कहता है कि ऐसा जातक संसार के प्रत्येक सुख का भोग करता है लेकिन इस भोग के कारण उसे गुप्त रोग भी होता (कर्क, वृश्चिक व मीन) राशि में हो तो जातक अत्यधिक यदि पुरुष राशि (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु व कुंभ) में हो तो जीवनसाथी सुन्दर व सुशील होता है परन्तु वह कठोर भाषा का प्रयोग अधिक करता है। 
   जब स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) में शुक्र होने पर जीवनसाथी बहुत ही कोमल शरीर का परन्तु स्वभाव बिलकुल विपरीत होता है। संतान कम होती है। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार ऐसा जातक रुपया लगाकर व्यापार में पूर्णतः असफल होता है परन्तु बिना धन के व्यवसाय में सफल हो जाता है। उदाहरण के लिये जैसे किसी व्यवसाय में कोई ऐसा व्यक्ति धन लगाये जिसे व्यापार का अनुभव न हो तो ऐसे जातक को वह सलाहकार अथवा किसी अन्य रूप में सम्मिलित करे तो फिर जातक व्यापार में बहुत सफल होता है।
    ऐसा होने पर स्त्री पक्ष से आपको कम सुख मिलेगा अथवा कुछ गुप्त परेशानियां रह सकती हैं। हांलाकि विवाह के बाद यदि आपका आहार विहार नियमित और मर्यादित रहेगा तो समस्याएं नहीं होंगी। आपके खर्चे आमदनी से अधिक हो सकते हैं। हो सकता है कि आप उचित स्थान पर खर्च न करके अनुचित जगह पर खर्च करें। हो सकता है कि स्वतंत्र व्यवसाय से भी आपको बहुत लाभ न मिल पाए।
इन उपाय से होगा लाभ -
-- जातक की पत्नी को पुरुषों के जैसे कपडे नहीं पहनने चाहिए और न ही पुरुषों के जैसे बाल रखने चाहिए अन्यथा गरीबी बढती है। 
-- ऐसे जातक को उसी से विवाह करना चाहिए जिस स्त्री के भाई हों।
-- जातक स्त्री हो तो स्वयं या फिर पुरुष हो तो पत्नी अपने बालों में सोने का कि.ल लगाए। 
-- खयाल रखें कि पत्नी नंगे पैर न चले।

जानिए 24 जनवरी 2020 को कैसे होगा दूर सभी राशियों से शनि का प्रकोप

हिंदू धर्म में हर ग्रह का अपना एक अलग स्थान है. इन्ही ग्रहों के आधार पर यहाँ भविष्यवाणीयाँ की जाती है l समय समय पर इन ग्रहों का प्रभाव हमारे सांसारिक जीवन पर बहुत ही महत्वपूर्ण होता है l और इन सब में भी शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव तो बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है इसीलियें हमारे ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द जी शास्त्री ने आप सभी के लिए शनि की साढेसाती का प्रभाव किन-किन राशियों पर कब-कब होगा यहाँ बताया है. आप सभी यह महत्वपूर्ण जानकारी आप तक व अन्य लोगों तक जरुर पहुंचाएं.
Know-how-far-Saturn-will-get-out-of-all-zodiac-signs-on-24-January-2020- जानिए 24 जनवरी 2020 को कैसे होगा दूर सभी राशियों से शनि का प्रकोपवैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रह गोचर का विशेष महत्व होता है। जब कोई ग्रह एक राशि को छोड़कर दूसरी राशि में स्थान परिवर्तन करता है तो उसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है। अगले वर्ष की शुरुआत ( 2020) में ग्रहों की स्थितियों में कई बड़े फेरबदल होने वाले हैं। वर्ष 2020 के शुरूआती दिनों में ही शनि अपनी राशि बदलेंगे। शनि 24 जनवरी 2020 को धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। शनि के राशि परिवर्तन से अगले वर्ष 2020 में किन राशियों से शनि की अशुभ छाया हट जाएगी और किन राशि पर इनका प्रकोप रहेगा।
    शनि के गोचर, साढ़ेसाती और महादशा का हमारे जीवन में बहुत महत्व होता है, क्योंकि इसके प्रभाव से मनुष्य के जीवन में बड़े बदलाव होते हैं, जैसे शादी , नौकरी, व्यवसाय, संतान आदि। हालांकि ये परिवर्तन सुखद और दुखद दोनों हो सकते हैं। शनि देव बुध, शुक्र और राहु के साथ मित्रता रखते हैं तो सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ इनका संबंध शत्रुता का है। बृहस्पति और केतु के साथ इनका संबंध सम रहता है। मकर तथा कुंभ राशियों के ये स्वामी माने जाते हैं।  मिथुन और तुला राशि वालों की ढैय्या साल 24 जनवरी साल 2020 में शुरु होने जा रही है। 
   यहां से मकर की द्वितीय ढैय्या, धनु की अंतिम ढैय्या और वृश्चिक राशि वाले शनि की साढ़े साती से मुक्त हो जाएंगे इस प्रकार शनि के धनु राशि के गोचर से 6 राशियों मेष,कर्क,सिंह,तुला,कुम्भ,एवं मीन को शुभ फलों की प्राप्ति होगी। शेष 6 राशियों ,वृषभ,मिथुन,कन्या,वृश्चिक धनु,मकर अशुभ फलों में वृद्धि करेंगे अतः उन्हें सतर्क एवं सावधान रह कर जरूरी उपाय करना चाहिए। शनि ग्रह का गोचर 24 जनवरी 2020 यानी शुक्रवार के दिन रात को 12 बजकर 10 मिनिट पर धनु राशि से मकर राशि मे हो रहा है शनि की यह अपनी ही राशि है । इसके बाद वर्ष 2022 में शनि (शुक्रवार) दिनांक 29 अप्रैल 2022 को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। साथ ही साल 2025 में शनि, शनिवार दिनांक 29 मार्च 2025 को रात 11 बजकर 02 मिनट पर कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करेंगे।
   वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि को न्यायधीश की उपाधि दी गई है। जब भी शनि का राशि परिवर्तन होता है तो प्रकृति के साथ- साथ मानव जीवन पर भी इसका अत्याधिक प्रभाव देखने को मिलता है।पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि शनि मध्यम वर्ग, मजदूर वर्ग का भी कारक माना जाता है। शनि के राशि परिवर्तन के साथ ही कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव शुरू हो जाएगा तो कुछ को इन सब चीजों से राहत मिलेगी। 
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी से जानिए शनि का मकर राशि में गोचर करने पर सभी 12 राशियों पर क्या होगा प्रभाव (असर)---
  1. शनि गोचर 2020 मेष राशि -- शनि का गोचर आपके दसवें भाव में हो रहा है। कुंडली में दसवें भाव से कर्म को देखा जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए काफी शुभ है। शनि का परिवर्तन आपके कर्म को प्रभावित करेगा। इस राशि परिवर्तन से नौकरी करने वाले लोगों को अत्यंत ही लाभ प्राप्त हो सकता है। आपको इस समय में प्रमोशन मिल सकता है। मेष राशि के जो लोग काफी समय से अच्छी नौकरी का प्रयास कर रहे हैं तो इनको इस समय में एक अच्छी नौकरी प्राप्त हो सकती है। लेकिन इस समय में आपको अपनी माता और जीवनसाथी की सेहत का ख्याल रखना होगा। वहीं जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद भी हो सकता है। 
  2. शनि गोचर 2020 वृषभ राशि --- शनि के मकर राशि में जाने से इस रााशि से शनि की ढैय्या का असर बिल्कुल खत्म हो जाएगा। शनि का गोचर आपके नवें भाव में हो रहा है। कुंडली में नवें भाव से भाग्य का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ है। शनि का परिवर्तन आपके भाग्य में वद्धि करेगा। इस राशि के जिन लोगों का कोई काम काफी समय से अटका हुआ था। वह इस समय में पूरा हो जाएगा। आपको इस समय में आपके भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। लेकिन आपका इस समय अपने छोटे भाई बहनों के साथ विवाद हो सकता है। आपको इस समय में आपका कोई रोग भी परेशान करता है। धार्मिक कार्यों में आप इस समय बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। 
  3. शनि गोचर 2020 मिथुन राशि --- शनि का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है। कुंडली में अष्टम भाव से मृत्यु का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए अशुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपकी परेशानियों को बढ़ा सकता है। इस राशि परिवर्तन के साथ ही आपकी शनि की ढैय्या भी आरंभ हो जाएगी। इस समय आपका अपने परिवार में झगड़ा हो सकता है। इसलिए आपको अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। कार्यक्षेत्र में भी आपकाअपने उच्च अधिकारियों के साथ मतभेद हो सकता है। इसलिए आपको इस समय बहुत ही ज्यादा संभल कर चलना चाहिए। बच्चों की सेहत का इस समय विशेष ध्यान रखें।  
