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जानिए इस वर्ष चैत्र नवरात्रि कब और क्यों मनाये

आजकल सोशल मीडिया में चैत्र नवरात्रि 2017 पर्व को लेकर बहुत चर्चा हो रही हैं कि इस वर्ष 28 मार्च को मनाएं या 29 मार्च 2017 को


आइये शास्त्रोक्त सत्य जानने का प्रयास करें ---
      ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की भारतीय सनातन संस्कृति में संवत् यानि नए साल का शुभारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होता है और इसी दिन हम लोग चैत्र नवरात्री का शुभारंभ भी करते है । संवत् 2074 में 28 मार्च 2017 मंगलवार के दिन नवरात्री में घट स्थापन किया जायेगा । क्योंकि भारतीय सनातन शास्त्रो में से धर्मसिन्धु और निर्णय सिंधु में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया हुआ है कि “नवरात्र आरम्भ प्रतिपदा के दिन किया जाता है अगर सूर्योदय के समय एक मुहूर्त से कम यही लगभग 48 मिन्ट से कम अगर प्रतिपदा हो तो जिस दिन अमावस्या हो उसी दिन घट स्थापना करना शात्रोक्त सही होता है“ और 29 मार्च 2017 को प्रतिपदा सवेरे 5 बज कर 45 मिन्ट पर समाप्त हो जायेगी और सूर्योदय 5 बज कर 36 मिन्ट पर होगा तो प्रतिपदा मात्र 9 मिन्ट ही रहेगी इसलिए नवरात्री का आरम्भ 28 मार्च 2017 को ही किया जायेगा ।


                   
          अतः आप सभी से मेरा (ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री) विनम्र निवेदन हैं की किसी भी भ्रम में रह कर 28 मार्च 2017 को ही नवरात्रि का आरम्भ करते हुए माँ जगदम्बा की स्थापना करे जो एकदम सही और शास्त्रोक्त है । क्योंकि कई लोग 29 मार्च को करवा रहे है वो एकदम गलत है ।निर्णय सागर पंचांग में स्पष्ट लिखा है कि धर्म-निर्णय सिंधु ग्रंथ के अनुसार 28 मार्च मंगलवार सुबह 8.26 के बाद प्रतिपदा तिथि शुरू होने से चैत्र नवरात्रि विधान और नूतन चैत्र नव वर्ष की मान्यता शास्त्र संवत रहेगी। लेकिन वर्ष के पहले सूर्योदय से सूर्य पूजा और नव वर्ष 29 को मनाया जाएगा।  
ऐसे लोगो से बचे और शास्त्रोक्त निर्णय के अनुसार काम करे जिससे आपको लाभ और आशीर्वाद मिले ।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार 28 मार्च 2017 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नववर्ष की शुरूआत होगी। ज्योतिष शास्त्र में इस दिन सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही गुड़ी पूजन का विशेष विधान बताया गया है। सूर्योदय के समय ही सूर्य को अर्घ्य देना चाहिये और फिर नीम मिश्री का सेवन किया जाये। ज्योतिषियों के अनुसार सूर्य को अर्घ्य प्रदान कर बारह नामों से सूर्य नमस्कार करें तथा वेद में दिये गये संवत्सर सूक्त का पाठ करने से श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है।
         वर्ष 2017 में चैत्र (वासंती) नवरात्र व्रत 28 मार्च से शुरु होकर 5 अप्रैल तक रहेगें। व्रत का संकल्प लेने के बाद, मिट्टी की वेदी बनाकर ‘जौ बौया’ जाता है। इसी वेदी पर घट स्थापित किया जाता है। घट के ऊपर कुल देवी की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन किया जाता है। इस दिन “दुर्गा सप्तशती“ का पाठ किया जाता है। पाठ पूजन के समय दीप अखंड जलता रहना चाहिएद्य
            ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की नवरात्री की पहली तिथि पर सभी भक्त अपने घर के मंदिर में कलश स्थापना करते हैं। इस कलश स्थापना की भी अपनी एक पूजा विधि, एक मुहूर्त होता है। कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है। घट स्थापना का मुहूर्त प्रतिपदा तिथि (28 मार्च ) को प्रातः 08:26 बजे से 10:24 बजे तक है। इस समय के बीच ही घट स्थापना हो सकेगी।
    इसी अवसर पर सृष्टि रचियता ब्रह्माजी के साथ ही शिव विष्णु सहित आह्वान पूजन, ध्वज पूजन, कलश पूजन करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती हे।ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस दिन विक्रम संवत 2074 शुरू होगा तथा इस अवसर पर तीर्थ की पूजन के साथ ही सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर सूर्य को अर्घ्य देने का विधान ज्योतिषियों द्वारा बताया गया है।

  1. 28 मार्चः नवरात्र का पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना होती हैं। इस दिन घटस्थापना का मुहूर्त सुबहर 8:26 से लेकर 10:24 तक का हैं। पूजा में इन्हें चमेली का फूल अर्पित करना शुभ होता हैं।
  2. 29 मार्च : नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इनकी पूजा में भी चमेली का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता हैं।
  3. 30 मार्च : नवरात्र के तीसरे दिन देवी चन्द्रघंटा की पूजा होती हैं। इन्हें भी चमेली का फूल पसंद हैं।
  4. 31 मार्चः नवऱात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे रूप देवी कूष्मांडा की पूजा होती हैं, जिन्हें लाल रंग के फूल पसंद हैं। 
  5. 1 अप्रैलः नवरात्र के पांचवा दिन माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है। जिन्हें मां पार्वती के नाम से भी जाना जाता हैं। इन्हें पूजा में लाल रंग के फूल अर्पित करने चाहिए।
  6. 2 अप्रैलः चैत्र नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का होती हैं। जिन्हें लाल रंग के फूल खासकर गुलाब का फूल अर्पित करें। 
  7. 3 अप्रैल : सातवें दिन यानि सप्तमी को मां कालरात्रि की पूजा होती हैं। जिन्हें रात की रानी का फूल पसंद हैं। 
  8. 4 अप्रैलः नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन कई लोग कन्या पूजन भी करते हैं। 
  9. 5 अप्रैलः नववरात्र के अंतिम दिन राम नवमीं होती हैं। पूजा का मुहूर्त सुबह 11ः 09 ​से 1ः 38 तक का हैं।

           दो वर्ष बाद चैत्र नवरात्र नौ दिन 28 मार्च 2017 ( गुड़ी पड़वा) से 5 अप्रैल 2017 नवमी तक होंगे। वर्ष 2015 और 2016 में आठ दिन के थे। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस बार नवमी को पुष्य नक्षत्र का शुभ योग भी रहेगा, क्योंकि भगवान राम का जन्म नवमी तिथि के दिन पुष्य नक्षत्र में ही हुआ था। 
        नवरात्र के पहले दिन प्रतिपदा मंगवार 28 मार्च सुबह 8.29 बजे शुरू होगी।  सुबह 9.31 बजे चर, लाभ और अमृत के चौघडिय़ा में घट स्थापना का शुभ मुहूर्त है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12.9 से 12.57 तक रहेगा। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की धूम रहेगी। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार विक्रम नवसंवत्सर 2074 का प्रवेश सुबह 8.28 बजे से ही मेष लग्न में होगा। 

