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कहीं वास्तु दोष तो नहीं हें कारण आपकी संतान के विवाह में देरी/बाधा का

विवाह या शादी को जीवन का महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। सामान्यत: हर इंसान का विवाह अवश्य होता है। विवाह के बाद वर-वधु के साथ दोनों के परिवारों का जीवन बदलता है। इसी वजह से शादी किस से की जाए, इस संबंध में सावधानी अवश्य रखी जाती है। घर में वास्तुदोष होने पर वहां रहने वालों को कई तरह की विपत्तियों का सामना करना पड़ता है। कई बार वास्तुदोष के कारण कार्यों में भी बाधाएं आती हैं। 
           यदि परिवार मेंकिसी का विवाह नहीं हो रहा हो अथवा होने में देरी हो रही है, तो इसका कारण भी वास्तु दोष हो सकता है। आजकल अनेक अभिभावक अपने बच्चों की शादी./ विवाह को लेकर बहुत परेशान/चिंतित रहते हें और पंडितों तथा ज्योतिर्विदों के पास जाकर परामर्श/सलाह लेते रहते हें...किन्तु क्या कभी आपने सोचा की विवाह में विलंब के कई कारण हो सकते हैं.??? इनमे से एक मुख्य कारण वास्तु दोष भी हो सकता है। आपने महसूस भी किया होगा कि जब आप किसी मित्र या रिश्तेदार के घर गये होंगे और रात में ठहरने का मौका लगा होगा। आपके लिए अच्छी व्यवस्था होने के बाद भी आपको उतना आराम नहीं मिला होगा जितना आप अपने बिछावन पर करते हैं। 
          इसके विपरीत किसी के घर में आपको अपने घर से भी ज्यादा आराम मिला होगा। यह सब वास्तु का प्रभाव होता है। वास्तु विज्ञान के अनुसार सोने के तरीके और बिस्तर का प्रभाव भी हमारे ऊपर होता है। आपका बिछावन और सोने का अंदाज सही नहीं है तो कैरियर और धन संबंधी समस्याओं को लेकर भी परेशानी बनी रहती है। बिस्तर का प्रभाव दांपत्य जीवन और विवाह पर भी होता है। इससे विवाह में बाधा भी आती है। इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए वास्तु विज्ञान में कुछ उपाय बताए गये हैं।
        कैसी लड़की से विवाह करना चाहिए और कैसी लड़की से नहीं, इस संबंध में आचार्य चाणक्य बताया है कि : - वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम्। रूपशीलां न नीचस्य विवाह: सदृशे कुले।। 
            चाणक्य कहते हैं समझदार मनुष्य वही है जो विवाह के लिए नारी की बाहरी सुंदरता न देखते हुए मन की सुंदरता देखे। यदि कोई उच्च कुल की कुरूप कन्या सुंस्कारी हो तो उससे विवाह कर लेना चाहिए। जबकि कोई सुंदर कन्या यदि संस्कारी न हो, अधार्मिक हो, नीच कुल की हो, जिसका चरित्र ठीक न हो तो उससे किसी भी परिस्थिति में विवाह नहीं करना चाहिए। विवाह हमेशा समान कुल में शुभ रहता है। 
           समझदार और श्रेष्ठ मनुष्य वही है जो उच्चकुल में जन्म लेने वाली सुसंस्कारी कुरूप कन्या से विवाह कर लेता है। विवाह के बाद कन्या के गुण ही परिवार को आगे बढ़ाते हैं। जबकि सुंदर नीच कुल में पैदा होने वाली कन्या विवाह के बाद परिवार को तोड़ देती है। ऐसे लड़कियों का स्वभाव व आचरण निम्न ही रहता है। जबकि धार्मिक और ईश्वर में आस्था रखने वाली संस्कारी कन्या के आचार-विचार भी शुद्ध होंगे जो एक श्रेष्ठ परिवार का निर्माण करने में सक्षम रहती है। 