  4. शनि का गोचर 2020 कर्क राशि -- शनि का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है। कुंडली में सप्तम भाव से वैवाहिक जीवन का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके वैवाहिक जीवन में खुशियों का संदेश लेकर आ रहा है। इस समय जो जातक विवाह करना चाहते हैं उनके लिए यह समय काफी शुभ है। इस समय में आपका विवाह हो सकता है। कार्यक्षेत्र में भी आपको इस समय लाभ मिल सकता है। वहीं अगर आप नौकरी में परिवर्तन करना चाहते हैं तो भी यह समय आपके लिए काफी अच्छा है। इस समय आपकी प्रवृति काफी गंभीर हो जाएगी और आप सभी काम को काफी सोच विचार कर करेंगे। 
  5. शनि गोचर 2020 सिंह राशि -- शनि का गोचर आपके छठवें भाव में हो रहा है। कुंडली में छठवें भाव से रोग और शत्रु का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए सामान्य रहेगा। इस परिवर्तन से आपके शुत्र परास्त होंगे। अगर आपको काफी से किसी रोग ने परेशान कर रखा था तो वह भी इस समय में ठीक हो जाएगा। कोर्ट कचहरी के क्षेत्र में भी इस समय आपको सफलता प्राप्त होगी। लेकिन इस समय में आपके खर्चे बढ़ सकते हैं। ससुराल पक्ष से भी आपको इस समय परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस समय आपरे पराक्रम में वृद्धि होगी। अगर आप विदेश जाना चाहते हैं तो भी आपके लिए समय काफी शुभ है। 
  6. शनि गोचर 2020 कन्या राशि --- इस राशि पर से शनि की ढैय्या समाप्त हो जाएगी। इस वजह से तमाम तरह की परेशानियों से इन्हें निजात मिल जाएगी। शनि का गोचर आपके पांचवें भाव में हो रहा है। कुंडली में पांचवें भाव से संतान और विद्या का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। इस परिवर्तन से आपको संतान सुख की प्राप्ति होगी। इस समय नव दंपत्ति के यहां संतान की किलकारियां गुंज सकती है। विद्यार्थियों को भी इस समय लाभ प्राप्त हो सकता है। अगर आप अपने किसी मंदपंसद कॉलेज या स्कूल में एडमिशन लेना चाहते हैं तो आपके लिए यह समय काफी शुभ है। लेकिन आपको इस समय वैवाहिक सुख में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं आपकी आय में भी कमीं हो सकती है। 
  7. शनि गोचर 2020 तुला राशि --- 24 जनवरी 2020 से शनि का मकर राशि में यानि आपके चतुर्थ भाव में प्रवेश होगा| उस समय स्थितिया परिवर्तन होगी और आपके सुख में वृद्धि होगी आपकी माता के साथ आपका रिश्ता अच्छा रहेगा किसी भी तरह का कोई भी आप कार्य भूमि, वाहन से सम्बंधित करते है| तो आपको उसमे सफलता हासिल होंगी| इसके अलावा गुरु जो की 30 मार्च को नीच के होकर मकर राशि में प्रवेश कर रहे है| उसके बाद वो 30 जून को पुनः धनु राशि में प्रवेश करेंगे और 20 नवम्बर को पुनः मकर राशि में प्रवेश कर जायेंगे| ये कुछ उत्तार चढाव गुरु का इस साल देखने को मिलेगा| राहू इस साल आपके भाग्य स्थान से आपके अष्टम स्थान यानि वृषभ राशि में 23 सितम्बर 2020 को प्रवेश करेंगे| वही 23 सितम्बर 2020 को केतु भी आपके राशि से द्वितीय भाव में यानि वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे|शनि का गोचर आपके चौथे भाव में हो रहा है। कुंडली में चौथे भाव से सुख और माता का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए अशुभ रहेगा। इस राशि परिवर्तन के साथ ही आपके ऊपर शनि की ढैय्या की शुरू हो जाएगी। इस समय में आपकी माता की सेहत ठीक रहेगी। आपको वाहन, भूमि और वाहन के सभी सुख प्राप्त होंगे। लेकिन इस समय आपको अपने कार्यक्षेत्र में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इस समय में आपको शत्रु बाधा हो सकती है। कोर्ट कचहरी के मामलों में भी आपको परेशानी हो सकती है। शारीरीक का भी इस समय में आपको सामना करना पड़ सकता है। 
  8. शनि गोचर 2020 वृश्चिक राशि -----शनि के मकर राशि में जाने से वृश्चिक राशि वालों पर अब शनि की टेढ़ी नजर नहीं रहेगी। शनि का गोचर आपके तीसरे भाव में हो रहा है। कुंडली में तीसरे भाव से पराक्रम और छोटे भाई बहन का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके पराक्रम में वृद्धि करेगा। इस समय में आप अपना सभी काम अपने पराक्रम के दम पर पूरा कर लेंगे। आपका भाग्य भी इस समय में आपका साथ देगा। धार्मिक कार्यों में भी आप इस समय बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे लेकिन आपको इस समय में अपनी संतान की तरफ से परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। आपके खर्च भी इस समय में अत्याधिक बढ़ सकते हैं। 
  9. शनि गोचर 2020 धनु राशि---धनु राशि अग्नितत्व, द्विस्वभाव राशि है । धनु राशि में स्थित होकर शनि तृतीय दृष्टि से कुम्भ राशि को प्रभावित करेंगे जो उनकी मूलत्रिकोण राशि है। ज्यादा अशुभ प्रभाव नहीं रहेगा। सप्तम दृष्टि से मिथुन राशि को देखेंगे जो उनके मित्र बुध की राशि है। शनि की दशम दृष्टि कन्या पर रहेगी जो फिर से बुध की ही राशि है ।  यह याद रखियेगा की शनि ग्रह गोचरवश राशि के अंतिम भाग में अर्थात 20 डिग्री से 30 डिग्री विशेष प्रभाव या फल उत्पन्न करते हैं। शनि एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए लगभग ढाई साल का समय लेते हैं। यहां से, वह संपत्ति को इंकित करनेवाले चौथे भाव, दीर्घायु को इंकित करनेवाले 8 वीं भाव और लाभ और व्यवसाय को इंकित करने वाले 11 वें भाव पर अपनी दृष्टि डालते है। धनुष राशीवालों के लिए इन साढ़े सात वर्ष (साडे सती) को 'पाद शनी' कहा जाता है, जिसके दौरान शनि आपको अच्छे फल प्रदान करेगा, बशर्ते आपने अच्छी नैतिकता बनाए रखी हो। यह गोचर आपके करियर में सकारात्मक मोड़ ला सकता है, वित्तीय स्थिति में सुधार कर सकता है और आपके लंबित सपने को पूरा कर सकता है।इस राशि वाले सभी जातक सतर्क ओर सावधानी रखें। साल 2020 में शनि धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में धनु राशि वालों से दूसरे चरण की साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी और तीसरी चरण साढ़ेसाती यानी उतरती साढ़ेसाती आरंभ हो जाएगी। इससे धनु राशि वालों की पहले की मुकाबले से उनके जीवन में परेशानियां कम होती चली जाएगी। इस राशि के जो लोग सरकारी नौकरी में हैं, उनके लिए नौकरी में पदोन्नति और वित्तीय वृद्धि होगी। कला और सिनेमा क्षेत्र के लोग इस अवधि के दौरान अपने पेशे में लोकप्रियता और सुधार का आनंद लेंगे।  इस अवधि में शनि धनु राशि से द्वितीय भाव में गोचर करेगा, जो वित्त और परिवार का द्योतक है।शनि का गोचर आपके दूसरे भाव में हो रहा है। कुंडली में दूसरे भाव से धन और कुंटुंब का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए मध्यम रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके धन में वृद्धि करेगा। इसी के साथ आप पर शनि की साढेसाती की आखिरी ढैय्या शुरु हो जाएगी। आपका परिवार भी इस समय में आपका पूरा साथ देगा। लेकिन आपको इस समय में कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ेगा। आपको अपने ससुराल पक्ष से परेशानि हो सकती है। आपकी माता का स्वास्थय भी इस समय में खराब हो सकता है। वहीं लाभ की अपेक्षा आपको नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है। 
  10. शनि गोचर 2020 मकर राशि --- शनि का गोचर आपके लग्न भाव में हो रहा है। कुंडली में लग्न भाव से शरीर का विचार किया जाता है। अगर आप व्यापार करते हैं तो आपको इस समय बाहरी देशों के साथ अपना व्यापार बढ़ाने का मौका मिलेगा। आयात-निर्यात के क्षेत्र में आपको सफलता मिल सकती है। विदेश यात्रा अथवा जन्मस्थान से दूर जाने के योग भी आपके लिये बन रहे हैं। वर्ष 2020 में मंगल का लाभ स्थान में होना आपके अंदर हर समस्या से लड़ने की शक्ति प्रदान करेगा। इस वर्ष आपकी राशि पर शनि की साढेसाती का प्रथम चरण समाप्त हो जाएगा। जिससे आपको काफी राहत मिलेगी। वर्ष राशिफल 2020 में 24 जनवरी को शनि राशि परिवर्तन कर आपकी ही राशि में प्रवेश कर जाएंगें। स्वराशि के शनि का होना आपके लिये शनि का शश महायोग बनाएगा। जिससे आपके कार्यक्षेत्र की स्थिति में काफी अच्छा बदलाव देखने को मिलेगा।शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए सामान्य ही रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके शरीर के लिए तो ठीक है। लेकिन इस समय आपमें आलस्य की अधिकता रहेगी। जिसके कारण आप अपने कार्यों को ठीक प्रकार से नहीं कर पाएंगे। आपका इस समय में अपने जीवनसाथी के साथ भी झगड़ा हो सकता है। अगर आप व्यापार करते हैं तो आपको इस समय काफी संभल कर चलना चाहिए। नौकरी करने वाले जातकों को भी कार्यस्थल में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 