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जानिए कैसा रहेगा विक्रम नवसंवत्सर 2074 ???
    इस नवसंवत्सर का नाम साधारण है। इस वर्ष का राजा मंगल और मंत्री बृहस्पति हैं। हालांकि नव वर्ष का पहला सूर्योदय 29 मार्च को होगा। ऐसे में सूर्य पूजा और नव वर्ष 29 मार्च को ही मनाया जाएगा। 
मंत्री पद गुरु बृहस्पति के पास होने सामाजिक समरसता होगी बढ़ोतरी :--- 
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार राजा मंगल, मंत्री बृहस्पति, शस्य सूर्य, धान्येश शुक्र, मेघेश-बुध, फलेश-बुध, धनेश-शनि, दुर्गेश-बुध होंगे। मंत्री पद गुरु बृहस्पति के पास होने से सामाजिक समरसता में बढ़ोतरी होगी। इस वर्ष देश-दुनिया में कृषि, विज्ञान, तकनीकी, अध्यात्म और पर्यटन में अच्छी उन्नति के आसार हैं। 
            चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष श्री संवत 2074 का शुभारंभ इस बार “28 मार्च 2017” प्रातः8ः27 “मेष लग्न” व वृश्चिक नवांश से हो रहा हैं जिसमे लग्न मे मंगल बुध,पंचम भाव मे राहू,छठे भाव मे वक्री गुरु,नवम भाव मे शनि,एकादश भाव मे केतू तथा द्वादश भाव मे सूर्य,चन्द्र व वक्री शुक्र स्थित हैं द्य
              लग्नेश मंगल का लग्न मे होना देश के लिए बहुत शुभता दर्शा रहा हैं जो देशवासियो के साहस व पुरुषार्थ द्वारा देश को आगे ले जाने के लिए प्रेरित कर रहा हैं संभव हैं की इस वर्ष भारत सरकार देश की रक्षा से संबन्धित कई बड़े सौदे व फैसले कठोरता से लागू करे द्य इस मंगल की दृस्टी चतुर्थ भाव व सप्तम भाव पर पड़ रही हैं जो देश के सुख व विदेश व्यापार भाव बनते हैं चूंकि इन दोनों भावो के स्वामी चन्द्र व शुक्र द्वादश भाव मे हैं जो स्पष्ट रूप से देश को विदेशो से बहुत लाभ होना बता रहे हैं द्य शुक्र चन्द्र दोनों चूंकि,कला,ग्लेमर,संगीत व   मनोरंजन के कारक भी होते हैं जो भारतीय फिल्मों व संगीत का पूरे विश्व मे इस वर्ष डंका बजना तय कर रहे हैं संभव हैं की भारतीय कला जगत के किसी व्यक्ति को कोई बड़ा पुरस्कार इस वर्ष विश्वस्तर पर मिल जाए जिससे भारत की कला व फिल्मजगत की ख्याति और बढे द्य
               इस वर्ष का लग्न भारत की वृष लग्न की पत्रिका का द्वादश भाव भी हैं जो इस वर्ष अर्थात 2017-2018 मे भारत को विदेशो से अच्छे समाचार,व्यापार,संधिया,लाभ व धन की प्राप्ति बता रहा हैं द्वादश भाव का स्वामी गुरु अपने भाव द्वादश के अतिरिक्त दसम भाव व धन भाव को भी दृस्ट कर स्पष्ट संकेत दे रहा हैं की सरकार द्वारा इस वर्ष विदेश नीति मे कोई बड़ा बदलाव किया जाएगा जिससे विदेशो से बहुत सा लाभ किसी ना किसी रूप मे देश को मिलेगा जो बड़े पैमाने मे धन के निवेश के रूप मे हो सकता हैं ( विदेश व्यापार का स्वामी व धन भाव का स्वामी शुक्र ऊंच अवस्था मे द्वादश भाव मे हैं )
          28/3/2017 को सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या पड़ रही हैं और दिन मंगल वार पड़ रहा हैं क्यूंकी नववर्ष प्रातः 8ः27 पर आरंभ होगा जिससे शुक्ल प्रतिपदा तिथि अगले दिन सूर्योदय के समय मानी जाएगी जो बुधवार का दिन बनेगा इस कारण इस वर्ष का राजा बुध बनेगा द्य बुध नव वर्ष कुंडली मे तीसरे व छठे भाव का स्वामी होकर लग्न मे लग्नेश मंगल संग ही स्थित हैं और सप्तम भाव को देख रहा हैं जिसका स्वामी द्वादश भाव मे ऊंच का होकर बैठा हैं तथा नवांश मे भी यह बुध छठे भाव से द्वादश भाव को देख रहा हैं जो विदेशो से लाभ,विदेशो से कर्ज़ के अतिरिक्त कर्जमाफ़ी के साथ साथ पड़ोसियो विशेषकर चीन व पाकिस्तान से विवाद,घुसपैठ,अनावश्यक तनाव अथवा युद्ध आदि की पुष्टि भी करा रहा हैं ऐसा विशेषकर 15 मई से 15 अक्तूबर के बीच होना संभव जान पड़ता हैं
             पंचमेश सूर्य का द्वादश भाव मे होना देश की जनता का रुझान विदेशो के प्रति बढ़ने की तरफ इशारा कर रहा हैं वही द्वादश तथा नवम भाव के स्वामी गुरु के छठे भाव मे वक्री अवस्था मे होना विदेशी पर्यटको से संबन्धित कोई बड़ा विवाद होने के साथ साथ विदेशो मे रह रहे भारतीयो से संबन्धित कोई ना कोई परेशानी भी बता रहा हैं 
          दसम व एकादश भाव का स्वामी शनि नवम भाव मे होने से देश के राजा की विदेशी दौरो की पुष्टि कर रहा हैं स्पष्ट हैं की प्रधानमंत्री मोदी इस वर्ष भी कई बड़े देशो के अतिरिक्त पड़ोसी मुल्को की यात्रा भी करेंगे जिनसे देश को अवश्य ही बड़े पैमाने मे लाभ होगा 
               सूर्य के मेष राशि मे प्रवेश वाले दिन के स्वामी को वर्ष का मंत्री माना जाता हैं इस वर्ष सूर्य 14/4/2017 को रात्रि 2ः04 बजे मेष राशि मे प्रवेश करेगा क्यूंकी हिन्दू तिथि सूर्योदय से बदलती हैं इसलिए इस वर्ष का मंत्री गुरु बनेगा द्य गुरु नवमेश व द्वादशेश होकर वक्री अवस्था मे छठे भाव मे बैठा हैं जो दसम भाव व द्वादश भाव के अतिरिक्त दूसरे भाव को व उसके स्वामी शुक्र को भी देख रहा हैं जिससे सरकार द्वारा फाइनेंस व बैंकिंग सेक्टर मे किसी बड़े बदलाव का होना निश्चित होता दिख रहा हैं संभव हैं की वर्ष 2017-2018 मे सरकार टैक्स दरो मे बड़ी राहत प्रदान करने के साथ साथ कुछ नए बैंक भी खोले अथवा कुछ का राष्ट्रीयकरण करे जिससे बैंकिंग क्षेत्र मे उछाल आने से विस्तार होगा तथा नई नौकरिया पैदा होंगी जो बैंको को ब्याजदारों मे कमी करने पर मजबूर करेगा जिससे देश के आम आदमी को बहुत राहत प्राप्त होगी तथा निर्माण क्षेत्र मे भी विस्तार होगा 
               गुरु मंत्री के रूप मे नवमेश व द्वादशेश होकर इस वर्ष दसम भाव व द्वादश भाव को दृस्टी दे रहा हैं दसम भाव जो की देश के राजा का होता हैं उसका स्वामी शनि नवम भाव से राजयोग निर्मित कर गुरु को दृस्टी देकर देश के राजा अर्थात प्रधानमंत्री मोदी को किसी बड़े अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार की प्राप्ति बता रहा हैं ऐसा जून-जुलाई अथवा सितंबरदृअक्तूबर मे हो सकता हैं वही नवांश मे भी यह गुरु दसम भाव मे ही स्थित हैं जो सरकार का न्याय व्यवस्था अथवा सर्वोच्च न्यायालय से धर्म अथवा तीर्थ आदि से संबन्धित किसी प्रकार का विरोध व तनाव करवाना निश्चित कर रहा हैं 
             स्वतंत्र भारत की कुंडली से देखे तो इस पूरे वर्ष भारत चन्द्र मे राहू की अंतर्दशा मे रहेगा चन्द्र भारत की पत्रिका मे तीसरे भाव मे स्वराशी का होकर संचार व खेल जगत मे भारत के लिए सुखद भविष्य बता रहा हैं वही राहू लग्न मे स्थित होकर राजनीतिक व संचार जगत मे भारत का लोहा पूरे विश्व मे मनवाने की पुष्टि कर रहा हैं राहू क्यूंकी शुक्र की राशि मे हैं तथा शुक्र देश का लग्नेश होने के साथ साथ महिलाओ का प्रतिनिधित्व भी करता हैं स्पष्ट हैं की देश की आधी आबादी अर्थात महिलाओ के लिए यह वर्ष कुछ खास उपलब्धियों वाला रहेगा द्य चन्द्र व राहू मे 3/11 का संबंध हैं जो ज्योतिषीय दृस्टी शुभ संबंध कहा जाता हैं 
             संक्षेप मे कहें तो क्यूं की इस वर्ष के राजा बुध व मंत्री गुरु बन रहे हैं जो की ज्योतिषीय दृस्टी से शुभ ग्रह माने व समझे जाते हैं अतः यह वर्ष भारत के लिए अच्छी वर्षा व फसलों की भारी पैदावार होने से विशेषकर लाभदायक साबित होगा तथा देश इस वर्ष कई मामलो मे तेजी से तरक्की की और अग्रसर होगा 