          अब हम बात करते है, कि घर में हम ऐसा क्या करें या ऐसी क्या व्यवस्था रखें कि हमारे बच्चों चाहे वो लड़का हो या लड़की कि शादी में विलम्ब न हो। वैसे विवाह विलंब के कई कारण हो सकते हैं। वास्तु दोष भी इसका एक प्रमुख कारण हो सकता है। यदि आप भी अपनी संतान के विवाह विलंब से चिंतित हैं, तो यहां वास्तु संबंधी कुछ उपाय दीये जा रहें हूँ, जिनका प्रयोग करने पर आपकी संतान के शीघ्र विवाह के योग बन सकते हैं----
 ऐसे लगाएं बेड----- 
वास्तु विज्ञान के अनुसार लड़के और लड़कियों के लिए बेड लगाने की दिशा अलग अलग है। लड़कियों के लिए वायव्य कोण यानी उत्तर पश्चिम दिशा शुभ होती है जबकि लड़कों के लिए पूर्व और पूर्वोत्तर दिशा शुभ रहती है। बेड लगाते समय यह भी ध्यान रखें कि बेड किसी भी दीवार से सटा हुआ नहीं हो। 
 बेड के नीचे कुछ न रखें---- 
बेड की साफ सफाई जितनी जरूरी है उतनी ही जरूरी है बेड के नीचे की सफाई। इसलिए अगर बेड के नीचे सामान रखने की आदत है तो इसे बदल दीजिए। बेड के नीचे रखे हुए सामनों से नकारात्मक उर्जा का संचार होता है जो विवाह में बाधक होता है। अगर बॉक्स वाले पलंग पर सोते हैं तो निश्चित ही बॉक्स में काफी सामान रखते होंगे।इससे भी नकारात्मक उर्जा का संचार होता है। इस नकरात्मक उर्जा को दूर करने के लिए पलंग के चारों पायों के नीचे तांबे का एक स्प्रिंग अथवा एक बाउल में नमक भर कर रखें। 
 बेड के बाईं ओर सोएं---- 
बेड पर हमेशा बायीं ओर सोएं। यह सिर्फ वास्तुशास्त्र ही नहीं बल्कि लंदन के एक होटल प्रीमियर इन द्वारा किये गये एक सर्वे रिपोर्ट में भी कहा गया है कि बांयी ओर सोने वाले व्यक्ति का मूड अधिक अच्छा रहता है। उनके अंदर सकारात्मक सोच रहती है और वह अधिक एक्टिव रहते हैं। 
 इनका भी रखें विशेष ध्यान---- 
विवाह सम्बंधित व्यवधान में गृह वास्तु की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. ऐसा देखने में आया है की वास्तु दोष भी योग्य कन्या / युवक के विवाह में अड़चन पैदा करता है. अतः यदि आपकी भी समस्या भी कुछ ऐसी है तो यह उचित होगा की आप भी निम्नलिखित छोटे-छोटे वास्तु उपाय को अपना कर देखे. बहुत मुमकिन है की आपकी समस्या का हल हो जायेगा.यदि आप भी अपनी संतान के विवाह बाधा / देरी की वजह से चिंतित हैं तो इन वास्तु दोषों पर विचार करें- 
 ------जिन विवाह योग्य युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो पा रहा हें उनको उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित कमरे में रहना चाहिए। इससे विवाह के लिए रिश्ते आने लगते हैं।उस कमरे में उन्हें सोते समय अपना सर हमेशा पूर्व दिशा में रखना चाहिए... 