  11. शनि गोचर 2020 कुंभ राशि --- इस राशि के जेक विशेष ध्यान(सावधानी) रखें क्यों कि शनि का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है। कुंडली में बारहवें भाव से खर्च का विचार किया जाता है। पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि शनि का राशि परिवर्तन इस राशि के लिए अशुभ ही रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके खर्चों को बढाएगा। इस राशि परिवर्तन के साथ ही आप पर शनि की साढेसाती शुरू हो जाएगी। इस समय में आपको खर्च बढ़ सकते हैं। आपको कोई पुराना रोग भी फिर से परेशान कर सकता है। शत्रुओं से आपको इस समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। परिवार में भी किसी के साथ आपका झगड़ा हो सकता है। धन संबंधी परेशानियां भी हो सकती है। इस समय में आपको भाग्य के भरोसे नहीं रहना चाहिए। 
  12. शनि गोचर 2020 मीन राशि---- शनि का गोचर आपके ग्यारहवें भाव में हो रहा है। कुंडली में ग्यारहवें भाव से आय का विचार किया जाता है। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपकी आय को बढाएगा। यह राशि परिवर्तन आपकी सभी इच्छाओं को पूर्ण करेगा। इस समय में आपकी सैलरी बढ़ सकती है। कार्यक्षेत्र में भी आपका मान सम्मान बढ़ेगा। आपके स्वाभाव में गंभीरता आएगी और आप अपने सभी कामों को अत्याधिक विचारकर ही करेंगे। लेकिन ध्यान रखें, वैवाहिक जीवन के लिए यह समय ठीक नहीं है। आप वयस्त होने के कारण इस समय अपने पार्टनर को समय नहीं दे पाएंगे और अगर आप शादीशुदा हैं तो आपका अपनी ससुरालवालों के साथ मतभेद हो सकता है। 

जाने और समझें, शनि का फल कथन कैसे करें--
आपकी कुंडली और गोचर मिलाकर ही फलकथन किया जा सकता है अकेला गोचर कभी भी फलदाई नहीं होता  फलदीपिका, जातक पारिजात जैसे महान ज्योतिष ग्रंथों में एक बहुत सरल तरीका बताया हुआ है की जन्म चन्द्रराशि से 3, 6, 11 राशि में शनि का गोचर शुभ होता है यदि क्रमशः वेध स्थान 12, 9, 5 में कोई अन्य ग्रह न हो। उदाहरणार्थ तुला राशि के लिए धनु का शनि 3वे होकर शुभ होना चाहिए अगर 12वे कन्या में कोई ग्रह (सूर्य के अतिरिक्त) गोचर न कर रहा हो। परन्तु किसी ग्रह के गोचर का मनुष्य पर प्रभाव सिर्फ जन्म लग्न अथवा जन्म राशि देखकर बताना असंभव है। इसके लिए कुंडली का सूक्ष्म अध्ययन आवश्यक है। साथ ही शनि के अलावा 8 और ग्रह हैं जिनके गोचर का प्रभाव आपको देखना होगा। मैं आपको एक छोटा सा सूत्र देता हूँ जिसको आप खुद अपनी कुंडली में देख सकते हैं की शनि का गोचर आपको कैसा फल देगा। इसके लिए आप अपनी कुंडली में शनि का अष्टकवर्ग देखिये। इस अष्टक वर्ग में देखिये की धनु राशि में कितने बिंदु/रेखा/अंक हैं। अगर यह संख्या 0, 1, 2, 3 है तो सामान्यतः अशुभ फल मिलेगा, अगर संख्या 4 है तो मिला जुला, 5, 6, 7, 8 है तो शुभ फल मिलेगा। ऐसा आप अनुमान लगा सकते हैं।अतः अगर आपकी चन्द्र राशि तुला, कर्क, कुम्भ है और आपकी कुंडली में शनि के अष्टक वर्ग में 5 से 8 बिंदु हैं तो आप शनि के धनु राशि में गोचर से अच्छे फल की आशा कर सकते हो।

जानिए शनि की साढ़ेसाती को कम करने के उपाय ---
कृपया इन्हें आप नियमिति ध्यान रख करें l इससे आप पर शनि का प्रकोप कम हो जायेंगा. इस समय साढे साती ‘वृश्चिक’ ‘धनु’ और ‘मकर’ राशि में चालू है और इनका प्रभाव काफी गहरा हो रहा है इन राशि के जातकों को बहुत ही ध्यान से अपने सारे काम पूर्ण करने चाहिए. 
साढ़ेसाती से बचने के लिए यह है महत्वपूर्ण उपाय .
  1. साडेसाती राशि वाले जातक नित्य सुबह उठकर ‘ॐ शं शनिश्चराय नमः’ का जाप अवश्य करना चाहियें l
  2. नित्य शनिदेव की मूर्ति को हाथ जोड़ नमस्कार कर घर से निकलना चाहियें l
  3. यदि हो सकें तो नित्य शनि देव की चालीसा को पढ़ना चाहियें l
  4. सप्ताह में शनिवार के दिन शनि देव की पूजा अवश्य करनी चाहियें l
  5. यदि आप से हो सके तो शनिवार को शनि देव के उपवास करें l यह विशेष फलदायक होंगे l
  6.  (नोट : ध्यान रहे उपवास में कोई भी विघ्न नहीं आना चाहियें क्यूँ की शनि देव जल्दी नाराज हो जातें है l तो इस बात का अवश्य ध्यान दे अगर संकल्प ले तो उसे पूरा करें न हो सके तो न ले l
  7. शनि देव का यंत्र अपने पूजा स्थल अपने तिजोरी में अवश्य रखें l
  8. शनि देव को मनाने के लिए आप मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर में भी पूजा कर सकते है l हनुमान देव की पूजा शनि की पूजा कहलाती है l
  9. शनिवार को काला वस्त्र पहने l अगर न पहन सकों तो कम से कम एक काला रुमाल अपने पास अवश्य रखें l
  10. शनि देव सूर्य भगवान के पुत्र है इसलिए रोज सूर्य भगवान को जल अवस्य चढ़ाएं इससे विशेष कृपा प्राप्त होंगी l
  11. शनि देव की माता छाया है l इसलिए आप शाम के समय या रात को शनि देव का ध्यान करें इससे भी उनकी कृपा बनी रहेंगी l
  12. “ॐ शं शनिश्चराय नमः” यह मंत्र जितना आप जपेंगे l उतना शनि का प्रकोप कम होगा l यह मंत्र ही साढ़ेसाती का रामबाण उपाय है l

वृश्चिक राशि में देव गुरु वृहस्पति का प्रवेश, 5 महीनें रखें सावधानी

देवगुरु वृहस्पति लगभग 12 वर्षों बाद पुनः 05 नवंबर 2019 को प्रातः अपनी राशि धनु में प्रवेश कर रहे हैं। ये एक सदी में लगभग आठ बार धनु राशि की परिक्रमा करते हैं।  देव वृहस्पति ग्रह 5 नवंबर 2019, मंगलवार रात 12 बजकर 3 मिनट पर अपनी राशि धनु में गोचर करेगा और 29 मार्च 2020, रविवार शाम को 7 बजकर 8 मिनट तक इसी राशि में स्थित रहेगा। गुरु के धनु राशि में गोचर करने से 'हंस' योग बनता है। धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु पुनर्वसु, विशाखा एवं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों के भी स्वामी हैं। कर्क राशि इनकी उच्च और मकर राशि नीच संज्ञक कही गयी है। जिन जातकों की जन्मकुंडली में गुरु धनु राशि में होकर केन्द्र या त्रिकोण में होंगे उनके लिए 'हंस' योग श्रेष्ठतम फलदाई रहेगा।ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को सर्वाधिक शुभ एवं शीघ्रफलदाई ग्रह माना गया है। जन्मकुंडली में द्वितीय, पंचम, नवम तथा एकादश भाव के कारक होते हैं।
गुरु बृहस्पति का कुंडली पर प्रभाव--
कुंडली में बृहस्पति की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को मान सम्मान और ज्ञान प्रदान करती है तथा व्यक्ति को धन की प्राप्ति भी अच्छी मात्रा में होती है। संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी बृहस्पति की मजबूत स्थिति को देखा जाता है। वहीं दूसरी ओर गुरु बृहस्पति जब इसके विपरीत अवस्था में होते हैं तो इन सभी कारकों में कमी आने की संभावना बढ़ जाती है। 
 Lord-Jupiter-in-Scorpio-keep-careful-for-5-months-वृश्चिक राशि में देव गुरु वृहस्पति का प्रवेश, 5 महीनें रखें सावधानी    मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा, संयम, धैर्य, तरक्की, ज्ञान, सदाचरण और वैवाहिक सुख का प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति 5 नवंबर को सुबह अपनी राशि धनु में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 2019 में बृहस्पति ने कई बार मार्गी-वक्री गति करते हुए आगे-पीछे की राशियों में गोचर किया। धनु राशि में चल रहे बृहस्पति 10 अप्रैल को वक्री हुए थे। वक्री गति करते हुए ये 22 अप्रैल को पिछली राशि वृश्चिक में आ गए थे। इसके बाद 11 अगस्त को वृश्चिक राशि में ही मार्गी हो गए थे। अब मार्गी गति करते हुए 5 नवंबर को पुन: अपनी ही राशि धनु में आ रहे हैं। बृहस्पति कर्क राशि में उच्च का होता है और मकर में नीच का। धनु और मीन इसकी स्वयं की राशि है। यह धनु और मीन राशि के स्वामी हैं और कर्क राशि में उच्च तथा मकर राशि में नीच अवस्था में माने जाते हैं। कुंडली में चंद्रमा लग्न पर बृहस्पति की दृष्टि अमृत समान मानी जाती है। यह स्थिति गजकेसरी योग बनाती हैं।