आइये जाने चैत्र नवरात्री 2016 के बारे में और उनके महत्त्व को

चैत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों का आरंभ वर्ष 8 अप्रैल मार्च 2016 के दिन से होगा जिसे "गुड़ी पड़वा" या " नव वर्ष प्रतिपदा" भी कहा जाता हैं।। इसी दिन से हिंदु नवसंवत्सर का आरंभ भी होता है. चैत्र मास के नवरात्र को ‘वार्षिक नवरात्र’ कहा जाता है।। इस बार मां डोली पर आयेंगी और मुरगे पर चढ़ कर विदा होंगी ।। इस वर्ष 11 अप्रैल 2016 को पंचमी तिथि के क्षय होने के कारण यह नवरात्र आठ दिनों का होगा ।। 
           इन दिनों नवरात्र में ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री (मोब.-0966990067 ) के अनुसार कन्या या कुमारी पूजन किया जाता है. कुमारी पूजन में दस वर्ष तक की कन्याओं का विधान है. नवरात्रि के पावन अवसर पर अष्टमी तथा नवमी के दिन कुमारी कन्याओं का पूजन किया जाता है ।। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री (मोब.-0966990067 ) के अनुसार नौ दिनों तक चलने नवरात्र पर्व में माँ दुर्गा के नौ रूपों क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री देवी की पूजा का विधान है।।
Chaitra-Navratri-to-about-2016-and-their-importance-आइये जाने चैत्र नवरात्री 2016 के बारे में और उनके महत्त्व को        नवरात्र के इन प्रमुख नौ दिनों में लोग नियमित रूप से पूजा पाठ और व्रत का पालन करते हैं. दुर्गा पूजा के नौ दिन तक देवी दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ इत्यादि धार्मिक किर्या पौराणिक कथाओं में शक्ति की अराधना का महत्व व्यक्त किया गया है. इसी आधार पर आज भी माँ दुर्गा जी की पूजा संपूर्ण भारत वर्ष में बहुत हर्षोउल्लास के साथ की जाती है. वर्ष में दो बार की जाने वाली दुर्गा पूजा एक चैत्र माह में और दूसरा आश्विन माह में की जाती है. 
       चैत्र नवरात्र पूजन का आरंभ घट स्थापना से शुरू हो जाता है. शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन प्रात: स्नानादि से निवृत हो कर संकल्प किया जाता है. व्रत का संकल्प लेने के पश्चात मिटटी की वेदी बनाकर जौ बौया जाता है. इसी वेदी पर घट स्थापित किया जाता है. घट के ऊपर कुल देवी की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन किया जाता है. तथा "दुर्गा सप्तशती" का पाठ किया जाता है. पाठ पूजन के समय दीप अखंड जलता रहना चाहिए. दुर्गा पूजा के साथ इन दिनों में तंत्र और मंत्र के कार्य भी किये जाते है. बिना मंत्र के कोई भी साधाना अपूर्ण मानी जाती है. 
            ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री (मोब.-0966990067 ) के अनुसार हर व्यक्ति को सुख -शान्ति पाने के लिये किसी न किसी ग्रह की उपासना करनी ही चाहिए. माता के इन नौ दिनों में ग्रहों की शान्ति करना विशेष लाभ देता है. इन दिनों में मंत्र जाप करने से मनोकामना शीघ्र पूरी होती है. नवरात्रे के पहले दिन माता दुर्गा के कलश की स्थापना कर पूजा प्रारम्भ की जाती है।। तंत्र-मंत्र में रुचि रखने वाले व्यक्तियों के लिये यह समय ओर भी अधिक उपयुक्त रहता है. गृहस्थ व्यक्ति भी इन दिनों में माता की पूजा आराधना कर अपनी आन्तरिक शक्तियों को जाग्रत करते है. इन दिनों में साधकों के साधन का फल व्यर्थ नहीं जाता है. मां अपने भक्तों को उनकी साधना के अनुसार फल देती है. इन दिनों में दान पुण्य का भी बहुत महत्व कहा गया है ।। 
 ये रहेंगी 2016 में चैत्र नवरात्र की तिथि --- 
  1.  पहला नवरात्र --प्रथमा तिथि, 8 अप्रैल 2016, दिन शुक्रवार 
  2. दूसरा नवरात्र --द्वितीया तिथि 9 अप्रैल 2016, दिन शनिवार 
  3. तीसरा नवरात्रा --तृतीया तिथि, 9 अप्रैल 2016, दिन शनिवार 
  4. चौथा नवरात्र -- चतुर्थी तिथि, 10 अप्रैल 2016, दिन रविवार 
  5. पांचवां नवरात्र --- पंचमी तिथि , 11 अप्रैल 2016, दिन सोमवार
  6. छठा नवरात्रा -- षष्ठी तिथि, 12 अप्रैल 2016, दिन मंगलवार 
  7. सातवां नवरात्र -- सप्तमी तिथि , 13 अप्रैल 2016, दिन बुधवार 
  8. आठवां नवरात्रा -- अष्टमी तिथि, 14 अप्रैल 2016, दिन बृहस्पतिवार 
  9. नौवां नवरात्र-- नवमी तिथि 15 अप्रैल 2016, दिन शुक्रवार

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 विशेष योग हैं इस नवरात्री में---
 8 अप्रैल शुक्रवार के दिन अश्विनी नक्षत्र तथा सर्वार्थ सिद्धि योग के संयोग में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार शुक्रवार के दिन शुभ योग में अश्विनी नक्षत्र का होना माता लक्ष्मी की कृपा को दर्शाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से वासंती नवरात्रि की शुरुआत होगी। तृतीया तिथि के क्षय के कारण इस बार देवी आराधना का पर्व काल आठ दिन का रहेगा। 
         अनेकानेक वर्षोंं बाद चैत्र नवरात्रि योगों के दिव्य संयोग में आ रही है। साधना, सिद्धि, खरीदारी तथा मांगलिक कार्यों के लिए नवरात्रि के आठ दिन श्रेष्ठ हैं। इस नवरात्रि में लक्ष्मी प्राप्ति के लिए साधना तथा संकल्प की सिद्धि आराधक को देवी कृपा से सहज ही प्राप्त होगी। सालों बाद नवरात्रि के आठ दिन कोई ना कोई विशिष्ट योग का होना शुभ व मांगलिक कार्यों के लिए भी श्रेष्ठ है। 
 जानिए किस दिन कौनसा खास योग--- - 
प्रतिपदा व अष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग - मनोवांछित संकल्पों की सिद्धि के लिए साधना, खरीदारी व नवीन कार्यों के आरंभ के लिए श्रेष्ठ - चतुर्थी पर रात्रि में रवियोग - वनस्पति तंत्र की जागृति के लिए शुभ रात्रि - पंचमी की रात्रि अमृत सिद्धि योग - सुख-समृद्धि तथा कामनाओं की पूर्ति के लिए देवी की आराधना करना श्रेयस्कर - छठ, सप्तमी व नवमी पर रवि योग - स्वर्ण, रजत, वाहन आदि की खरीदारी के लिए शुभ रहेगा दिन - गुरुपुष्य नक्षत्र - पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार नवमी के दिन गुरुपुष्य नक्षत्र हर प्रकार की खरीदी, गृह प्रवेश, गृह आरंभ, नवीन प्रतिष्ठान व उद्योग आदि की स्थापना के लिए महामुहूर्त बना हैं।।... 
 इस चैत्री नवरात्री पर घट स्थापना के मुहूर्त--- अनुकूल मुहूर्त में ही करें कलश स्थापना--- 
चैत्र नवरात्र आठ अप्रैल से शुरू होगा. इस बार एक तिथि नष्ट होने से नवरात्र आठ दिनों का होगा. पूजा करने वाले अनुकूल मुहूर्त में ही कलश स्थापना करें और सच्चे मन से देवी मां का ध्यान लगाये. ऐसा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण होती है।।
  1.  - सुबह 7.45 से 10.45 तक लाभ व अमृत का चौघड़िया रहेगा।
  2.  - दोपहर 11.40 से 12.45 शुभ अभिजीत मुहूर्त रहेगा।।
  3.  - दोपहर 12.45 से शुभ का चौघड़िया रहेगा।। 
  4. ---साधकगण स्थिर लग्न वृष में प्रातः 8 बजकर 13 मिनट से 10 बजकर 8 मिनट के बीच घाट स्थापना कर सकते हैं।। इस शुभ समय में लाभ एवम् अमृत का चौघड़िया भी रहेगा।। 