------- जिन विवाह योग्य युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो पा रहा हें को ऐसे कक्ष में नहीं रहना चाहिए जो अधूरा बना हुआ हो अथवा जिस कक्ष में बीम लटका हुआ दिखाई देता हो। 
------- जिन विवाह योग्य युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो पा रहा हें तो उनके शयन कक्ष/ कमरे एवं दरवाजा का रंग गुलाबी, हल्का पीला, सफेद(चमकीला) होना चाहिए। 
------ जिन विवाह योग्य युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो पा रहा हें तो उन्हें विवाह के लिए अपने कमरे में पूर्वोत्तर दिशा में पानी का फव्वारा रखना चाहिए। 
----- कई बार ऐसा भी होता की कोई युवक या युवती विवाह के लिए तैयार/राजी नहीं होते हें हो तो उसके कक्ष के उत्तर दिशा की ओर क्रिस्टल बॉल कांच की प्लेट अथवा प्याली में रखनी चाहिए। 
-----विवाह योग्य युवाओं का कमरा उत्तर दिशा या उत्तर-पूर्व दिशा या उत्तर पश्चिम दिशा में रखें। ----सोते समय पैर उत्तर की ओर तथा सिर दक्षिण की ओर रखना चाहिए। 
------अविवाहितों के कमरे का रंग गुलाबी ( दिशा देख कर ) , पीला या सफेद होना चाहिए।
 ----युवाओं के कमरे में एक से अधिक दरवाजे हो तो श्रेष्ठ है। 
-----विवाह योग्य लड़के-लड़कियां अधूरे ( तीन या पांच कोने वाले ) बने कमरे में बिलकुल ना रहें। 
----लड़के-लड़कियों के कमरे में काले रंग की कोई वस्तु ना रखें तो अच्छा है।
 ----कमरे में बीम दिखाई नहीं देना चाहिए। 
----कमरे की पूर्व-उत्तर दिशा में पानी का फव्वारा या जल से सम्बंधित कोई चित्र रखें। 
---कक्ष की उत्तर दिशा में क्रिस्टल बॉल, कांच की प्लेट रखें। 
----विवाह योग्य व्यक्ति का कमरा दक्षिण या दक्षिण पश्चिम दिशा में नहीं होना चाहिए। 
---कमरे में कोई भी खाली बर्तन ना रखे। -
----अविवाहित व्यक्ति के पलंग के नीचे कोई भी भारी वस्तु या लोहे की वस्तु कतई ना रखें। ऐसा होने से उनके विवाह योग में बाधा उत्पन्न होती है।
 -----यदि विवाह प्रस्ताव में व्यवधान आ रहे हों तो विवाह वार्ता के लिए घर आए अतिथियों को इस प्रकार बैठाएं कि उनका मुख घर में अंदर की ओर हो और उन्हें घर का दरवाजा दिखाई न दे। ऐसा करने से बात पक्की होने की संभावना बढ़ जाती है। 
----यदि विवाह के पूर्व लड़का-लड़की घर वालों की रजामंदी से मिलना चाहें तो बैठक व्यवस्था इस प्रकार करें कि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर न हो।
 ----नैरित्य कोण उपस्तिथ दोष विवाह में अवरोध और वैवाहिक जीवन में बाधा उत्पन्न करता है. यदि नैरित्य कोण में रसोई या शौच का कार्य हो, नैरित्य कोण दूषित हो जता है. इसके अलावा यदि इस कोण में सेप्टिक टेंक हो, अंडर ग्राउंड पानी की टंकी हो, .कुआं हो, बोर हो, मुख्य प्रवेश द्वार हो तो भी वास्तु दोष उत्त्पन्न होता है. अतः विवाह सम्बन्धी बातों की नियमितता के लिए यह आवश्यक है की इन तथ्यों की ओरे भी ध्यान दिया जाय. 
       ===यदि आप भी अपनी संतान के विवाह में हो रही देरी से परेशान हैं तो एक बार अपने घर के वास्तु दोषों पर ध्यान देकर जरुर विचार करें।अत: यदि हम अपने जीवन को सुखद एवं समृद्ध बनाना चाहते हैं और अपेक्षा करते हैं कि जीवन के सुंदर स्वप्न को साकार कर सकें। इसके लिए पूर्ण निष्ठा एवं श्रद्धा से वास्तु के उपायों को अपनाकर अपने जीवन में खुशहाली लाएं।
Edited by: Editor

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