देव गुरु वृहस्पति ग्रह 5 नवंबर को कल धनु राशि में प्रवेश करेंगे जहाँ 30 मार्च 2020 तक  इसी राशि में रहने वाले हैं. वह 22 अप्रैल 2019 से वृश्चिक राशि में ही विराजमान थे. गुरु के राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों के जातकों पर पड़ेगा। किसी राशि के जातक को धन का लाभ होगा तो किसी को स्वास्थ्य की परेशानी होगी। पांच राशि वालों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। यह बात उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिष पण्डित दयानन्द शास्त्री जी सभी राशि परिवर्तन से होने वाले असर के बारे में बताते हुए कही
जीवन में बदलाव लाएगा--
उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषी पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि भारतीय वैदिक ज्योतिष के अंतर्गत ग्रहों में बृहस्पति को देवताओं का गुरु कहा गया है और ग्रहों के मंत्रिमंडल में इन्हें मंत्री का पद प्राप्त है। ये नैसर्गिक रूप से सब से शुभ ग्रह माने जाते हैं। यह वृद्धि के कारक हैं इसलिए अच्छी या बुरी जो भी घटना हो उसमें इनका योग वृद्धि कारक होता है। यह हमारे जीवन में हमारे गुरु और गुरु तुल्य लोगों, हमारे परिवार के बड़े बुजुर्गों, संतान, धन तथा ज्ञान का कारक प्राप्त है। जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति से जातक के जीवन के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें पता चलती हैं। इसलिए यह राशि परिवर्तन कई तरह से जीवन में बदलाव लाएगा।
     गुरु एक राशि में करीब एक साल रहते हैं इसलिए 12 साल के बाद फिर से अपनी राशि धनु में लौटते हैं। 5 नवंबर को गुरु सुबह  अपनी राशि धनु में लौट रहे हैं। अपनी राशि धनु में गुरु अगले साल 2020 मार्च तक रहेंगे। इस राशि में गुरु का स्वागत दो पाप ग्रह केतु और शनि करेंगे। शनि और केतु से साथ गुरु का संयोग यूं तो शुभ नहीं है फिर भी गोचर के अनुसार कुछ राशियों को इसका परिवर्तन शुभ लाभ  होगा तो किसी को होगा नुकसान. ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी से जानते हैं कि अगले 5 महीने किन किन राशि वालों को सबसे अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है।
  1. मेष राशि- मेष राशि से नवम भाव में गुरु का गोचर रुके हुए कार्यों को पूरा करने के साथ-साथ भाग्य में वृद्धि करेगा तथा मनचाहा परिणाम देगा. इस राशि के लिए बृहस्पति नवम भाव में गोचर करेगा। इस राशि वालों को अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त होता। इस राशि के लिए बृहस्पति भाग्योदकारी है। नौकरी में प्रमोशन, व्यापार में लाभ मिलेगा। पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा। घर में नए मेहमान आएंगे। आर्थिक मामलों के लिए वक्त शुभ रहेगा। आपको कई स्रोतों से धन की प्राप्ति हो सकती है। धार्मिक कार्यों में रुचि होगी। धार्मिक यात्राओं पर जा सकते हैं। तीर्थयात्रा हो सकती है. सत्संग का लाभ मिलेगा. पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बन सकता है. स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा. रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे. पठन-पाठन व लेखन के काम में मन लगेगा. धन प्राप्ति सुगम होगी. पारिवारिक सुख-शांति बनी रहेगी. जल्दबाजी न करें.
  2. वृषभ राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति का गोचर अष्टम भाव में होगा। इससे कुछ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सेहत का विशेष ध्यान रखना होगा। पेट संबंधी रोग आ सकते हैं। अनचाही यात्राएं होंगी। आर्थिक पक्ष कमजोर रहेगा। धन संचय करने में परेशानी आ सकती है। उधार चुकाने का दबाव रहेगा। व्यापार में मनचाहे परिणाम प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करना पड़ेगी। धार्मिक कार्यों की ओर रूझान बढ़ेगा। रोजगार में वृद्धि होगी. प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे. शारीरिक कष्ट की वजह से बाधा संभव है. उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे. आय में वृद्धि होगी. वरिष्ठ जनों का सहयोग तथा मार्गदर्शन प्राप्त होगा. पार्टनरों से मतभेद दूर होंगे. कुसंगति से हानि होगी. विवेक से कार्य करें।
  3. मिथुन राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति का गोचर सप्तम स्थान में रहेगा। इस समय आपका वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। वैवाहिक जीवन में चल रहे मतभेद दूर होंगे। आर्थिक स्थिति के लिए समय उत्तम है। पार्टनरशिप में कोई नया कार्य प्रारंभ करना चाहते हैं तो अवश्य करें लाभ होगा। प्रेम संबंधों में नयापन आएगा। नौकरी में तरक्की, बिजनेस में लाभ की स्थिति मिलेगी। समाज में सम्मान प्राप्त होगा। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे. किसी व्यक्ति के व्यवहार से मन खिन्न रहेगा. पुराना रोग उभर सकता है. दूर का समाचार मिल सकता है. चिंता तथा तनाव में वृद्धि होगी. पार्टनरों तथा मातहतों से मतभेद बढ़ सकते हैं. दूसरों से अपेक्षा न करें. आय में निश्चितता रहेगी.
  4. कर्क राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति छठे भाव में गोचर करेगा। कर्क राशि में बृहस्पति उच्च का होता है। इसलिए इसका शुभ प्रभाव मिलने वाला है। इस राशि के जो लोग शत्रुओं से परेशान हैं, उनकी यह परेशानी शीघ्र दूर होगी। रोगों से मुक्ति मिलने का समय है। हालांकि मानसिक रूप से मजबूत रहना होगा कोई अनपेक्षित घटना हो सकती है। वैवाहिक जीवन के लिए समय ठीक है। आर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी। थोड़े प्रयास से ही कार्य बनेंगे. सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. सामाजिक कार्य करने का अवसर मिलेगा. धन प्राप्ति सुगम होगी. संतान पक्ष से कोई खराब सूचना मिल सकती है. चिंता तथा तनाव रहेंगे. प्रतिद्वंद्वी शांत रहेंगे. विवाद से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है. जोखिम न लें.
  5. सिंह राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति पंचम स्थान में गोचर करने जा रहा है। अपने मित्र सूर्य की राशि में मार्गी गुरु का प्रवेश इसके लिए शुभ रहेगा। इस राशि के जातकों की पारिवारिक स्थिति सुखद रहेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। कर्ज मुक्ति की स्थिति बन रही है। संतान पक्ष की चिंता दूर होगी। संतानों के विवाह की बात बनेगी। नौकरीपेशा को सम्मान, व्यापारियों को कार्य विस्तार का सुख प्राप्त होगा। परिवार में अतिथियों का आगमन होगा. शुभ समाचार प्राप्त होंगे. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. कोई नया काम करने की योजना बन सकती है. व्यवसाय ठीक चलेगा. थकान महसूस होगी. आलस्य हावी रहेगा. बेचैनी रहेगी. पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा. मतभेद कम होंगे. जल्दबाजी न करें।
  6. कन्या राशि- इस राशि के लिए गुरु का गोचर चतुर्थ स्थान में होगा। चतुर्थ स्थान सुख स्थान होता है, इसलिए यहां पर बृहस्पति का मार्गी होना इस राशि वालों को अनेक प्रकार के सुख प्रदान करेगा। पारिवारिक जीवन में मधुरता तो आएगी ही, जो लोग वैवाहिक सुख की प्रतीक्षा कर रहे हैं उनकी इच्छा पूरी होने वाली है। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। स्वयं पर खर्च करेंगे। पर्यटन का अवसर आएगा। दोस्तों के साथ मेल मुलाकात होगी। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे. यात्रा मनोरंजक रहेगी. सुखमय जीवन व्यतीत होगा. किसी बड़ी समस्या का हल मिलेगा. प्रसन्नता रहेगी. धन प्र‍ाप्ति सुगम होगी. वरिष्ठजनों का सहयोग तथा मार्गदर्शन प्राप्त होगा. अप्रत्याशित लाभ हो सकता है. ऐश्वर्य के साधनों पर बड़ा खर्च होगा.