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ऐसे मनाएं नवरात्रि पर्व... 
जानिए नवरात्रि का प्रभाव,महत्त्व एवं इस अवसर पर किये जाने वाले उपाय---- 
 हमारे वेद, पुराण व शास्त्र साक्षी हैं कि जब-जब किसी आसुरी शक्ति ने अत्याचार व प्राकृतिक आपदाओं द्वारा मानव जीवन को तबाह करने की कोशिश की तब-तब किसी न किसी दैवीय शक्ति का अवतरण हुआ। इसी प्रकार जब महिषासुरादि दैत्यों के अत्याचार से भू व देव लोक व्याकुल हो उठे तो परम पिता परमेश्वर की प्रेरणा से सभी देवगणों ने एक अद्भुत शक्ति का सृजन किया जो आदि शक्ति मां जगदंबा के नाम से सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त हुईं। उन्होंने महिषासुरादि दैत्यों का वध कर भू व देव लोक में पुनःप्राण शक्ति व रक्षा शक्ति का संचार कर दिया। 
       ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री (मोब.-0966990067 ) के अनुसार इस वर्ष 2016 को 8 अप्रैल को प्रतिपदा तिथि के दिन चैत्री नवरात्रों का पहला नवरात्रा होगा. माता पर श्रद्धा व विश्वास रखने वाले व्यक्तियों के लिये यह दिन विशेष रहेगा. शारदीय नवरात्रों का उपवास करने वाले इस दिन से पूरे नौ दिन का उपवास विधि -विधान के अनुसार रख, पुन्य प्राप्त करेगें।। नवरात्रि का त्योहार नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों में तीन देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है। पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरुपों (कुमार, पार्वती और काली), अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरुपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरुपों की पूजा करते है। संपूर्ण ब्रह्मण्ड का संचालन करने वाली जो शक्ति है। उस शक्ति को शास्त्रों ने आद्या शक्ति की संज्ञा दी है।
 देवी सुक्त के अनुसार- 
या देवी सर्व भूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।। 
         अर्थात जो देवी अग्नि,पृथ्वी,वायु,जल,आकाश और समस्त प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित है, उस शक्ति को नमस्कार, नमस्कार, बारबार मेरा नमस्कार है। इस शक्ति को प्रसन्न करने के लिए नवरात्र काल का अपना विशेष महत्व है। मां दुर्गा को प्रसन्न करने हेतु नवरात्र में निम्न बातो का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नवरात्र में साधक को व्रत रखकर माता दुर्गा की उपासना करनी चाहिए। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09669290067 ) के अनुसार माता दुर्गाकी उपासना से सभी सांसारिक कष्टो से मुक्ति सहज ही हो जाती है। 
        नवरात्र शब्द दो शब्दों नव़ + रात्र से मिलकर बना है। जिसका अर्थ नौ दिव्य अहोरात्र से है। शास्त्रों के अनुसार नवरात्री का पर्व वर्ष में चार बार आता है। ये चार नवरात्रीयां बासंतिक,आषढीय,शारदीय व माघीय है जिसमें से दो नवरात्री शारदीय व बासंतिक जनमानस में विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसी कारण शेष दो नवरात्री आषाढी व माघीय को गुप्त नवरात्री कहा जाता है। कल्कि पुराण के अनुसार चैत्र नवरात्र जनसामान्य के पुजन हेतु उतम मानी गई है। गुप्त नवरात्र साधको के लिए उतम मानी है। शारदीय नवरात्र राजवंश के लिए उतम मानी गई है। 
         भगवान श्री राम ने शारदीय नवरात्र का विधि विधान से पुजन कर लंका विजय प्राप्त की थी। लंकिन समय चक्र के साथ राजपरिवार प्रथा बंद होकर अब आमजन भी शारदीय नवरात्र को अति उत्साह से मनाता आ रहा है एवं माता दुर्गा को प्रसन्न करने के अनेक उपाय भी करता आ रहा है। उपासना और सिद्धियों के लिये दिन से अधिक रात्रिंयों को महत्व दिया जाता है. हिन्दू के अधिकतर पर्व रात्रियों में ही मनाये जाते है. रात्रि में मनाये जाने वाले पर्वों में दिपावली, होलिका दशहरा आदि आते है. शिवरात्रि और नवरात्रे भी इनमें से कुछ एक हे. शक्ति की परम कृपा प्राप्त करने हेतु संपूर्ण भारत में नवरात्रि का पर्व बड़ी श्रद्घा, भक्ति व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
          ऐसी नवरात्रि सुख और समृद्घि देती है। सनातन संस्कृति में नवरात्रि की उपासना से जीव का कल्याण होता है। भगवती राजराजेश्वरी की विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होगा, घर-घर घट-कलश स्थापित किए जाते हैं। स्त्री हो या पुरुष, सबको नवरात्र करना चाहिये । यदि कारणवश स्वयं न कर सकें तो प्रतिनिधि ( पति – पत्नी, ज्येष्ठ पुत्र, सहोदर या ब्राह्मण ) द्वारा करायें । नवरात्र नौ रात्रि पूर्ण होने से पूर्ण होता है । इसलिये यदि इतना समय न मिले या सामर्थ्य न हो तो सात, पाँच, तीन या एक दिन व्रत करे और व्रतमें भी उपवास, अयाचित, नक्त या एकभुक्त – जो बन सके यथासामर्थ्य वही कर ले ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09669290067 ) के अनुसार नवरात्रि में घट स्थापना के बाद संकल्प लेकर पुजा स्थान को गोबर से लेप लीपकर वहां एक बाजट पर लाल कपडा बिछाकर उस पर माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर पंचोपचार पुजा कर धुप-दीप एवं अगरबती जलाए। फिर आसन पर बैठकर रूद्राक्ष की माला सें किसी एक मंत्र का यथासंभव जाप करे। 
पुजन काल एवं नवरात्रि में विशेष ध्यान रखने योग्य बाते- 
1- दुर्गा पुजन में लाल रंग के फुलो का उपयोग अवश्य करे। कभी भी तुलसी,आंवला,आक एवं मदार के फुलों का प्रयोग नही करे। दुर्वा भी नही चढाए। 
2- पुजन काल में लाल रंग के आसन का प्रयोग करे। यदि लाल रंग का उनी आसन मिल जाए तो उतम अन्यथा लाल रंग काल कंबल प्रयोग कर सकते है। 
3- पुजा करते समय लाल रंग के वस्त्र पहने एवं कुंकुंम का तिलक लगाए। 
4- नवरात्र काल में दुर्गा के नाम की ज्योति अवश्य जलाए। अखण्ड ज्योत जला सकते है तो उतम है। अन्यथा सुबह शाम ज्योत अवश्य जलाए। 
5- नवरात्र काल में नौ दिन व्रत कर सके तो उतम अन्यथा प्रथम नवरात्र चतुर्थ नवरात्र एवं होमाष्टमी के दिन उपवास अवश्य करे। 
6- नवरात्र काल में नव कन्याओं को अन्तिम नवरात्र को भोजन अवश्य कराए। नव कन्याओं को नव दुर्गा को मान कर पुजन करे। 
7- नवरात्र काल में दुर्गा सप्तशती का एक बार पाठ पुर्ण मनोयोग से अवश्य करना चाहिए। 
नवरात्री में जाप करने हेतु विशेष मंत्र----- 

  •  ओम दुं दुर्गायै नमः 
  • ऐं ह्मीं क्लीं चामुंडाये विच्चै 
  • ह्मीं श्रीं क्लीं दुं दुर्गायै नमः 
  • ह्मीं दुं दुर्गायै नमः 
      ###ग्रह दोष निवारण हेतु नवदुर्गा के भिन्न भिन्न रूपों की पुजा करने से अलग-अलग ग्रहों के दोष का निवारण होता है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री (मोब.-09669290067 ) के अनुसार कोई ग्रह जब दोष कारक हो तो- 
  1. ---- सूर्य दोष कारक होने पर नवदुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पुजा करनी चाहिए। दस महा विधाओं में से मातंगी महाविधा की उपासना लाभदायक करनी है। 
  2. ----चंद्र दोष कारक होने पर नवदुर्गा के कुष्मांडा के स्वरूप की पुजा करनी चाहिए।दश महाविधाओं में भुवनेश्वरी की उपासना चंद्रकृत दोषो को दुर करत़ी ळें 
  3. ---मंगलदोष कारक होने पर नवदुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पुजा करनी चाहिए। दश महाविधाओं में बगलामुखी की उपासना मंगलकृत दोषों को दुर करती है। 
  4. -----बुध दोष कारक होने पर नवदुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पुजा करनी चाहिए। दश महाविधाओं में षोडशी की उपासना बुध की शांति करती है। 
  5. ----वृहस्पति दोष कारक होने पर नवदुर्गा के महागौरी स्वरूप की उपासना करनी चाहिए। दश महाविधाओं में तारा महाविद्या की उपासना गुरू ग्रह के दोषो को दुर करती है। 
  6. -----शुक्र दोष कारक होने पर नवदुर्गा के सिद्धीदात्री स्वरूप की पुजा करनी चाहिए। दश महाविद्याओं में कमला महाविद्या की उपासना शुक्र दोषो को कम करती है। 
  7. ----शनि दोषकारक होने पर नवदुर्गा के कालरात्रि स्वरूप पुजा करनी चाहिए। दश महाविद्याओं में काली महाविद्या की उपासना शनि दोष का शमन करती है। 
  8. -----राहु दोषकारक होने पर नवदुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप पुजा करनी चाहिए। दश महाविद्याओं में छिन्नमस्ता की उपासना लाभदायक रहती है। 
  9. ------ केतु दोष कारक होने पर नवदुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पुजा करने से दोष दुर होता है। दश महाविद्याओं में धुमावती की उपासना केतु दोष नाशक है। इस प्रकार आप नवरात्र में दुर्गा पुजा, उसके स्वरूप की पुजा कर सुख, शांति एवं समृद्धि प्राप्त कर सकते है। 

       ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09669290067 ) के अनुसार इस नवरात्री के पावन नौ दिनों के लिए यहाँ पर दिव्य मंत्र दिए जा रहे हैं, जिनके विधिवत परायण करने से स्वयं के नाना प्रकार के कार्य व सामूहिक रूप से दूसरों के कार्य पूर्ण होते हैं। इन मंत्रों को नौ दिनों में अवश्य जाप करें। इनसे यश, सुख, समृद्धि, पराक्रम, वैभव, बुद्धि, ज्ञान, सेहत, आयु, विद्या, धन, संपत्ति, ऐश्वर्य सभी की प्राप्ति होती है। विपत्तियों का नाश होगा। 
 1. विपत्ति-नाश के लिए :------ 
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। 
सर्वस्पापहरे देवि नारायणि नमोस्तुते।। 

2. भय नाश के लिए :----- 
सर्वस्वरूपे सर्वेश सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि, दुर्गे देवि नमोस्तुते।। 
3. पाप नाश तथा भक्ति की प्राप्ति के लिए :----
 नमेभ्य: सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे। 
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।। 

4. मोक्ष की प्राप्ति के लिए :---- 
त्वं वैष्णवी शक्तिरन्तवीर्या। 
विश्वस्य बीजं परमासि माया। 
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भूवि मुक्ति हेतु:।। 

5. हर प्रकार के ‍कल्याण के लिए :------ 
सर्वमंगल्यमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। 
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते।। 

6. धन, पुत्रादि प्राप्ति के लिए : ----- 
सर्वबाधाविनिर्मुक्तो-धनधान्यसुतान्वित: मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।। 

7. रक्षा पाने के लिए :----- 
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खंडे न चाम्बिके। 
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि: स्वनेन च।। 

8. बाधा व शांति के लिए :----- 
सर्वबाधाप्रमशन: त्रैलोक्याखिलेश्वरि। 
एवमेव त्वया कार्यमस्यद्धैरिविनाशनम्।। 

9. सुलक्षणा पत्नी की प्राप्ति के लिए : ------ 
पत्नी मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्। 
तारिणी दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।

