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महामृत्युञ्जय कवच कैसे करें प्रयोग और उठायें लाभ

क्या हैं महामृत्युञ्जय कवच ..??? 
mahamratyunjay-tantra-kavach-महामृत्युञ्जय कवच कैसे करें प्रयोग और उठायें लाभ        अपने स्वयं तथा परिवार की कुशलता के लिए महामृत्युञ्जय का कवच जरूरी है, और सावन में महामृत्युञ्जय मानो सोने पर सुहागा है, भगवान शिव महामृत्युञ्जय कहलाते हैं, शिव की शक्तियां जितनी अनंत, अपार व विराट हैं, उतना ही सरल है उनका स्वरूप व स्वभाव। इसी वजह से शिव भक्तों के मन में समाया शिव उपासना के आसान उपायों से भी मिलने वाली शिव कृपा का विश्वास ही हर भक्त के लिए सुखों का भंडार खोल देता है। 
      शास्त्रों के मुताबिक सांसारिक जीवन से जुड़ी ऐसी कोई मुराद नहीं जो शिव उपासना से पूरी न हो। विशेष रूप से शास्त्रों में बताए शिव उपासना के विशेष दिनों, तिथि और काल को तो नहीं चूकना चाहिए। इसी कड़ी में यहां बताई जा रही शिव मंत्र स्तुति, शिव पूजा व आरती के बाद बोलने से माना जाता है कि इसके प्रभाव से बुरे वक्त, ग्रहदोष या बुरे सपने जैसी कई परेशानियां दूर होती हैं- 
 दुरूस्वप्नदुरूशकुन दुर्गतिदौर्मनस्य, दुर्भिक्षदुर्व्यसन दुस्सहदुर्यशांसि। 
उत्पाततापविषभीतिमसद्ग्रहार्ति, व्याधीश्चनाशयतुमे जगतातमीशरू॥ 
         इस शिव स्तुति का सरल शब्दो में मतलब है कि- संपूर्ण जगत के स्वामी भगवान शिव मेरे सभी बुरे सपनों, अपशकुन, दुर्गति, मन की बुरी भावनाएं, भूखमरी, बुरी लत, भय, चिंता और संताप, अशांति और उत्पात, ग्रह दोष और सारी बीमारियों से रक्षा करे। 
      धार्मिक मान्यता है कि शिव, अपने भक्त के इन सभी सांसारिक दुरूखों का नाश और सुख की कामनाओं को पूरा करते हैं। भगवान शिव महामृत्युञ्जय कहलाते हैं। शिव का यह रूप काल को पराजित करने या नियंत्रण करने वाले देवता के रूप में पूजित है। महामृत्युञ्जय की आराधना का निरोग होने, मौत को टालने या मृत्यु के समान दुरूखों का अंत करने में बहुत महत्व है। 
      शास्त्रों में महामृत्युञ्जय की उपासनाके लिए महामृत्युञ्जय मंत्र के जप का बहुत महत्व बताया गया है। इस महामृत्युञ्जय मंत्र का जप दैनिक जीवन में कोई भी व्यक्ति कर सकता है। लेकिन खास तौर पर जब कोई व्यक्ति रोग से पीडि़त हो या मानसिक अशांति या भय, बाधाओं से घिरा हो, तब इस मंत्र की साधना पीड़ानाशक मानी गई है। शास्त्रों में इस मंत्र के जप के विधि-विधान का पालन साधारण व्यक्ति के लिए कभी-कभी कठिन हो जाता है। हालांकि किसी योग्य ब्राह्मण से इस मंत्र का जप कराया जाना अधिक सुफल देने वाला होता है। फिर भी अगर किसी विवशता के चलते विधिवत मंत्र जप करना संभव न हो तो यहां बताया जा रहा है महामृत्युञ्जय जप का आसान उपाय। इसका श्रद्धा और आस्था के साथ पालन निश्चित रूप से कष्टों में राहत देगा
- इस मंत्र का जप यथासंभव रोग या कष्ट से पीडि़त व्यक्ति द्वारा करना अधिक फलदायी होता है। 
- ऐसा संभव न हो तो रोगी या पीडि़त व्यक्ति के परिजन इस मंत्र का जप करें।
 - मंत्र जप के लिए जहां तक संभव हो सफेद कपड़े पहने और आसन पर बैठें। मंत्र जप रूद्राक्ष की माला से करें।
 - महामृत्युञ्जय मंत्र जप शुरू करने के पहले यह आसान संकल्प जरूर करें
- मैं (जप करने वाला अपना नाम बोलें) महामृत्युञ्जय मंत्र का जप (स्वयं के लिए या रोगी का नाम) की रोग या पीड़ा मुक्ति या के लिए कर रहा हूं। महामृत्युञ्जय देवता कृपा कर प्रसन्न हो रोग और पीड़ा का पूरी तरह नाश करे।
 - कम से कम एक माला यानि 108 बार इस मंत्र का जप अवश्य करें। 

 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।
      मंत्र जप पूरे होने पर क्षमा प्रार्थना और पीड़ा शांति की कामना करें। शास्त्रों के मुताबिक भगवान शिव संहारकर्ता ही नहीं, कल्याण करने वाले देवता भी है। इस तरह शिव का काल और जीवन दोनों पर नियंत्रण है। यही वजह है कि व्यावहारिक जीवन में सुखों की कामनापूर्ति के लिए ही नहीं दुरूखों की घड़ी में शिव का स्मरण किया जाता है। शिव की भक्ति से दुरूख, रोग और मृत्यु के भय से छुटकारा पाने का सबसे प्रभावी उपाय है- महामृत्युंजय मंत्र का जप। 
       धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र जप से न केवल व्यक्तिगत संकट बल्कि पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय आपदाओं और त्रासदी को भी टाला जा सकता है। यहां जानिए इनके अलावा भी कैसे विपरीत हालात या बुरी घड़ियों में भी इस मंत्र का जप जरूर करना चाहिएकृदृ
 - विवाह संबंधों में बाधक नाड़ी दोष या अन्य कोई बाधक योग को दूर करने में। 
- जन्म कुण्डली में ग्रह दोष, ग्रहों की महादशा या अंर्तदशा के बुरे प्रभाव की शांति के लिए। 
- संपत्ति विवाद सुलझाने के लिए। 
- महामारी के प्रकोप से बचने के लिए।
 - किसी लाइलाज गंभीर रोग की पीड़ा से मुक्ति के लिए।
 - देश में अशांति और अलगाव की स्थिति बनी हो। 
- प्रशासनिक परेशानी दूर करने के लिए। 
- वात, पित्त और कफ के दोष से पैदा हुए रोगों की निदान के लिए। 
- परिवार, समाज और करीबी संबंधों में घुले कलह को दूर करने के लिए। 
- मानसिक क्लेश और संताप के कारण धर्म और अध्यात्म से बनी दूरी को खत्म करने के लिए। 
- दुर्घटना या बीमारी से जीवन पर आए संकट से मुक्ति के लिए।
Edited by: Editor

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