  7. तुला राशि- इस राशि के लिए गुरु मार्गी तृतीय स्थान में होगा। भाई-बंधुओं के साथ रिश्ते सुधरेंगे। पैतृक संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद सुलझने की स्थिति में आ जाएंगे। अभी तक आपकी जो योजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही थीं, उन्हें गति मिलेगी। सम्मान और सुख प्राप्त होगा। सेहत के लिहाज से यह गोचर ठीक नहीं रहेगा। मस्तिष्क संबंधी रोग उभर सकते हैं। पेट के निचले हिस्से के रोग भी परेशान करेंगे। संतान पक्ष की चिंता रहेगी। मशीनरी से चोट लग सकती है। इस राशि के जातकों को वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है. अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे. बनते कामों में विघ्न आ सकते हैं. कर्ज लेना पड़ सकता है. स्वास्थ्य कमजोर रहेगा. काम में मन नहीं लगेगा. पार्टनरों से मतभेद हो सकता है. जोखिम व जमानत के कार्य टालें. कीमती वस्तुएं संभालकर रखें. विवाद न करें.
  8. वृश्चिक राशि- इस राशि के लिए बृहस्पति का गोचर द्वितीय स्थान में हो रहा है। धन स्थान में बृहस्पति का बैठना शुभ संकेत है। आपकी आर्थिक योजनाओं को गति मिलेगी। नया कार्य व्यवसाय प्रारंभ करना चाहते हैं या पुराने को विस्तार देना चाहते हैं तो समय अच्छा है। इस दौरान किसी बड़े प्रोजेक्ट के पूरे हो जाने से मानसिक सुख-श्ाांति प्राप्त होगी। वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी। प्रेम संबंध में अनुकूलता प्राप्त होगी, लेकिन पार्टनर के साथ पारदर्शी व्यवहार करना होगा। कानूनी अड़चन आ सकती है. वाणी पर नियंत्रण रखें. बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे. शारीरिक कष्ट संभव है. बेचैनी रहेगी. मनोरंजक यात्रा होगी. धनलाभ के अवसर हाथ आएंगे. लेन-देन में जल्दबाजी न करें. भाइयों से सहयोग मिलेगा. घर में सुख-शांति बनी रहेगी.
  9. धनु राशि- इसी राशि में बृहस्पति आ रहा है और यह लग्न यानी प्रथम स्थान है। यहां पर बृहस्पति के मार्गी होने से शारीरिक दिक्कतें दूर होंगी। सुख-सौभाग्य प्राप्त होगा। धन की तंगी दूर होने की स्थिति बनेगी और आय के एक से अधिक साधन प्राप्त होंगे। सेहत के लिहाज से यह गोचर अच्छा साबित होगा। बीमारियों पर हो रहे खर्च में कमी आएगी। जीवनसाथी के साथ पर्यटन का मौका आएगा। शत्रुओं को परास्त करने में कामयाब होंगे। सभी कार्य आपके मनोनुकूल होंगे। मानसिक द्वंद्व रहेगा. चोट व रोग से बचें. अपरिचितों पर विश्वास न करें. जल्दबाजी न करें. नई योजना बनेगी. नए कार्य प्रारंभ करने का मन बनेगा. व्यवसाय में अनुकूलता रहेगी. मित्रों के साथ अच्‍छा समय गुजरेगा. प्रसन्नता रहेगी. मनोरंजन के अवसर मिलेंगे. भाग्य का साथ मिलेगा.
  10. मकर राशि- इस राशि के लिए द्वादश स्थान में मार्गी बृहस्पति का आना मिलाजुला प्रभाव दिखाएगा। चूंकि द्वादश स्थान व्यय भाव होता है इसलिए खर्च में निश्चित तौर पर बढ़ोतरी होगी, लेकिन ध्यान रखना होगा कि यह खर्च कहां हो रहा है। अनावश्यक कार्यों पर खर्च करने से खुद को रोकना होगा। आय के साधनों में वृद्धि होगी। कोई ऐसा कार्य प्राप्त होने के योग बन रहे हैं जो आपके धन भंडार में वृद्धि करेगा। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। सेहत बेहतर रहेगी। तीर्थ दर्शन हो सकता है. सत्संग का लाभ मिलेगा. प्रभावशाली व्यक्तियों से मेलजोल बढ़ेगा. कार्य की बाधा दूर होगी. व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल रहेगा. पारिवारिक सहयोग मिलेगा. कुछ तनाव भी हो सकता है. थकान हो सकती है. परिस्थिति अनुकूल रहेगी. जल्दबाजी न करें.
  11. कुंभ राशि- कुंभ राशि के लिए एकादश भाव में मार्गी बृहस्पति के आने से स्थितियों में सुधार आएगा। अब तक जो भागदौड़ और जीवन में अनिश्चितता बनी हुई थी वह दूर हो जाएगी। अपने बारे में कोई अच्छा निर्णय ले पाएंगे। हालांकि अभी भी कोई बड़ा निवेश करने से बचना होगा। खासकर वाहन, मशीनरी के कार्यों में निवेश करें। मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा में अवश्य वृद्धि होगी। अविवाहितों को विवाह सुख की प्राप्ति होगी।प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी. कामकाज मनमाफिक चलेगा. प्रसन्नता रहेगी. प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग मिलेगा. जल्दबाजी से का‍म बिगड़ सकते हैं. पारिवारिक संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी. सुख-शांति बनी रहेगी. वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें. सुख के साधनों पर खर्च होगा.
  12. मीन राशि- यह राशि चक्र की अंतिम राशि हैं। मीन राशि के लिए मार्गी बृहस्पति का गोचर दशम स्थान में होगा। कार्य स्थान में बृहस्पति का शुभ प्रभाव मिलेगा। जिनके पास नौकरी नहीं है उन्हें नौकरी मिलेगी। बिजनेस प्रारंभ करने के लिए सही वक्त है, कार्य विस्तार करें। प्रॉपर्टी और वाहन में निवेश फलेगा। सेहत में सुधार आएगा। परिवार के बुजुर्गों के सहयोग से सही निर्णय ले पाएंगे। मित्रों, भाई-बंधुओं के साथ संबंधों में सुधार आएगा। पारिवारिक समागम का अवसर आएगा।कष्ट, भय, तनाव व चिंता का वातावरण बन सकता है. जोखिम व जमानत के कार्य टालें. वाहन व मशीनरी के प्रयोग में विशेष सावधानी रखें. दूसरों के झगड़ों में न पड़ें. कीमती वस्तुएं गुम हो सकती हैं. आय में निश्चितता रहेगी. व्यवसाय ठीक चलेगा. नौकरी में सह‍कर्मियों से विवाद संभव है।
बृहस्पति ग्रह की शांति के कुछ उपाय ---
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति अनुकूल अवस्था में नहीं है तो आपको पुखराज रत्न धारण करना चाहिए।
- बृहस्पति धनु और मीन राशियों के स्वामी हैं इसलिए अगर इन दोनों राशियों के जातक पुखराज धारण करें तो उन्हें शुभ फल मिलते हैं। इसके साथ ही बृहस्पति ग्रह के अच्छे फल प्राप्त करने के लिए गुरुवार के दिन या बृहस्पति की होरा में गुरु यंत्र को अपने घर में स्थापित करना चाहिए। आप गुरु ग्रह के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए पीपल की जड़ को गुरु की होरा या गुरु के नक्षत्रों में भी धारण कर सकते हैं।

शनि हुए मार्गी, जानिए अगले 5 महीनों में मार्गी शनि का आपकी राशि पर क्या प्रभाव होगा

हिंदू मान्यताओं में ग्रहों और नक्षत्रों की चाल का बहुत महत्व है। मान्यता है कि इनके स्थान परिवर्तन का असर इंसान के जीवन पर भी पड़ता है। यह अच्छा या बुरा कुछ भी हो सकता है। ग्रहों के न्यायधीश और व्यक्ति को कर्मों के आधार पर फल देने वाले शनि अपनी चाल बदलेंगे। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि भारतीय ज्योतिष के नौ ग्रहों में से एक प्रमुख न्यायप्रिय शनि ग्रह का वक्री होना प्रमुख घटना है। शनि एक राशि में 30 महीने, गुरू 13 महीने, राहु केतु 18 महीने और अन्य ग्रह दिनों के हिसाब से रहते हैं। शनि इस समय धनु राशि में वक्री अवस्था में गोचर है। शनि 30 अप्रैल 2019 से वक्री चल रहे है। 