कैसा रहेगा आपकी राशि का भविष्यफल 2016 में

   निश्चित रूप से आप ने कभी ना कभी खुद से जरूर पूछा होगा, क्या यह हो सकता है कि आप इस वर्तमान स्थिति के बजाय किसी और स्थिति में होते ? क्या आपने कभी सोचा है कि कोई उच्च शक्ति आप के जीवन को दिशा दे रही हैं। राशिफल प्राचीन समय से आपको दिशा देता आ रहा है और आपके भविष्य को सामने लता हैं, चाहे वो अच्छा हो या बुरा । 
know-How-about-your-Predictions-in-2016-yearly-horroscope-कैसा रहेगा आपकी राशि का भविष्यफल 2016 में         अपने भविष्य को बदलना शयद संभव न हो पर अपने भविष्य की घटनाओ के लिए तैयार रहना जरूरी हैं । पृथ्वी अनंत ब्रह्मांड के माध्यम से सैकड़ो सितारों के निकट संपर्क में हैं , इसीलिए वह आपस में काफी जुड़े हुए हैं । अगर सभी ग्रह संतुलित हैं तो आपका जीवन , व्यवसाय , स्वास्थ्य इत्यादि सभी कुछ अच्छा रहेगा । यदि ग्रह सन्तुलनत में नहीं है तो ये सभी कुछ मुश्किल हैं । यदि आप को इन आने वाली घटनाओ के बारे में पहले से जानकारी नही होगी तो शायद आप इन से निपटने के लिए सही ढंग से तैयार नही रहेंगे । 
       वर्ष 2016 में अपने जीवन में आने वाले किसी भी प्रकार के आश्चर्य से सावधान रहने के लिए, अपनी कुंडली 2016 को जानिए । अनिश्चित भविष्य के बारे में अनुमान लगाना भूल जाइये । हर राशिचक्र में कुछ विशिस्ट लक्षण और गुण होते है जो आपके जीवन की दिशा तय करते हैं । राशिफल इन सभी गुणो को ध्यान में रखकर बनाया जाता हैं । अपने भविष्य को बदलने की चेष्टा तभी की जा सकती है जब आपको उसके बारे में पूर्वानुमान हो। अपनी कुंडली 2016 आपको वह अनुमान लगाने की क्षमता दे सकता हैं । आप जान सकते हैं, आपके जीवन में वह सुनहरे अवसर कब आएंगे जब आप व्यसाय और निजी जीवन में बेहतर कर सकते है। आपको मालूम होग कब आप को अपने शरीर और स्वास्थ्य के विषय में अधिक सतर्क रहने की जरूरत हैं । 
          ज्योतिषानुसार भविष्य जानने का सबसे सटीक तरीका राशिफल होता है। माना जाता है कि राशिफल द्वारा जीवन की कई घटनाओं के विषय में आप पूर्वानुमान लगा सकते हैं। तो चलिए के द्वारा आप भी जान लीजिए वर्ष 2016 आपके लिए कैसा रहेगा।आपि राशि के राशिफल 2016 के द्वारा आप अपने प्यार, व्यापार, कारोबार और स्वास्थ्य आदि के बारे में जान सकते हैं। हर कोई चाहता है अपने आने वाले कल को जानना, समझना। इसलिए में लेकर आया हूँ आपके आने वाले कल का भविष्यफल। भविष्य की गुत्थी को सुलझाने के लिए अभी पढ़ें राशिफल 2016... 
  1.  2016 का मेष राशिफल---- यह साल आपको ढेरों ख़ुशियाँ देेने वाला होगा। कारोबार से अच्छी आमदनी होगी, लेकिन इसमें थोड़ी देर भी हो सकती है। यदि आप कारोबारी हैं तो खुले हाथ पैसे ख़र्च करने और निवेश करने में एहतियात बरतें। शेयर बाज़ार में भी पैसे लगाने से परहेज़ करें। पारिवारिक कलह से थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन ख़ुद को इससे दूर रखने की कोशिश करें। यह वर्ष प्रेम-संबंधों के अनुकूल नहीं है, भरपूर शारीरिक सुख भी मिलने की संभावना कम है। इस वर्ष ‘बिन बुलाए बराती’ न बनें यानि बिना मतलब के झगड़ों में न पड़ें, इससे कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है, उल्टा नुक़सान ही होगा। अच्छे दिनों की शुरूआत अगस्त माह के बाद होगी, लेकिन पूरे वर्ष सावधान रहना आपके लिए हितकर होगा।वैदिक ज्योतिष के मुताबिक़ आपके लिए यह वर्ष मिला-जुला परिणाम देने वाला है। गृहस्थ जीवन को लेकर कुछ तनाव हो सकता है, हालाँकि पेशेवर ज़िन्दगी में सफलता आपके क़दमों को चूमेगी। लेकिन आपको ज़्यादा उत्साहित होने की ज़रूरत नहीें हैं, ख़ुशियाँ धीरे-धीरे ही मिलेंगी। यदि क़ारोबारियों की बात करें, तो इस समय किसी भी प्रकार का निवेश न करना ही ठीक होगा। शेयर बाज़ार से दूर ही रहें तो बेहतर होगा। अनावश्यक रूप से पैसे ख़र्च करने की आदत को नियंत्रित करना बेहद ही ज़रूरी है। संभव है कि प्रेम-संबंधों में कुछ ख़ास रोचकता न रहे और भरपूर यौन-सुख भी प्राप्त नहीं हो। बेकार की बातोंं पर ध्यान न दें तो ही अच्छा है। हमेशा आवेश में रहने की आदत आपको नुक़सान पहुँचा सकती है। ज़िन्दगी में रौनक अगस्त माह के बाद ही आएगी, लेकिन पूरे साल सतर्क रहने की आवश्यकता है...यह वर्ष आपको विभिन्न प्रकार के मिश्रित फल देने वाला है, कुछ मीठे होंगे तो कुछ खट्टे भी हो सकते हैं। यह समय इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि पारिवारिक रिश्तों में सामंजस्य स्थापित करने में की कुछ दिक्कतें आ सकती है, लेकिन चिन्ता करने की कोई ख़ास बात नहीं है, यदि आप कोशिश करेंगे तो इसे संभालने में सफल रहेंगे। आर्थिक स्थिति की बात करें तो यह मुनाफ़ा देने वाला और आशाजनक परिणाम देने वाला होगा। लाभ की प्राप्ति में थोड़ी देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं। कारोबारी इस समय अत्यधिक निवेश करने और ख़र्च करने से परहेज़ करें। स्टॉक मार्केट से दूर ही रहें तो बेहतर होगा, क्योंकि लाभ होने की संभावना न के बराबर है। रिश्तों के बीच प्यार की अहमियत को समझें। यह समय अपने प्यार को बेहतर समझने और उस पर ध्यान देने वाला है, तथा यह आपके रोमांटिक एवं यौन जीवन के यह लिए ज़रूरी भी है। अपने प्रिय के साथ भरपूर समय बिताएँ, वरना रिश्तों का आनंद उठाने से वंचित रह जाएंगे। अगस्त महीने के बाद आपके सितारे बदलने वाले हैं, लेकिन सतर्कता पूरे साल ज़रूरी है। अतः अपने बेहतर कल की तैयारी में जी-जान से जुट जाएँ। 
  2.  2016 का वृषभ राशिफल---- ख़ुशियों की सौगात लिए नया साल आपका इंतज़ार कर रहा है। जीवनसाथी से पूरे साल ख़ुशियाँ मिलेंगी। नौकरी पेशा लोगों के लिए साल का कुछ समय परेशानियों भरा हो सकता है, जबकि व्यापारियों को बेहतर लाभ होगा। आपका प्रेम-संबंध एक नए मुक़ाम पर पहुँचेगा, जो पूरे साल आपको प्रफुल्लित करेगा। आपकी कामोत्तेजना अनैतिक संबंधो के लिए बाध्य कर सकती है और आपको असहाय भी बना सकती है। अपनी भावनाओं पर क़ाबू रखना आपके लिए हितकर होगा। यह वर्ष आपको एक नई ऊँचाई पर ले जाने वाला होगा।सितारे कहते हैं कि वृषभ राशि के लिए यह साल ख़ुशियोंं भरा रहेगा। यदि जीवनसाथी के साथ सच्चा प्यार और स्नेह है, तो सब कुछ निर्बाध रूप से चलेगा। इस वर्ष आपका वैवाहिक जीवन आनंदमय रहेगा और आप अपने प्रिय के साथ सुखमय पल बिताएंगे। नौकरीपेशा लोगों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। क़ारोबारियों को तत्काल मुनाफ़ा नहीं होगा, लेकिन धीरे-धीरे अवश्य होगा। प्रेम-संबंधो में प्रगाढ़ता आएगी, जो आपको पल-पल आनंदित करेगी। जितना ज़्यादा आप अंदर से ख़ुश रहेंगे, उतने ही आप सफल भी होंगे। प्रेमी के प्रति आपकी उदासीनता कुछ ऐसे रिश्तों की ओर इशारा कर रही है, जो उचित नहीं मालूम होते हैं। निजी प्रेम-संबंधों से भटकाव होने के कारण ऐसा हो सकता है। हालाँकि आप काफ़ी समझदार हैं। अवांछित संबंधों से दूरी बनाकर रहें तो बेहतर होगा। यह साल आपके लिए आर्थिक रूप से मददगार साबित होगा। 
  3.  2016 का मिथुन राशिफल---- आपके लिए यह साल सर्वोत्तम सालों में से एक साबित होगा। जीवनसाथी के साथ रिश्तों में प्रगाढ़ता आएगी, लेकिन जीवनसाथी के बेरूखी के कारण रिश्तेदारों से कुछ अनबन भी हो सकती है। इस बीच सेहत का ख़याल रखना भी ज़रूरी है, जैसे कहा भी गया है- ‘हेल्थ इज़ वेल्थ’, अर्थात् स्वास्थ्य ही धन है। इसके लिए खानपान पर ध्यान दें और व्यायाम करें। आय में कमी रहने की संभावना है, अतः ज़रूरी जगहों पर ही पैसे ख़र्च करें और कर्ज़ लेने से भी पूरी तरह परहेज़ करें। यह साल कारोबारियों को बेहतर मुनाफ़ा देने वाला होगा। प्रेम-संबंधों में पूरे साल मधुरता क़ायम रहेगी।ग्रहों की चाल बताती है कि इस साल का ज़्यादातर भाग आपके अनुकूल रहेगा। प्यार और स्नेह के कारण जीवनसाथी के क़रीब रहेंगे, जो कि आप दोनों के सामंजस्य पर भी निर्भर करता है। जीवनसाथी का संबंध रिश्तेदारों के साथ मधुर रहेगा। स्वास्थ्य के प्रति गंभीर रहें, पौष्टिक आहार लें और व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें; कहा भी गया है - ‘स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का निवास होता है’। ख़र्चों पर नियंत्रण रखें, क्योंकि आय में थोड़ी कमी रहने की संभावना है। आर्थिक संकटों से बचने के लिए कर्ज़ लेने से परहेज़ करें, ऐसे समय में कुछ लोग व्याकुल होकर अवैध रास्तों का चुनाव करते हैं जो कि कदापि उचित नहीं है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 2016 व्यापारियों के लिए मुनाफ़े वाला वर्ष साबित होगा। प्रेम-संबंधों में मधुरता आएगी। कुछ सामान्य दिक़्क़तों को छोड़कर यह साल आपके लिए कुछ ख़ास कष्टप्रद नहीं है।