    आज 18 सितंबर को शनि धनु राशि में वक्री से मार्गी हो जाएगा। शनि जो धनु राशि में उल्टा चल रहे थे 18 सितंबर से सीधा चलने लगेगा। शनि के सीधा को शुभ माना जाता है। दो ग्रह राहु- केतु को छोड़कर 18 सितंबर से सभी ग्रह मार्गी रहेंगे। शनि के मार्गी  शनिदेव का वक्री अथवा मार्गी होना पृथ्वीवासियों के प्रति बड़ी घटना के रूप में देखा जाता है। जिस राशि पर भ्रमण करने के मध्य ये वक्री रहते हैं, उन्हें काफी मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है। शनि के मार्गी होने से पिछले कुछ समय से चली आ रही परेशानियां खत्म होगी। शनि के मार्गी होने से खासतौर पर मेष और सिंह राशि वालों के लिए कई सुखद समाचार मिलेगा।

Saturn-is-Margi-know-how-Margi-Saturn-will-affect-your-zodiac-in-the-next-5-months.-शनि हुए मार्गी, जानिए अगले 5 महीनों में मार्गी शनि का आपकी राशि पर क्या प्रभाव होगा
      आज दोपहर 18 सितंबर 2019 (बुधवार) से शनि भी अपनी चाल बदलकर उलटी से सीधी मार्ग यानी मार्गी चाल पर होंगे। इस तरह करीब 142 दिन बाद धनु राशि में चल रहे शानि देव अब उल्टी चाल छोड़कर सीधी चाल चलना शुरू करेंगे। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि शनिदेव 30 अप्रैल 2019 को वक्री हुए थे। अपने कुल 142 दिन के इस वक्रत्वकाल में शनि ने लगभग सभी राशियों को कार्यों में अड़चन, आर्थिक संकट, रोग, पारिवारिक जीवन में समस्याएं, दाम्पत्य सुख में कमी जैसी अनेक परेशानियों से लोगों का सामना हुआ है। लेकिन अब आज 18 सितंबर से शनि के धनु राशि में मार्गी होने से सभी राशि वालों को राहत महसूस होगी। शनि के मार्गी होने से जीवन की बाधाएं समाप्त होंगी, धन आगमन के बंद रास्ते खुलेंगे और प्रत्येक क्षेत्र में तरक्की का मार्ग प्रशस्त होगा। राजनीति में उथल-पुथल  देखने को मिल सकती है। डिप्रेशन व अकारण ही घटनाएं बढ़ सकती हैं।
पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार 18 सितम्बर 2019 (बुधवार) दोपहर 2 बजकर 15 मिनट पर शनि ने अपनी चाल बदल दी हैं और धनु राशि में सीधी चाल चलेंगे। इस राशि में शनि अगले पांच महीने यानी 24 जनवरी 2020 तक सीधी चाल से चलते हुए शनि मकर राशि में प्रवेश करेंगे।  
जानिए आने वाले अगले 5 महीनों में मार्गी शनि का आपकी राशि पर क्या प्रभाव होने वाला है
  1. मेष - इस राशि के जातक को शनि के स्थान परिर्वतन करने से भाग्य का सहयोग मिलेगा। चीजें बेहतर होंगी। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी और करियर भी अच्छा बनेगा। नए अवसर प्राप्त होंगे। कारोबार के सिलसिले में की गई यात्रा लाभप्रद रहेगी। शत्रु पक्ष निर्बल रहेंगे। मित्रों से सहयोग मिलेगा। रुके हुए कार्य आज पूरे हो सकते हैं, प्रयास कीजिए। आपकी कोई इच्छा आज पूरी होने वाली है भाग्य 90 प्रतिशत साथ दे रहा है। माता-पिता और गुरुओं का आशीर्वाद मिलेगा। ध्यान रखें--अष्टम ढैया से निकले शनि को मना लें, आप संकट में आ सकते हैं।
  2. वृषभ- शनि की बदली हुई चाल इस राशि के लिए शुभ है। जातकों को धन लाभ होगा। नये काम शुरू करने के लिए भी समय शुभ है। मन अस्थिर रहेगा और विचारों के भंवर में डूबते रहेंगे। लेखकों और कलाकारों के लिए दिन सृजनात्मक रहेगा। वैसे आज संभलकर काम करें, काम में बाधा आ सकती है। स्थान परिवर्तन का योग बना है। यात्रा में असुविधा हो सकती है। गुरु मंत्र का जप करें। भाग्य 53 प्रतिशत तक साथ देगा।स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। नौकरी से जुड़ी दिक्कतें खत्म होंगी। वाणी पर संयम रखें और विवाद से दूर रहें। कष्ट से छुटकारा मिलेगा।  ध्यान रखें-- परेशानियां तो आएंगी पर शनि मंत्र को जपने से आपको परेशानी कम होगी।
  3. मिथुन- इस राशि के जातक के लिए भी अगले 5 महीने फलदायी हैं। विवाह से जुड़ी  समस्याओं का हल मिलेगा। रूके हुए काम पूरे होंगे। जीवनसाथी का भरपूर साथ मिलेगा। जिन लोगों का अपने जीवनसाथी के साथ मनमुटाव था वो खत्म हो जाएगा। विशिष्ट लोगों से संपर्क बनेंगे जिनका भविष्य में लाभ भी मिल सकता है। कारोबार के लिहाज से यात्रा सुखद रहेगी। उन्नति का समाचार मिलेगा। आज जो भी कीजिए दिल खोलकर कीजिए, शत्रु निर्बल रहेंगे। सेहत अच्छी रहेगी। वैसे इस दौरान किसी से कर्ज लेने से बचें। ध्यान रखें --घरेलू समस्याओं से जूझना पड़ेगा। शनि को मनाने की तैयारी करें।
  4. कर्क- इस राशि के जातक को लंबी बीमारी से राहत मिलेगी। आय में बढोत्तरी होगी। कार्यक्षेत्र में व्यस्तता रहेगी। कारोबार में धन लाभ होगा। आज का कर्म आपके कल का भविष्य बनाएगा अतः सोच-समझकर काम करें और निर्णय लें।कानूनी और सरकारी मसलों में कोई जोखिम नहीं ले। विरोधियों से दूर रहें। अधिकारी वर्ग से लाभ होगा। ध्यान रखें -- इस अवधि में कष्टों से मुक्ति मिलेगी किन्तु शनि की भक्ति को भुलाकर भी छोड़े नहीं।
  5. सिंह- इस राशि के जातक को संतान का भरपूर साथ और प्यार मिलेगा। धन अर्जित करने में सफलता मिलेगी। अपने और अपने संतान के स्वास्थ्य का ध्यान जरूर रखें।इस आप सकारात्मक उर्जा से भरपूर रहेंगे। काम में रुचि रहेगी और जो भी करेंगे उसमें सफलता मिलेगी। मित्रों और सज्जनों से सहयोग मिलेगा। विरोधी भी आज सहयोग मांगने पर मदद करेंगे। कुल मिलाकर स्थिति सामान्य और सुखद रहने वाली है। किसी प्रकार की जल्दबाजी से बचें। ध्यान रखें -- ढैया से होगी मुक्ति, अब मिलेगी कष्टक में मुक्ति।
  6. कन्या- माता का साथ मिलेगा। यह समय घर और गाड़ी लेने के लिए भी अच्छा रहने वाला है। जीवनसाथी से विवादों में ना उलझें। यात्रा में असुविधा हो सकती है। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें। अपने सामान का ध्यान रखें, खोने का भय है। कठिन परिश्रम करना पड़ेगा।धार्मिक कार्यों में रूचि रहेगी। विदेश जाने की संभावना बन सकती है। ध्यान रखें -- सावधानी रखें।अच्छे दिन गए ।इस राशि वालो के लिए परेशानियों का आगमन होने वाला है।
  7. तुला- आपके लिए शनि का मार्गी चाल शुभ रहने वाला है। भाई-बहनों से प्रेम बढ़ेगा और शुभ समाचार मिलेंगे। कला और मनोरंजन में रुचि रहेगी। धर्म-कर्म के काम में मन लगेगा। आसपास की यात्रा लाभदायक रहेगी। कार्यक्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी मित्रों से सहयोग मिलेगा। बुजुर्गों व साधु-संतों से आशीर्वाद प्राप्त होगा।आय में वृद्धि हो सकती है। पदोन्नति का भी योग बन रहा है। आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। पैतृक संपत्ति विवाद खत्म होगा। ध्यान रखें -- इस राशि वालो। हो जाओ खुश। आ रहे हैं अच्छे दिन कर ले अपनी मन की सभी इच्छा पूरी।
  8. वृश्चिक- संपत्ति के मामले में आपको लाभ मिल सकता है। परिश्रम अधिक है। मान-सम्मान में वृद्धि का योग है। कार्यक्षेत्र में व्यस्तता बढ़ेगी। नए अवसर व नए लोगों से परिचय होगा। सक्रिय रहें, सुअवसर को हाथ से न जाने दें। पारिवारिक मामलों में धन खर्च कर सकते हैं। खराब रिश्तों में सुधार होगा और मान-सम्मान बढ़ेगा। रूके हुए काम पूरे होंगे। ध्यान रखें -- आपको शनि की अच्छी दृष्टि के लिए अभी आपको ढाई साल और इंतजार करना होगा।  