  4.  2016 का कर्क राशिफल---- व्यक्तिगत तौर पर यह वर्ष आपके लिए सौगातों की बौछार करने वाला है, लेकिन इसके लिए यह आवश्यक है कि आप दूसरे लोगों और रिश्तेदारों की अच्छाई के लिए सोचें। स्वास्थ्य का ख़याल रखना भी ज़रूरी है, पुरानी बीमारी आपको फिर से परेशान कर सकती है। किसी ग़ैर के उपर विश्वास करना आपके लिए घातक हो सकता है। धन संबंधी मामलों में भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। कुछ लोग आपके विरूद्ध षड्यन्त्र भी रच सकते हैं। नौकरी बदलने के लिए यह वर्ष सर्वथा उपयुक्त है। आपके ऊपर नए कार्य की ज़िम्मेदारी भी आ सकती है। वेतन में वृद्धि होने की प्रबल संभावना है। अपने प्यार के लिए आप किसी भी परंपरा को तोड़ सकते हैं, चाहे वह कोई सामाजिक परंपरा ही क्यों न हो। हालांकि यह वर्ष प्रेम-संबंधों के लिए काफ़ी अनुकूल है, लेकिन साथ में कामोत्तेजना पर काबू रखना भी ज़रूरी है।वर्ष कुंडली के अनुसार कर्क राशि वाले निजी ज़िन्दगी का भरपूर आनंद उठाएंगे, हालाँकि मुमकिन है कि परिवार के सभी सदस्यों के साथ संबंध अच्छे न रहेें। स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहने की आवश्यकता है, किसी गंभीर बीमारी की चपेट में आने की संभावना है। आमदनी के प्रति भी सावधान रहें। वित्तीय मामलों में किसी के ऊपर आँख मूंदकर विश्वास करना आपके लिए घातक हो सकता है। अपने आँख और कान को खोलकर रखें; कुछ लोग आपके ख़िलाफ़ साज़िश भी रच सकते हैं। नौकरी बदलने के लिए यह साल सर्वोत्तम है, अतः इसके लिए प्रयासरत रहें। इस राशि के कुछ जातकों को नई ज़िम्मेदारी भी मिल सकती है और वेतन में भी वृद्धि होने के आसार हैं। कर्क राशि के कुछ जातक प्यार की ख़ातिर सामाजिक बंधनों को भी तोड़ सकते हैं। इस वर्ष अपनी काम-ऊर्जा पर नियंत्रण रखना आपके यौन-जीवन के लिए बेहतर साबित होगा। 
  5.  2016 का सिंह राशिफल----- यह वर्ष आपकी सफलता के सारे द्वार खोलेगा। जीवनसाथी और रिश्तेदारों के साथ मधुर संबंध बरक़रार रहेंगे। गरिष्ठ आहार और मदिरासेवन से परहेज़ करना आपको कई सारी बीमारियों से बचा सकता है, जैसे - मोटापा। इस वर्ष लक्ष्मी आपके ऊपर मेहरबान रहेंगी। नौकरीपेशा वाले लोग और कारोबारियों को धन की कमी नहीं रहेगी। आर्थिक रूप से यह वर्ष सुनहरा साबित होगा। चारों तरफ़ से शोहरत हासिल होगी। मान-मर्यादा और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। अविवाहितों को विवाह के प्रस्ताव मिलेंगे तथा प्रेम-संबंधो में आश्चर्यजनक मधुरता देखने को मिलेगी। यौन जीवन का बेहतर सुख प्राप्त होगा और पूरा साल आनंद के साथ गुज़रेगा।वर्षफल के मुताबिक़ आपके लिए यह साल किसी उपहार से कम नहीं है। आपके जीवन का हर एक पहलू सही दिशा से होकर गुज़रेगा। जीवनसाथी और क़रीबियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध रहेंगे। सेहत की बात करें तो वजन बढ़ सकता है। इसे नियंत्रित करने की कोशिश करें, रोग-रहित काया के लिए भारी आहार लेने से परहेज़ करें। शराब से दूरी बनाना आपकी सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। यदि आपकी आर्थिक स्थिति की बात करें, तो यह काफ़ी हद तक ठीक-ठाक रहने वाली है। धन में वृद्धि के साथ-साथ जमा-पूँजी में भी बढ़ोत्तरी होगी। आप चाहे कहीं नौकरी करते हों या ख़ुद का क़ारोबार हो, मुनाफ़े का होना हर हाल में सुनिश्चित है। पेशेवर ज़िन्दगी में प्रसिद्धि मिलेगी। 2016 के राशिफल के अनुसार प्रेम-संबंधों में भी सुधार नज़र आ रहा है। अविवाहित लोगों के हाथ इस वर्ष पीले हो सकते हैं। यौन-जीवन में भी चार-चांद लगने वाला है तथा शारीरिक सुख भी प्राप्त होगा। जीवनसाथी के साथ अंतरंग क्षणों का आनंद लेंगे। 
  6.  2016 का कन्या राशिफल--- पूरा वर्ष तो संतोषजनक रहेगा, लेकिन जीवनसाथी से रिश्तों के बीच थोड़ी दूरियाँ बढ़ने की संभावना है। परिवार से विवाद भी हो सकता है। सेहत को लेकर चिंताएँ हो सकती हैं, अतः इसके प्रति सतर्क रहें और खान-पान पर विशेष ध्यान दें। बृहस्पति के बारहवें घर में बैठे होने के कारण कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है तथा लक्ष्मी भी आपसे नाराज़ हो सकती हैं। पूरे वर्ष बृहस्पति आपके ऊपर अपना प्रभाव डालेगा। बिज़नेसमैन को कुछ ख़ास मुनाफ़ा नहीं होगा, लेकिन अगस्त के बाद आपके अच्छे दिनों की शुरूआत ज़रूर होगी। नौकरी पेशा वालों पर इसका कुछ ज़्यादा प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। संगी-साथियों के साथ रिश्ते अच्छे रहेंगे, लेकिन इसके लिए अपनी मानसिकता को बदलने की ज़रूरत है।दुर्भाग्यवश, जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता की कमी रह सकती है। परिजनों के साथ भी नोेंक-झोंक होने की ज़्यादा संभावना है। ज़िन्दगी का हर एक पहलू आपको परेशानी देने वाला हो सकता है; सेहत भी प्रभावित हो सकती है। सेहत का ख़याल रखना आपके हाथ में है, इसलिए इसके प्रति गंभीर रहें। वित्त से संबंधित कुछ नुक़सान होने की संभावना है। बृहस्पति के बारहवें घर में मौजूद होने के कारण परेशानियाँ और भी बढ़ सकती है। अगस्त तक अपनी महत्वाकांक्षाओं पर क़ाबू रखें। इसके बाद का समय आपके हित में होने वाला है। हालाँकि, यदि आप नौकरी-पेशा नहीं हैं, तो ज़्यादा दिक़्क़त नहीं होगी। प्रेम-संबंधों की बात करें तो यह वास्तव में बेहतर समय रहेगा, यदि आप अपने विचारों पर नियंत्रण रखते हैं तो। 
  7.  2016 का तुला राशिफल---- संयुक्त परिवारों में मतभेद हो सकता है लेकिन छोटे परिवार की स्थिति बेहतर रहेगी, यानि ‘छोटा परिवार, सुखी परिवार’ वाली पंक्ति सार्थक होगी। जीवनसाथी के ऊपर विश्वास करना फ़ायदे का सौदा होगा। कुछ लोगों के अपने पार्टनर के साथ रिश्ते ख़राब हो सकते हैं। बच्चों की देखभाल को लेकर थोड़ी चिंता हो सकती है। नौकरी पेशा लोगों के लिए यह वर्ष बहुत ही अच्छा है, लेकिन कारोबारियों के लिए थोड़ा मुश्किल भरा वक़्त हो सकता है। 11 अगस्त के बाद आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आपकी स्थिति पहले से ख़राब होती जा रही है। अप्रत्याशित व्यय होने की भी संभावना है। लोगों के साथ बातचीत करते वक़्त सतर्कता बनाएँ रखें। प्रेम-संबंधों में अनावश्यक रूप से समय बर्बाद न करें, जीवनसाथी के साथ बेहतर तालमेल आपको ज़िम्मेदार पार्टनर के रूप में साबित करेगा। यौन सुखों के लिए शरीर को दाँव पर न लगाएँ।तुला राशि के ऐसे जातक जिनका संयुक्त परिवार है, उनके परिजनोंं के बीच आपसी सौहार्द की कमी रहेगी। वहीं दूसरी तरफ़ छोटे परिवारों में ख़ुशी का माहौल रहेगा, यानि इस मामले में ‘छोटा परिवार सुखी परिवार’ की बात सही साबित होगी। अपने जीवनसाथी के ऊपर किसी प्रकार का शक़ न करें तो बेहतर होगा। इस साल तुला राशि के कुछ जातकों का पारिवार से संबंध ख़राब हो सकता है। यदि संतान की बात की जाए तो वे आपको थोड़ी परेशानी दे सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए समय बेहतर है, लेकिन क़ारोबारियों को अपने क़ारोबार में कुछ परेशाानियों का सामना करना पड़ सकता है। 11 अगस्त के बाद आपके बेहद ही अच्छे दिन आने वाले हैं। हालाँकि, अचानक से ख़र्च भी बढ़ने की संभावना है। पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतें, अन्यथा परेशानियाँ बढ़ सकती हैं। प्रेम-संबंधों में भी संयम बरतने की आवश्यकता है। जीवनसाथी के साथ ताल-मेल बिठाकर चलने की ज़रूरत है। शारीरिक सुख के साथ शरीर का ख़याल रखना भी ज़रूरी है। 
  8.  2016 का वृश्चिक राशिफल---- जैसे पानी और मछली का रिश्ता अटूट होता है, ठीक वैसे ही आपको भी अपने जीवनसाथी के साथ अटूट सामंजस्य स्थापित करना होगा। व्यक्तिगत तौर पर कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अच्छे भविष्य के लिए पिता का सहयोग प्राप्त होगा। बच्चों का मनोभाव आपको बेचैन कर सकता है। अपने कार्यों में किसी तरह की कोताही न बरतें, आलस्य का परित्याग करें, वरना मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अगस्त तक धन को संंचित करना फ़ायदेमंद रहेगा, परंतु इस महीने के बाद निवेश किया जा सकता है। हालाँकि प्यार के इज़हार में देर करना किसी को शायद ही पसंद हो, लेकिन आपको इसके लिए अगस्त तक का इंतज़ार करना होगा, वरना आप किसी शक़ के घेरे में आ सकते/सकती हैं। यौन सुखों का भरपूर आनंद मिलेगा लेकिन उचित दूरी बनाकर रहना फ़ायदे का सौदा हो सकता है।इस वर्ष वृश्चिक राशि वालों को जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बना कर चलना होगा। निजी ज़िन्दगी में लगातार उतार-चढ़ाव आते रहेंगे। बच्चों का व्यवहार आपको कुछ हद तक तनाव दे सकता है। आलस्यपूर्ण रवैया अपनाने से परहेज़ करें। आमोद-प्रमोद और मनोरंजन में समय बिताने के कारण आपके कार्यों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। धन को सुरक्षित रखें और अगस्त तक जितना ज़्यादा हो सके, पैसे संचित करने का प्रयास करें। इस महीने के बाद ही निवेश करना उचित होगा। यदि प्रेम-संबंधों की बात करें तो इसमें धैर्य से काम लें तथा आपसी रिश्तों के बीच किसी तरह के शक़ को पैदा न होने दें। अगस्त तक प्रेम-संबंधों के प्रति सावाधान रहने की आवश्यकता है। वैवाहिक जीवन और शारीरिक सुखों का भरपूर आनंद मिलेगा। हालाँकि इससे दूरी बनाना आपके लिए बेहतर होगा। 
  9.  2016 का धनु राशिफल---- परिवार और भाई-बहनों के साथ तक़रार होने की संभावना है। यदि आप किसी पुरानी बीमारी से ग्रसित हैं तो इस समय स्वास्थ्य का ख़याल रखना आपका परम कर्तव्य होना चाहिए। खान-पान पर भी ध्यान दें तथा दूषित पदार्थ खाने से परहेज़ करें। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह साल आशाजनक परिणाम देने वाला होगा और अगस्त के बाद का समय आपको नई बुलंदियों पर ले जाएगा। अपने व्यवहार में संयम बरतें, वरना अनावश्यक रूप से किसी झमेले में फँस सकते हैं। संबंधों को बिगाड़ने से बेहतर है कि उसे सुदृढ़ बनाने की कोशिश करें। आर्थिक स्थितियों में स्थिरता आएगी। आपके ख़िलाफ़ साज़िश रची जा सकती है, अतः सतर्क रहें। कारोबारी अवैध कार्यों से दूर रहें, अन्यथा जेल की चक्की भी पीसनी पड़ सकती है।कभी-कभी परिजनों के साथ विवाद हो सकता है। भाई-बहनों से भी विवाद होने की संभावना है। इस वर्ष आप दूषित भोजन और दूषित पानी पीने से बीमार हो सकते हैं, इसलिए सावधानी अपेक्षित है। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह वर्ष अनुकूल है। अगस्त तक अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें, इसके बाद स्थितियों में स्वतः ही सुधार होगा। लोगों के साथ वाद-विवाद करने से परहेज़़ करें तथा सलीके से पेश आएँ, व्यवहार में परिवर्तन करना आपके लिए काफ़ी महत्वपूर्ण रहेगा। यदि आर्थिक जीवन की बात करें तो सब-कुछ बेहतर है, लेकिन ख़ुद को गद्दारों और जालसाज़ों से दूर रखने की कोशिश करें। व्यापारियों के लिए यह वर्ष अनुकूल नहीं रहेगा। अपने क्रिया-कलापों और निर्णयों के प्रति भी सावधान रहें, वरना कुंडली में संकेत है कि कारागृह का मुँह देखना पड़ सकता है। विपरित परिस्थितियों में ग़ैरक़ानूनी मसलों से दूर ही रहें तो बेहतर होगा। वैसे, इस साल ज़िन्दगी के प्रत्येक मोड़ पर अपनी क्षमतानुसार प्रयास ज़रूर करते रहें। 
  10.  2016 का मकर राशिफल----- यह साल आपके लिए ख़ुशियों की सौगात लेकर आया है, लेकिन सुख-दुःख तो सिक्के के दो पहलू हैं, इसलिए कुछ व्यक्तिगत परेशानीयों का सामना भी करना पड़ सकता है और जीवनसाथी के साथ विवाद मुमकिन है। जैसे तरकश से निकला हुआ तीर वापस नहीं आता है, वैसे ही जिह्वा से निकली वाणी को वापस नहीं लिया जा सकता है, अतः सोच-विचार कर बोलें। सेहत का उचित ख़याल रखें, कब्ज़ियत, सरदर्द और थकान हो सकती है। केतु के प्रभाव से रहित जातकों को इस साल बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। कार्यस्थल पर प्रतिष्ठा में वृृद्धि होगी। कॅरियर बनाने के नए और बेहतर मौक़े मिलेंगे। यह वर्ष व्यापारियों को समृद्धि और अच्छे मुनाफ़े देेने वाला साबित होगा, सरकारी ठेके मिलने के आसार हैं। प्रेम-संबंधों के लिए भी यह साल अनुकूल रहने वाला है।निजी ज़िन्दगी से आपको उतनी सुख-शांति नहीं मिलेगी, जितना कि आप उम्मीद करेंगे। जीवनसाथी और परिजनों के साथ तक़रार हो सकती है, जिसके कारण परिवार का माहौल बिगड़ने की संभावना है। अपनी वाणी मेें संयम बरतें, वरना इसके दुःख़द परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। सरदर्द, बदहज़मी और मानसिक तनाव आपके स्वस्थ जीवन को प्रभावित कर सकता है। यदि आपके ऊपर राहु औऱ केतु की दशा नहीं है, तो आर्थिक लाभ होना निश्चित है। नौकरी-पेशे से भी आपको अत्यधिक लाभ होगा और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। कुछ लोगों को नई नौकरी मिलेगी और ऐसी ही स्थिति व्यापारियों की भी रहेगी, उन्हें सरकारी ठेके मिलेंगे और मुनाफ़े का सौदा होगा। यह साल प्रेम-संबंधों के लिए भी बेहतर साबित होगा। कुल मिलाकर यह साल आपके लिए बेहतर सालों में से एक होगा। 
  11.  2016 का कुम्भ राशिफल----- परिवार को लेकर कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन बृहस्पति के सातवें भाव में बैठे होने के कारण परेशानियाँ टल भी सकती हैं। परिवार में मतभेद तो होते ही हैं, लेकिन इसके लिए परिवार से नाता तोड़ना ठीक नहीं होगा, इस समय स्वविवेक से फ़ैसला लेना उचित होगा। मस्तिष्क और गुप्तांगो में कुछ दिक़्क़तें हो सकती हैं, लेकिन उचित सावधानी बरतने से आप इससे बच भी सकते हैं। लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी तथा मित्रों की ओर से भी लाभ प्राप्त होगा, लेकिन दानवीर कर्ण बनने की कोशिश न करें। नौकरी पेशा लोगों की पदोन्नती होगी, कामों की तारीफ़ होगी और चहुमुखी उन्नति भी होगी। कारोबारी वर्ग की बात की जाए तो उनके लिए भी यह वर्ष सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला होगा। प्रेम-संबंधों में स्थिरता बनी रहेगी।गृहस्थ जीवन सामान्य रहेगा। थोड़ी-बहुत दिक़्क़त हो सकती है, लेकिन बृहस्पति के सातवें भाव में मौजूद रहने के कारण मामला ज़्यादा नहीं बिगड़ेगा। जो लोग पारिवारिक विवाद से ऊब कर परिवार से दूर जाना चाहते हैं, उनके लिए ऐसा क़दम उठाना उनकी इच्छा-शक्ति पर निर्भर करता है। गुप्तांगों और मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें तथा पूरी तरह सावधानी बरतें। इस वर्ष आपकी आर्थिक स्थिति शानदार रहने वाली है। बेहतर आर्थिक स्थिति के साथ-साथ दोस्तों का भी भरपूर सहयोग मिलेगा। किन्तु आपको ज़्यादा दरियादिली नहीं दिखानी है और न ही दोस्ती का ग़लत फ़ायदा उठाना है। नौकरी पेशा लोगों को शोहरत, मान-सम्मान के साथ-साथ पदोन्नती भी मिलेगी। आपके वरिष्ठ और सहकर्मी आपको एक कुशल कर्मचारी के रूप में देखेंगे और आपकी तारीफ़ करेंगे। क़ारोबारियों के लिए भी यह वर्ष बेहतर साबित होने वाला है, इसलिए मायूस होने की ज़रूरत नहीं है। प्रेम-संबंधों में मधुरता क़ायम रहेगी। 
  12.  2016 का मीन राशिफल------ आप ऐसा महसूस करेंगे कि सबकुछ आपकी इच्छानुसार नहीं हो रहा है तथा पारिवारिक मतभेदों का सामना भी करना पड़ सकता है। सामानों के खोने की आशंका है, अतः सतर्क रहें। स्वास्थ्य संबंधी कुछ दिक़्क़तें हो सकती हैं, जैसे - लिवर, किडनी और आँत में दिक़्क़तें हो सकती हैं। इस साल वेतन में वृद्धि होने के ज़्यादा आसार हैं, लेकिन नौकरी की प्रारंभिक अवस्था में छोटी-मोटी परेशानियों से भी वास्ता हो सकता है। यह आपके जीवन का सबसे प्रभावशाली वर्ष साबित होगा। यदि सौभाग्य से आप व्यापारी हैं फिर तो सोेने पर सुहागा है। यह साल आपको ढेरों मुनाफ़ा देने वाला है, लेकिन अगस्त के बाद। जीवनसाथी की तलाश के लिए भी समय उपयुक्त है और प्रेम-संबंध एक नए मुक़ाम को हासिल करेगा।यह वर्ष आपके लिए थोड़ा संघर्ष-प्रधान हो सकता है। मुमकिन है कि पारिवारिक जीवन में भी कुछ निराशा रहे। लेकिन आप क़तई चिन्ता न करें, क्योंकि उचित व्यवहार और अच्छे विचारों के द्वारा आप इनसे उबर सकते हैंं। हालाँकि, आपकी एक छोटी ग़लती भी बड़ा नुक़सान कर सकती है, अतः कुछ भी करने से पहले पूरी एहतियात बरतें। आँत, लीवर और कि़डनी में समस्या चिन्ता का कारण बन सकती है। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। नौकरी के शुरूआती दिनों में कुछ परेशानी हो सकती है; हालाँकि सफलता आपको मिलेगी, किन्तु देर से। क़ारोबारियों को अगस्त के बाद अपार सफलता मिलने वाली है। प्रेम-संबंधों में भी अगस्त के बाद सुख़द परिणाम मिलने के आसार हैं, इससे पहले प्यार के मामलों में पूरी तरह से संयम बरतें।