  9. धनु- आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। नई नौकरी तलाश रहे हैं तो इसमें सफलता के योग हैं और आप सकारात्मक बने रहेंगे। शादीशुदा लोग जीवनसाथी को लेकर परेशान हो सकते हैं। भविष्य की चिंता सताएगी। संघर्ष अधिक करना पड़ेगा। व्यर्थ की भागदौड़ रहेगी। मन दुविधा में रहेगा। बिजनेस बढ़ेगा और आर्थिक तौर पर मजबूत होंगे। ध्यान रखें -- इस राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती की वजह से किसी शुभ समाचार के मिलने में देरी हो सकती है।
  10. मकर- आपके लिए विदेश जाने की पूरी संभावना बन रही है। धार्मिक यात्राओं पर भी जा सकते हैं। पैसों से जुड़ी कुछ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जीवनसाथी से मनमुटाव की आशंका रहेगी। किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए जल्दबाजी से बचें और वाणी पर संयम रखें। ध्यान रखें -- इस राशि के जातकों के सभी कार्यों के पूरा होने में विलम्ब होगा।
  11. कुंभ- आपके लिए अगले कुछ दिन लाभ वाले हैं। इच्छापूर्ति होगी। सोचे हुए कार्य पूर्ण होंगे। किसी बड़े अधिकारी का समर्थन प्राप्त होगा। कार्यक्षेत्र में प्रभाव और जिम्मेदारी बढ़ेगी। अचानक लाभ से प्रसन्न होंगे। कोई डील करने जा रहे हैं तो अपनी बुद्धि और चतुराई से लाभदायक सौदा कर सकते हैं।नौकरी में परिवर्तन के योग के साथ मान-सम्मान बढ़ेगा। रूके हुए धन प्राप्त होंगे। प्रेम संबंधो में मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।  शनिदेव इस राशि वालों पर मेहबान हैं। आपका कल्याण करेंगे।
  12. मीन- आपके लिए अगले कुछ दिन मिलेजुले रहने वाले हैं। परिश्रम और संघर्ष के बाद सफलता मिलेगी जिससे आनंदित होंगे। विरोधी साजिश कर सकते हैं, लेकिन आपका अहित नहीं कर पाएंगे। जीवनसाथी से आनंद और खुशी मिलेगी।काम को लेकर कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। वैसे समय के साथ आप इनसे निपटने में भी कामयाब होंगे। नौकरीपेशा लोग खुश रहेंगे। ध्यान रखें -- इस राशि के जातकों के काम के बीच कोई बाधा नहीं आएगी पर काम आधा अधूरा ही बनेगा।

जानिए कौन से ग्रह देते हैं जोड़ों का दर्द एवं साथ ही जानिए दर्द को ठीक करने के ज्योतिषीय उपाय

अक्सर हम देखते हैं की जोड़ों के दर्द से पीड़ित लोगों को दैनिक काम-काज करने में बहुत समस्या आती है। जिन रोगों में यह दर्द, लक्षण, रूप मिलता है इनमें से एक है संधिगत वात। जोड़ों के इस विकार में वायु ही मुख्य कारण होता है। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार आयुर्वेद में हड्डी और जोड़ों में वायु का निवास होता है। वायु के असंतुलन से जोड़ भी प्रभावित होते हैं। अतः वायु गड़बड़ा जाने से जोड़ों में दर्द होता है। क्योंकि गठिया रोग जोड़ों से संबंधित है इसलिए जोड़ों की रचना को भी समझ लेना उचित होगा। 
    गठिया में जोड़ों की रचना में विकृति पैदा होती है। हड्डियों के बीच का जोड़ एक झिल्ली से बनी थैली में रहता है, जिसे सायनोवियल कोष या आर्टीक्युलेट कोष कहते हैं। जोड़ों की छोटी रचनाएं इसी कोष में रहती हैं। हड्डियों के बीच की क्रिया ठीक तरह से हो तथा हड्डियों के बीच घर्षण न हो, इसलिए जोड़ों में हड्डियों के किनारे लचीले और नर्म होते हैं। यहां पर एक प्रकार की नर्म हड्डियां रहती हैं, जिन्हें कार्टीलेज या आर्टीक्युलेट कहते हैं, जो हड्डियों को रगड़ खाने से बचाती है। पूरे जोड़ को घेरे हुए एक पतली झिल्ली होती है जिसके कारण जोड़ की बनावट ठीक रहती है। इस झिल्ली से पारदर्शी, चिकना तरल पदार्थ उत्पन्न होता है, जिसे सायनोवियल तरल कहते हैं। संपूर्ण सायनोवियल कोष में यह तरल भरा रहता है। किसी भी बाह्य चोट से जोड़ को बचाने का काम यह तरल करता है। इस तरल के रहते जोड़ अपना काम ठीक ढंग से करता है। 
Know-which-planets-give-joint-pain-and-also-know-astrological-ways-to-cure-pain- जानिए कौन से ग्रह देते हैं जोड़ों का दर्द एवं साथ ही जानिए दर्द को ठीक करने के ज्योतिषीय उपाय        गठिया रोग का एक कारण शरीर में अधिक मात्रा में यूरिक एसिड का होना माना गया है। जब गुर्दों द्वारा यह कम मात्रा में विसर्जित होता है या मूत्र त्यागने की क्षमता कम हो जाती है तो मोनो सोडियम -बाइयूरेट -क्रिस्टल जोड़ों के उत्तकों में जमा होकर तेज उत्तेजना एवं प्रदाह उत्पन्न करने लगता है। तब प्रभावित भाग में रक्त संचार असहनीय दर्द पैदा कर देता है। गठिया रोगियों का वजन अक्सर ज्यादा होता है और ये देखने में स्वस्थ एवं प्रायः मांसाहारी और खाने-पीने के शौकीन होते हैं। 
      भारी और तैलीय भोजन, मांस, मक्खन, घी और तेज-मसाले, शारीरिक एवं मानसिक कार्य न करना, क्रोध, चिंता, शराब का सेवन, पुरानी कब्ज आदि कारणों से जोड़ों में मोनो-सोडियम बाइयूरेट जमा होने से असहनीय पीड़ा होती है जिससे मानव गठिया रोग से पीड़ित हो जाता है।
जन्म कुंडली में शनि पीड़ित होने पर ही घुटनो के दर्द, कमर दर्द, गर्दन के दर्द, रीढ़ की हड्डी की समस्या, कोहनी और कंधो के जॉइंट्स में दर्द के जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
     वैसे तो हमारे स्वास्थ से जुडी कोई भी समस्या जीवन की गति को धीमा कर ही देती है पर जोड़ो के दर्द या जॉइंट्स पेन की समस्या हमारे जीवन में एक बोझ की तरह होती है जिससे जीवन ठहर सा जाता है घुटनो के दर्द की समस्या बहुत से लोगो के जीवन में एक बड़ी बाधा बनी रहती है तो बहुत से लोग कमर दर्द के कारण कितनी ही समस्याओं का सामना करते हैं तो आइये जानते हैं ज्योतिर्विद पण्डित दयानन्द शास्त्री जी से की कौन कौन से ग्रहयोग व्यक्ति को जोड़ो के दर्द की समस्या देते हैं –
      “ज्योतिष की चिकित्सीय शाखा हमारे स्वास्थ और शारीरिक गतिविधियों को समझने तथा उनके निदान में अपनी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ज्योतिष में “शनि” को हड्डियों के जोड़ या जॉइंट्स का कारक माना गया है हमारे शरीर में हड्डियों का नियंत्रक ग्रह तो सूर्य है पर हड्डियों के जोड़ों की स्थिति को “शनि” नियंत्रित करता है अतः हमारे शरीर में हड्डियों के जोड़ या जॉइंट्स की मजबूत या कमजोर स्थिति हमारी कुंडली में स्थित ‘शनि” के बल पर निर्भर करती है कुंडली में शनि पीड़ित स्थिति में होने पर व्यक्ति अक्सर जॉइंट्स पेन या जोड़ो के दर्द से परेशान रहता है और कुंडली में शनि पीड़ित होने पर ही घुटनो के दर्द, कमर दर्द, गर्दन के दर्द, रीढ़ की हड्डी की समस्या, कोहनी और कंधो के जॉइंट्स में दर्द के जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसके अतिरिक्त कुंडली का “दसवा भाव” घुटनो का प्रतिनिधित्व करता है छटा भाव कमर का प्रतिनिधित्व करता है, तीसरा भाव कन्धों का प्रतिनिधित्व करता है और सूर्य को हड्डियों और केल्सियम का कारक माना गया है अतः इन सबकी भी यहाँ सहायक भूमिका है। 
        ज्योतिषीय दृष्टिकोण काल पुरूष की कुंडली में दशम भाव और मकर राशि महत्वपूर्ण जोड़ों का नेतृत्व करती है जैसे ‘घुटने’। इसलिए दशम भाव एवं मकर राशि के दूषित प्रभावों में रहने से रोग उत्पन्न होता है। इसके अतिरिक्त शनि, शुक्र और मंगल ग्रह एवं लग्न यदि किसी कुंडली में निर्बल और दुष्प्रभावों में हो तो जातक को गठिया जैसा रोग देता है।  पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया यदि किसी की कुंडली में शनि, शुक्र, मंगल, दशम भाव, दशमेश, लग्न, लग्नेश यदि दुष्प्रभावों में रहते हैं तो संबंधित ग्रहों की दशा-अंतर्दशा और गोचर के अशुभ रहने से गठिया रोग होता है।
      ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं की जोड़ो के दर्द की समस्या में मुख्य भूमिका “शनि” की ही होती है क्योंकि शनि को हड्डियों के जोड़ो का नैसर्गिक कारक माना गया है और शनि हमारे शरीर में उपस्थित हड्डियों के सभी जॉइंट्स का प्रतिनिधित्व करता है। अतः कुंडली में शनि पीड़ित होने पर ही व्यक्ति को दीर्घकालीन या निरन्तर जोड़ी के दर्द की समस्या बनी रहती है।"
  1. यदि शनि कुंडली में छटे या आठवे भाव में हो तो ऐसे में व्यक्ति को घुटनो, कमर आदि के जोड़ो के दर्द की समस्याएं होती हैं।
  2. शनि यदि नीच राशि (मेष) में हो तो भी व्यक्ति जोड़ो के दर्द से समस्याग्रस्त रहता है।
  3. शनि का केतु और मंगल के योग से पीड़ित होना भी जॉइंट्स पेन की समस्या देता है।
  4. शनि यदि सूर्य से पूर्णअस्त हो तो भी जोड़ो के दर्द की समस्या रहती है।
  5. शनि का अष्टमेश या षष्टेश के साथ होना भी जॉइंट्स पेन की समस्या देता है।
  6. यदि कुंडली के दशम भाव में कोई पाप योग बन रहा हो या दशम भाव में कोई पाप ग्रह नीच राशि में हो तो भी घुटनो के दर्द की समस्या रहती है।
  7. छटे भाव में पाप योग बनना कमर दर्द की समस्या देता है।
  8. यदि कुंडली में शनि पीड़ित स्थिति में हो तो शनि की दशा में भी जॉइंट्स पेन की समस्या बनी रहती है।

समझें विभिन्न जन्म लग्नों के अनुसार जोड़ो के दर्द या गठिया रोग को--
  • मेष लग्न: जब लग्नेश मंगल शनि से युक्त दशम भाव में हो और शुक्र पंचम या षष्ठ में सूर्य से अस्त हो तो जातक को गठिया जैसा रोग हो सकता है।
  • वृषभ लग्न: शुक्र षष्ठ भाव में चंद्र से युक्त हो और शनि से दृष्ट हो, मंगल राहु से युक्त होकर दशम भाव में हो तो जातक को गठिया जैसा रोग हो सकता है। 
  • मिथुन लग्न: लग्नेश बुध षष्ठ या अष्टम भाव में हो और अस्त हो, मंगल दशम भाव में गुरु से युक्त या दृष्ट हो, शनि द्वादश भाव में चंद्र से युक्त होकर स्थित या दृष्टि रखता हो तो जातक को गठिया जैसा रोग देता है। 
  • कर्क लग्न: चंद्र शनि से युक्त होकर षष्ठ भाव में हो, मंगल लग्न में राहु या केतु से युक्त या दृष्ट हो, बुध दशम भाव में शुक्र से युक्त हो तो जातक को गठिया जैसा रोग देता है।
  • सिंह लग्न: शनि दशम भाव में चंद्र से युक्त हो, लग्नेश सूर्य, राहु से युक्त होकर तृतीय या षष्ठ भाव में हो, शुक्र अस्त हो तो जातक जोड़ों के दर्द से परेशान रहता है। 
  • कन्या लग्न: शनि लग्न में राहु या केतु से युक्त हो, लग्नेश बुध षष्ठ या अष्टम भाव में अस्त हो, मंगल दशम भाव में चंद्र से युक्त या दृष्ट हो तो जातक जोड़ों के दर्द से परेशान रहता है। 
  • तुला लग्न: लग्नेश शुक्र अस्त होकर चंद्र से दृष्ट या युक्त होकर जल राशि में हो, शनि षष्ठ भाव में गुरु से युक्त या दृष्ट हो, मंगल अस्त हो तो जातक जोड़ों के दर्द से परेशान रहता है। 
  • वृश्चिक लग्न: बुध लग्नस्थ होकर राहु-केतु से दृष्ट या युक्त हो, शनि षष्ठ भाव में चंद्र से युक्त या दृष्ट हो, मंगल अष्टम भाव में हो तो जातक को संबंधित रोग देता है। 
  • धनु लग्न: लग्नेश गुरु अष्टम या द्वादश भाव में चंद्र से युक्त हो, शनि वक्री होकर दशम भाव में या दशम भाव पर दृष्टि, मंगल, शुक्र अस्त हो तो जातक को गठिया रोग देते हैं। 
  • मकर लग्न: गुरु राहु से युक्त होकर दशम भाव में हो, लग्नेश शनि वक्री हो, सूर्य लग्न में हो, शुक्र अस्त हो, मंगल दशम भाव में हो तो जातक को गठिया जैसा रोग होता है। 
  • कुंभ लग्न: मंगल दशम भाव में राहु-केतु से युक्त या दृष्ट हो, सूर्य लग्न में या अष्टम भाव में गुरु से युक्त हो, शनि वक्री हो तो जातक को जोड़ों का दर्द देता है। 
  • मीन लग्न: गुरु तृतीय, षष्ठ या अष्टम भाव में मंगल से युक्त या दृष्ट हो, शुक्र-शनि दशम भाव में राहु-केतु से युक्त या दृष्ट हो, चंद्र अस्त हो तो जातक को गठिया जैसा रोग देते हैं। उपरोक्त सभी योगों का प्रभाव अपनी संबंधित ग्रहों की दशा-अंतर्दशा एवं गोचर के दुष्प्रभावों के कारण होता है। इसके उपरांत जातक रोग रहित हो जाता है।

पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में ग्रह स्थिति भिन्न होने के कारण व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपाय भी भिन्न होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार वात दोष होने से गठिया रोग उत्पन्न होता है जिसमें यूरिक एसिड की मात्रा कम हो जाती है। शनि ग्रह वात प्रकृति का है और रोग को धीरे-धीरे बढ़ाता है। शुक्र ग्रह वात-कफ प्रकृति का है। यह शरीर में हार्मोन को संतुलित रखता है। इसलिए इसके दूषित हो आयुर्वेदिक उपचार सरसों के तेल में अजवायन और लहसुन जलाकर तेल मालिश करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। काले तिलों को पीस कर बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर बकरी के दूध से सेवन करने से आराम मिलता है। मजीठ, हरड़, बहेड़ा, आंवला, कुटकी, बच, नीम की छाल, दारू हल्दी, गिलोय का काढ़ा बना कर पीने से गठिया में आराम मिलता है। 
       बड़ी इलायची, तेजपत्ता, दाल चीनी, शतावर, गंगरेन, पुनर्नका, असगंध, पीपर, रास्ना, सोंठ, गोखरू, विधारा, तज निशीथ, इन सबको गिलोय रस में घोट कर गोली बनाकर बकरी के दूध के साथ दो-दो गोली सुबह शाम सेवन करने से आराम मिलता है। असगंध के पत्ते में चुपड़कर गर्म कर के दर्द के स्थान पर बांधने से आराम होता है। दशमूल काढ़ा या दशमूलारिष्ट की चार-चार चम्मच दिन में दो-तीन बार थोड़ा सा पानी मिलाकर लेने से गठिया दर्द में आराम मिलता है। अश्वगंधा चूर्ण एक ग्राम, शृंग भस्म 500 मि. ग्राम और वृद्ध वात चिंतामणि रस 65 मि. ग्राम, तीनों को मिलाकर तीन बार दूध या शहद के साथ सेवन करें। लहसुन को दूध में उबालकर, खीर बना कर खाने से गठिया रोग ठीक होता है। सौंठ, अखरोट और काले तिल, अनुपात 1ः2ः4 में पीसकर, सुबह-शाम गरम पानी से 15 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से लाभ मिलता है। जाने से हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं जिससे शरीर विकृत होने लगता है। मंगल ग्रह पित्त प्रकृति का है जो रक्त के लाल कणों का कारक है इसलिए ग्रह के दूषित होने से रक्त में विकार उत्पन्न होता है और जोड़ों को शुष्क कर देता है। जोड़ों में तरल पदार्थ की मात्रा को इतना कम कर देता है कि उठते-बैठते जोड़ों से आवाज आने लगती है और जोड़ विकृत हो जाते हैं।
इन उपाय से होगा जोड़ों के दर्द में लाभ–
  • ॐ शम शनैश्चराय नमः का नियमित जाप करें।
  • शनिवार को मन्दिर में पीपल पर सरसो के तेल का दिया जलाएं।
  • शनिवार को संध्याकाल में सरसो के तेल का परांठा कुत्ते को खिलाएं।
  • किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श के बाद शनि का कोई रत्न भी धारण कर सकते हैं पर किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बिना शनि का कोई भी रत्न ना पहने।
  • आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
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