जानिए केसा होगा नव वर्ष 2016

 नववर्ष 2016 का शुभारंभ शुक्रवार, पोष माह की कृष्ण पक्षीय सप्तमी को होने जा रहा हैं।। इस दिन चन्द्रमा कन्या राशि का और उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा।।। 
    Will-Know-New-year-2016-जानिए केसा होगा नव वर्ष 2016
  1. इस वर्ष शुक्र प्रभावी होने से चीनी, चांवल और खाद्यान्न का उत्पादन ठीक होगा।।वर्षा समुचित होगी।। 
  2. इस वर्ष व्यापारी वर्ष को सुख और लाभ मिलेगा।। 
  3. इस वर्ष सोना, फेशनेबल कपडे और विलासिता का सामान और सौन्दर्य प्रसादन वस्तुओ का बाजार तेज रहेगा।। 
  4.  शासक वर्ग द्वारा अपने समर्थकों और उनकी जय जयकार करने वालों का अधिक ध्यान रखा जायेगा।। 
  5. शुक्र के प्रभाव स्वरूप छेड़खानी और बलात्कार जेसी घटनाओं में वृद्धि होगी।। 
  6. इस वर्ष आकस्मिक प्राकृतिक आपदा के कारण किसान और जनता दोनों प्रभावित होंगें।। 
  7. सरकार और शासक वर्ग को बहुत कठिन हालात से गुजरना होगा।।
  8.  महंगाई बढ़ने के कारण जनता में असन्तोष बढ़ेगा।। 
  9. ज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत का वर्चस्व बढ़ेगा।। 
  10. विदेश निति सभी स्थानों पर कामयाब होगी और संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का स्वप्न पूर्ण होगा।। 
  11.  पडोसी मुल्क अपनी हरकतों से परेशानी बढ़ाते रहेंगें।। 
  12. बम विस्फोट, आगजनी और आतंकी घटनाओं से आमजन प्रभावित होगा।। 
  13. पडोसी मुल्क के कारण कोई बड़ा हादसा या अपूरणीय क्षति संभावित हैं।। 
  14. भारत के रक्षा बजट में वृद्धि होगी।। 
  15.  इस वर्ष महिलाओं का वर्चस्व बढ़ेगा।। 
  16. महिला उत्थान की योजनाएं सफल होगी।। 
  17. लोकसभा और राज्यसभा के साथ साथ अन्य उच्च पदों पर महिलाएं अपना प्रभाव बढ़ने में कारगर रहेंगी।।
  18.  धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से भारत सुदृढ़ होगा।। 
  19. पेट्रोलियम और भूमिगत उर्वरा शक्ति मिलने से भारत को लाभ होगा।।
  20. आर्थिक रूप से उन्नति होगी।। 
  21. किसी बड़े और प्रभावी नेता का दुर्घटना में प्रभावित होने की योग बनता हैं।। 

 वर्षा--- इस वर्ष रोहिणी का वास् पर्वत पर होने एवम् समय वास कुम्हार के घर होने से वर्षा साधारण होगी।। चारे और अनाज की कमी से आमजन और पशु त्रस्त रहेंगें।। 
  • इस वर्ष जो, गेंहूँ,रुई,चना और चावल तथा तिलहन की फसल वर्षा की कमी से प्रभावित होकर नष्ट होना संभावित हैं।। 
  • अनेक स्थानों पर तेज हवाओ के कारण भी फसलों को नुकसान संभव हैं।। अतः वर्षा की कमी से खाद्यान्न और कृषि उपज की स्थिति कमजोर रहेगी।। 
  • आगामी वर्ष 2017 में होने वाली अतिवृष्टि इस वर्ष हुयी पानी की कमी को पूर्ण में कारगर होगी।।
  • देश में बढ़ाता भूजल स्तर चिंता का विषय बनेगा।। 
  •  देश में आर्थिक सुधर की नयी नयी योजनाएं बनेगी जो नाकाफी होंगी।। 

            ****श्री प्रणव मुखर्जी(राष्ट्रपति) की प्रचलित नाम से कन्या राशि वनती हैं जिसमे वर्ष लग्न से अष्टम में हैं।।आठ सितम्बर अक्टूबर में स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी आवश्यक हैं।।। 
          ***प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी वृश्चिक राशि से प्रभावित हैं।। वर्तमान में वृश्चिक राशि पर शनि की साढ़े सटी चल रही हैं।। अतः इस वर्ष मोदी जी को नाना प्रकार की कठिनाइयों से गुजरना होगा।। विरोधी पक्ष अड़ंगे डालकर सफलता में अवरोध पेदा करेगा।। मोदी जी अपनी सूझबूझ से देश को उन्नति में मार्ग पर ले जाने में सक्षम होंगें।। 
         **** श्रीमति सोनिया गांधी----इनकी जन्म लग्न कर्क और जन्म राशि मिथुन हैं।। वर्तमान में मिथुन राशि में चौथा शनि चल रहा गें जिसके कारण पार्टी में विरोध उभरेगा।। वृश्चिक का शनि होने से इनका स्वास्थ भी प्रभावित होगा।। इतना होने के बाद भी अपनी सुझबुझ से पार्टी को आगे बढ़ने में कामयाब होगी।। 
      इस वर्ष 2016 में सोने के भावों में भारी गिरावट रहेगी।। इस वर्ष जनवरी, आपर्क, जुलाई और दिसम्वर में सोने के भाव बहुत निचे आ जायेंगें।। इसके साथ साथ शेयर मार्केट या सेंसेक्स में भी उतार चढ़ाव बना रहेगा।। जनवरी, जुलाई और नवम्बर में तेजी रहेगी बाकि के समय मंदी ही बनी रहेगी।। डॉलर मजबूत बना रहेगा।। 2016 के अंतिम महीनों में रुपया थोडा मजबूत हो सकता हैं।।
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